Gaav WaaLee

Gaav WaaLee जो रास्ता छोटे शहर से बडे़ शहर को जाता है,
वहीं रास्ता बड़े शहर से छोटे शहर भी तो आ सकता है 🙏
अयोध्यावासी ❤️
(19)

23/10/2025

"तेरी सोच ही तेरी कमाई तय करती है।

₹10,000 वाली सोच = ₹10,000 की जिंदगी।
करोड़ों वाली सोच = करोड़ों की जिंदगी।"💯

23/10/2025

सरकारी स्कूलों के मास्टर सुबह-सुबह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में छोड़कर
फिर ख़ुद सरकारी स्कूलो मे ड्यूटी पर जाते हैं 🙏

प्लास्टिक पैक में जो युवा की लाश है वो  #आकाशदीप_गुप्ता है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल के प्लांट में टॉप टैलेंटेड साइंटिस्...
23/10/2025

प्लास्टिक पैक में जो युवा की लाश है वो #आकाशदीप_गुप्ता है।

लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल के प्लांट में टॉप टैलेंटेड साइंटिस्ट थे और 7 साल से मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम करते थे।

उम्र मात्र 30 साल थी। आज इनकी मौत हार्ट अटैक से हो गई।

कितना दर्दनाक है ये समझिए की देश अपना यंग एसेट खो रहा है।

6 महीने पहले इन साइंटिस्ट की शादी हुई थी ।
ये मृत्यु अप्राकृतिक लग रही है इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।

दिवाली के अगले दिन अधजले पटाखे बीन कर उन्हें अपने हाथों से नया रूप देकर अपने हिसाब से पटाखे बना कर नहीं जलाए तो फिर बचपन...
23/10/2025

दिवाली के अगले दिन अधजले पटाखे बीन कर उन्हें अपने हाथों से नया रूप देकर अपने हिसाब से पटाखे बना कर नहीं जलाए तो फिर बचपन वाली क्या दिवाली मनाई।
अधजले पटाखे बीन कर उनके बारूद एक कागज में भरकर पुड़िया बनाना और फिर उस पुड़िया को जलाना, जलते समय जो रंग बिरंगी चिंगारियां निकलती हैं वही हमारे मेहनत का असली फल होता है और उन चिंगारियों को देख कर जो खुशी मिलती है उसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है।
असली खुशियां ढेर सारे पैसे खर्च करके नहीं मिलती है बल्कि अपने हाथों से की गई इन छोटी छोटी मेहनत के फल को देखकर मिलती हैं और यही असली बचपन और बचपना होता है।
अरूणिमा

2018 में एक मादा मगरमच्छ ने बिना किसी नर के अंडे दिए... यानी एक चमत्कारी वर्जिन बर्थ!वैज्ञानिकों ने पुष्टि की,कि यह पार्...
23/10/2025

2018 में एक मादा मगरमच्छ ने बिना किसी नर के अंडे दिए... यानी एक चमत्कारी वर्जिन बर्थ!
वैज्ञानिकों ने पुष्टि की,कि यह पार्थेनोजेनेसिस था प्रकृति की वह रहस्यमयी शक्ति, जिसमें मादा अपने दम पर नई ज़िंदगी जन्म देती है।

अंडे में पाया गया भ्रूण 99.9% तक माँ जैसा था मानो प्रकृति ने खुद अपनी क्लोनिंग तकनीक फिर से सक्रिय कर दी हो।
यह खोज मगरमच्छों को उनके डायनासोर युग के पूर्वजों से जोड़ती है, साबित करती है कि उनके DNA में अब भी प्राचीन जीवन की प्रतिध्वनि गूंज रही है।

जब साथी न हों, तब भी जीवन अपना रास्ता ढूंढ लेता है क्योंकि कुदरत हारना नहीं जानती, वह हमेशा पुनर्जन्म लेती है।

सरकार बदलती रहती हैं पर व्यवस्थाएं नहीं बदलती । किराए में बढ़ोतरी हुई है  मगर सीट नहीं मिलती एक बिहारी सबकुछ झेलता है!12...
23/10/2025

सरकार बदलती रहती हैं पर व्यवस्थाएं नहीं बदलती । किराए में बढ़ोतरी हुई है मगर सीट नहीं मिलती एक बिहारी सबकुछ झेलता है!

