29/06/2025
24 घंटे का दिन सिर्फ भ्रम है? दिन की लंबाई हर दिन बदलती है! असलियत जानकर चौंक जाएंगे
जब हम 24 घंटे कहते हैं तो हमें लगता है कि दिन की लंबाई स्थिर और अटल है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर दिन की लंबाई वास्तव में थोड़ी-सी अलग होती है? पृथ्वी के घूर्णन की गति में लगातार हो रहे ये सूक्ष्म बदलाव कभी-कभी मिलीसेकंड (हज़ारवाँ हिस्सा) के स्तर पर वैज्ञानिकों के लिए रहस्यमयी संकेत हैं जो हमें पृथ्वी के अंदर और बाहर दोनों की गतिशीलता के बारे में बताते हैं।
क्या दिन की लंबाई वास्तव में बदलती है?
हाँ, वैज्ञानिकों ने यह प्रमाणित किया है कि पृथ्वी की घूर्णन गति पूरी तरह स्थिर नहीं है। हर दिन पृथ्वी अपनी धुरी पर एक पूरा चक्कर लगभग 86400 सेकंड में लगाती है। लेकिन इस आंकड़े में मिलीसेकंड के अंतर आ सकते हैं,कभी दिन थोड़ा लंबा होता है कभी थोड़ा छोटा। इन बदलावों को Length of Day (LOD) कहा जाता है।
इन बदलावों के पीछे कौन-से कारण होते हैं?
1. चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव
चंद्रमा पृथ्वी पर ज्वारीय बल डालता है,जिससे समुद्रों में ज्वार-भाटा आता है। लेकिन यह ज्वारीय घर्षण धीरे-धीरे पृथ्वी की घूर्णन गति को धीमा कर रहा है यानी दिन लंबा होता जा रहा है।
2. महासागरीय धाराएँ और ज्वारीय घर्षण
जब समुद्री जल में बड़ी धाराएँ बनती हैं (जैसे एल-नीनो या ला-नीना),तो पृथ्वी के घूर्णन में हल्का बदलाव आता है। इन परिवर्तनों से दिन की लंबाई मिलीसेकंड स्तर तक बढ़ या घट सकती है।
3. वायुमंडलीय दबाव और हवाएँ
पृथ्वी के वातावरण में चलने वाली तेज़ हवाएँ विशेष रूप से जेट स्ट्रीम्स भी पृथ्वी के कोणीय वेग को प्रभावित करती हैं। जब हवा ज़्यादा घूमती है तो पृथ्वी की खुद की गति थोड़ी धीमी हो जाती है।
4. आंतरिक कोर की गति
पृथ्वी का अंदरूनी कोर स्वतंत्र रूप से घूमता है। यदि यह कोर मेंटल की तुलना में तेज़ या धीमा होता है तो इससे पृथ्वी की बाहरी गति में हल्के बदलाव आ सकते हैं।
यह सब वैज्ञानिक कैसे मापते हैं?
इस तरह के सूक्ष्म परिवर्तन परमाणु घड़ियों की मदद से ट्रैक किए जाते हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक VLBI (Very Long Baseline Interferometry) नामक तकनीक का भी उपयोग करते हैं जो पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच सिग्नल की मदद से बहुत उच्च सटीकता से समय माप सकती है। इस अंतर को ठीक करने के लिए समय-समय पर Leap Second (अतिरिक्त सेकंड) जोड़ा जाता है ताकि यूनिवर्सल टाइम (UTC) और पृथ्वी की वास्तविक गति में संतुलन बना रहे।
पृथ्वी धीरे-धीरे धीमी हो रही है?
हाँ, वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार:
* हर 100 साल में पृथ्वी के दिन की लंबाई में लगभग 1.7 मिलीसेकंड की वृद्धि हो रही है।
* करोड़ों साल पहले जब डायनासोर जीवित थे,तब एक दिन 23 घंटे का हुआ करता था।
इसका प्रभाव किन क्षेत्रों पर पड़ता है?
* GPS और उपग्रह प्रणाली: समय की अत्यधिक सटीकता आवश्यक है,वरना लोकेशन में गड़बड़ी हो सकती है।
* जलवायु विज्ञान: वायुमंडलीय बदलावों के प्रभाव का अनुमान लगाया जा सकता है।
* भूकंप और ज्वालामुखी विज्ञान: आंतरिक कोर की गतिविधियों का संकेत मिलता है।
* अंतरिक्ष मिशन: समय गणना और कक्षीय गतियों में सटीकता अत्यंत आवश्यक।
निष्कर्ष
पृथ्वी एक गतिशील,जीवित ग्रह है उसकी गति स्थिर नहीं है बल्कि वह हर पल थोड़ा बदल रही है। ये परिवर्तन भले ही हमें महसूस न हों,लेकिन वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से यह पता चलता है कि समय,जैसा हम सोचते हैं,वह पूरी तरह से सटीक नहीं बल्कि प्रकृति के प्रभाव में लगातार ढलता रहता है। यह तथ्य न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से बल्कि हमारे समय की परिभाषा और खगोलीय समझ के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्या हम जिस "समय" में जीते हैं वह कभी स्थिर था? शायद नहीं। समय भी हमारी तरह ही बदलता है,बहता है और ग्रह की धड़कनों पर निर्भर करता है।