Study In Leisure

Study In Leisure सभी का Study In Leisure चैनल में स्वागत है।

22/07/2025

Library Science History of 1933 - 01

Library Science 36 Librarian
13/07/2025

Library Science 36 Librarian

भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्रमिक विकास की यात्राभारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान (Library and Informat...
13/07/2025

भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्रमिक विकास की यात्रा
भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान (Library and Information Science - LIS) का विकास एक लंबी और बहुआयामी यात्रा रही है, जिसमें विभिन्न समितियों, संस्थानों, नियमों और आयोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस यात्रा को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:

1. प्रारंभिक चरण और प्राचीन विरासत
प्राचीन काल: भारत में ज्ञान के संरक्षण की परंपरा वैदिक काल से है। नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में विशाल पुस्तकालय थे, जैसे नालंदा का प्रसिद्ध 'धर्मगंज'। ये पुस्तकालय केवल संग्रह नहीं बल्कि शिक्षण और शोध के केंद्र थे। पांडुलिपियों का संरक्षण मठों, मंदिरों और शाही दरबारों में किया जाता था।

मध्यकालीन भारत: मुगल शासकों ने अपने व्यक्तिगत और शाही पुस्तकालयों का निर्माण किया, जिनमें फ़ारसी, अरबी और संस्कृत की दुर्लभ पांडुलिपियाँ संग्रहित थीं।

2. औपनिवेशिक प्रभाव और आधुनिक पुस्तकालयों की नींव
18वीं-19वीं शताब्दी: ब्रिटिश शासन के दौरान पश्चिमी पुस्तकालय अवधारणाओं का प्रवेश हुआ।

कलकत्ता पब्लिक लाइब्रेरी (1836): यह भारत की पहली प्रमुख सार्वजनिक पुस्तकालयों में से एक थी।

इंपीरियल लाइब्रेरी (1891): बाद में राष्ट्रीय पुस्तकालय (National Library of India) बनी। इसका उद्देश्य भारत के लिए एक विशाल संदर्भ पुस्तकालय बनाना था।

पुस्तकालय आंदोलन का उदय: 20वीं सदी की शुरुआत में पुस्तकालय आंदोलन ने जोर पकड़ा।

बड़ौदा राज्य (महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ III): इन्होंने डब्ल्यू. ए. बोर्डेन को बुलाकर 1910 में बड़ौदा में एक व्यापक सार्वजनिक पुस्तकालय प्रणाली की स्थापना की, जिसे भारत में सार्वजनिक पुस्तकालय आंदोलन का अग्रदूत माना जाता है।

पंजाब लाइब्रेरी एसोसिएशन (1916): भारत में स्थापित शुरुआती पुस्तकालय संघों में से एक।

मद्रास लाइब्रेरी एसोसिएशन (MALAY) (1928): डॉ. एस. आर. रंगनाथन द्वारा स्थापित, जिसने पुस्तकालय आंदोलन को वैज्ञानिक दिशा दी।

3. डॉ. एस. आर. रंगनाथन का युग और पुस्तकालय विज्ञान की नींव
डॉ. एस. आर. रंगनाथन (1892-1972): इन्हें भारतीय पुस्तकालय विज्ञान का जनक माना जाता है।

पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम (1931): "पुस्तकें उपयोग के लिए हैं", "प्रत्येक पाठक को उसकी पुस्तक", "प्रत्येक पुस्तक को उसका पाठक", "पाठक का समय बचाओ", "पुस्तकालय एक वर्धनशील संस्था है।" ये नियम आज भी पुस्तकालय सेवाओं का आधार हैं।

कोलन वर्गीकरण (Colon Classification - CC) (1933): भारतीय परिस्थितियों के लिए विकसित एक विश्लेषणात्मक-संश्लेषणात्मक वर्गीकरण प्रणाली।

लाइब्रेरी लेजिस्लेशन (पुस्तकालय विधान) पर जोर: उन्होंने सार्वजनिक पुस्तकालयों के सुचारु संचालन के लिए पुस्तकालय अधिनियमों की वकालत की।

भारतीय पुस्तकालय संघ (ILA) (1933): की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसके पहले सचिवों में से एक थे।

4. स्वतंत्रता के पश्चात् विकास और संस्थागत ढाँचा
सार्वजनिक पुस्तकालयों का विकास:

राष्ट्रीय पुस्तकालय अधिनियम का प्रयास: स्वतंत्रता के बाद, सरकार ने सार्वजनिक पुस्तकालयों के विकास पर ध्यान दिया। कई राज्यों में सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम पारित किए गए (जैसे मद्रास 1948, आंध्र प्रदेश 1960)।

