18/09/2026
🌍 संसार दर्शन बहुत पुरानी बात है। एक यात्री सुबह-सुबह अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। मौसम सुहावना था, पंछी चहचहा रहे थे, और रास्ता हरियाली से भरा था। वह अपनी धुन में आगे बढ़ ही रहा था कि अचानक सामने से एक विशालकाय हाथी गरजता हुआ उसकी ओर दौड़ा। हाथी की आँखों में क्रोध था और कदमों में इतनी ताकत कि ज़मीन तक काँप उठी।*
*यात्री के मन में एक ही विचार आया — “जान बचानी है, अभी और इसी क्षण!” उसने चारों ओर नज़र दौड़ाई, लेकिन कोई ठिकाना नहीं दिखा। तभी उसकी नज़र रास्ते के किनारे एक पुराने कुएँ पर पड़ी। वह बिना सोचे-समझे उसमें कूद गया।*
*गिरते समय उसका हाथ कुएँ में उगे एक वटवृक्ष की लटकती शाखा से टकराया। उसने उस शाखा को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और वहीं झूल गया। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, सांसें तेज़ हो चुकी थीं, और नीचे झाँकते ही उसकी हालत और भी खराब हो गई — कुएँ के तल में चार अति विषैले सर्प और एक भयानक अजगर मुँह खोले उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। वह ज़रा-सी चूक में उसे निगल जाने को तैयार थे।*
*डर के मारे उसका शरीर पसीने से भीग गया। उसने ऊपर नज़र उठाई तो देखा — उसी वटवृक्ष की ऊँची शाखा पर एक बड़ा-सा मधुमक्खियों का छत्ता लटक रहा था, जिससे बूंद-बूंद मीठा मधु टपक रहा था। भय और असहायता के बीच, यात्री ने ऊपर की ओर बढ़कर मधु की एक बूंद चखी। स्वाद इतना लाजवाब था कि वह क्षणभर में अपने डर, हाथी,अजगर और मधुमक्खियां के डंक — सबको भूल बैठा। एक बूंद के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी… वह उस स्वाद में डूब गया।*
*लेकिन अचानक उसकी नज़र पेड़ के तने की ओर गई। वह देखता है कि वटवृक्ष के इस तने को को दो चूहे — एक सफेद🐁 और एक काला 🐀 — लगातार कुतर रहे हैं। सफेद चूहा थोड़ी देर काटता, फिर हट जाता, और काला चूहा उसकी जगह ले लेता। यह क्रम बिना रुके चलता जा रहा था। यात्री को समझते देर न लगी — जैसे ही यह तना टूटेगा, वह सीधे अजगर के मुँह में गिर जाएगा।*
*तभी महासौभाग्य से वहां से दो वैमानिक देव निकलते हैं और उस पथिक से कहते है कि तुम हाथ बढ़ाओ हम तुम्हें यहां से निकाल लेंगे और तब वह पथिक कहता है बस एक बूंद मधु की और चख लूं फिर चलता हूं ऐसे ही अत्यंत दुर्लभ अवसर को नष्ट करते हुए वह पथिक अपनी आयु पूर्ण कर अजगर के मुख में समा जाता है।*
*यह कोई साधारण जंगल-कथा नहीं है, बल्कि हम सभी के जीवन का सटीक चित्रण है।*
*वह पथिक कोई और नहीं हम ही है वह हाथी 🐘— वह समय (काल) है, जो हर पल हमें आगे से धकेलता है, हमें भागने पर मजबूर करता है।*
*अजगर — निगोद और चारों सर्प चारों गतियां, जो हर क्षण हमारे ओर बढ़ रहे है।*
*🌳वटवृक्ष — हमारी आयु है, जिससे हम टिके हुए हैं।*
*💦मधु — जीवन के सुख और मोह-माया हैं एवं मधुमक्खियां हमारे नाते रिश्तेदार आदि है, जो हमें इतने मीठे लगते हैं जिनके साथ रहने पर हम अपने आप को भी भूल जाते हैं।*
*🐁• सफेद चूहा — दिन है।*
*🐀• काला चूहा — रात है।*
*ये दोनों मिलकर हमारी उम्र को धीरे-धीरे कुतरते जा रहे हैं, बिना रुके, बिना थके।*
*तब कभी महा सौभाग्य से हमें सच्चे देव शास्त्र गुरु मिलते हैं और वह हमें संसार चक्र से निकलने के सुगम मार्ग बताते हैं और हम उनसे यह कहते हैं कि बस थोड़ा घर गृहस्ती सेट हो जाए थोड़ा बच्चे सेटल हो जाए और ऐसे विचार और कार्यों में लगे रहते हुए अपना काल पूरा करके अनंत संसार के परिभ्रमण में लगे होने से ही हम आज भी दुखी ही हैं।*
*हम विचारें क्या कहीं हम अब भी उस यात्री की तरह ही गलती तो नहीं कर रहे है ❓
#जैन