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01/05/2026

पहले जयपुर से रेलवे का कोई बड़ा अधिकारी आता था तो साफ सफाई चकाचक हो जाती थी, अब डीआरएम के आने का भी नहीं रहा कर्मचारियों में खौफ:..
निरीक्षण में बडे अधिकारी को नीचे का स्टाफ वही दिखाता है, जैसा वे चाहते हैं, इससे बडे अधिकारी के सामने उनकी कमजोरी या लापरवाही उजागर नहीं हो:..जयपुर से बुधवार सुबह डीआरएम रवि कुमार जैन निरीक्षण के सिलसिले में दौसा स्टेशन आए थे। पहले कोई अधिकारी जयपुर से चलकर दौसा आता था तो रेलवे स्टेशन के अंदर प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, स्टाफ क्वार्टर, पार्किंग एरिया आदि में सफाई कर्मचारी जुट जाते थे और अधिकारी के आने से पहले स्टेशन परिसर में चौतरफा चकाचक सफाई दिखाई देती थी। यह देखकर यात्री बोलते भी थे कि आज कोई बड़ा अधिकारी आ रहा है, इसलिए अधिकारी की डांट फटकार से बचने के लिए सफाई की जा रही है।
दूसरी ओर बुधवार को डीआरएम रवि कुमार जैन के निरीक्षण के दौरान साफ सफाई कहीं दिखाई नहीं दी। यह देख यात्रियों को यह कहते सुना गया कि अब तो कर्मचारियों में डीआरएम स्तर के बडे़ अधिकारी का भी खौफ नहीं रहा। यात्रियों का यह कहना सही भी था, क्योंकि सर्कुलेटिंग एरिया, स्टाफ क्वार्टर, पार्किंग एरिया में सफाई ही नही कराई गई। पहले अधिकारी आते थे तो बढ़िया साफ सफाई के साथ सफेद पाउडर से रास्ते की मार्किंग भी की जाती थी, इससे अधिकारी को यह पता चल सके कि किस तरफ क्या-क्या बना है। यात्रियों का यह भी कहना है कि आम दिन सफाई व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारी तथा स्टेशन सुपरिटेंडेंट (सुपरवाइजर) कहीं दिखाई ही नहीं देते हैं, जिससे प्लेटफार्म पर फैली गंदगी की भी शिकायत नही कर पाते है‌ं। एक अधिकारी का तो 1-2 महीने बाद ही रिटायरमेंट है, ऐसे में मातहत स्टाफ का कहना है कि वे तो टाइम पास कर रहे हैं। किसी कलेक्टर या एसपी का रिटायरमेंट में 6 माह या उससे कम का समय रहता है तो ऐसे अधिकारी को सेक्रेटेरिएट बुला लिया जाता है। इसी के मद्देनजर यात्रियों का कहना कि रिटायरमेंट को देखते जो स्टेशन सुपरिटेडेंट या कोई और कर्मचारी टाइम पास की मानसिकता रखता/ दिखाता है तो उसे पहले ही कम्पल्सरी रिटायरमेंट देकर घर भेज देना चाहिए। इससे यात्रियों को उनकी अनदेखी का खामियाजा तो भुगतना नहीं पड़े। यात्रियों के अनुसार स्टेशन परिसर में फैली गंदगी आदि पर डीआरएम को जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ एक्शन लेने की जरूरत है।

15 दिन से शहर गंदगी से सड़ रहा है, मौसमी बीमारी फैलने की आंशका से लोग चिंतित, कलेक्टर का भी अधिकारियों में खौफ नहीं:    ...
16/04/2026

