08/03/2026
जब एक मुसलमान हिंदू के घर में पेंट करता है तो उसे दिक्कत नहीं होती । जब रंगरेज कपड़े कलर करता है तो उसे दिक्कत नहीं होती । जब वो औरत को काले टेंट में डालकर ख़ुद रंगीन कपड़े पहनता है तो भी दिक्कत नहीं होती । और तो और होली पर रंग बेचता है पूरे हाथ पर रंग में सने रहते है तब भी दिक्कत नहीं होती । तब ईमान खतरे में अहि आता । लेकिन जब किसी हिंदू के हाथ से रंग का कोई छीटा पड़ जाए तब ईमान ख़तरे में पड़ जाता है । मतलब सीधा सा है दिक्कत हिंदू से है रंग से नहीं । इसी कारण देश बटा क्योंकि हिंदू से दिक्कत थी । जहाँ हिंदू की जेब से पैसा निकलना हो वहाँ सब जायज़ दता कि हिंदुओं के त्योहारों पर दुकान मत लगाओ जाहिलो । हिंदुओं के पैसे से दिक्कत नहीं है हिंदुओं से है और हमेशा से रही है और हमेशा रहेगी । क्योंकि दिक्कत इस्लाम में है । ये दोगलापन इस्लाम में है । इस्लाम इसकी इजाजत देता है कि काफिरों से फायदा उठाओ मगर जब ज़रूरत पड़े पूरी दुश्मनी क़ायम रखो । मौक़ा मिलते ही काफ़िर का सर कलम कर दो । तरुण की हत्या उसी इस्लामिक सोच का परिणाम है । इस पूरे प्रकरण में अच्छी बात ये है कि हिंदू संगठनों ने अपनी भूमिका सक्रियता से निभाई है ये आगे भी कंटिन्यू रहनी चाहिए ।।
जय श्री राम हर हर महादेव !!