27/05/2026
कुछ महीनों से मुझे एक बात बहुत गहराई से महसूस हो रही है।
जब से मेरा कार्यकाल शुरू हुआ है, मैं केवल एक ही बात कह रहा हूँ —
स्वार्थ और अहंकार का त्याग।
लेकिन मैंने देखा कि हमारे पंथ के कई पुराने और प्रमुख लोग धीरे-धीरे पंथ से दूर होते चले गए।
जिनके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं था कि वे अलग हो सकते हैं, वे भी आज रास्ते से हट चुके हैं।
और कहीं न कहीं इसका सबसे बड़ा कारण स्वार्थ और अहंकार ही बना।
मैं यह बात किसी की निंदा के लिए नहीं कह रहा, बल्कि एक सीख के रूप में कह रहा हूँ।
समय हमें यह समझा रहा है कि पंथ को अब ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो सेवा, विनम्रता और सच्चे भाव से जुड़े हों।
आज पंथ को सबसे ज़्यादा आवश्यकता नए लोगों की है,
और विशेष रूप से युवाओं की।
क्योंकि युवा ही वह शक्ति हैं जो आने वाले समय में इस कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं।
यदि आप सच में इस कार्य में टिक सकते हैं,
स्वार्थ और अहंकार से ऊपर उठकर समाज और पंथ के लिए कुछ करना चाहते हैं,
तो आइए… आगे बढ़िए और अपना योगदान दीजिए।
साहेब बंदगी साहेब