Mohammad Shibu

Mohammad Shibu "Allah is my Lord. Islam is my life. Quran is my guide. Muhammad ﷺ is my role model. Jannah is my goal" 💚💚 للحيللله محمدرسوللله ﷺ

जापान में अब 95,000 से भी अधिक लोग 100 वर्ष से ज़्यादा की उम्र पार कर चुके हैं… और इसकी वजह ये है —1. वे जीवन को सरल रखत...
10/05/2026

जापान में अब 95,000 से भी अधिक लोग 100 वर्ष से ज़्यादा की उम्र पार कर चुके हैं… और इसकी वजह ये है —

1. वे जीवन को सरल रखते हैं
कम दिखावा, कम तनाव, कम भागदौड़। सादगी मन और शरीर दोनों को शांति देती है।

2. वे 80% पेट भरने तक ही खाते हैं
जापान में “Hara Hachi Bu” का सिद्धांत माना जाता है — यानी ज़रूरत से ज़्यादा न खाना। इससे शरीर पर कम दबाव पड़ता है।

3. वे रोज़ चलते हैं और सक्रिय रहते हैं
वहाँ एक्टिव रहना सिर्फ एक्सरसाइज़ नहीं, बल्कि जीवनशैली है। पैदल चलना, बागवानी और रोज़मर्रा की गतिविधियाँ उन्हें स्वस्थ रखती हैं।

4. वे जीवन का उद्देश्य (Ikigai) खोजते हैं
हर सुबह उठने की एक वजह होना जीवन में ऊर्जा और मानसिक शक्ति देता है।

5. वे रिश्तों और समुदाय को महत्व देते हैं
अकेलापन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। अच्छे रिश्ते और अपनापन लंबी उम्र में मदद करते हैं।

6. वे ताज़ा और प्राकृतिक भोजन खाते हैं
मछली, हरी सब्जियाँ, ग्रीन टी, फर्मेंटेड फूड और कम मात्रा में भोजन उनकी आदत है।

7. वे तनाव को अलग तरीके से संभालते हैं
लगातार भागदौड़ की बजाय वे धैर्य, ध्यान, प्रकृति और शांत दिनचर्या को महत्व देते हैं।

8. वे अनुशासन और नियमितता बनाए रखते हैं
समय पर सोना, संतुलित भोजन और नियमित आदतें शरीर और मन को स्थिर रखती हैं।

9. वे सीखना कभी बंद नहीं करते
पढ़ना, नई चीज़ें सीखना, शौक और सामाजिक जुड़ाव दिमाग को सक्रिय रखते हैं।

10. वे जीवन से रिटायर नहीं होते
उम्र बढ़ने के बाद भी वे खुद को सक्रिय, उपयोगी और उद्देश्यपूर्ण बनाए रखते हैं।

लंबी उम्र एक दिन में नहीं बनती…
यह छोटी-छोटी अच्छी आदतों से धीरे-धीरे बनती है।

धीरे जिएँ।
संतुलित खाएँ।
रिश्तों से जुड़े रहें। 🌿

09/05/2026

May Allah Almighty make all the stages of this house easy for the entire Ummah of my Prophet (peace and blessings of Allah be upon him). Amen. Amen. O Lord of the Worlds.

पंजाब के एक गांव ने जनाज़े की रस्म को बदल कर एक नया इतिहास रचा हैं ! जहां एक ग़रीब शख़्स का जनाजा कब्रिस्तान में पहुंचा ...
08/05/2026

पंजाब के एक गांव ने जनाज़े की रस्म को बदल कर एक नया इतिहास रचा हैं ! जहां एक ग़रीब शख़्स का जनाजा कब्रिस्तान में पहुंचा और सफें दुरूस्त हुई तो ईमाम साहब ने शामिल हुए लोगों सें मुखातिब होकर एक दिल सोज ऐलान किया !

ये मैय्यत जिसका जनाज़ा हम पढ़ने लगे हैं अपने घर का एकलौता (वाहिद) कफील और सहारा था ! सोगवारान (शौकाकुल) परिवार में सिर्फ एक बेवा और तीन छोटे बच्चें हैं !

