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श्रीचंद्रावलीजी के उत्सव की खुब खुब मंगल बधाई...भाद्रपद शुक्लपक्ष पंचमीशिक्षापत्र : श्रीहरिरायजी आज्ञा करते है कि श्रीकृ...
16/09/2026

श्रीचंद्रावलीजी के उत्सव की खुब खुब मंगल बधाई...

भाद्रपद शुक्लपक्ष पंचमी

शिक्षापत्र : श्रीहरिरायजी आज्ञा करते है कि श्रीकृष्ण सेवा के सिवाय अन्य प्रकार के लौकिक-पारलौकिक फल आदि की चिंता नहीं करनी चाहिए।

श्रीस्वामिनी जी(राधाजी)की बधाई
राग सारंग
आज बृषभान के घर फूल।।
प्रगटी कुंवरी राधिका जाकें
मिटे सबन के शूल।।1।।
लोक लोक ते टीको आयो
विविध रतन पट कूल।।
सूरदास प्रभु समताको पावे
जाके भाग्य अतूल।।2।।

श्रीचंद्रावलीजी की बधाई

राग सारंग

चंद्रभान के नवनिधि आई।।
सुषमा कूखि अवतरी कन्या घर घर बजत बधाई।।1।।
नाम धर्यो चंद्रावली सुखनिधि कोटिक चंद्र लजाने।।
भादो सुदि पांचे शुभवासर अरून ह्रदय रस माने।।2।।
सुनि वृषभान नंद मन लरखे देखि अनुपम शोभा।।
कृष्णदास गिरिधर की जोरी देखत रति पति लोभा।।3।।

श्रीस्वामिनी जी(राधाजी)की बधाई
राग - कल्याण
प्रगट भई वृषभान नंदिनी चलो बधाई बाजे री।।
भादो मास उजियारी आठे मंद मंद घन गाजे री।।1।।
व्रजवनिता धावति कल गावति गांव गांव ते आई री।।
विगलित वसन लटकत लट ही नाचत पै नहीं लाजे री।।1।।
आनंद भरी नंदजूकी रानी देत वसन पसु भ्राजे री।।
उदय भयो व्रज वल्लभ कुलको व्यास वचन पर छाजे री।।3।।

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શુભ વિચાર...
15/09/2026

શુભ વિચાર...

व्रज – विस २०८३ भाद्रपद शुक्ल चतुर्थीगुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगारराजभोग द...
15/09/2026

व्रज – विस २०८३ भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी

गुलाबी मलमल का पिछोड़ा एवं श्रीमस्तक पर गोल पाग पर गोल चंद्रिका के श्रृंगार
राजभोग दर्शन -
कीर्तन – (राग : सारंग)
महारास पूरन प्रगट्यो आनि l
अति फूली घरघर व्रजनारी श्री राधा प्रगटी जानि ll 1 ll
धाई मंगल साज सबे लै महा ओच्छव मानि l
आई घर वृषभान गोप के श्रीफल सोहत पानि ll 2 ll
कीरति वदन सुधानिधि देख्यौ सुन्दर रूप बखानि l
नाचत गावत दै कर तारी होत न हरख अघानि ll 3 ll
देत असिस शीश चरनन धर सदा रहौ सुखदानि l
रसकी निधि व्रजरसिक राय सों करो सकल दुःख हानि ll 4 ll

साज - श्रीजी में आज गुलाबी मलमल की रुपहली ज़री के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया सफेद एवं चरणचौकी पर सफ़ेद रंग की बिछावट की जाती है.
वस्त्र – श्रीजी में आज गुलाबी मलमल का पिछोड़ा और श्रीमस्तक पर गोल पाग धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र श्याम रंग के होते हैं.
श्रृंगार – प्रभु को आज हल्का का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. फ़ीरोज़ा के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर गुलाबी की गोल पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, गोल चंद्रिका तथा बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्वेत पुष्पों की विविध रंगों की थागवाली चार मालाजी धरायी जाती है.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, झीने लहरियाँ के वेणुजी एवं वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट गुलाबी व गोटी चाँदी की आती हैं.

Nand Mahotsav celebrations organized by Vaishnav Sangh of UAE (Dubai) at   with the blessings of Vaishnavacharya Shri Dw...
14/09/2026

Nand Mahotsav celebrations organized by Vaishnav Sangh of UAE (Dubai) at with the blessings of Vaishnavacharya Shri Dwarkeshlalji

व्रज – भाद्रपद शुक्ल चतुर्थीबुधवार, 27 अगस्त 2025डंडा चौथ (गणेश चतुर्थी )विशेष – आज गणेश चतुर्थी (डंका चौथ) है. पुष्टिमा...
14/09/2026

व्रज – भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी
बुधवार, 27 अगस्त 2025

डंडा चौथ (गणेश चतुर्थी )

विशेष –

आज गणेश चतुर्थी (डंका चौथ) है. पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय में ‘गण’ का अर्थ समूह अथवा यूथ से एवं ‘पति’ का अर्थ गोपियों के नाथ श्री प्रभु से है.

गोपालदासजी ने वल्ल्भाख्यान में गाया है जिसका भावार्थ यह है कि “श्याम वर्ण के श्रीजी प्रभु गोपीजनों के समूह के मध्य अत्यंत शोभित हैं.
यह ‘गणपति’ रूप में प्रभु का स्वरुप कामदेव को भी मोहित करता है. गौरवर्ण गोपियाँ और मध्य में श्यामसुन्दर प्रभु.”