12 घंटे तो कभी 24 घंटे खड़े होकर आना पड़ता है! ऐसा नहीं है कि किराया नहीं देते हैं, बस सीट नहीं मिलती कभी लटक कर तो कभी गेट पर अरे नहीं कई दफा बाथरूम वाली सीट पर बैठ कर बिहार आते हैं 😒

चुप चाप झेलते हैं! गाली सुनते हैं थप्पड़ खाते है चुप रहते हैं क्योंकि उम्मीद है साहब एक दिन सबकुछ बदलेगा...... छठ पूजा मनाने घर पहुंचना ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने के बराबर है!



infacts

गाँव में तालाब कब्जाने के 100 तरीके! 🌊तालाब सबके हैं — इसलिए सब कब्जाना चाहते हैं ।सबसे पहले कब्जा कौन करता है?👉 वही लोग...
23/10/2025

गाँव में तालाब कब्जाने के 100 तरीके! 🌊

तालाब सबके हैं — इसलिए सब कब्जाना चाहते हैं ।

सबसे पहले कब्जा कौन करता है?
👉 वही लोग, जिनका घर या खेत तालाब के किनारे होता है — मतलब जिन पर इसे बचाने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है।

कब्जे की शुरुआत कैसे होती है?
🐄 पहले तालाब के कोने में गोबर, राख, और बचा हुआ चारा डाल दिया जाता है।
📦 कुछ महीनों में वहाँ ज़मीन जैसी जगह बन जाती है।
🐃 फिर वहाँ भैंसें बाँध दी जाती हैं या ट्रॉली भर मिट्टी डाल दी जाती है।
🧱 धीरे-धीरे ईंट लगाकर दीवार उठाई जाती है, और देखते-देखते तालाब का एक हिस्सा "घर" बन जाता है।

⏳ कुछ सालों में पूरा तालाब ही गायब हो जाता है — और फिर गाँव में जलभराव शुरू हो जाता है।
विडंबना यह कि उसी वक्त जल भराव होने पर गाँव वाले ग्राम प्रधान को गालियाँ देते हैं, जबकि कब्जा करने वाले भी वही लोग होते हैं।

जब प्रशासन कार्रवाई करने की कोशिश करता है, तो
खुद ग्राम प्रधान नही करने देते क्योंकी कब्जाने वाले कुछ लोग उसके वोटर हैं ।
⚖️ कुछ अब कोर्ट में जाकर "गरीबी" का बहाना लगाते है, कोर्ट स्टे लगा देती है , अगले दस साल बस तारीख लगती है तब तक तालाब पूरा गायब हो जाता है ।

💰 और सबसे ज़्यादा फायदा होता है उस लेखपाल को, जिसे हर महीने "मिठाई" पहुँचने लगती है।

आज सैकड़ों गाँव ऐसे हैं जहाँ
🏠 तालाबों पर कब्जे या कचरे के ढेर ने उन्हें खत्म कर दिया है,
💦 और अब वही गाँव हर साल बाढ़ और जलभराव झेल रहे हैं।

अजब जोड़ी गजब कहानी 😍😍घटना किस देश की कोर्ट में हुई ये नहीं पता पर जो वाकया हुआ वो मजेदार था,हुआ यूं कि पति पत्नी आपस मे...
23/10/2025

अजब जोड़ी गजब कहानी 😍😍

घटना किस देश की कोर्ट में हुई ये नहीं पता पर जो वाकया हुआ वो मजेदार था,

हुआ यूं कि पति पत्नी आपस में तलाक़ लेना चाहते थे, जब डेट पर दोनों लोग जज के सामने पेश हुए और जज ने उनकी अर्जी देखी और और उन्हें देखा तो पहले मुस्कुराए फिर बोले अभी आप लोग थोड़ा और टाइम लीजिए जब सीरियस हों तब आइएगा,