इद्दत के अय्याम में उनके पास आमदानी का कोई जरिया नहीं है ! लिहाज़ा कब्रिस्तान के मैन गेट पर एक चादर बिछा दी गई हैं ! जो भी साहबे तौफीक बग़ैर किसी दिखलावे के अल्लाह की रज़ा के लिए एक रूपये सें लेकर अपनी हैसियत के मुताबिक जितनी रकम दे सकता हो वो वहां डाल दे !
तद्फीन के बाद जब चादर सें रकम जमा की गई तो वो एक लाख रुपए सें ज़्यादा थी !

किसी के दस रुपए थे तो किसी के सौ लेकिन इस मुस्तरका हमदर्दी ने यतीम बच्चों के लिए कई महीनों का मआस (ख़र्चा पानी) शुकून फराहम कर दिया, ताजियत सिर्फ हाथ उठाकर दुआ करने का नाम नहीं, बल्कि दु:ख की घड़ी में अमली सहारा बनने का नाम है !

हमारे नबी करीम सल्लललाहो अलैहि वस्सल्लम का फरमान हैं कि अगर कोई पौधा लगाएं और उससे किसी इंसान, परीन्दे या जानवर को कोई फायदा पंहुचे तो लगाने वाले को उसका भी सवाब मिलता रहता हैं, जन्नत का आसान रास्ता खल्के ख़ुदा की खिदमत में छुपा हुआ हैं !

आइये इस रिवायत को हर गांव व शहर में जिंदा करे ! जब भी किसी ऐसे का जनाजा हो जो घर का वाहिद कफील (अकेला कमाने वाला) था, तो वहां के उल्मा ए इकराम पाँच मिनट की इधर उधर की बात करने की बजाय ये ऐलान करें के "मरहूम के बच्चों के लिए अपना हिस्सा डालें" ताकि मरहूम के परिवार को म'आसी अखराजात और परेशानियां सें बचाया जा सकें और ये अमल सदका ए जरिया बन जाए - जज़ाक अल्लाह खैर !

डॉक्टर महमूद मुस्तफा लिखते है कि,तुम कब्र में हजारों साल तक क्या करोगे?मैं तुम्हें एक तरीका बताता हूँ जो मेरे साथ बहुत क...
07/05/2026

डॉक्टर महमूद मुस्तफा लिखते है कि,

तुम कब्र में हजारों साल तक क्या करोगे?
मैं तुम्हें एक तरीका बताता हूँ जो मेरे साथ बहुत कारगर साबित हुआ और जिससे मैं अपने अल्लाह से रिश्ते पर ज्यादा ध्यान देने लगा हूँ।

कब्र डरावनी है, जाहिर है कि नेक लोगों के अलावा।
मैंने इसके बारे में सोचा, और अब मेरी उम्र 54 साल है, और मैं दुनिया से और उसकी चीजों से तंग आ चुका हूँ। अच्छा, तो जब मैं कब्र में जाकर अकेला रहूँगा, सैकड़ों-हजारों साल तक, तो मैं क्या करूँगा?

क्या तुमने कभी इसका तसव्वुर किया है?

इसलिए मैंने नीचे दिए गए तरीके पर अमल करना शुरू किया:

देखो, मैं मर जाऊँगा, और मेरे पास एक खाली, बिल्कुल अंधेरी कब्र होगी।

इस कब्र को सामान की जरूरत होगी, इसलिए मैं हर इस्तग़फार को ऐसे तसव्वुर करने लगा जैसे मैं उसे अपनी कब्र की तरफ भेज रहा हूँ ताकि वो वहाँ मेरा इंतजार करे और मेरी तन्हाई का साथी बने।

अल्लाह की कसम, मैं मजाक नहीं कर रहा।

मैंने अपनी कब्र को पूरी तरह सजाने का अमल शुरू कर दिया है।

कब्र के एक कोने को मैं हजारों तस्बीहात से भर रहा हूँ।

यहाँ मेरे सिर के करीब कम से कम 300 ख़त्म-ए-कुरान होंगे जो मेरे लिए आरामदायक बिस्तर का कारण बनेंगे।

हर रुकू को मैं यह सोचकर अदा करता हूँ कि मैं उसे कब्र में अपना ज़खीरा बना रहा हूँ।

हर कोई मुझे छोड़कर अपने घर चला जाएगा, और मैं अकेला रह जाऊँगा शायद हजारों सालों तक। मेरे बच्चे कुछ सालों में मुझे भूल चुके होंगे।

