Mata Pita

Mata Pita ​ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने,
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
🙏🙏🙏

28/02/2026

🙏🙏🙏
Mitti ki deewar par, neela sa ek roop hai,

Jaise kadi dopehari mein, thandi koi dhoop hai.

Sar par mor-pankh saje, aankhon mein muskan hai,

Chote se is balak ka, wahi to bhagwan hai.

​Na koi mantra aata hai, na koi vidhi-vidhaan,

Bas ek tak niharta hai, nishchal hai dhyan.

Wo bada sa chitra jaise, saans lene lagta hai,

Jab masoom sa ye baccha, uske samne jagta hai.






17/12/2025

2 prakar se bhagwan deta hai


15/12/2025

🥰😍♥️

14/12/2025

Bolo
14/12/2025

Bolo

13/12/2025

एक बार हमने एक शराबी को प्रणाम किया था। शराब पिए था। हम गंगा के किनारे बैठे, गंगा जी की तरंगों का आनंद ले रहे थे, मंत्र जपते हुए। उस समय 22-24 की जो भी अवस्था हो, नई अवस्था थी।
​"ए, खड़ा हो।" मतलब एक कौतूहल। उसकी गंध से तो समझ गए शराब पिए है। हमने कहा "क्या करेगा?"। तो खड़े हुए। यह स्वभाव शुरू से रहा है, जी। बोले, "आ"। हमने कहा, "कहाँ ले जाएगा?"। "बाबा, इससे क्या फर्क पड़ता है, ले चलो"।
​वो ले गया और वैकुंठ धाम ले गया, वहाँ ब्रम्हावर्त बिठूर में है वैकुंठ धाम, वो पास में ही था। और भगवान की छवि को, ऐसे नशे में ही बोल रहा है। बोला, "देख रहा है इनको तू? कौन हैं ये?"। हमने कहा, "भगवान"। "किसके बने?"। "वो भगवान तो भगवान होते हैं।"। बोले, "नहीं, जो मैं बात पूछ रहा हूँ, असली बता"। हमने कहा, "संगमरमर"। बोले, "ये क्या है?"। हमने कहा, "संगमरमर"। बोले, "समझ ले। एक पैरों के नीचे रौंदा जाता है, और एक भगवान बनकर पूज रहा है। क्यों? ये तिल-तिल काटा गया, लेकिन टूटा नहीं। ये टूटा नहीं, तो आज भगवान बनकर पूज रहा है। टूटना नहीं जीवन में"।
​हम उसे पंचांग प्रणाम किए थे, जैसे संत को प्रणाम करते हैं, कि भगवान नाटक करके, शराबी का मुझे उपदेश कर रहे हैं। अगर उपदेश सही मिले, तो एक शराबी का भी उपदेश मान लेना चाहिए। तो हमको बात माननी है, वो कहीं से भी हो। अगर सही बात बोल रहा है, तो हमें शिक्षा लेनी चाहिए। यह नहीं देखना चाहिए ये कौन है।
​जैसे हम मिठाई, अच्छी लगी तो ले लिया। मिठाई वाला ये मिठाई खाता है कि नहीं, ये नहीं। मेरी पसंद है, मैंने खरीद ली। तो अच्छी बात मुझे जहाँ से मिले, वहाँ से स्वीकार करना चाहिए। वो छोटा व्यक्ति हो, वो संसारी व्यक्ति हो, या वो पागल आदमी भी हो, तो भी हमें स्वीकार करना चाहिए। अच्छी बात स्वीकार करनी चाहिए।

🙏 उपदेश का सार (Summary of the Teaching)

​महाराज श्री प्रेमानंद गोविंद शरण जी ने शराबी को प्रणाम इसलिए किया क्योंकि वह उसे केवल एक शराबी नहीं मानते थे, बल्कि उसे भगवान द्वारा दिया गया एक उपदेश मानते थे।

​यहाँ इस घटना से मिलने वाले मुख्य उपदेश का सार है:
​1. ज्ञान कहीं से भी मिले, स्वीकार करो: महाराज जी कहते हैं कि अगर उपदेश या सही बात एक शराबी से भी मिले, तो उसे मान लेना चाहिए। हमें यह नहीं देखना चाहिए कि बात कौन कह रहा है, बल्कि यह देखना चाहिए कि बात सही है या नहीं।
​2. टूटना नहीं (Non-breaking Resolve): शराबी उन्हें वैकुंठ धाम (बिठूर) ले गया और भगवान की संगमरमर की मूर्ति दिखाते हुए पूछा कि यह क्या है। शराबी ने कहा, एक संगमरमर पैरों के नीचे रौंदा जाता है और एक भगवान बनकर पूजा जाता है, क्योंकि यह तिल-तिल काटा गया, लेकिन टूटा नहीं।
​इस घटना से महाराज जी को यह शिक्षा मिली कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, साधना और दृढ़ संकल्प से टूटना नहीं चाहिए।
​3. विनम्रता और सम-भाव: शराबी को प्रणाम करना महाराज जी की अत्यधिक विनम्रता को दर्शाता है। उन्होंने शराबी में भी भगवान के नाटक (लीला) को देखा, जो उन्हें उपदेश दे रहे थे।