15 दिन से शहर गंदगी से सड़ रहा है, मौसमी बीमारी फैलने की आंशका से लोग चिंतित, कलेक्टर का भी अधिकारियों में खौफ नहीं:
3 माह का बकाया वेतन और डेढ़ साल का पीएफ का भुगतना नही मिलने से सफाई कर्मी 1 अप्रैल से हड़ताल पर:
शहर 15 दिन से गंदगी से सड़ रहा है। चौतरफा फैली गंदगी और बदबू के कारण लोगों का घरों मे बैठना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं गंदगी के कारण तेजी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह बारिश होने और अब चटक धूप को देखते हुए मौसमी बीमारी फैलने की आंशका से लोग चिंतित हैं। सफाई कर्मियों की हड़ताल को दो सप्ताह से ज्यादा का समय बीत गया, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह बनकर बैठे हैं। खास बात यह है कि हर सप्ताह मंडे मीटिंग के तहत कलेक्टर की अध्यक्षता में आवश्यक सेवाओं के अधिकारियों की बैठक होती है, जिसमें नगर परिषद के अधिकारी भी शामिल होते हैं। ऐसे में 15 दिन से जारी हड़ताल को देखकर लगता है कि नगर परिषद के अधिकारियों में कलेक्टर का भी खौफ नहीं हैं। आम लोगों का कहना है कि नगर परिषद के अधिकारी जयपुर से अप डाउन करते हैं, जिससे उन्हें शहर की सफाई नहीं होने से बदबू, मक्खी-मच्छर और बीमारी फैलने की समस्या कैसे समझ आएगी।
बकाया भुगतान के लिए सीधे तौर पर अधिकारी भी दोषी हैं:
नगर परिषद के स्तर पर ठेकेदार को भुगतान किया जाता है, फिर ठेकेदार सफाई कर्मियों को भुगतान करता है। सफाई कर्मियों का कहना है कि बकाया भुगतान नहीं करने के पीछे ठेकेदार के साथ अधिकारी भी बराबर के दोषी हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों को बार-बार बोलने के बाद भी हमारा वेतन व पीएफ का भुगतान नहीं कराया गया, जबकि ठेकेदार को नगर परिषद के स्तर पर नियमित भुगतान किया गया। अधिकारी चाहते तो ठेकेदार का भुगतान रोककर सफाई कर्मियों का बकाया भुगतान के लिए पाबंद कर सकते थे। सफाई कर्मियों का यह भी आरोप है कि सफाई व्यवस्था को देखने वाले अधिकारियों को ठेकेदार के स्तर से हर माह अपना कमीशन मिल जाता है। 1 अप्रैल से नया टेंडर, इस बार टेंडर में सफाई कर्मियों की संख्या नहीं खोलने से मिलीभगत के खेल की आंशका:
इस बार 1 अप्रैल से शहर की सफाई व्यवस्था का टेंडर श्रीमाधोपुर (सीकर) की एक फर्म के नाम हुआ है। टेंडर में पहली बार सफाई कर्मियों की संख्या नही खोली गई। यानी ठेकेदार के स्तर पर कितने कर्मी लगाकर शहर की सफाई कराई जाएगी, यह नहीं लिखा है। इसमें अधिकारियों की साठगांठ की बू आती है। इससे ठेकेदार मनमानी पर उतारू हो सकता है, जिसका खामियाजा लेवर की कटौती से सफाई कर्मियों और सफाई में कमी से आम लोगों को भुगतना पडेगी। पार्षद जितेंद्र कुमार शर्मा का कहना है कि हड़ताल के चलते शहर गंदगी से सड़ रहा है, जबकि नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंद कर बैठे हैं। जल्द ही हालात नहीं सुधरे तो लोगों के सड़क पर उतरे पर नगर परिषद के अधिकारियों को जवाब देना भारी पड़ेगा।
न्यूनतम मजदूरी 783 की तुलना में आधे से भी कम भुगतान, सरकारी कर्मचारियों की एक माह ही सैलेरी लेट हो जाए तो वे बिलबिलाने लगते हैं:
1 अप्रैल 2026 से राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी की नई दर तय की गई हैं। इसमें अकुशल कार्मिकों जिसमें सफाई कर्मी भी आते हैं, उनकी न्यूनतम मजदूरी डेली की 783 रूपए (एक माह की 20358 ) तय की गई है, जबकि गरीबों के खून-पसीने की कमाई को आधे से ज्यादा जिम्मेदार ही डकार जाते हैं। दूसरी ओर सफाई कर्मियों का कहना की
सरकारी कर्मचारियों की एक माह की सैलरी भी लेट हो जाए तो वे बिलबिलाते हुए शासन और प्रशासन को हड़काने पर उतारू हो जाते हैं। हमें तो 3 माह हो गए, हमारी सुनने वाला कौन है। उनका कहना है कि जिम्मेदारों ने बकाया भुगतान नही कराया तों सड़क पर उतरकर प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