जज ने ऐसा इस लिए बोला क्योंकि ये दोनों उस दिन मैचिंग का ड्रेस पहनकर पहुंचे थे, जज ने कहा जब आज के दिन भी ये लोग एक दूसरे के ड्रेस को मैच करके पहनकर आए है तो सोचिए ये कितना एक दूसरे का ख्याल कर रहे होंगे, हो सकता है किसी बात को लेकर आवेश में आकर ऐसा फैसला लिया हो, शांत होंगे हो सकता है सब ठीक हो जाएगा, इसलिए एक मौका और दे दिया सोचने के लिए 😜

डायबिटीज और हाइपरटेंशन है? यानी दातून करना भूल चुके हो... तो वापसी कीजिये, तुरंतसन 1990 से पहले कितने लोगों को डायबिटीज़ ...
23/10/2025

डायबिटीज और हाइपरटेंशन है? यानी दातून करना भूल चुके हो... तो वापसी कीजिये, तुरंत

सन 1990 से पहले कितने लोगों को डायबिटीज़ होता था? कितने लोग हाइपरटेंशन से त्रस्त थे? नब्बे के दशक के साथ हर घर में एक डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर का रोगी आ गया, क्यों? बहुत सारी वजहें होंगी, जिनमें हमारे खानपान में बदलाव को सबसे खास माना जा सकता है। बदलाव के उस दौर में एक चीज बहुत ख़ास थो जो खो गयी, पता है ना क्या है वो? दातून... गाँव देहात में आज भी लोग दातून इस्तमाल करते दिख जाएंगे लेकिन शहरों में दातून पिछड़ेपन का संकेत बन चुका है। गाँव देहात में डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के रोगी यदा कदा ही दिखेंगे या ना के बराबर ही होंगे। वजह साफ है, ज्यादातर लोग आज भी दातून करते हैं। तो भई, डायबिटीज़ और हाइ ब्लड प्रेशर के साथ दातून का क्या संबंध, यही सोच रहे हो ना?... तो आज आपका दिमाग हिल जाएगा... और फिर सोचिएगा, हमने क्या खोया, क्या पाया?

ये जो बाज़ार में टूथपेस्ट और माउथवॉश आ रहे हैं ना, 99.9% सूक्ष्मजीवों का नाश करने का दावा करने वाले, उन्हीं ने सारा बंटाधार कर दिया है। ये माउथवॉश और टूथपेस्ट बेहद स्ट्राँग एंटीमाइक्रोबियल होते हैं और हमारे मुंह के 99% से ज्यदा सूक्ष्मजीवों को वाकई मार गिराते हैं। इनकी मारक क्षमता इतनी जबर्दस्त होती है कि ये मुंह के उन बैक्टिरिया का भी खात्मा कर देते हैं, जो हमारी लार (सलाइवा) में होते हैं और ये वही बैक्टिरिया हैं जो हमारे शरीर के नाइट्रेट (NO3-) को नाइट्राइट (NO2-) और बाद में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) में बदलने में मदद करते हैं। जैसे ही हमारे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी होती है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ये मैं नहीं कह रहा, दुनियाभर की रिसर्च स्ट्डीज़ बताती हैं कि नाइट्रिक ऑक्साइड का कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल हायपरेटेंस (2004) में 'नाइट्रिक ऑक्साइड इन हाइपरटेंशन' टाइटल के साथ छपे एक रिव्यु आर्टिकल में सारी जानकारी विस्तार से छपी है। और, नाइट्रिक ऑक्साइड की यही कमी इंसुलिन रेसिस्टेंस के लिए भी जिम्मेदार है। समझ आया खेल? नाइट्रिक ऑक्साइड कैसे बढ़ेगा जब इसे बनाने वाले बैक्टिरिया का ही काम तमाम कर दिया जा रहा है? ब्रिटिश डेंटल जर्नल में 2018 में तो बाकायदा एक स्टडी छपी थी जिसका टाइटल ही ’माउथवॉश यूज़ और रिस्क ऑफ डायबिटीज़’ था। इस स्टडी में बाकायदा तीन साल तक उन लोगों पर अध्धयन किया गया जो दिन में कम से कम 2 बार माउथवॉश का इस्तमाल करते थे और पाया गया कि 50% से ज्यादा लोगों को प्री-डायबिटिक या डायबिटीज़ की कंडिशन का सामना करना पड़ा।

