01/10/2026
हज़रत पीर सैयद अब्दुल क़ादिर बादशाह चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह
हज़रत पीर क़ुतुबुल अक़ताब शैख़ुल मशायख़ सैयद अब्दुल क़ादिर बादशाह चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, जिन्हें अकीदतमंदों में दादा पीर और शाहे मेहमान तवक्कली के नाम से भी जाना जाता है, 20वीं सदी के एक अज़ीम और मशहूर सूफ़ी बुज़ुर्ग थे। आपकी ज़िंदगी इबादत, रियाज़त, तालीमात-ए-सूफ़िया और इंसानियत की ख़िदमत से भरपूर थी। आपकी रूहानी विरासत कई मशहूर सूफ़ी सिलसिलों से जुड़ी हुई है।
🌹 सिलसिला-ए-तरीक़त और रूहानी निस्बत
हज़रत का रूहानी ताल्लुक़ सिलसिला-ए-चिश्तिया निज़ामिया और सिलसिला-ए-बंदानवाज़िया से था। आपकी रूहानी निस्बत मशहूर बुज़ुर्ग, हज़रत ख़्वाजा बंदा नवाज़ गेसूदराज़ रहमतुल्लाह अलैह, गुलबर्गा शरीफ़ के मुबारक सिलसिले से जुड़ी हुई थी। आप अपने रूहानी मक़ाम और फ़ैज़-ओ-बरकत की वजह से अकीदतमंदों के बीच क़ुतुबुल अक़ताब और शैख़ुल मशायख़ के अलक़ाब से मशहूर हुए।
🌹 इबादत, रियाज़त और तालीमात
हज़रत ने अपनी पूरी ज़िंदगी इबादत, ज़िक्र-ओ-अज़कार, रियाज़त और रूहानी तरबियत में गुज़ारी। आपकी तालीमात का बुनियादी मक़सद अमन, मोहब्बत, इंसानियत, आपसी भाईचारा और रूहानी पाकीज़गी को फ़रोग़ देना था। आप तवक्कुल यानी अल्लाह तआला की ज़ात पर मुकम्मल भरोसा रखने के पैकर थे। आपकी ज़िंदगी से लोगों को सब्र, शुक्र, ख़ुलूस और अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहने का पैग़ाम मिलता है।
🌹 मज़ार-ए-मुबारक और करामात
आपका मज़ार-ए-मुबारक रोज़ावाड़ी, बागणी, ज़िला सांगली, महाराष्ट्र में मरज-ए-ख़लाइक़ है। यह मुक़द्दस दरगाह आज भी अकीदतमंदों के लिए रूहानी फ़ैज़ और सुकून का मरकज़ है।
रिवायती क़िस्सों और मुक़ामी रिवायतों के मुताबिक़, आपकी बारगाह में हाज़िरी देने वाले कई मुसाफ़िरों, हुक्मरानों और परेशानहाल लोगों को आपकी दुआओं और तवज्जोह से रूहानी सुकून और शिफ़ा हासिल हुई। अकीदतमंदों के दरमियान आपकी करामात और तवक्कुल के कई वाक़िआत मशहूर हैं। दूर-दराज़ से लोग आपकी बारगाह में हाज़िरी देकर फ़ैज़ और बरकत हासिल करने आते हैं।
🌹 ख़ानदानी विरासत और सज्जादानशीन
हज़रत की रूहानी विरासत को आज भी आपके ख़ानदान के अफ़राद और जानशीन आगे बढ़ा रहे हैं। मौजूदा सज्जादानशीनों में जनाब पीर सैयद शाह अब्दुल मुनाफ़ अब्दुल ग़नी पीरज़ादे साहिब का नाम भी शामिल है, जो दरगाह के रूहानी मामलात, रोज़ाना की रस्मों और दीनी व रूहानी तक़ारीब की सरपरस्ती करते हैं।
आपके आस्ताने पर महफ़िल-ए-समा, ज़िक्र-ओ-अज़कार और सालाना उर्स मुबारक का एहतेमाम किया जाता है। इन मुबारक तक़ारीब में दूर-दराज़ से अकीदतमंद शिरकत करते हैं। ख़ास बात यह है कि इस दरगाह से मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब के लोग भी अकीदत और मोहब्बत रखते हैं, जो अमन, इंसानियत और आपसी भाईचारे की सूफ़ियाना तालीमात की एक ख़ूबसूरत मिसाल है।
🌹 रूहानी पैग़ाम और फ़ैज़
हज़रत पीर सैयद अब्दुल क़ादिर बादशाह चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की ज़िंदगी तवक्कुल, इबादत, मोहब्बत और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ का एक रौशन नमूना है। आपकी तालीमात आज भी अकीदतमंदों के दिलों में ज़िंदा हैं और आपकी दरगाह रूहानी सुकून, अमन और भाईचारे का पैग़ाम दे रही है।
अल्लाह तआला हज़रत के दरजात बुलंद फ़रमाए, उनके फ़ैज़-ओ-बरकात से हमें मालामाल फ़रमाए और उनके सदक़े में तमाम अकीदतमंदों की जायज़ मुरादें पूरी फ़रमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।