भारत सरकार का सलाहकार बोर्ड (1957): पुस्तकालयों के विकास के लिए सिफारिशें करने हेतु गठित।

खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी, पटना (1891 में स्थापित, 1969 में राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित)।

विश्वविद्यालय और शैक्षणिक पुस्तकालय:

राधाकृष्णन आयोग (विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग) (1948-49): इसने विश्वविद्यालय पुस्तकालयों के महत्व पर जोर दिया और उनके लिए पर्याप्त धन और कर्मचारियों की सिफारिश की।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC): अकादमिक पुस्तकालयों के विकास, आधुनिकीकरण और मानकों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। UGC ने पुस्तकालयों के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया और दिशानिर्देश जारी किए।

कोठारी आयोग (शिक्षा आयोग) (1964-66): इसने भी विश्वविद्यालय और कॉलेज पुस्तकालयों के महत्व को रेखांकित किया और उनकी भूमिका को व्यापक बनाने की सिफारिश की।

प्रलेखन (Documentation) और सूचना केंद्र:

भारतीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रलेखन केंद्र (INSDOC) (1952): वैज्ञानिक और तकनीकी सूचना के संग्रह, प्रसंस्करण और प्रसार के लिए स्थापित। बाद में यह राष्ट्रीय विज्ञान संचार और सूचना संसाधन संस्थान (NISCAIR) का हिस्सा बना।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) आदि ने अपने विशिष्ट प्रलेखन केंद्र स्थापित किए।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) जैसे संगठनों ने भी अपनी सूचना सेवाएँ विकसित कीं।

5. सूचना प्रौद्योगिकी का आगमन और डिजिटलीकरण
1980 के दशक: भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रारंभिक चरण का आगमन।

पुस्तकालय स्वचालन की शुरुआत: कुछ बड़े पुस्तकालयों में कंप्यूटर का उपयोग शुरू हुआ।

DELNET (Developing Library Network) (1988): दिल्ली के पुस्तकालयों के बीच संसाधन साझाकरण के लिए शुरू हुआ, बाद में यह राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित हुआ।

1990 के दशक और 21वीं सदी: इंटरनेट और कंप्यूटर प्रौद्योगिकी का व्यापक प्रभाव।

INFLIBNET (Information and Library Network) (1991): UGC द्वारा स्थापित, इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में पुस्तकालयों के नेटवर्क और सूचना सेवाओं को बढ़ावा देना है। शोधगंगा (डिजिटल शोध प्रबंधों का भंडार) और ई-शोधसिंधु (ई-संसाधन कंसोर्टियम) इसके प्रमुख पहल हैं।

डिजिटल पुस्तकालयों का विकास: नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया (NDLI) जैसी परियोजनाएं शुरू हुईं।

पुस्तकालय प्रबंधन सॉफ्टवेयर: LIBSYS, SOUL, KOHA (ओपन सोर्स) जैसे सॉफ्टवेयर का व्यापक उपयोग।

सूचना साक्षरता (Information Literacy): डिजिटल युग में सूचना के प्रभावी उपयोग के लिए सूचना साक्षरता को बढ़ावा देना एक प्रमुख कार्य बन गया।

6. वर्तमान प्रवृत्तियाँ और भविष्य की दिशा
ओपन एक्सेस आंदोलन (Open Access Movement): शोध आउटपुट तक मुफ्त पहुंच को बढ़ावा देना।

बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग: पुस्तकालय सेवाओं को बेहतर बनाने, व्यक्तिगत पाठक सेवाएँ प्रदान करने और सूचना पुनर्प्राप्ति को अधिक कुशल बनाने के लिए इन तकनीकों का उपयोग।

क्लाउड कंप्यूटिंग और वेब 3.0: पुस्तकालय सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाना।

सूचना सुरक्षा और गोपनीयता: डिजिटल वातावरण में डेटा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चिंता।

लाइब्रेरी प्रोफेशनल्स की भूमिका का विस्तार: अब वे केवल पुस्तकों का प्रबंधन नहीं करते, बल्कि सूचना क्यूरेटर, डेटा विश्लेषक और ज्ञान प्रबंधक के रूप में भी कार्य करते हैं।

With Saraswati puja samiti yoga kharaicha – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
12/07/2025

With Saraswati puja samiti yoga kharaicha – I just got recognised as one of their top fans! 🎉

24/06/2025

Library Science|Library| Quiz| STET|BPSC|IN HINDI|

Send a message to learn more

Address

Ara

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Study In Leisure posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Study In Leisure:

Share