03/09/2026
vs #जुमलेबाजी
PM मोदी ने कल 1सितंबर की शाम में 'हेलो फ्रांड्स' बोला..
खुशियाँ मनाइए बोला!
देश की GDP 7.8% हो गए हैं सुनाते हुए खुशियों से बोला!
बस, आज 2सितंबर शाम होते-होते शेयर बाजार के निवेशक छाती पीटने लग गए! शेयर बाजार में निवेशकों के 5लाख-करोड़ डूब गए?
शेयर बाजार को 7.8% GDP पर तब शक हुआ, जब घोषणा करने के बाद LPG सिलिंडर के दाम बढ़ गए! सुबह-सुबह ही!
शायद सोचा!
भाई GDP जब इतने अच्छे बता रहे हैं तो फिर सिलिंडर के दाम क्यों बढ़ गए? GDP जब इतने अच्छे हैं तो सोना खरीदने से मना क्यों किया? विदेश यात्रा करने से क्यों मना किया? विदेशों में शादी करने से भी क्यों मना कर दिया?
दाल में जरुर कुछ काला है! इसीलिए GDP भी कुछ काला है!
रही सही कसर पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी सुभाष गर्ग ने पूरी कर दी!
कहा: GDP 7.8% सरासर फॉल्स है! पिछले वर्ष के डेटा में चुनाव आयोग के SIR की तरह डेटा में हेराफेरी कर GDP को 7.8% बता दिया गया है? ताकि देशवासी खुश हो जाँय?
ऊपर से पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भी 7.8% वाली GDP पर सवाल उठा दिया? कहा: "जब GDP इतने अच्छे हैं तो बेरोजगार युवाओं को नौकरियाँ क्यों नहीं मिल रही हैं? मतलब है कि GDP 7.8% का आंकड़ा फॉल्स है!"
बात भी सही है!
नौकरियों के लिए ही तो बेरोजगार युवाओं की फौज दिल्ली जंतर मंतर से लेकर बिहार, झारखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, बंगाल & यू.पी में कॉकरोच बन बनकर इतने आंदोलन क्यों कर रहे हैं आखिर?
आज 2सितंबर 2026 को भी यू.पी में BSF बहाली की परीक्षा के पेपर लीक हो गए? कानपुर में चकेरी श्याम नगर इन्फोटेक सेंटर पर परीक्षार्थियों के पेपर लीक के कारण हंगामा हुआ! और परीक्षा रद्द हो गई है! पता नहीं, अब कितने लोग सुसाइड करते हैं!
ये सिस्टम में इतने पेपर लीक का वायरस चुनाव आयोग के SIR की तरह क्यों हो गया है? जब बंगाल में SIR के वक्त बंगाल की आम जनता के द्वारा रोते पिटते कहा जा रहा था कि SIR में पेपर लीक की तरह गड़बड़ियाँ हो रही है, तो एक नहीं मानी थी किसी ने भी!
जिद्द थी कि बेइमानी से हो या गड़बड़ियों से हो या वोटर लिस्ट में पेपर लीक हो तो हो(?), मगर बंगाल चुनाव जीतना ही है!
वैसी परिस्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने भी तब सहारा नहीं दिया था भारतीय नागरिकता को?
तब उस वक्त कॉकरोच भी स्तित्व में नहीं थे!
वरना, डंके की चोट पर चुनाव की तारीखें बढ़वा देते तो बढ़वा देते, मगर चुनाव आयोग के SIR में वोटर लिस्ट को दुरुस्त करवा कर ही मानते देश के कॉकरोच!
बंगाल चुनाव में चुनाव आयोग के SIR की गड़बड़ियाँ अब साक्षात पकड़ी जा चुकी है! और सुप्रीम मी लॉर्ड अब कह रहे हैं: "क्या हम दोबारा चुनाव करवाने का आदेश दे सकते हैं?"
बताइए?
भारत में रहते हुए सुप्रीम मी लॉर्ड को यह पता ही नहीं चल पाया अभी तक कि बंगाल चुनाव की जीत के जश्न में तब तक तो अडाणी 10लाख रुपए से भी अधिक की मिठाईयाँ बाँट चुका है? बंगाल में!
बंगाल CM ने खुद ही दावे के साथ बोला है ये बातें!
डेटा की इस हेराफेरी में PM मोदी भी देश की GDP 7.8% का जश्न मनाने लग गए? और Live आकर हेलो फ़्रान्ड्स भी बोलने लग गए? GDP डेटा की क्रॉस चेकिंग भी नहीं करवा पा सके? गज़ब!
उसमें भी मुगल शासक बाबर & अकबर के घर उज़्बेकिस्तान से?
पुरखे बताया करते थे!
RSS के लोगों को मुगलों से & अंग्रेजों से खूब पटती थी!