Radha Radha 🙏🙏🙏
12/12/2025

Radha Radha 🙏🙏🙏

गौ सेवा केवल एक कर्मकांड नहीं, यह संस्कृति है हमारी। इसे अपनाएं और पुण्य कमाएं।🙏🙏🙏गौ सेवा (गाय की सेवा) का भारत में धार्...
12/12/2025

गौ सेवा केवल एक कर्मकांड नहीं, यह संस्कृति है हमारी। इसे अपनाएं और पुण्य कमाएं।🙏🙏🙏

गौ सेवा (गाय की सेवा) का भारत में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।
​संक्षेप में गौ सेवा की स्थिति:
​धार्मिक महत्व: गाय को 'गौ माता' कहा जाता है और शास्त्रों में इसे पूजनीय माना गया है। ऐसा माना जाता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए इसकी सेवा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
​सांस्कृतिक महत्व: गौ सेवा भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। इसे आध्यात्मिक शांति और पुण्य का कार्य माना जाता है।
​सामाजिक प्रयास: गौ सेवा के लिए कई गौशालाएँ (Cow Shelters) और संस्थाएँ चलाई जा रही हैं। ये संस्थाएँ बीमार, बेसहारा और बूढ़ी गायों की देखभाल, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था करती हैं।
​सरकारी और गैर-सरकारी सहयोग: कई क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और धर्मपरायण लोग मिलकर गौ आश्रय स्थलों को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
​व्यक्तिगत योगदान: बहुत से लोग रोज गाय को रोटी, चारा या गुड़ खिलाकर व्यक्तिगत स्तर पर गौ सेवा करते हैं, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है।
​आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व: गाय के दूध, घी और अन्य उप-उत्पादों (गोबर, गोमूत्र) का महत्व है। गोबर का उपयोग जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण में भी होता है।








​ (Alternate spelling)

​You can also combine a few for maximum reach:

12/12/2025

Patni ko sanman do♥️
1. पति का कर्तव्य (Duty of the Husband)
​वक्ता बताते हैं कि पति का दायित्व है कि पत्नी को जो भी प्रिय हो, वह सब लाकर दे।
​इसमें पत्नी के श्रृंगार की सभी वस्तुएं शामिल हैं, जैसे:
​काजल (Kajal)
​बिंदी (Bindi)
​पायल (Anklets)
​मंगलसूत्र (Mangalsutra)
​सोने की चूड़ियाँ (Gold Bangles)
​डायमंड की चूड़ियाँ (Diamond Bangles)
​अंगूठी (Ring)
​2. श्रृंगार का महत्व (Importance of Adornment/Shringar)
​वक्ता कहते हैं कि ये सब वस्तुएं श्रृंगार का हिस्सा हैं और 16 श्रृंगारों (Solah Shringar) के अंतर्गत आती हैं।
​यह श्रृंगार केवल सामान्य वस्तु नहीं है, बल्कि माँ लक्ष्मी और माँ पार्वती भी इसे धारण करती हैं।
​यहाँ तक कि देवांगनाएं (Celestial Nymphs) भी श्रृंगार करती हैं।
​3. श्रृंगार रस और नारी का सम्मान (Shringar Rasa and Respect for Women)
​वक्ता उन लोगों पर व्यंग्य करते हैं जो श्रृंगार को महज़ उपभोग की वस्तु समझते हैं।
​वह ब्रज की कहावत का प्रयोग करते हैं: "बंदर का जाने अदरक का स्वाद" (अर्थात मूर्ख व्यक्ति गुण नहीं पहचानता)।
​उनका कहना है कि जिन लोगों ने स्त्री को भोग का पदार्थ समझ रखा है, वे श्रृंगार रस के महत्व को नहीं जान सकते।
​वक्ता जोर देकर कहते हैं कि स्त्री पूजनीय है।
​जिस दिन लोग स्त्री को पूजनीय मानना शुरू कर देंगे, उस दिन उन्हें पता चलेगा कि नारी में माँ का वात्सल्य (Motherly Affection) भी है, पति के प्रति प्रेम (Love) भी है, श्रृंगार रस भी है, और श्रृंगार रस की एक अलग धारणा भी है।

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