07/08/2026
*63 किलोमीटर की सड़क पर खर्च किए गए 4700 करोड़.....एक्सप्रेस-वे के नाम पर भाजपा सांसद के भाई ने तोड़े भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड*
👉 सड़क बनाने के नाम पर देश को लूटकर खोखला कैसे किया जाता है.... एक्सप्रेस वे का सपना दिखाकर गरीब जनता से वसूले टैक्स को कैसे डकारा जाता है........ये कोई संघियो-भाजपाइयों से सीखे। क्योंकि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे से घटिया और बेशर्म नमूना देश ने शायद ही कभी देखा हो।
👉 सिर्फ कुछ सप्ताह पहले जिस सड़क का उद्घाटन हुआ था, उस सड़क का हर मीटर पर गड्ढे में तब्दील हो जाना, जगह-जगह पर मौत का कुंआ बन जाना, ट्रक-बस तो छोड़िए मोटरसाइकिल के गुजरने के बाद भी सड़क का पके आम की तरह पिलपिला होकर धंस जाना बताता है कि ये कोई तकनीकी चूक नहीं है, बल्कि यह उस क्रूर और नग्न व्यवस्था का खुला कबूलनामा है, जहां सत्ता के पाले हुए दलाल देश की छाती खोदकर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
➡️ आपको जानकर अचरज होगा कि 63 किलोमीटर के इस तथाकथित 'अजूबे' पर सरकारी खजाने से पूरे सैंतालीस सौ करोड़ रुपए फूंक दिए गए....यानी सीधे शब्दों में कहें तो एक किलोमीटर सड़क पर पचहत्तर करोड़ रुपए की लूट को सरेआम अंजाम दिया गया। उत्तर प्रदेश के इतिहास में इससे महंगा एक्सप्रेस-वे नहीं बना, और शायद ही इससे बड़ा भ्रष्टाचार का कोई दूसरा स्मारक बना हो, जो उद्घाटन की शिलापट्ट सूखने से पहले ही हजारों जगहों पर धंसकर मोदी-भाजपा-गडकरी लूट की कहानी सुना रहा है।
👉🏿 अगर मीडिया में जरा सी भी शर्म बची हो तो बड़ी-बड़ी बातें करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हाइवे का ढिंढोरा पीटने वाले मंत्री नितिन गडकरी से पूछना चाहिए कि क्या पचहत्तर करोड़ प्रति किलोमीटर की इस अंधेरगर्दी में जनता को सिर्फ मौत के कुएं और जानलेवा गड्ढे ही मिलने की गारंटी है?
👉🏿 हर मंच से अमेरिका जैसी सड़कों का झांसा देकर जनता को गुमराह करने वाला नितिन गडकरी आखिर किस बिल में छिपा बैठा है ? कहीं उसको दुबई के शेखों के यहां सड़क बनाने के लिए डिपोर्ट तो नहीं कर दिया गया....
👉🏿 विकास के नाम पर जनता के पैसे की खुली लूट पर प्रधानमंत्री की खामोशी और मंत्रियों की बेशर्म लीपापोती इस बात की चीख-चीखकर गवाही दे रही है कि इस महा-भ्रष्टाचार की इस पूरी पटकथा में उनके अपने हाथ गहरे तक रंगे हुए हैं। 'सबका साथ, सबका विकास' का पाखंडी नारा असल में इन सत्ताधारियों के चहेते चोरों के लिए 'सबकी लूट' का लाइसेंस बन चुका है।
👉 एक जागरूक नागरिक होने के नाते आपको जानना चाहिए कि इस साढ़े चार हजार करोड़ से ज्यादा के ठेके की मलाई किसे चाटने को मिली है। यह महा-प्रोजेक्ट जिस 'PNC इंफ्राटेक' को सौंपा गया, उसका मालिक कोई ईमानदार ठेकेदार नहीं, बल्कि भाजपा के अपने राज्यसभा सांसद नवीन जैन का सगा भाई प्रदीप जैन है। वाह रे 'नैतिकता' और वाह रे 'नया भारत'!
👉🏿 क्या संघ और भाजपा के दफ्तरों में यही देश सेवा सिखाई जाती है कि सरकार से सांठगांठ करके अपने घर के, अपने भाइयों के और अपने रिश्तेदारों के खातों में जनता के टैक्स का पैसा उड़ेला जाए? जब ठेकेदार खुद सत्ताधारी पार्टी के भ्रष्टाचारी सांसद का सगा भाई हो, तो कौन सा सरकारी अफसर उस कंपनी पर सवाल उठाने की जुर्रत करेगा?
यह सिर्फ भाई-भतीजावाद का मामूली कीड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के संसाधनों पर डाका डालने का एक संगठित संघी सिंडिकेट है, जिसे सीधे दिल्ली और लखनऊ के सिंहासन से खुला संरक्षण प्राप्त है।
👉 देश का आम आदमी, जो महंगाई की चक्की में पिसते हुए आटे से लेकर नमक तक पर टैक्स चुका रहा है, वह क्या इसीलिए खून-पसीना बहाता है कि उसके द्वारा दिए गए पाई-पाई का टैक्स इन संघी लुटेरों के घरों की तिजोरियों में भरा जाए?
👉 मध्यम वर्ग और गरीब की गाढ़ी कमाई को नोंच-नोंचकर अपने चहेते उद्योगपतियों और सांसदों के भाइयों को अमीर बनाने का यह गंदा खेल अब अपनी सीमाओं को लांघ चुका है। देश की छाती पर लूट का यह नंगा नाच तब तक बंद नहीं होगा, जब तक इन संघियों-भाजपाइयों की खाल खींचकर जनता इनसे एक-एक पाई का हिसाब नहीं मांग लेती।
👉 कोई कह रहा था कि मोदी राज में देश को सिर्फ अडानी और अंबानी लूट रहे हैं.............तो उन्हें समझ जाना चाहिए कि मोदी के अमृतकाल में हर उस ठेकेदार को देश लूटने की छूट मिली है, जो भाजपा-संघ परिवार से जुड़ा है, जो नागपुरिया परंपरा का पहरेदार है, जो लूट का हिस्सा भाजपा को चंदे के रूप में देता है........या फिर रंगा-बिल्ला और भागवत का चापलूस है।
*देख लो संघियों-भाजपाइयों का असली राष्ट्रवाद......ये लोग ऐसे ही देश को दीमक की तरह चाटकर देश की सेवा करने का पाखंड करते हैं।*