ShakirAlwar

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31/05/2026

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मुंब्रा के मात्र 6 वर्षीय नन्हे हाफ़िज़-ए-कुरआन अब्दुल्लाह बिन सादिक हमीद ने सिर्फ़ 11 महीनों की अल्प अवधि में पवित्र कु...
31/05/2026

मुंब्रा के मात्र 6 वर्षीय नन्हे हाफ़िज़-ए-कुरआन अब्दुल्लाह बिन सादिक हमीद ने सिर्फ़ 11 महीनों की अल्प अवधि में पवित्र कुरआन हिफ्ज़ करके एक प्रेरणादायक और प्रशंसनीय उपलब्धि हासिल की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्दुल्लाह जामिया इस्लामिया नूर बाग (कोसा, मुंब्रा) के छात्र हैं। इतनी कम उम्र में कुरआन हिफ्ज़ करने की यह सफलता उनकी असाधारण बुद्धिमत्ता, मेहनत, लगन और अल्लाह तआला के विशेष फ़ज़्ल व करम का प्रमाण मानी जा रही है।

शिक्षकों के अनुसार, अब्दुल्लाह शुरू से ही तेज़ याददाश्त और असाधारण क्षमता के धनी रहे हैं। उनके उस्ताद हाफ़िज़ अब्दुल ग़फ्फ़ार कुरैशी ने बताया कि समय के साथ उनकी सबक़ याद करने की गति और मज़बूती लगातार बढ़ती गई, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

इस सफलता में उनकी माता की मेहनत और त्याग भी महत्वपूर्ण रहा है, जिन्होंने अपने बेटे की शिक्षा और हिफ्ज़-ए-कुरआन पर विशेष ध्यान दिया तथा हर कदम पर उसका मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन किया।

सोशल मीडिया पर भी लोग इस नन्हे हाफ़िज़ की सफलता को माता-पिता की बेहतरीन परवरिश, दीनदार माहौल और कुरआन करीम से मोहब्बत का सुंदर परिणाम बता रहे हैं।

अल्लाह तआला नन्हे हाफ़िज़ अब्दुल्लाह को कुरआन पाक का सच्चा ख़ादिम बनाए, उनके इल्म, अमल और याददाश्त में और बरकत अता फ़रमाए तथा उन्हें दीन और दुनिया की कामयाबियों से मालामाल करे। आमीन। 🤲 #हाफिज_ए_कुरआन #माशाअल्लाह #कुरआन_करीम 📖✨🤲

🚨 लापता बच्ची के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना 🚨तेलंगाना के कुरनूल के पास एक बच्ची ट्रेन से गिर गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत ...
31/05/2026

🚨 लापता बच्ची के संबंध में महत्वपूर्ण सूचना 🚨

तेलंगाना के कुरनूल के पास एक बच्ची ट्रेन से गिर गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद करते हुए उसे अस्पताल पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार, बेहोश होने से पहले बच्ची ने बताया था कि वह बसी गांव, मेवात (हरियाणा) की रहने वाली है। इसके बाद वह बेहोश हो गई।

सभी मित्रों, विशेष रूप से मेवात और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से अनुरोध है कि इस संदेश को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि यह सूचना जल्द से जल्द बच्ची के परिवार तक पहुंच सके।

यदि किसी को इस बच्ची के बारे में कोई जानकारी हो या वह उसके परिवार को जानता हो, तो कृपया तुरंत संबंधित अस्पताल या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

ईश्वर से प्रार्थना है कि बच्ची जल्द स्वस्थ हो जाए और सुरक्षित अपने परिवार से मिल जाए।

📢 कृपया इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें।

अगर आप इस सामग्री को सोशल मीडिया पोस्ट या न्यूज़-स्टाइल कैप्शन के रूप में साझा करना चाहते हैं, तो इसे इस तरह अधिक साफ़ औ...
31/05/2026

अगर आप इस सामग्री को सोशल मीडिया पोस्ट या न्यूज़-स्टाइल कैप्शन के रूप में साझा करना चाहते हैं, तो इसे इस तरह अधिक साफ़ और संतुलित ढंग से लिखा जा सकता है:

📚 भारत के मशहूर शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर ने अपने एक व्याख्यान में कहा कि यदि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमान तरक्की, शिक्षा और एकता के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें हज़रत मुहम्मद ﷺ, हज़रत उमर फ़ारूक़ (रज़ि.) और हज़रत अली (रज़ि.) की ज़िंदगी, किरदार और नेतृत्व से सीख लेनी चाहिए।

ओझा के अनुसार शुरुआती इस्लामी दौर की सफलता की बुनियाद इल्म (शिक्षा), इंसाफ़, उच्च नैतिक मूल्यों और प्रभावी शासन व्यवस्था पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि इन महान हस्तियों का जीवन आज भी नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बन सकता है।

