09/08/2026
लेकिन सवाल है—जोधपुर के घर नीले क्यों रंगे गए?
इसके पीछे एक से ज्यादा कारण बताए जाते हैं।
🔵 1. ब्राह्मण परिवारों से जुड़ी परंपरा
पुराने समय में नीला रंग कई ब्राह्मण घरों की पहचान माना जाता था। बाद में दूसरे समुदायों ने भी इस रंग का इस्तेमाल शुरू कर दिया और धीरे-धीरे पुराने जोधपुर की बड़ी संख्या में इमारतें नीली दिखाई देने लगीं।
🔵 2. गर्मी से बचाव
जोधपुर का मौसम बहुत गर्म और शुष्क है। पारंपरिक रूप से नीले/चूने के लेप वाली दीवारों को घरों को अपेक्षाकृत ठंडा रखने में मददगार माना जाता रहा है। हालांकि इसे “नीला रंग घर को निश्चित रूप से ठंडा करता है” जैसी पक्की वैज्ञानिक वजह के रूप में नहीं कहना चाहिए।
🔵 3. दीमक और कीड़ों से जुड़ी मान्यता
नीले रंग में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक चूने और तांबे के यौगिकों को लेकर यह मान्यता भी मिलती है कि इससे दीमक और कुछ कीड़ों से बचाव होता था। यह कारण भी स्थानीय परंपरा में ज्यादा मिलता है, न कि हर नीले घर के लिए प्रमाणित नियम के रूप में।
🔵 4. मेहरानगढ़ के नीचे बसा पुराना शहर
जोधपुर का पुराना शहर मेहरानगढ़ किले के चारों तरफ विकसित हुआ। इसलिए जब आप किले की ऊँचाई से नीचे देखते हैं, तो नीले घरों का विशाल समुद्र दिखाई देता है।
यही दृश्य जोधपुर को भारत के सबसे पहचानने योग्य ऐतिहासिक शहरों में शामिल करता है।
📍 कहाँ देखें असली ब्लू सिटी?
अगर आप जोधपुर में शूटिंग या घूमने जा रहे हैं, तो नवचोकिया (Navchokiya) और मेहरानगढ़ के आसपास की पुरानी गलियाँ नीले घरों के लिए खास तौर पर प्रसिद्ध हैं। पुराने शहर की संकरी गलियों में जाकर आपको नीले रंग की पारंपरिक हवेलियाँ और घर ज्यादा देखने को मिलेंगे।
और सबसे शानदार दृश्य—मेहरानगढ़ किले की ऊँचाई से पूरा पुराना शहर। 💙🏰