बैरिकेडिंग की न कार्य चलने का बोर्ड लगाया, बीच सड़क पर खोद कर छोड़ दिया 'मौत का कुआं': लालसोट रोड पर नागौरी पुलिया के पा...
12/04/2026

बैरिकेडिंग की न कार्य चलने का बोर्ड लगाया, बीच सड़क पर खोद कर छोड़ दिया 'मौत का कुआं':
लालसोट रोड पर नागौरी पुलिया के पास पीलूवाले बालाजी चौराहे पर बीच सड़क पर खड्ढा खोद कर छोड़ दिया, जो हादसे का बडा कारण बन सकता है। इसमें जिम्मेदारों की बड़ी लापलवाही यह है कि गड्ढे की बैरिकेडिंग भी नहीं की और न ही काम जारी है... का संकेतक बोर्ड लगाया। इससे लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। वहीं हादसा हुआ तो प्रशासन को जवाब देना भारी पडेगा। जहां गड्ढा खोदा है, वहां पानी की पाइप लाइन और केबल दोनों दिखाई दे रही है। ऐसे मे खड्ढा किस डिपार्टमेंट के अधिकारियों की स्वीकृति से खोदा गया, यह स्पष्ट नहीं है। जान-माल की सुरक्षा के मद्देनजर यह बडी लापरवाही है। लोगों का कहना है कि इसमें लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कलेक्टर को एक्शन लेने की जरूरत है, जिससे भविष्य में जिम्मेदार इस तरह की लापरवाही नही कर सकें। साथ ही खड्ढे की सेफ्टी के लिए फेंसिंग कराई जाए तथा जल्द से जल्द काम पूरा कर खड्ढे को भरा जाए।

नीलकंठ बाबा के दरबार में सीढ़ियों के रास्ते भक्तों का पहुंचना होगा आसान, रेलिंग लगाने का काम शुरू:  पांच महादेवों की नगर...
12/04/2026

नीलकंठ बाबा के दरबार में सीढ़ियों के रास्ते भक्तों का पहुंचना होगा आसान, रेलिंग लगाने का काम शुरू:
पांच महादेवों की नगरी दौसा में भक्तों को नीलकंठ बाबा के दरबार तक पहुंचना अब और आसान होगा। इसके लिए सीढ़ियों के रास्ते में रेलिंग लगाई जाएगी, जिसका काम शुरू हो चुका है। रेलिंग लगाने का काम हनुमान मंदिर के पास से शुरू किया गया है, जल्द ही पूरे रास्ते की सीढ़ियों पर रेलिंग लगाई जाएगी। रेलिंग लगने पर बाबा के भक्त मंदिर के रास्ते से आसानी से चढ़-उतर सकेंगे। नीलकंठ महादेव बाबा के दरबार तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों के साथ रैंप की भी सुविधा है। रैंप के रास्ते चढ़ने पर भक्तों को सीढ़ियों की तुलना में समय ज्यादा लगता है, जबकि सीढ़ियां वर्षों पुरानी और खडी होने (ऊंचाई में ज्यादा) से भक्तों को गिरने का खतरा रहता है तथा शरीर पर जोर अधिक लगाना पड़ता है। अब रेलिंग लगने से भक्तों का रैंप के साथ सीढ़ियों से चढ़ना भी आसान और सुरक्षित रहेगा। रेलिंग मंदिर कमेटी के स्तर पर लगाई जा रही हैं या नीलकंठ बाबा के ही किसी भक्त के द्वारा लगाई जा रही है, इस बारे में जानने के लिए भक्त उत्सुक हैं। विदित रहे कि पहाडी पर स्थित नीलकंठ बाबा के दरबार तक पहुंचने के लिए 365 सीढ़ियां हैं।

पार्ले-जी बिस्किट के उपभोक्ताओं के साथ सरेआम ठगी, कंपनी भी पैकेट पर घुमा फिरा कर रेट लिखकर कर रही है गुमराह : पार्ले-जी ...
04/04/2026

