26/10/2025
भारत में करेंसी नोट छापने की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की है। आरबीआई एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी मूल्यवर्ग के नोट छापता है, क्योंकि इसे वित्त मंत्रालय द्वारा मुद्रित किया जाता है। एक रुपये के नोट को छोड़कर भारत के हर करेंसी नोट पर RBI गवर्नर की घोषणा होती है; “मैं धारक को फलां रुपये की राशि देने का वचन देता हूं”। इसका सीधा-सा अर्थ है; अगर किसी के पास 100 रुपये का नोट है, तो RBI की यह जिम्मेदारी है कि वह धारक को किसी भी कीमत पर 100 रुपये का सामान दे।
भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत की गई थी। इसका मुख्यालय मुंबई में है। भारतीय रिजर्व बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के आधार पर मुद्रा प्रबंधन की भूमिका दी गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 22; रिजर्व बैंक को देश के करेंसी नोट जारी करने का अधिकार देती है। 1935 से पहले करेंसी नोट छापने की जिम्मेदारी भारत सरकार के पास थी।
भारत का केन्द्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक है, जो एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी मूल्यवर्ग के नोट छापता है । उल्लेखनीय है कि एक रुपए के नोट पर भारत के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं , जबकि अन्य नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
आरबीआई द्वारा कितने करेंसी के नोट छापे जा सकते हैं?
न्यूनतम रिजर्व प्रणाली (एमआरएस) के आधार पर की जाती है। यह प्रणाली भारत में 1957 से लागू है। इस प्रणाली के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक को हर समय कम से कम 200 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाए रखनी होती है । इन 200 करोड़ में से 115 करोड़ रुपये सोने के रूप में तथा शेष 85 करोड़ विदेशी मुद्रा के रूप में होने चाहिए।
भारत में करेंसी नोट छापने की जिम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की है। आरबीआई एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी मूल्यवर्ग के नोट छापता है, क्योंकि इसे वित्त मंत्रालय द्वारा मुद्रित किया जाता है। एक रुपये के नोट को छोड़कर भारत के हर करेंसी नोट पर RBI गवर्नर की घोषणा होती है; “मैं धारक को फलां रुपये की राशि देने का वचन देता हूं”। इसका सीधा-सा अर्थ है; अगर किसी के पास 100 रुपये का नोट है, तो RBI की यह जिम्मेदारी है कि वह धारक को किसी भी कीमत पर 100 रुपये का सामान दे।
भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत की गई थी। इसका मुख्यालय मुंबई में है। भारतीय रिजर्व बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के आधार पर मुद्रा प्रबंधन की भूमिका दी गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 22; रिजर्व बैंक को देश के करेंसी नोट जारी करने का अधिकार देती है। 1935 से पहले करेंसी नोट छापने की जिम्मेदारी भारत सरकार के पास थी।
भारत का केन्द्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक है, जो एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी मूल्यवर्ग के नोट छापता है । उल्लेखनीय है कि एक रुपए के नोट पर भारत के वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं , जबकि अन्य नोटों पर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं।
आरबीआई द्वारा कितने करेंसी के नोट छापे जा सकते हैं?
न्यूनतम रिजर्व प्रणाली (एमआरएस) के आधार पर की जाती है। यह प्रणाली भारत में 1957 से लागू है। इस प्रणाली के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक को हर समय कम से कम 200 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाए रखनी होती है । इन 200 करोड़ में से 115 करोड़ रुपये सोने के रूप में तथा शेष 85 करोड़ विदेशी मुद्रा के रूप में होने चाहिए।
नोट पर क्यों लिखा होता है कि “मैं धारक को 100 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ.”
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इतनी संपत्ति रखने के बाद, आरबीआई अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के अनुसार किसी भी संख्या में करेंसी नोट छाप सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
“मैं धारक को रुपये की राशि का भुगतान करने का वचन देता हूं” इसका क्या अर्थ है?
मैं भुगतान करने का वचन देता हूं....यह वाक्य करेंसी नोट पर सिर्फ इसलिए मुद्रित किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आरबीआई ने मुद्रित करेंसी के मूल्य के बराबर सोना सुरक्षित रखा है। यह वचन पत्र नोट धारक को यह आश्वासन देता है कि आरबीआई किसी भी मामले/स्थिति (गृहयुद्ध, विश्व युद्ध या कोई प्राकृतिक आपदा, मंदी या अति मुद्रास्फीति आदि) में डिफॉल्टर नहीं हो सकता। यदि किसी के पास 100 रुपये का नोट है, तो उसे उसके विनिमय मूल्य के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि किसी भी स्थिति में आरबीआई उसे 100 रुपये के मूल्य के बराबर सोना/सामान देने के लिए उत्तरदायी है।