इसलिए मुझे कब्र में साथियों, रोशनी और जन्नत जैसे मंज़रों की जरूरत होगी।

मैं तस्बीहात, ज़िक्र, कुरान, नमाज़ और सदक़ा—सबको अपने साथ तसव्वुर करता हूँ कि वो मेरे दोस्त होंगे, मेरे साथ वहाँ हँस रहे होंगे और बातें कर रहे होंगे।

नबी करीम ﷺ पर दरूद पढ़ना मैंने अपने मामूलात का अहम हिस्सा बना लिया है। यह वहाँ हमारी महफिलों में भी शामिल होगा—ठंडे पानी की तरह, खूबसूरत कपड़ों की तरह।

मैं यह चाहता हूँ कि मेरी कब्र की जिंदगी इस दुनिया की जिंदगी से भी ज्यादा खूबसूरत हो, इंशाअल्लाह।

क्या यह बेहतर नहीं है कि मैं वहाँ जाकर ग़ीबत, चुगली, हसद और दूसरे दुनियावी गुनाहों के नतीजे में बदबूदार कपड़ों, दीमक लगे फर्नीचर और सख्त पत्थरीले बिस्तर के बजाय अपनी कब्र को बेहतरीन चीजों से सजा कर रखूँ?

मैंने दुनिया में अपना घर बनाने के लिए सारी जिंदगी कड़ी मेहनत की, लेकिन यह घर तो मेरे वारिसों का हो जाएगा। असल में तो मेरी सारी मेहनत अपने लिए है ही नहीं, सारे फायदे तो और लोग उठाएँगे। तो मैंने सोचा कि बस बहुत हो गया, मुझे अपना घर बनाना है जहाँ सिर्फ मैं ही रहूँगा और लंबा वक्त गुजारना है।

अगर मेरे सारे आमाल दुनिया की जरूरतों के लिए थे और अपनी कब्र के लिए कुछ भी नहीं था, तो फिर मेरी कब्र के घर के लिए सिवाय अज़ाब के फर्नीचर, हमेशा का अंधेरा और सख्त हिसाब के अलावा कुछ भी नहीं होगा। और मैं ऐसे घर में अकेला कैसे रहूँगा!

मेरी आपको भी नसीहत है कि आज से:

अपनी कब्र को अपना बैंक अकाउंट बनाओ। इसमें ज्यादा से ज्यादा जमा करो और लंबी अवधि वाली पॉलिसी लो।

अपनी इबादतों का खूब ख्याल रखो। अल्लाह की कसम, जब तुम कब्र में होगे, तो तुम मुझे वहाँ से भी शुक्रिया अदा करोगे।

अपनी कब्र के घर का इस दुनिया के घर से ज्यादा ख्याल रखो।

अभी तुम अपने घरवालों के बीच हो, पहन रहे हो, खा-पी रहे हो, आराम से सो रहे हो, और तुम्हारी सारी जरूरतें पूरी हो रही हैं, फिर भी तुम अपनी हालत से नाराज रहते हो, हर वक्त शिकायत करते रहते हो।

तो सोचो जब तुम जमीन के नीचे होगे और सैकड़ों-हजारों सालों तक होगे, तो वहाँ तुम्हारे साथ कौन होगा?

तुम्हारे पसंदीदा सियासतदान, खिलाड़ी, अदाकार, ताजिर—ये तो तुम्हें यहाँ भी नहीं जानते, और न ही इन्हें तुम्हारी इतनी फिक्र है। तुम ही इनके पीछे बेवकूफों की तरह अपना वक्त बर्बाद करते हो।

तुम्हारे वो बच्चे जिनकी शादियों पर तुम लाखों रुपये फिजूल खर्च कर देते हो—यकीन करो, यह खर्च तुम्हारे लिए बोझ बन चुका होगा, और बच्चे मुकर जाएँगे कि हमारे बाप और माँ ने खुद अपने लिए और हमारे लिए मुसीबत खड़ी की।

