01/05/2026
पहले जयपुर से रेलवे का कोई बड़ा अधिकारी आता था तो साफ सफाई चकाचक हो जाती थी, अब डीआरएम के आने का भी नहीं रहा कर्मचारियों में खौफ:..
निरीक्षण में बडे अधिकारी को नीचे का स्टाफ वही दिखाता है, जैसा वे चाहते हैं, इससे बडे अधिकारी के सामने उनकी कमजोरी या लापरवाही उजागर नहीं हो:..जयपुर से बुधवार सुबह डीआरएम रवि कुमार जैन निरीक्षण के सिलसिले में दौसा स्टेशन आए थे। पहले कोई अधिकारी जयपुर से चलकर दौसा आता था तो रेलवे स्टेशन के अंदर प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया, स्टाफ क्वार्टर, पार्किंग एरिया आदि में सफाई कर्मचारी जुट जाते थे और अधिकारी के आने से पहले स्टेशन परिसर में चौतरफा चकाचक सफाई दिखाई देती थी। यह देखकर यात्री बोलते भी थे कि आज कोई बड़ा अधिकारी आ रहा है, इसलिए अधिकारी की डांट फटकार से बचने के लिए सफाई की जा रही है।
दूसरी ओर बुधवार को डीआरएम रवि कुमार जैन के निरीक्षण के दौरान साफ सफाई कहीं दिखाई नहीं दी। यह देख यात्रियों को यह कहते सुना गया कि अब तो कर्मचारियों में डीआरएम स्तर के बडे़ अधिकारी का भी खौफ नहीं रहा। यात्रियों का यह कहना सही भी था, क्योंकि सर्कुलेटिंग एरिया, स्टाफ क्वार्टर, पार्किंग एरिया में सफाई ही नही कराई गई। पहले अधिकारी आते थे तो बढ़िया साफ सफाई के साथ सफेद पाउडर से रास्ते की मार्किंग भी की जाती थी, इससे अधिकारी को यह पता चल सके कि किस तरफ क्या-क्या बना है। यात्रियों का यह भी कहना है कि आम दिन सफाई व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारी तथा स्टेशन सुपरिटेंडेंट (सुपरवाइजर) कहीं दिखाई ही नहीं देते हैं, जिससे प्लेटफार्म पर फैली गंदगी की भी शिकायत नही कर पाते हैं। एक अधिकारी का तो 1-2 महीने बाद ही रिटायरमेंट है, ऐसे में मातहत स्टाफ का कहना है कि वे तो टाइम पास कर रहे हैं। किसी कलेक्टर या एसपी का रिटायरमेंट में 6 माह या उससे कम का समय रहता है तो ऐसे अधिकारी को सेक्रेटेरिएट बुला लिया जाता है। इसी के मद्देनजर यात्रियों का कहना कि रिटायरमेंट को देखते जो स्टेशन सुपरिटेडेंट या कोई और कर्मचारी टाइम पास की मानसिकता रखता/ दिखाता है तो उसे पहले ही कम्पल्सरी रिटायरमेंट देकर घर भेज देना चाहिए। इससे यात्रियों को उनकी अनदेखी का खामियाजा तो भुगतना नहीं पड़े। यात्रियों के अनुसार स्टेशन परिसर में फैली गंदगी आदि पर डीआरएम को जिम्मेदार स्टाफ के खिलाफ एक्शन लेने की जरूरत है।