जमीन जायदाद & महलों का काफी सुख मिलता था तब!
आपस में रिश्तेदारी भी होती रहती थी!
बस, दिक्कत भारत की आजादी 1947 में मिलने के बाद होने लग गई है? दिक्कत बराबरी वाले संविधान से भी होने लग गई! मुगलों & अंग्रेजों के टाइम में जो रुतबा & पुश्तैनी हेन्कड़ी बनी थी उसमें थोड़ा सा बट्टा लगने लग गया?
इसीलिए, भाजपा के सवर्ण सांसदों ने अब तथाकथित अत्याचार से से बचने के लिए 'सवर्ण आयोग' गठन करने की माँग सरकार से करी है! आज!
कहा: "आजाद भारत में जनसंख्या के हिसाब से सवर्ण जाति के लोग 10-15% हैं, अल्पसंख्यक हैं & SC/ST/OBC के लोग भारत में बहुसंख्यक हैं! इसीलिए सवर्णों पर अत्याचार की रोकथाम के लिए अब 'सवर्ण आयोग' का गठन हो!
यद्यपि कि देश की जनसंख्या के हिसाब से..... 10-15%(100%जनसंख्या) रहते हुए भी 51.5% का सीधा सामान्य आरक्षण अर्थात जनसंख्या के हिसाब से 500% से भी अधिक आरक्षण का लाभ लेते आ रहे हैं! आजादी के बाद से ही! लैटरल इंट्री का 100%लाभ अतिरिक्त है! कॉलेजियम सिस्टम में तो SC/ST/OBC की जनसंख्या की तुलना में मात्र 10%(100%) संख्या ही होकर, और भी 100% कॉलेजियम आरक्षण अर्थात जनसंख्या के बनिस्पत 1000%आरक्षण का लाभ लेते आ रहे हैं!
डेटा की हेराफेरी को समझकर भी जानबूझकर नासमझ बनकर...
फिर भी कहते हैं आजाद भारत में UGC से सवर्णों का शोषण हो रहा है! SC/ST एक्ट से शोषण हो रहा है? और SC/ST/OBC के आरक्षण से भी शोषण होने लग गया है? बाप रे....
मुगलों & अंग्रेजों के टाइम में ऐसा नहीं होता था! पहले!
खेत खलिहान & महल किला आदि मुफ़्त में मिल जाया करते थे!
छाती चौड़ी रहती थी! हेंकड़ी बघारने में भी खूब मजा आता था!
अब आजाद भारत में बाबा साहेब अंबेडकर के समानता वाले संविधान लागू होने के बाद सवर्णों के साथ थोड़ी कठिनाई महसूस होने लग गई है! SC/ST/OBC भी अब बराबर की कुर्सियों पर बैठने लग गए हैं! इसलिए ग्लानि महसूस होती है! सवर्णों को खुद का शोषण जैसा महसूस होता रहता है!
इसलिए 'सवर्ण आयोग' के गठन की माँग सरकार के समक्ष रखी गई है! आज! दिल्ली में!
भाई! कौन से डेटा के आधार पर सवर्णों के शोषण के खिलाफ सवर्ण आयोग का गठन हो? वही चुनाव आयोग के बंगाल में SIR डेटा जैसा डेटा के हिसाब से हो रहा है शोषण? डेटा तो बताना पड़ेगा!
या कि लैटरल इंट्री & कॉलेजियम इंट्री वाले डेटा के हिसाब से हो रहे शोषण के खिलाफ सवर्ण आयोग का गठन हो?
या कि PM मोदी के GDP 7.8% वाले डेटा के हिसाब से सवर्णों का शोषण हो रहा है? और तब सवर्ण आयोग का गठन होना चाहिए?
कोई परफेक्ट डेटा समझे या न समझे?
मगर, शेयर मार्केट तो परफेक्ट डेटा खूब समझते रहता है!
उसे सवर्णों के शोषण जैसा रत्ती भी विश्वास नहीं हुआ कि भारत देश की GDP 7.8% हो गई! और भर दिन छाती पीटता रह गया?
शेयर मार्केट में 5लाख-करोड़ रुपए डूब गए 24घंटे में ही?
7.8%GDP पर विवाद गहरा गया है!
बेरोजगार कॉकरोचों को नौकरियाँ ही नहीं मिल रही हैं,
24करोड़ सरकारी नौकरियों का गबन ही हो गया है 12वर्षों में,
तो देश की 7.8%GDP का क्या अचार बनाएंगे युवा?
भारत में 51% से भी अधिक युवा आबादी वाले इस देश में...
7.8%GDP की खुशी में क्या अब अचार बनाने लगेंगे ये पढ़े लिखे बेरोजगार झुंड? किस बात की इन्हें खुशी?
सर जी! सोचिए जरा?
जय जय श्री राम