Poonam Tiwari Pandey

Poonam Tiwari Pandey जीवन का सार.....

30/08/2026

कभी कांटों का पौधा अगर
जीवन रूपी बगीचे में लग जाए
तो उसे छोटा समझने की
भूल मत करना
आपके देखते देखते कब
विकराल रूप ले लेगा
आपको पता भी न चलेगा
तो हर समय सावधान रहें…✍️पूनम

24/08/2026

ताक़त ऐसी होती हैं
आने के साथ साथ
गुरूर को भी साथ लाती हैं
बस खेल शुरू हो जाता है
नीच दिखावन का….😃😃🤫

21/08/2026

भर गया है मन ऐ मेरा
अब तो इस संसार से
स्वार्थ की चासनी में डूब
ज़्यादातर इंसान है
खूबी खुद की बोलता वह
खुद ब खुद इंसान वह
हर तरफ फैला रखा हैं
झूठ का साम्राज्य है
हर तरफ फैला हुआ है
अफ़रातफ़री इस संसार में
ना जानूँ कब अन्त होगा
स्वार्थी संसार का….✍️पूनम

13/08/2026

अपने बनकर

अपना बनकर मूर्ख बनाया,
अपना बनकर ठगा हमें।
हम भीगते रहे बारिश में,
वे सेंकते रहे धूप।

अपनेपन का ढोंग रचाकर,
न जाने कितनी बार छला।
हमने फ़र्ज़ समझकर,
हर रिश्ते का कर्ज़ चुकाया।

“वे करते रहे हिसाब हमारा,
हमने तो फर्ज निभाया ।
लाभ हानि रख परे
सिर्फ अपना कर्म किया
हारा दिया हमें उनकी चालाकियों ने
नहीं बना सकें अपना
अब समझ आया—
हर अपना, अपना नहीं होता …✍️.पूनम 13.08.26

13/08/2026

सहनशीलता हममें थी,
पर सीमाओं में कैद थे।
अपने विचार रखते थे,
सोच अपनों के सुख की थी।

आज ऊब-सी लगती है
हमको अपने आप से,
कई प्रश्नों के भँवर में
उलझा हुआ मन है।

तोड़ दिए हैं जब से
मन के सारे बंधन,
जीना हमने सीख लिया—
अब थोड़ा अपने लिए….पूनम 13.08.26

13/08/2026

विकल्प तो बहुत मिले जीवन में,
पर चुनी हमने धर्म की राह।
अपने सुख की कामना की होती,
तो कहानी कुछ और होती आज।

कुछ लोग आज भी वहीं खड़े हैं,
जहाँ कल खड़े थे—
ख़्वाबों की रोटियाँ सेंकते हुए,
ख़याली पुलाव पकाते हुए।

वक़्त आगे निकल गया,
मगर उनकी सोच वहीं ठहर गई
हाय! रे इंसान जीवन कर्म करने के लिए है

02/08/2026

अफ़रा-तफ़री बिक रही है बाज़ारों में,
शोर ने हर गली पर अपना झंडा गाड़ दिया है।
सुकून कहीं कोने में दम तोड़ रहा है,
और लोग कहते हैं—
“सब कुछ ठीक है।”
हर चेहरे पर मुस्कान का मुखौटा है,
हर ज़ुबान पर किसी और की शिकायत।
अपने गिरहबान में झाँकने की फुर्सत किसे है,
यहाँ हर शख़्स
दूसरों का हिसाब लिए बैठा है।
भीड़ बहुत है,
मगर आदमी अकेला है।
रिश्ते हैं,पर उनमें अपनापन नहीं।
सच हर रोज़ कटघरे में खड़ा मिलता है,
और झूठ
नए वस्त्र पहनकर सम्मानित हो जाता है।
यह कैसा समय है
जहाँ आईने से ज़्यादा
पत्थरों पर भरोसा है।
हर कोई न्यायाधीश बना बैठा है,
मगर अपने अपराधों पर
सन्नाटा पसरा है।
शोर से शहर आबाद दिखाई देता है,
पर भीतर एक गहरी वीरानी है।
लगता है अब इंसान नहीं,
मुखौटे ही एक-दूसरे से मिलते हैं।

02/08/2026

फुर्सत न मिली कभी
अपने से मिलने की
अपनों के नाम पें
ग़ैरों की ख़ुशामद कर रहे
आंख खुली तो पाया
कल भी तन्हा थे
आज तन्हा है
कैसे खुद गरजों से
रिश्ते निभा रहे थे…

02/08/2026

राम को चाहा था हमने,
राम को पा लिया हमने।
राम-राम कहते-कहते,
नयनों में जल क्यों भर आता है?
कोई तो राज़ है इसमें,
जो शब्दों से कह न पाएँ।
राममय है यह सारा जग,
जिधर उठें नज़र मेरी ,
राम ही है नज़र आते।
राम ही थे, राम ही हैं,
राम का है ऐ जग सारा।
हर श्वास में बस राम हैं ,
यही जीवन का सत्य हैं।
जब मन पूरी तरह रामरम होता,
तो आँखें भर आती हैं ,
भक्ति में डूब कर ऐ मन
गोते खा रहा होता…..✍️पूनम

31/07/2026

अजीब-सी बेचैनी है,
एक अनकहा-सा ठहराव है।
किसी चीज़ की कमी भी नहीं,
फिर भी भीतर कुछ खाली-सा है।
मन का एक कोना
लगातार कुछ चाहता है,
पर क्या चाहता है—
यह भी पता नहीं।
शायद यही जीवन है—
सब कुछ होते हुए भी
किसी अनदेखी तलाश में
चुपचाप चलते रहना….✍️पूनम

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