इसलिए आज से अपनी जान की फिक्र करो, अपना ख्याल खुद रखो।

ऐ अल्लाह, हमें हुस्न-ए-खातिमा अता फरमा।
आमीन आमीन आमीन

ऐ अल्लाह, हमारी आख़िरत को बेहतर बना दे और हमें कब्र के अज़ाब से बचा।
आमीन आमीन आमीन या अल्लाह

ऐ अल्लाह, हमें अपना ज़िक्र, शुक्र और हुस्न-ए-इबादत की तौफीक अता फरमा, ताकि तू हम पर अपनी रज़ा और जन्नतुल फिरदौस में नेमतें नाज़िल करे, जहाँ हम तेरे नबी मुहम्मद ﷺ की सोहबत में हों।

आमीन 🤲

वो बातें जिन्हें आप हज़रत मुहम्मद ﷺ ने नापसंद किया या मना किया 👇1. धूप और छांव के बीच बैठनानबी ﷺ ने उस जगह बैठने से मना क...
11/04/2026

वो बातें जिन्हें आप हज़रत मुहम्मद ﷺ ने नापसंद किया या मना किया 👇

1. धूप और छांव के बीच बैठना
नबी ﷺ ने उस जगह बैठने से मना किया जहाँ धूप और छांव मिलती हो।

हदीस: “धूप और छांव के बीच मत बैठो।” (अबू दाऊद)
शरीर के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है क्योंकि अलग-अलग तापमान से तकलीफ या बीमारी हो सकती है। पूरी धूप या पूरी छांव में बैठना बेहतर है।

2. बहुत गरम खाना खाना
नबी ﷺ ने बहुत गरम खाना खाने से मना किया।

हदीस: “खाने को ठंडा होने दो, क्योंकि बहुत गरम खाने में बरकत कम होती है।” (अल-बैहकी)
बहुत गरम खाना मुंह, गले और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। थोड़ा ठंडा होने का इंतज़ार करना सेहत और बरकत दोनों के लिए अच्छा है।

3. पेट के बल (उल्टा) लेटना
नबी ﷺ ने पेट के बल सोने से मना किया।

हदीस: “यह लेटने का वह तरीका है जो जहन्नम वालों का है।” (इब्न माजा)
इस तरह सोने से गर्दन और पीठ पर दबाव पड़ता है। दाएं या बाएं करवट सोना बेहतर और सुन्नत है।

4. बाएं हाथ से खाना
नबी ﷺ ने बाएं हाथ से खाने से मना किया।

हदीस: “शैतान बाएं हाथ से खाता और पीता है।” (सहीह मुस्लिम)
दाएं हाथ से खाना-पीना सुन्नत है। बाएं हाथ को आमतौर पर सफाई (हाइजीन) के कामों के लिए रखा जाता है। बीमारी या मजबूरी में छूट है।

5. खाने या पीने पर फूंक मारना
नबी ﷺ ने खाने या पीने में फूंक मारने से मना किया।

हदीस: “उन्होंने पेय में फूंक मारने से मना किया।” (सहीह मुस्लिम)
फूंक मारने से कीटाणु फैल सकते हैं और खाना/पेय अस्वच्छ हो सकता है। यह एक साफ-सफाई का तरीका भी है।

6. दूसरों को बुरे नामों से पुकारना
नबी ﷺ ने लोगों को बुरे या अपमानजनक नामों से बुलाने से मना किया।

क़ुरआन: “एक-दूसरे को बुरे नामों से मत पुकारो।” (सूरह अल-हुजुरात 49:11)
बुरे नाम रिश्तों को खराब करते हैं और गुनाह हैं। दूसरों की इज्जत करना इस्लाम की बुनियादी शिक्षा है।

7. जुआ (Gambling)
इस्लाम में जुआ पूरी तरह हराम है।

क़ुरआन: “नशे की चीजें और जुआ शैतान के काम हैं, इसलिए इनसे बचो।” (सूरह अल-माइदा 5:90–91)
जुआ लत, नुकसान और झगड़े का कारण बनता है। यह इंसान को अल्लाह की याद और मेहनत से दूर कर देता है।

छोटी-छोटी बातों में भी सुन्नत इंसान को डिसिप्लिन, जागरूकता और ख्याल रखना सिखाती है। आज साइंस इन बातों के सही होने की पुष्टि करता है, हमने सुन्नतों को हल्का समझा और दुनिया की नज़र में भी हलके हो गये।

ज़कात निकालिए, आपकी ज़कात के मुस्तहिक के लोग आपका इंतज़ार कर रहे हैं, उनकी ईद में खुशियों का ज़रिया बनिए और अपना फ़र्ज़ ...
18/03/2026

ज़कात निकालिए, आपकी ज़कात के मुस्तहिक के लोग आपका इंतज़ार कर रहे हैं, उनकी ईद में खुशियों का ज़रिया बनिए और अपना फ़र्ज़ अदा करिए...