नाथद्वारा में कई वर्षों पहले यह परम्परा थी कि गणेश चतुर्थी के दिन नाथद्वारा के सभी स्कूलों और आश्रमों के बालक विविध वस्त्र श्रृंगार धारण कर के अपने गुरुजनों के साथ मंदिर के गोवर्धन पूजा के चौक में आते और डंडे (डांडिया) से खेलते थे.
उन्हें गुड़धानी के लड्डू पूज्य श्री तिलकायत की ओर से दिए जाते थे. इसी भाव से आज डंके के खेल के चित्रांकन की पिछवाई आज श्रीजी में धरायी जाती है.
इसके अतिरिक्त अपने निज आवास मोतीमहल की छत पर खड़े हो कर तिलकायत गुड़धानी के लड्डू मंदिर पिछवाड़े में बड़ा-बाज़ार में खड़े नगरवासियों को देते थे जिन्हें सभी बड़े उत्साह से लेकर उल्हासित होते थे.

आज श्रीजी को नियम से लाल चूंदड़ी का धोरे-वाला सूथन, छज्जे वाली पाग और पटका का श्रृंगार धराया जाता है.

श्रीजी ने अपने सभी भक्तों को आश्रय दिया है, मान दिया है चाहे वो किसी भी धर्म से हो.

इसी भाव से आज ठाकुरजी अपनी अनन्य मुस्लिम भक्त ताज़बीबी की भावना से सूथन-पटका का श्रृंगार धराते हैं.

आज के दिन की एक और विशेषता है कि आज सूथन के साथ श्रीमस्तक पर छज्जे वाली पाग और जमाव का कतरा धराया जाता है.

आज भोग में कोई विशेष सामग्री नहीं अरोगायी जाती है. केवल यदि कोई मनोरथी हो तो ठाकुरजी को सखड़ी अथवा अनसखड़ी में बाटी-चूरमा की सामग्री अरोगायी जा सकती है.

सायंकाल संध्या-आरती समय मंदिर के श्रीकृष्ण-भंडार और खर्च-भंडार में लौकिक रूप में भगवान गणेश के चित्रों का पूजन किया जाता है.

राजभोग दर्शन –

साज -

श्रीजी में आज व्रजवासियों के समुदाय की डंडा खेल के चित्रांकन वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.

वस्त्र -

श्रीजी को आज लाल चौफुली चूंदड़ी के वस्त्र पर धोरे-वाला सूथन और पटका धराया जाता है.
ठाड़े वस्त्र सुवापंखी (तोते के पंख जैसे हल्के हरे) रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार -

प्रभु को आज छेड़ान (कमर तक) का हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हीरे के सर्व आभरण धराये जाते हैं.
श्रीमस्तक पर लाल चूंदड़ी की छज्जे वाली पाग के ऊपर मोरशिखा, जमाव का कतरा लूम तथा तुर्री एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं.
श्रीकर्ण में दो जोड़ी हीरा के कर्णफूल धराये जाते हैं.
श्रीकंठ में तिमनिया वाला सिरपेंच धराया जाता हैं.
गुलाबी एवं श्वेत पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती हैं.
श्रीहस्त में कमलछड़ी, हरे मीना के वेणुजी और दो वेत्रजी (एक स्वर्ण का) धराये जाते हैं.
पट लाल एवं गोटी मीना आती हैं.

भाद्रपद शुक्लपक्ष तृतीयादिनांक - 14/09/2026 , वार - सोमवार  (गणेश चतुर्थी)शिक्षापत्र : श्रीहरिरायजी आज्ञा करते है कि अवै...
14/09/2026

भाद्रपद शुक्लपक्ष तृतीया
दिनांक - 14/09/2026 , वार - सोमवार (गणेश चतुर्थी)

शिक्षापत्र : श्रीहरिरायजी आज्ञा करते है कि अवैष्णव के संग में रहना निषेध हैं फिर भी दूरदर्शी वैष्णवों को विचार पूर्वक लोक संकोच आदि के कारण अनासक्ति से अवैष्णव का संग कार्य पूर्ति के लिये करना पड़ता हैं किन्तु मन में सदैव यह भाव रखना चाहिए कि यह संग प्रभु कृपा से जितना शीघ्र छूटे उतना अच्छा हैं।

श्रीस्वामिनी जी(राधाजी)की बधाई
राग सारंग
सकल लोक की सुंदरता वृषभान गोप के आई।।
जाको जश सुर मुनि जो कहत है भुवन चतुर्दश गाई।।1।।
नवल किशोरी रूप गुन श्यामा कमलासी ललचाई।।
प्रगटे पुरुषोत्तम श्री राधा द्वै विधि रूप बनाई।।2।।
उड़ेलें दान देत विप्रन को जस जो रह्यो जग छाई।।
छीतस्वामी गिरिधरकौ चेरौ जुग जुग यह सुखपाई।।3।।

राग - मालव
सब मिलि मंगल गावो।।
श्रीवृषभान उदार विदित जग जानो।।
वंदो चरण महर कीरतिके संपति बहोत लुटावो।।
चतुर्भुजप्रभु हित रूप स्वामिनी निरखत नेन सिरावो।।2।।

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શુભ વિચાર..
13/09/2026

શુભ વિચાર..

एक बोध कथा - ईश्वर बहुत दयालु है।
13/09/2026

एक बोध कथा - ईश्वर बहुत दयालु है।


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