सोशल मीडिया पर उनके इस बयान को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोगों ने इसे शिक्षा, आत्म-विकास और इतिहास से सीख लेने का सकारात्मक संदेश बताया है।

8 घंटे पहले की स्टोरी खुद सब कुछ बयान कर रही हैजो इंसान हमारे नौजवानों को सट्टा खिलाने का काम कर रहा हो वो आज हमें बताएग...
31/05/2026

8 घंटे पहले की स्टोरी खुद सब कुछ बयान कर रही है
जो इंसान हमारे नौजवानों को सट्टा खिलाने का काम कर रहा हो वो आज हमें बताएगा कि मदरसों में क्या सही है और क्या गलत?

जिसे खुद सही और गलत की पहचान नहीं, वो दूसरों को नसीहत देने चला है।
एक तरफ बच्चों और नौजवानों को बर्बादी की राह दिखा रहा है दूसरी तरफ education के नाम पर चंदा मांग रहा है।

अब लोग खुद फैसला करें
ये इंसान बच्चों को तालीम देगा या सट्टा खेलना सिखाएगा?

मदरसों और उलेमा पर उंगली उठाने से पहले इंसान को अपना किरदार देखना चाहिए।
हद तब पार हो जाती है जब खुद गलत काम करने वाले लोग दीन और तालीम पर भाषण देने लगते हैं।

अब ऐसे लोगों का इलाज जरूरी है, ताकि हमारी नई नस्ल को गुमराह होने से बचाया जा सके।
❤️❤️

30/05/2026

Boycott 🚫
🚫

Become unity and educated ❤️☝️
30/05/2026

Become unity and educated ❤️☝️

जमरात पर कंकरी मारना कोई मज़ाक या मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह हज का एक पवित्र और अनिवार्य धार्मिक कर्म है।इसे हंसी-मज़ाक म...
30/05/2026

जमरात पर कंकरी मारना कोई मज़ाक या मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह हज का एक पवित्र और अनिवार्य धार्मिक कर्म है।
इसे हंसी-मज़ाक में पेश करना इस्लाम के धार्मिक प्रतीकों का अपमान करना और धर्म की गलत छवि दिखाना है।

सुन्नत तरीका यह है कि छोटी-छोटी कंकरीयाँ विनम्रता और गंभीरता के साथ “अल्लाहु अकबर” कहते हुए मारी जाएँ।

अगर आप भी इस्लाम के धार्मिक प्रतीकों के सम्मान को ज़रूरी मानते हैं, तो इस संदेश को ज़रूर शेयर करें। ❤️

अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी United States Commission on International Religious Freedom की एक सुनवाई को लेकर...
30/05/2026

अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी United States Commission on International Religious Freedom की एक सुनवाई को लेकर भारत में राजनीतिक और वैचारिक बहस तेज हो गई है। इस सुनवाई के दौरान भारत के तीन मुख्यमंत्रियों — Pushkar Singh Dhami, Yogi Adityanath और Himanta Biswa Sarma — का जिक्र किया गया।

सुनवाई में वामपंथी-लिबरल एक्टिविस्ट Rakib Ahmed Naik ने हिंदुत्व विचारधारा, राष्ट्रवादी संगठनों और भारत सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए इन नेताओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग की। इसके साथ ही Rashtriya Swayamsevak Sangh, Vishva Hindu Parishad और Bajrang Dal जैसे संगठनों का भी उल्लेख किया गया।

इस मुद्दे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। समर्थकों का कहना है कि जिन नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में धर्मांतरण, अवैध कब्जों, कट्टरपंथ और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया, वही अब विदेशी मंचों पर निशाने पर लाए जा रहे हैं।

सऊदी अरब की पवित्र धरती पर इस वर्ष हज के दौरान एक तस्वीर सामने आई जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया...
29/05/2026

सऊदी अरब की पवित्र धरती पर इस वर्ष हज के दौरान एक तस्वीर सामने आई जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया। तस्वीर में आईवरी कोस्ट के राष्ट्रपति अलासाने औआत्तारा जमीन पर लेटे हुए दिखाई दे रहे थे। देखते ही देखते यह तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो गई और लोगों के बीच चिंता की लहर फैल गई। हज केवल एक यात्रा नहीं है, बल्कि सब्र, इबादत और इंसानियत का सबसे बड़ा संदेश है। चाहे कोई आम इंसान हो या किसी देश का राष्ट्रपति, अल्लाह के घर में सब बराबर होते हैं। यही वजह है कि यह तस्वीर लोगों के दिलों को छू गई और पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई। 🕋🤲💚🌎💕

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