फ़कीर, मिस्कीन, गुलाम , ग़रीब , क़र्ज़दार और झूठे मुकदमों में फंसे ग़रीब लोगों का भी आप पर हक़ है , वह आपके ज़कात का मुस्तहिक है।

कुरआन मजीद में अल्लाह ने फ़र्माया है ....

“ज़कात" तुम्हारी कमाई में गरीबों और मिस्कीनों का हक है।”

1-फ़कीर वह होता है जिसके पास सिर्फ एक वक्त का खाना होता है।

2-मिस्कीन वह होता है जिसके पास यह भी नहीं होता।

ज़कात दुनिया का पहला साइंटिफिक टैक्स सिस्टम

क़ुरआन में शब्द "ज़कात" 33 बार इस्तेमाल हुआ है और ज़्यादातर नमाज़ के साथ साथ ज़कात का ज़िक्र हुआ है , इस हिसाब से इस्लाम के 5 फ़र्ज़ में ज़कात बेहद अहम फ़र्ज़ है।

ज़कात किसको नहीं दे सकते ?

1- बाप 2- माँ 3-बीवी और 4- बेटा बेटी

ज़कात इन लोगों को नहीं दे सकते, क्योंकि इनकी देखभाल करने की ज़िम्मेदारी आपकी होती है, इनका आप पर हक है और ईमानदारी से इनका हक देना ही दीन है। इनकी अपनी हैसियत के अनुसार देखभाल करना बेटों, पति और बाप की होती है, इसलिए इन लोगों को ज़कात देने की अनुमति नहीं है।

इसके अलावा अपने नज़दीक के मुस्तहिक रिश्तेदारों को सबसे पहले ज़कात दीजिए। ऐसे दीजिए कि उनको ज़कात भी मिल जाए और उनके मान स्वाभिमान और गैरत को चोट भी ना पहुँचे इसके लिए एक बेहतर तरीका है।

अपने ऐसे सगे संबन्धीयों से रमज़ान के अलावा भी मिला करें , रमज़ान में आप उनसे मिले और उनकी कुछ मदद की तो वह "ज़कात" का पैसा समझ कर अपनी गैरत पर चोट महसूस करेंगे।

उनसे शेष 11 महीनों में दो चार बार मिला करें , उनके पास बैठा करें , उनकी ज़रूरतों को समझा करें और फिर उन पर खर्च किया करें। जैसे उनकी कोई देनदारी हो वह चुका दें , जैसे उनका कोई बेटा बेटी पढ़ाई कर रहा हो उसकी सारी ज़िम्मेदारी उठा लें , जैसे उनकी कोई बेटी की शादी होनी हो उसमें मदद करें , मकान में कोई काम हो वह करा दें , उनकी जायज़ ज़रूरतें पूरी करें , इत्यादि इत्यादि।

उनकी गैरत बची रह जाएगी और आपकी ज़कात सबसे बेहरीन जगह खर्च हो जाएगी..........यही इस्लाम है।

ज़कात की गणना कैसे करें?

इस्लाम में ज़कात की मात्रा निर्धारण और उन चीजों को इंगित भी कर दिया जिस पर ज़कात फर्ज है।

इस आधार पर ज़कात को चार भागों में बांटा जा सकता है।

1. खेती व बाग
2. चौपाय - पशु, ऊँट, गाय, बकरी इत्यादि
3. सोना-चांदी इत्यादि
4. व्यापार में हुआ लाभ

• ज़कात साल में एक बार फर्ज़ है खेती व बाग का साल उस समय पूरा समझा जायेगा जब फसल पक जाये।

■ ज़कात की मात्रा व गणना :-

ज़कात की मात्रा व निसाब का निर्धारण मालिको की मेहनत, प्रयास, उनकी सहूलियत एवं मेहनत को सामने रखकर किया गया।