अब बताओ करना क्या है? कितना माउथवॉश यूज़ करेंगे? कितने टूथपेस्ट लाएंगे सूक्ष्मजीवों को मार गिराने वाले? दांतों की फिक्र करने के चक्कर में आपके पूरे शरीर की बैंड बज रही है सरकार... गाँव देहातों में तो दातून का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है, और ये दातून मुंह की दुर्गंध भी दूर कर देते हैं और सारे बैक्टिरिया का खात्मा भी नहीं करते। मेरे पातालकोट में तो आदिवासी टूथपेस्ट, टूथब्रश क्या होते हैं, जानते तक नहीं। अब आप सोचेंगे कि मैंने टूथपेस्ट और माउथवॉश को लेकर इतनी पंचायत कर ली तो दातून के प्रभाव को लेकर किसी क्लिनिकल स्टडी की बात क्यों नही की? तो भई, अब दातून से जुड़ी स्टडी की भी बात हो जाए। बबूल और नीम की दातून को लेकर एक क्लिनिकल स्टडी जर्नल ऑफ क्लिनिकल डायग्नोसिस एंड रिसर्च में छपी और बताया गया कि स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में ये दोनों जबर्दस्त तरीके से कारगर हैं। ये वही बैक्टिरिया है जो दांतों को सड़ाता है और कैविटी का कारण भी बनता है। वो सूक्ष्मजीव जो नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं जैसे एक्टिनोमायसिटीज़, निसेरिया, शालिया, वीलोनेला आदि दातून के शिकार नहीं होते क्योंकि इनमें वो हार्ड केमिकल कंपाउंड नहीं होते जो माउथवॉश और टूथपेस्ट में डाले जाते हैं। फटाफट इस जानकारी को शेयर करें, गंगा नहा लें।

चलते चलते एक बात और बता दूं, आदिवासी दांतों पर दातून घुमाने के बाद एकाध बार थूकते है, बाद में दांतों पर दातून की घिसाई तो करते हैं और लार को निगलते जाते हैं? लिंक समझ आया? लार में ही तो असल खेल है। ये हिंदुस्तान का ठेठ देसी ज्ञान है बाबू।

ज्यादा पंचायत नहीं करुंगा, मुद्दे की बात ये है कि वापसी करो, थोड़ा भटको और चले आओ दातून की तरफ... कसम से।

बासी पानी जे पिये, ते नित हर्रा खाय।
मोटी दतुअन जे करे, ते घर बैद्य न जाय।।

बचपन का वो दिन याद है की नहीं.....बचपन की बर्फ वाली आइसक्रीम जब मिलती थी,तब ना ब्रांड था, ना रैपर, पर स्वाद आज तक याद है...
23/10/2025

बचपन का वो दिन याद है की नहीं.....
बचपन की बर्फ वाली आइसक्रीम जब मिलती थी,
तब ना ब्रांड था, ना रैपर, पर स्वाद आज तक याद है। 🍧❤️

🇮🇳 "Rasbhari — छोटा फल, बड़ा चमत्कार!" Rasbhari, जिसे हिंदी में चिरपोटी, बंभुतका, मकोय और अंग्रेज़ी में Cape Gooseberry ...
23/10/2025

🇮🇳 "Rasbhari — छोटा फल, बड़ा चमत्कार!"

