16/09/2026
श्रीचंद्रावलीजी के उत्सव की खुब खुब मंगल बधाई...
भाद्रपद शुक्लपक्ष पंचमी
शिक्षापत्र : श्रीहरिरायजी आज्ञा करते है कि श्रीकृष्ण सेवा के सिवाय अन्य प्रकार के लौकिक-पारलौकिक फल आदि की चिंता नहीं करनी चाहिए।
श्रीस्वामिनी जी(राधाजी)की बधाई
राग सारंग
आज बृषभान के घर फूल।।
प्रगटी कुंवरी राधिका जाकें
मिटे सबन के शूल।।1।।
लोक लोक ते टीको आयो
विविध रतन पट कूल।।
सूरदास प्रभु समताको पावे
जाके भाग्य अतूल।।2।।
श्रीचंद्रावलीजी की बधाई
राग सारंग
चंद्रभान के नवनिधि आई।।
सुषमा कूखि अवतरी कन्या घर घर बजत बधाई।।1।।
नाम धर्यो चंद्रावली सुखनिधि कोटिक चंद्र लजाने।।
भादो सुदि पांचे शुभवासर अरून ह्रदय रस माने।।2।।
सुनि वृषभान नंद मन लरखे देखि अनुपम शोभा।।
कृष्णदास गिरिधर की जोरी देखत रति पति लोभा।।3।।
श्रीस्वामिनी जी(राधाजी)की बधाई
राग - कल्याण
प्रगट भई वृषभान नंदिनी चलो बधाई बाजे री।।
भादो मास उजियारी आठे मंद मंद घन गाजे री।।1।।
व्रजवनिता धावति कल गावति गांव गांव ते आई री।।
विगलित वसन लटकत लट ही नाचत पै नहीं लाजे री।।1।।
आनंद भरी नंदजूकी रानी देत वसन पसु भ्राजे री।।
उदय भयो व्रज वल्लभ कुलको व्यास वचन पर छाजे री।।3।।
सर्वोद्धारक श्री गिरिराज बावा की कृपा से आप सभी का दिन मंगलमय हो।