• अचानक प्राप्त माल पर व ज़कात :-

अत: जो माल आदमी को अचानक एवं एक बारगी में मिल जाये, (जैसे खनन से प्राप्त धन) तो उन पर साल बितने का इंतजार न किया जाये और जिस समय ऐसे धन की प्राप्ती होती है उसी समय उसका पांचवा हिस्सा उस पर वाजिब हो जाता है कि दान कर दे।

• खेती व बाग (बरानी खेती) पर ज़कात :-

जिस धन की प्राप्ती में स्वयं उसकी मेहनत शामिल हो तो उस पर 10वां हिस्सा वाजिब होगा। जैसे खेती व बाग इत्यादि जिसके जोतने व बोने का कार्य जो स्वयं करता है , किन्तु उसकी न सिंचाई की जरूरत पड़ती है, और न उसके लिए कुआँ खोदने और रहट् आदि लगाने की आवश्यकता पड़ती हो बल्कि बरसात के पानी से सिंचाई (बरानी खेती) हो जाती है।

• सिंचाई खेती व ज़कात :-

अगर कोई व्यक्ति डोल अथवा किसी अन्य साधन से सिंचाई करता है तो उस पर 20वाँ हिस्सा वाजिब हो जाता है।

• धन की देखरेख , सुरक्षा व ज़कात :-

अगर कोई ऐसा काम हो जिसमें बढ़ोतरी मालिक की मेहनत पर निर्भर हो और उसकी देखरेख व सुरक्षा उसके जिम्मे हो तो उस पर 40वाँ हिस्सा वाजिब हो जाता है।

• पशु- पशु, ऊँट, गाय, बकरी इत्यादि व ज़कात :-

चौपायों पर ज़कात का निसाब अलग -अलग हैं , जैसे: 5 ऊंट पर ही ज़कात देना आवश्यक है और ऐसे ही 40 बकरियां , 30 गायें ।

अर्थात जिस आदमी के पास पशुओं की यह संख्या है उन पर धन के कुल मूल्य का 40 वां हिस्सा अर्थात 2 .5 % ज़कात निकालना वाजिब हो जाता है I

• सोना -चाँदी पर ज़कात :-

ज़कात" आपकी पिछले साल की संपत्ती की मुल्य बढ़ोत्तरी का 2•5% या चालीसवाँ हिस्सा और यदि आभूषण निश्चित तय मात्रा अर्थात विश्व का पहला स्टैंडर्ड डिडक्शन अर्थात 52 तोला और 6 मासा चाँदी के मुल्य से अधिक हों तो उनके कुल मुल्य के 2•5% अर्थात चालीसवाँ हिस्सा ज़कात का मुल्य होता है।

नबी सल्ल्ललाहो अलैहे वसल्लम हज़रत मुहम्मद ने कहा: पाँच औकिया (52 तोला 6 मासा) से कम चाँदी के मुल्य के आभूषण और पाँच ऊंट से कम पर ज़कात नहीं है और पाँच अवाक (खाद्यान्नों का एक विशेष माप अर्थात 34 मन गल्ला) से कम पर ज़कात नहीं है। :- ( सही बुखारी , हदीस नंबर 1447)

यह दुनिया का पहला स्टैंडर्ड डिडक्शन है , और दुनिया भर की सारी टैक्स व्यवस्था ज़कात के इसी सिस्टम पर आधारित है।

• व्यापार के मुनाफे पर ज़कात :-

व्यापार के मुनाफे को 52 .5 साढ़े बावन तोला सोने पर ज़कात रखा गया है I ध्यान रहे की तिजारत के कुल धन पर ज़कात लागु होगा और कुल लाभ पर भी अलग से लागु होगा I अगर किसी व्यक्ति को हानि होती है उस स्थिति में उसके कुल व्यापार के माल में से हानि घटाकर शेष धन पर ज़कात वाजिब हो जाता है I

ज़कात में दिखावा नहीं होना चाहिए। ज़कात का दिखावा, 'दिखावे' की जकात बन जाएगा। दिखावा शैतानियत की निशानी है, इंसानियत की पहचान नहीं।