पार्ले-जी बिस्किट के उपभोक्ताओं के साथ सरेआम ठगी, कंपनी भी पैकेट पर घुमा फिरा कर रेट लिखकर कर रही है गुमराह : पार्ले-जी बिस्किट के उपभोक्ताओं के साथ ठगी की जा रही है। इसमें दुकानदारों के साथ कंपनी की सांठगाठ की बू भी आती है। सरकार ने पिछले साल ही जीएसटी घटा दी थी, लेकिन कंपनी ने पैकेट पर अलग अलग रेट लिख कर उपभोक्ताओं को गुमराह कर ठगा जा रहा है। इसमे खास बात यह भी है कि उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी का फायदा कंपनी और दुकानदार दोनों उठा रहे हैं।
पहला उदाहरण:
कंपनी ने पैकेट के ऊपर जहां मोटे अक्षरो में पार्ले-जी लिखा है, उसके नीचे 5 रूपए एमआरपी लिखी है। वहीं उसके बगल में राइट मे छोटे अक्षरों मे रिवाइज रेट 4.45 रूपए लिख दी गई । यानी जीएसटी के बाद एमआरपी कम हो ग ई तो फिर उपभोक्ताओं को गुमराह करने के लिए दो तरह की एमआरपी लिखने का कोई औचित्य नही है। हां, उपभोक्ता खरीदारी करते समय जल्दबाजी में होते हैं, जो दुकानदार द्वारा दिखाई गई एमआरपी को ही सही मानकर भुगतान कर देते हैं। इतना ही नहीं कंपनी की एक चालाकी और देखिए पिछले साल 29/11/2025 को पैकिंग किए पैकेट पर तो रिवाइज रेट 4.45 रपए लिख दी गई, लेकिन इस साल पिछले माह 10/3/2026 को पैकिंग किए पैकेट पर रिवाइज रेट नही लिखी गई। सीधे 5 रूपए एमआरपी लिखी है। दरअसल4.45 और 5 रूपए एमआरपी वाले दोनों ही पैकेट पर नेट वेट 45 ग्राम और 12.5 फीसदी एक्ट्रा लिखा है।
दूसरा उदाहरण:
कंपनी ने दूसरी पैकिंग भी निकाली है, जिसमें एमआरपी 3.60 रूपए लिखी है। इस पैकेट पर नेट वेट 38.5 ग्राम लिखा है। इसकी पैकिंग डेट 25/02/2026 है। एमआरपी 3.60 रूपए वाले पैकेट में बिस्किट की साइज छोटी कर दी गई, हालाकि क्वांटिटी 10 पीस की ही है। पैकिंग भी गुमराह करने वाली है, जो तीनों ही रेट के पैकिटों की एक समान है। रेट 4.45 और 3.60 रूपए करने के बाद भी जानकारी के अभाव में उपभोक्ताओं से 5 रूपए ही वसूले जा रहे हैं। जिम्मेदार
अधिकारियो को इस बारे देखने की जरूरत है, जिससे उपभोक्ताओं को ठगी से बचाया जा सके। मोटे तौर पर देखे तो 10 रूपए मे दुकानदार उपभोक्ताओं को 2 बिस्किट देते है, उस हिसाब से 4.45 की दर से 2 बिस्किट पर 1.10 और 3.60 की दर से 2 बिस्किट के 2.80 रूपए ज्यादा वसूले जा रहे हैं।
सरकार ने दी थी उपभोक्ताओं को राहत:
22 सितंबर 2025 से सरकार ने बिस्कुट, नमकीन और स्टेपल फूड्स पर जीएसटी दर को 12-18% से घटाकर 5% कर दिया है। इस कटौती के बाद, 5 रुपये वाला पार्ले-जी बिस्किट का पैकेट अब 4.45 रुपए में मिलना चाहिए।

