04/12/2025
“रुपया हुआ स्लिम-फिट, डॉलर बना हेवीवेट चैंपियन!”
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आजकल पूरे देश में एक ही चर्चा है—रुपया पतला हो गया! कोई इसे आर्थिक चिंता मान रहा है, तो कोई इसे देश के उज्जवल भविष्य की निशानी बताने पर आमादा है। आखिर फिटनेस का ज़माना है साहब! जब देश का आम आदमी सुबह-सुबह पार्क में वॉक करके, जिम जाकर, और महंगे प्रोटीन खरीदकर खुद को स्लिम-फिट करने की कोशिश कर सकता है, तो हमारा रुपया यह काम अपने आप क्यों न करे?
वैसे देखा जाए तो रुपये ने बड़ा ही अनुशासन दिखाया है—न तेल, न मसाला, न फैट, न कैलोरी। सीधे-सीधे स्लिमिंग डाइट अपनाई और बस…एकदम दुबला-पतला! अब तो इसकी हालत ऐसी हो गई है कि बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान की तंग गलियों में भी बिना किसी रुकावट ऐसे निकल जाता है जैसे योग दिवस पर लोग पार्क में मैट लेकर फिसलते हैं।
इधर डॉलर देखिए—इतना मोटा हो गया है कि लगता है प्रोटीन शेक, जिम ट्रेनर और हाई-कैलोरी डाइट सब वहीं खा रहा है। पर इसका मोटापा भी एक वैज्ञानिक सच्चाई है—जब देश के युवा reels बनाकर कमाई करना चाहते हैं और इनकम डॉलर में आती है, तो भाई कुछ तो मोटा होना ही था! आखिर युवाओं की ‘मोटी कमाई’ का ख्याल भी तो रखना है न?
अब जरा सोचिए—रुपया पतला, डॉलर मोटा। यह ठीक वही कॉम्बिनेशन है जो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की शादी में दिखता है—एक फिट, पतला-दुबला पार्टनर और दूसरा जिम-फ्रीक, हैवीवेट। दोनों साथ में अच्छे लगते हैं, ठीक वैसी ही भारत की अर्थव्यवस्था में यह जोड़ी नई कहानी लिख रही है।
कहते हैं पेट कम होने से इंसान तेज दौड़ता है…तो रुपया भी अब 90 इंच नहीं, सीधे 90 सेंटीमीटर पर आ गया है। इतना फिट हो गया है कि दुनिया की आर्थिक गलियों में आराम से चक्कर लगाकर वापस लौट आए। और डॉलर? उसका मोटापा देखकर पता चलता है कि भाईसाहब अभी आराम से सोफे पर फैलकर बैठे रहेंगे।
तो अगली बार जब कोई कहे कि—
“रुपया गिर गया!”
तो आप मुस्कुराकर कहिए—
“गिरा नहीं भाई, फिट हुआ है…बस अपनी स्लिम-फिट यात्रा पर है!”
रुपया पतला, डॉलर मोटा—देश का नया फिटनेस ट्रेंड!