रोज़ा , स्वच्छता और इंसानियत का हमदम है रोज़ा, रोज़े की ताकत है ज़कात। हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़र्माया 'रोजा रखते हुए शख़्स को बुरी बात कहने से बचना चाहिए , यह भी ज़कात है।"

मुझे अपनी दुआओं में याद रखें

ज़कात ,सोच समझकर दीजिए , अपने करीबी लोगों को सबसे पहले दीजिए क्योंकि उनके हालात से आप बखूबी वाकिफ होते हैं। वह आपकी ज़कात के सबसे बड़े हकदार हैं।

सबका हक़ अदा करिए...यह भविष्य में आपके मुनाफे की गारंटी है।

प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाला ब्रह्मांड 93 अरब प्रकाश-वर्ष से भी अधिक चौड़ा है... फिर भी मनुष्य पृथ्वी से केवल 1.3 प्...
27/01/2026

प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाला ब्रह्मांड 93 अरब प्रकाश-वर्ष से भी अधिक चौड़ा है... फिर भी मनुष्य पृथ्वी से केवल 1.3 प्रकाश-सेकंड की दूरी तक ही यात्रा कर पाए हैं।

आइए इस वास्तविकता को स्वीकार कर लें कि हम मानव प्रजाति के रूप में कभी भी अंतर-आकाशगंगा यात्रा हासिल नहीं कर पाएंगे। इस यात्रा के नाम पर जनता के टैक्स का बेहिसाब पैसा ख़र्च पायेंगे।

हम इस विशाल ब्रह्मांड में रेत के एक कण से भी छोटे हैं!!!

"मेरा दीमाग़ सिर्फ एक रिसीवर है, कायनात में एक ऐसा सेंटर है जिससे हमें ज्ञान, शक्ति और प्रेरणा हासिल करते है।" - निकोला ट...
25/01/2026

"मेरा दीमाग़ सिर्फ एक रिसीवर है, कायनात में एक ऐसा सेंटर है जिससे हमें ज्ञान, शक्ति और प्रेरणा हासिल करते है।" - निकोला टेस्ला

मनोवैज्ञानिकों का मानना ​​है कि हम विचारों को 'सोचते' नहीं हैं, बल्कि उन्हें 'प्राप्त' करते हैं।

हमें ख़यालात हासिल होते हैं, और अगर आपमें क़ाबिलियत है, तो आप उन्हें बदल सकते हैं, आकार दे सकते हैं, मोड़ सकते हैं और उनसे रचना भी कर सकते हैं।

आप एक बर्तन, एक चैनल, एक ज़रिया हैं।

इसीलिए आपके कुछ बेहतरीन विचार तब आते हैं जब आप एकांत में खो जाते हैं, आप ख़यालात को हासिल करने के लिए खालीपन/जगह बनाते हैं।

अच्छे, नेक लोगों के साथ ज़्यादा रहने से, फरिश्तों के ज़रिये नेक और अच्छे ख़यालात ज़हेन में गर्दिश करते हैं और बुरे और ग़लत लोगों का साथ अपनाने से शैतान के ज़रिये, बुरे और गुनाहों के ख़यालात दिल ओ दिमाग़ में छाये रहते हैं।

आप उन्हें रोक भी सकते हैं या पूरी तरह से बदल भी सकते हैं।

कुतुबमीनार के सहन में मौजूद ये कब्र हिंदुस्तान की मंगोलों से हिफाजत करने वाले सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की है 4 जनवरी 1316...
04/01/2026

कुतुबमीनार के सहन में मौजूद ये कब्र हिंदुस्तान की मंगोलों से हिफाजत करने वाले सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की है 4 जनवरी 1316 ई. को दिल्ली में 50 साल की उम्र में खिलजी की वफात हो गयी थी। उनकी वफात के बाद उन्हें कुतुबमीनार के सहन में उनके तामीर किये हुए मदरसे में दफन किया गया था। सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी को हिंदुस्तान को मंगोल हमलावरों से बचाने अलावा उनकी इन्तेजामि इस्लाहात, मेहसुलात और सल्तनत मे कीमतों पर कंट्रोल समेत ढेरों काम के लिए याद किया जाता है।