02/04/2026

हनुमान जन्मोत्सव की आपको शुभकामनाएं:
सीताराम सीताराम सीताराम कहिये, जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिये...इसका अर्थ है कि प्रभु श्री राम आपको जिस भी हाल में रखें, चाहे सुख हो या दुख, आपको उसी में संतुष्ट और खुश रहना चाहिए। यह भजन जीवन में संतोष, धैर्य और ईश्वर पर भरोसा रखने की प्रेरणा देता है। हनुमान जन्मोत्सव पर दौसा शहर में हनुमान मंदिरों मे झांकी सजाई गई हैं और मंदिरों पर आकर्षक रोशनी की गई है। शहर में पीलू वाले बालाजी मंदिर, फलसे वाले बालाजी, डगलेवाले बालाजी मंदिर, किला सागर में पहाड पर स्थित बालाजी मंदिर, रेलवे स्टेशन के सामन हनुमान मंदिर, आगरा बाइपास स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर और सैंथल बाइपास एरिया मे मोड़ा वाले बालाजी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में राम भक्त हनुमान जी की विशेष झांकी व मंदिरों पर आकर्षक रोशनी की गई। भक्तों का सुबह से मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचना शुरू हो गया है। वहीं भजन मंडी हनुमानजी के भजनों का गुणगान कर रही है।

दौसा में 13 साल बाद फिर महिला को कलेक्टर लगाया, पूर्व में दो महिला कलेक्टर रह चुकी हैं, जिसमे सौम्या झा सबसे युवा 33 साल...
01/04/2026

दौसा में 13 साल बाद फिर महिला को कलेक्टर लगाया, पूर्व में दो महिला कलेक्टर रह चुकी हैं, जिसमे सौम्या झा सबसे युवा 33 साल कीं:
दौसा कलेक्टर की कमान 13 साल बाद फिर एक महिला को सौंपी गई है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी डाॅ. सौम्या झा को दौसा कलेक्टर लगाया गया है। भजन लाल सरकार ने मंगलवार देर रात आईएएस की तबादला सूची जारी की। मौजूदा कलेक्टर देवेंद्र कुमार को नागौर में कलेक्टर लगाया है, जिन्होंने दौसा में 08/01/2024 को कलेक्ट्री संभाली थी। सौम्या मूलत मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं, जिनका जन्म 8 जून 1993 को हुआ था। आईएएस सौम्या झा डाॅक्टर बनना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने एमबीबीएस की पढाई पूरी कर अपना सपना पूरा किया, लेकिन उनका मन चिकित्सा के पेशे में नहीं लगा और एमबीबीएम की पढ़ाई पूरी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की। इसमें वे सफल हुईं और 2017 बैंच में डाॅ. सौम्या झा को राजस्थान कैडर मिला। फिलहाल वे चिकित्सा (आईईसी) विभाग के निदेशक जयपुर में कार्यरत हैं। करीब 33 वर्षीय डाॅ. सौम्या झा को बतौर कलेक्टर दौसा दूसरा जिला मिला है। इससे पहले वे टोंक में कलेक्टर रह चुकी हैं। टोंक जिले में देवली-उनियारा में 13/11/2024 को उप चुनाव हुआ था, जहां निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने एक एसडीएम को थप्पड मार दिया था, तब कलेक्टर डाॅ सौम्या झा सुर्खियों मे रही थीं। दरअसल विधायक हरीश मीणा के सांसद चुने जाने के बाद देवली-उनियारा में उपचुनाव हुए थे, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा दूसरे नंबर पर रहा था। इसमे नरेश मीणा को 59 हजार 478 वोट मिले थे। वहीऔ कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे, जहां कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही थी। इससे पूर्व दौसा में ही दो महिला कलेक्टर में रोली सिंह 22/06/2005 से 11/05/2006 तक और प्रमिला सुराना 03/10/2012 से 10/06/2013 तक कलेक्टर रह चुकी हैं। तीनों महिला कलेक्टर में डाॅ. सौम्या सबसे युवा 33 साल की हैं, जबकि रोली सिंह को जब दौसा कलेक्टर लगाया था, तब वे 36 साल और प्रमिला सुराना 49 साल की थीं।-
डाॅ.सौम्या के पति अक्षय गोदारा भी आईएएस हैं, बूंदी से करौली कलेक्टर लगाया:
बिहार में जन्मीं और मध्य प्रदेश में पली-बढ़ी सौम्या झा ने मेडिकल की पढ़ाई के बाद यूपीएससी की तैयारी की और पहले ही प्रयास में वर्ष 2016 में ऑल इंडिया रैंक 58 हासिल कर आईएएस अफसर बनी। उनके पिता आईपीएस अफसर हैं और मां रेलवे में डॉक्टर हैं। एमबीबीएस की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली के मशहूर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से की थी। डाॅ. सौम्या झा के पति अक्षय गोदारा भी आईएएस हैं। मूलत जोधपुर निवासी अक्षय गोदारा और डाॅ. सौम्या झा 2017 के बैचमेट हैं। अभी अक्षय गोदारा बूंदी कलेक्टर थे, जिन्हें अब करौली कलेक्टर की कमान सौंपी है।

