14/02/2026
🌊 हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) का पूरा क़िस्सा
हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नेक नबी थे। उन्हें एक बस्ती की तरफ़ भेजा गया था, जिसे इतिहास में नैनवा (Nineveh) कहा जाता है। वहाँ के लोग अल्लाह को नहीं मानते थे और बुरे कामों में पड़े हुए थे।
हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें समझाया, तौहीद (एक अल्लाह की इबादत) का पैग़ाम दिया और बुराई छोड़ने को कहा। लेकिन लोग उनकी बात नहीं मानते थे। बार-बार समझाने के बाद भी जब लोगों ने इनकार किया, तो उन्होंने अल्लाह के अज़ाब (सज़ा) की चेतावनी दी।
🚢 बस्ती छोड़ने का फैसला
जब लोग नहीं माने तो हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) नाराज़ होकर बस्ती छोड़कर चले गए। वे एक जहाज़ पर सवार हो गए। समुद्र में पहुँचने के बाद अचानक तेज़ तूफ़ान आ गया। जहाज़ डूबने की हालत में था।
लोगों ने कहा कि जहाज़ को हल्का करना होगा, इसलिए क़ुरआ (चिट्ठी डालना) किया गया कि किसे समुद्र में फेंका जाए। तीन बार चिट्ठी हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) के नाम निकली। तब उन्होंने समझ लिया कि यह अल्लाह की तरफ़ से इशारा है।
🐋 मछली के पेट में
जैसे ही वे समुद्र में कूदे, अल्लाह के हुक्म से एक बड़ी मछली ने उन्हें निगल लिया। लेकिन यह सज़ा के लिए नहीं बल्कि सबक और रहमत के लिए था।
मछली के पेट के अंधेरे में —
समुद्र का अंधेरा,
रात का अंधेरा,
और मछली के पेट का अंधेरा —
तीन तरह के अंधेरे थे।
उस हालत में उन्होंने सच्चे दिल से तौबा की और यह दुआ पढ़ी:
"ला इलाहा इल्ला अंता सुभानका इन्नी कुंतु मिनज़-ज़ालिमीन"
(ऐ अल्लाह! तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तू पाक है। बेशक मैं ही ग़लती करने वालों में था।)
🌿 अल्लाह की रहमत
अल्लाह को उनकी तौबा पसंद आई। कुछ समय बाद अल्लाह ने मछली को हुक्म दिया और उसने हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) को किनारे पर उगल दिया। वे बहुत कमज़ोर हो चुके थे।
अल्लाह ने उनके लिए एक बेलदार पेड़ (कद्दू का पौधा) उगाया, जिससे उन्हें छाया और आराम मिला। धीरे-धीरे उनकी तबीयत ठीक हो गई।
🌟 फिर से दावत-ए-तौहीद
जब वे अपनी बस्ती लौटे, तो देखा कि उनकी कौम ने अज़ाब के डर से सच्चे दिल से तौबा कर ली थी। अल्लाह ने उनकी तौबा कबूल कर ली और उन्हें माफ़ कर दिया।