07/05/2026
डॉक्टर महमूद मुस्तफा लिखते है कि,
तुम कब्र में हजारों साल तक क्या करोगे?
मैं तुम्हें एक तरीका बताता हूँ जो मेरे साथ बहुत कारगर साबित हुआ और जिससे मैं अपने अल्लाह से रिश्ते पर ज्यादा ध्यान देने लगा हूँ।
कब्र डरावनी है, जाहिर है कि नेक लोगों के अलावा।
मैंने इसके बारे में सोचा, और अब मेरी उम्र 54 साल है, और मैं दुनिया से और उसकी चीजों से तंग आ चुका हूँ। अच्छा, तो जब मैं कब्र में जाकर अकेला रहूँगा, सैकड़ों-हजारों साल तक, तो मैं क्या करूँगा?
क्या तुमने कभी इसका तसव्वुर किया है?
इसलिए मैंने नीचे दिए गए तरीके पर अमल करना शुरू किया:
देखो, मैं मर जाऊँगा, और मेरे पास एक खाली, बिल्कुल अंधेरी कब्र होगी।
इस कब्र को सामान की जरूरत होगी, इसलिए मैं हर इस्तग़फार को ऐसे तसव्वुर करने लगा जैसे मैं उसे अपनी कब्र की तरफ भेज रहा हूँ ताकि वो वहाँ मेरा इंतजार करे और मेरी तन्हाई का साथी बने।
अल्लाह की कसम, मैं मजाक नहीं कर रहा।
मैंने अपनी कब्र को पूरी तरह सजाने का अमल शुरू कर दिया है।
कब्र के एक कोने को मैं हजारों तस्बीहात से भर रहा हूँ।
यहाँ मेरे सिर के करीब कम से कम 300 ख़त्म-ए-कुरान होंगे जो मेरे लिए आरामदायक बिस्तर का कारण बनेंगे।
हर रुकू को मैं यह सोचकर अदा करता हूँ कि मैं उसे कब्र में अपना ज़खीरा बना रहा हूँ।
हर कोई मुझे छोड़कर अपने घर चला जाएगा, और मैं अकेला रह जाऊँगा शायद हजारों सालों तक। मेरे बच्चे कुछ सालों में मुझे भूल चुके होंगे।
इसलिए मुझे कब्र में साथियों, रोशनी और जन्नत जैसे मंज़रों की जरूरत होगी।
मैं तस्बीहात, ज़िक्र, कुरान, नमाज़ और सदक़ा—सबको अपने साथ तसव्वुर करता हूँ कि वो मेरे दोस्त होंगे, मेरे साथ वहाँ हँस रहे होंगे और बातें कर रहे होंगे।
नबी करीम ﷺ पर दरूद पढ़ना मैंने अपने मामूलात का अहम हिस्सा बना लिया है। यह वहाँ हमारी महफिलों में भी शामिल होगा—ठंडे पानी की तरह, खूबसूरत कपड़ों की तरह।
मैं यह चाहता हूँ कि मेरी कब्र की जिंदगी इस दुनिया की जिंदगी से भी ज्यादा खूबसूरत हो, इंशाअल्लाह।
क्या यह बेहतर नहीं है कि मैं वहाँ जाकर ग़ीबत, चुगली, हसद और दूसरे दुनियावी गुनाहों के नतीजे में बदबूदार कपड़ों, दीमक लगे फर्नीचर और सख्त पत्थरीले बिस्तर के बजाय अपनी कब्र को बेहतरीन चीजों से सजा कर रखूँ?
मैंने दुनिया में अपना घर बनाने के लिए सारी जिंदगी कड़ी मेहनत की, लेकिन यह घर तो मेरे वारिसों का हो जाएगा। असल में तो मेरी सारी मेहनत अपने लिए है ही नहीं, सारे फायदे तो और लोग उठाएँगे। तो मैंने सोचा कि बस बहुत हो गया, मुझे अपना घर बनाना है जहाँ सिर्फ मैं ही रहूँगा और लंबा वक्त गुजारना है।
अगर मेरे सारे आमाल दुनिया की जरूरतों के लिए थे और अपनी कब्र के लिए कुछ भी नहीं था, तो फिर मेरी कब्र के घर के लिए सिवाय अज़ाब के फर्नीचर, हमेशा का अंधेरा और सख्त हिसाब के अलावा कुछ भी नहीं होगा। और मैं ऐसे घर में अकेला कैसे रहूँगा!
मेरी आपको भी नसीहत है कि आज से:
अपनी कब्र को अपना बैंक अकाउंट बनाओ। इसमें ज्यादा से ज्यादा जमा करो और लंबी अवधि वाली पॉलिसी लो।
अपनी इबादतों का खूब ख्याल रखो। अल्लाह की कसम, जब तुम कब्र में होगे, तो तुम मुझे वहाँ से भी शुक्रिया अदा करोगे।
अपनी कब्र के घर का इस दुनिया के घर से ज्यादा ख्याल रखो।
अभी तुम अपने घरवालों के बीच हो, पहन रहे हो, खा-पी रहे हो, आराम से सो रहे हो, और तुम्हारी सारी जरूरतें पूरी हो रही हैं, फिर भी तुम अपनी हालत से नाराज रहते हो, हर वक्त शिकायत करते रहते हो।
तो सोचो जब तुम जमीन के नीचे होगे और सैकड़ों-हजारों सालों तक होगे, तो वहाँ तुम्हारे साथ कौन होगा?
तुम्हारे पसंदीदा सियासतदान, खिलाड़ी, अदाकार, ताजिर—ये तो तुम्हें यहाँ भी नहीं जानते, और न ही इन्हें तुम्हारी इतनी फिक्र है। तुम ही इनके पीछे बेवकूफों की तरह अपना वक्त बर्बाद करते हो।
तुम्हारे वो बच्चे जिनकी शादियों पर तुम लाखों रुपये फिजूल खर्च कर देते हो—यकीन करो, यह खर्च तुम्हारे लिए बोझ बन चुका होगा, और बच्चे मुकर जाएँगे कि हमारे बाप और माँ ने खुद अपने लिए और हमारे लिए मुसीबत खड़ी की।
इसलिए आज से अपनी जान की फिक्र करो, अपना ख्याल खुद रखो।
ऐ अल्लाह, हमें हुस्न-ए-खातिमा अता फरमा।
आमीन आमीन आमीन
ऐ अल्लाह, हमारी आख़िरत को बेहतर बना दे और हमें कब्र के अज़ाब से बचा।
आमीन आमीन आमीन या अल्लाह
ऐ अल्लाह, हमें अपना ज़िक्र, शुक्र और हुस्न-ए-इबादत की तौफीक अता फरमा, ताकि तू हम पर अपनी रज़ा और जन्नतुल फिरदौस में नेमतें नाज़िल करे, जहाँ हम तेरे नबी मुहम्मद ﷺ की सोहबत में हों।
आमीन 🤲