कोहरे और ठंड के मौसम से ज्यादा गर्मी में टेंशन दे रही है पूजा ट्रेन, यात्री परेशान, अधिकारी बेखबर:  जम्मू तवी से चलकर अज...
26/03/2026

कोहरे और ठंड के मौसम से ज्यादा गर्मी में टेंशन दे रही है पूजा ट्रेन, यात्री परेशान, अधिकारी बेखबर: जम्मू तवी से चलकर अजमेर को जाने वाली गाडी संख्या 12414 गलता धाम पूजा सुपर फास्ट ट्रेन इन दिनों 1 से डेढ़ घंटे तक विलंब से चल रही है। यात्रियों का कहना है कि कोहरे व ठंड के सीजन में पूजा ट्रेन लेट चले तो समझ में आता है, जबकि अब तो मौसम भी साफ है। यात्रियों की बात सही और परेशानी जायज है। यात्रियों की परेशान के मद्देनजर हमने यह देखा कि कहीं यह ट्रेन जम्मू तवी से ही तो लेट नही चल रही? इस पर रेलवे एप पर देखा तो पाया कि जम्मू तवी से शाम 6:15 बजे निर्धारित समय पर चलकर करनाल तक 452 किमी के सफर में राइट चल रही है, लेकिन करनाल से दिल्ली तक 123 किमी के बीच रोजाना 1 से डेढ़ घंटे तक लेट होती है। 25 मार्च ही बात करें तो जम्मू तवी से चलकर पूजा ट्रेन अपने निर्धारित समय सुबह 1:39 बजे से सिर्फ 3 मिनट विलंब से करनाल पहुंची थी, फिर दिल्ली की 123 किमी की दूरी को पार करने में 1 घंटा 23 मिनट लेट हो गई। यानी जम्मू तवी से करनाल के बीच 452 किमी के सफर में मात्र 3 मिनट लेट और फिर दिल्ली जंक्शन तक 123 किमी पहुंचने में डेढ़ घंटे तक की देरी। दिल्ली जंक्शन पहु़ंचने का निर्धारित समय सुबह 3:50 बजे का है, जो 5:13 बजे दिल्ली पहुंची। वहीं अलवर की बात करेंतो 732 किमी का सफर तय कर यह ट्रेन निर्धारित समय सुबह 7:02 से 1 घंटा 22 मिनट विलंब से 8:24 बजे पहुंची। यह एक दिन की बानगी है, रोजाना इसी तरह पूजा ट्रेन डेढ़ घंटे तक देरी से चल रही है। इससे यात्रियों को मौसम साफ होने के बावजूद पूजा ट्रेन से सफर करने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि ऐसा भी नहीं कि रात ही काम चल रहा हो, जिससे पूजा ट्रेन करनाल व दिल्ली के बीच लेट हो रही है। खास बात यह भी है कि करनाल पहुंचने के बाद निर्धारित 2 मिनट के स्टोपेज के बाद यह ट्रेन रवाना भी हो जाती है। यानी करनाल स्टेशन पर पूजा ट्रेन को ज्यादा खड़ा भी नहीं किया जाता है। गौरतलब यह है कि करनाल के बाद पूजा ट्रेन का अगला स्टोपेज दिल्ली जंक्शन ही है। इसके बावजूद 123 किमी की दूरी पार करने में डेढ़ घंटे तक विलंब से चलना समझ से परे है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन समय पर चले, इसके लिए कहां गड़बड़ हो रही है, उसे दिखाकर अधिकारियों को समाधान कराने की जरूरत है।

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