14/09/2026
आज कुरआन-ए-करीम के दर्स के बाद मैंने अपनी पुस्तक ''नुज़ूल-ए-ईसा इब्ने मरयम, ज़ुहूर-ए-मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह अल-महदी'' कई साथियों को दी और कहा कि इस विषय पर आप लोगों को भी काम करने की आवश्यकता है। मौजूद साथियों ने हमारी बात का समर्थन किया। इसी बीच एक सज्जन तशरीफ़ लाए और कहने लगे: मुझे दो-तीन किताबें दीजिए, हमारे यहाँ भी कुछ लोग शकीली बन गए हैं। (नऊज़ुबिल्लाह)
मैंने पूछा, आप कहाँ से हैं? उन्होंने कहा: बिहार शरीफ़ से।
हमारे बहुत से साथी, जिनका इस विषय पर अध्ययन और प्रत्यक्ष अनुभव नहीं है, वे समझते हैं कि इस फितने का दूर-दूर तक कोई अस्तित्व नहीं है। लेकिन जब हम उन्हें वहाँ के हालात के बारे में बताते हैं, तो फिर उन्हें वास्तविक स्थिति का एहसास होता है।
इसीलिए हमारी राय है कि समय रहते आम लोगों को इमाम महदी और हज़रत ईसा इब्ने मरयम के बारे में जानकारी दे दीजिए—वे कौन हैं? उनका नाम और नसब क्या है? इमाम महदी कहाँ पैदा होंगे? किस स्थान पर लोग उन्हें पहचानेंगे? हज़रत ईसा इब्ने मरयम कहाँ आसमान से दो फ़रिश्तों के बाज़ुओं पर हाथ रखकर उतरेंगे? दज्जाल कौन है?
ताकि झूठे दावेदार-ए-महदवियत और मसीहियत का पर्दाफाश हो सके और लोग स्पष्ट रूप से जान सकें कि शकील बिन हनीफ़ ख़ान अत्यंत झूठा व्यक्ति है।
हमारे सभी मसलकों के उलेमा-ए-किराम ने दलीलों की रोशनी में स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि शकील बिन हनीफ़ ख़ान और उसके अनुयायियों का इस्लाम और मुसलमानों से कोई संबंध नहीं है तथा ये सभी दायरा-ए-इस्लाम से बाहर हैं।
खालिद अनवर पुरनवी, अल-मज़ाहिरी
जनरल सेक्रेटरी, राब्ता मदरिस इस्लामिया अरबिया, बिहार
उस्ताद, जामिया मदनिया सबलपुर, पटना