12/01/2023
हिंदुओं को ढूंढ-ढूंढ कर मरवाया | तैमूर लंग - कहानी ऐसे क्रूर साशा की
युवा भारत मीडिया
भारत के इतिहास का सबसे क्रूर लुटेरा तैमूर लंग की कहानी बड़ी ही विचित्र है. उसका पिता तुरगाई बरलस तुर्कों का नेता था, इसका बचपन एक चोर का रहा, वह भेड़े चुराया करता था.
तैमूरलंग जीवन की मुश्किलों से पार पाने में सफल रहा। पंद्रहवीं शताब्दी के सीरियाई इतिहासकार इब्ने अरबशाह के अनुसार तैमूर भेड़ चुराते हुए एक चरवाहे के तीर से घायल हुआ था। स्पेनिश राजदूत क्लेविजो के अनुसार वह सिस्तान के घुड़सवारों का सामना करते हुए उसका दाहिना पैर जख्मी हुआ था जिसके कारण वह जीवनभर लँगड़ाता रहा, बाद में उसका दाहिना हाथ भी जख्मी हो गया। वस्तुतः 1363 ई. में जब वह भाड़े के मजदूर के तौर पर खुरासान में पड़नेवाले खानों में काम कर रहा था, तो उसी समय उसके शरीर का दाहिना हिस्सा विकलांग हो गया था। उसका दाहिना पैर बाँयें पैर की अपेक्षा छोटा था। चलते समय उसे अपना दाहिना पाँव घसीटना पड़ता था। यही कारण है कि लोग उसे फारसी में तैमूर-ए-लंग (लंगड़ा तैमूर) कहने लगे थे। बाद में यही नाम बिगड़ते-बिगड़ते तैमूरलंग हो गया।
वह तुर्क था मगर स्वयं को चंगेज खां का अनुयायी मानकर उसकी राह पर चल पड़ा. तैमूर ने रूस से लेकर मध्य एशिया तक एक बड़े भूभाग पर अपना राज्य स्थापित कर लिया.
उसके भारत पर आक्रमण करने के कई कारण था. खिज्र खां आदि का आमंत्रण तथा सबसे प्रभावी कारण था, मुस्लिम शासकों द्वारा काफिर यानि हिन्दू जनता के साथ बरती जाने वाली सहानुभूति ने इन्हें भारत पर आक्रमण कर हिन्दुओं का कत्लेआम कर उनकी सम्पति को लूट कर ले जाना उसका लक्ष्य था.
‘तुजुके तैमुरी’ यह तैमूर की आत्मकथा थी, जिसमें वह कुरान की पहली आयत से इसकी शुरुआत करते हुए लिखता है ‘ऐ पैगम्बर काफिरों और विश्वास न लाने वालों से युद्ध करो और उन पर सख्ती बरतो।