जब सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने हुकूमत संभाली थी तब मंगलों ने दुनिया भर में अफरा-तफरी मचा रखी थी। ख़्वारज़्म से लेकर ईरान, इराक समेत बगदाद जैसे बड़े शहर को मंगोलो ने खाक में मिला दिया था। अब जब मंगोल हिंदुस्तान को रौंदते हुए मंगोलिया जाने की कोशिस कर रहे थे। तब अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी जहानत से उनकी कोशिशों को नाकाम बना दिया। और मंगोलों से हुयी एक झड़प के बाद 8000 मंगोलो के सर को कलम कर के दिल्ली में उस वक्त बन रहे सीरी फोर्ट के मीनारों में चुनवा दिया, और मंगोलो को तजाकिस्तान के रास्ते से होकर गुजरने के लिए मजबूर कर दिया।

इसके अलावा सुल्तान बनते ही अलाउद्दीन खिलजी ने सबसे पहले टैक्स सिस्टम को सुधारा उन्होंने सिस्टम से बिचौलियों को हटाकर सीधे आम आदमी से जोड़ा बिचौलियों के हटने किसानों और गरीबो को बहुत फायदा हुआ। इस टैक्स सिस्टम को शेर शाह सूरी से लेकर मुग़लों तक ने इस्तेमाल किया।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की किताब "The Cambridge Economic History of India" में इस बात का ज़िक़्र है, की ख़िलजी का टैक्स सिस्टम हिंदुस्तान का सबसे अच्छा टैक्स सिस्टम था जो अंग्रेजों के आने तक चला।

अलाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान बनते ही बड़ी तेजी से अपनी सल्तनत को फैलाया रणथम्भौर, चित्तौड़, मालवा, सिवान, जालोर, देवगिरी, वरंगल, जैसी सारी रियासतें सुल्तान के झोली में आ गिरीं। ख़िलजी ने अपनी जिंदगी की कोई भी जंग नहीं हारी लेकिन एक बीमारी से हार गया और कम उम्र (49-50 वर्ष) में ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

सुल्तान अलाउद्दीन ख़िलजी के गुज़र जाने के दसियों बरस बाद भी लोग उनके दौर को ये कह कर हसरत से याद करते रहे की मरहूम सुल्तान के वक़्त में रोटी की इतनी क़ीमत नहीं थी और ज़िन्दगी बसर करना इतना मुश्किल नहीं था।

सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के दौर में 11 ग्राम चांदी के एक सिक्के के एवज़ में 85 किलो गेंहू मिला करता था। खाने की चीज़ों के ऐसे कम दाम उनकी हुकूमत के ख़त्म होने तक क़ायम रहे। बारिश हो या ना हो, फ़सल अच्छी हो या ख़राब हो जाये, खाने की चीज़ों के दाम रत्ती भर भी नहीं बढ़ते थे।

आप चालीस पार कर चुके हैं तो ये नसीहतें आप के लिए हैं। 1. हर साल हिजामह कराए, चाहे आप को कोई बीमारी न हो।2. पानी खूब पीये...
28/12/2025

आप चालीस पार कर चुके हैं तो ये नसीहतें आप के लिए हैं।

1. हर साल हिजामह कराए, चाहे आप को कोई बीमारी न हो।

2. पानी खूब पीये, चाहे प्यास महसूस न हो।
सेहत के बड़े मसाइल जिस्म में पानी की किल्लत के कारण होते हैं।

3. चाहे आप बेहद मसरूफ हो फिर भी खेलो और एक्सरसाइज करो, जिस्म को हरकत देना ज़रूरी है, चाहे चले, दौड़े या तैराकी करे या कार साफ करे, xyz करें।

4. खाना लिमिट में खाओ, हद से ज़्यादा खाना सिर्फ बीमारियों और मोटापे को दावत देता है, इसलिए एक हिस्सा खाओ, एक हिस्सा पीयो और एक खाली रखो।

5. जितना मुम्किन हो गाड़ी का इस्तेमाल कम करे, गली मोहल्ले, मस्जिद और क़रीब के दोस्तों के यहां चलते हुए ही जाए।

6. गुस्से से परहेज़ करें और लालच छोड़ दें, चीजों को नजरअंदाज़ करना सीखें, अपने आप को परेशान कुन हालात में न डालें, ये सब सेहत और दिमाग पर बुरा प्रभाव डालते हैं और रूह की रौनकें छीन लेते हैं।

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