Rasbhari, जिसे हिंदी में चिरपोटी, बंभुतका, मकोय और अंग्रेज़ी में Cape Gooseberry कहा जाता है, आयुर्वेद में एक अद्भुत औषधीय फल माना जाता है। यह न सिर्फ स्वाद में मीठा-खट्टा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुप्रभावी है।

💊 आयुर्वेदिक लाभ और उपयोग:

1. पाचन शक्ति बढ़ाए – Rasbhari का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है।

2. लिवर और किडनी की रक्षा – इसमें मौजूद सक्रिय तत्व लिवर की सफाई करते हैं और किडनी को स्वस्थ रखते हैं।

3. रक्त शुद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता – Rasbhari शरीर के टॉक्सिन्स निकालती है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है।

4. सर्दी-जुकाम में लाभकारी – इसका नियमित सेवन गले की खराश, खांसी और जुकाम में राहत देता है।

5. त्वचा और आंखों के लिए वरदान – इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो त्वचा को चमकदार और आंखों को स्वस्थ रखते हैं।

6. हृदय स्वास्थ्य में सहायक – Rasbhari का सेवन हृदय को मजबूत करता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है।

🩺 आयुर्वेदिक उपचार में Rasbhari का इस्तेमाल:

कब्ज़ या पाचन दोष: 10-15 ताजे Rasbhari (चिरपोटी/बंभुतका/मकोय) फल खाने से पाचन सुधरता है।

लिवर समस्याएँ: Rasbhari का जूस रोज़ सुबह खाली पेट लेने से लिवर की सफाई होती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए: Rasbhari के साथ शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है।

त्वचा की देखभाल: Rasbhari का पेस्ट चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे कम होते हैं और त्वचा में निखार आता है।

⚠️ सावधानियाँ:

1. अत्यधिक सेवन से बचें – Rasbhari अधिक मात्रा में खाने से पेट में गैस, दस्त या अल्सर जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

2. अलर्जी वाले लोग सतर्क रहें – कुछ लोगों को Rasbhari खाने से त्वचा में रैशेज़ या खुजली हो सकती है।

3. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ – बिना आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह के इसका सेवन न करें।

4. मधुमेह रोगियों के लिए – इसमें प्राकृतिक शुगर होती है, इसलिए ब्लड शुगर मॉनिटर करें।

💡 रोचक तथ्य:

Rasbhari के बीज और पत्ते भी आयुर्वेद में औषधीय उपयोग के लिए प्रसिद्ध हैं।

छोटे आकार का यह फल बड़े स्वास्थ्य चमत्कार कर सकता है।

इसे अलग-अलग क्षेत्रों में चिरपोटी, बंभुतका, मकोय नामों से भी जाना जाता है।



रिसोर्ट मे विवाह... नई सामाजिक बीमारी,कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियाँ होने की परंपरा चली परंतु वह दौर ...
23/10/2025

रिसोर्ट मे विवाह...
नई सामाजिक बीमारी,
कुछ समय पहले तक शहर के अंदर मैरिज हॉल मैं शादियाँ होने की परंपरा चली परंतु वह दौर भी अब समाप्ति की ओर है!
अब शहर से दूर महंगे रिसोर्ट में शादियाँ होने लगी हैं!
शादी के 2 दिन पूर्व से ही ये रिसोर्ट बुक करा लिया जाते हैं और शादी वाला परिवार वहां शिफ्ट हो जाता है।
आगंतुक और मेहमान सीधे वहीं आते हैं और वहीं से विदा हो जाते हैं।
जिसके पास चार पहिया वाहन है वही जा पाएगा,
दोपहिया वाहन वाले नहीं जा पाएंगे।
बुलाने वाला भी यही स्टेटस चाहता है।
और वह निमंत्रण भी उसी श्रेणी के अनुसार देता है।
दो तीन तरह की श्रेणियां आजकल रखी जाने लगी हैं,
किसको सिर्फ लेडीज संगीत में बुलाना है !
किसको सिर्फ रिसेप्शन में बुलाना है !
किसको कॉकटेल पार्टी में बुलाना है !
और किस वीआईपी परिवार को इन सभी कार्यक्रमों में बुलाना है!!
इस आमंत्रण में अपनापन की भावना खत्म हो चुकी है!
सिर्फ मतलब के व्यक्तियों को या परिवारों को आमंत्रित किया जाता है!!

महिला संगीत में पूरे परिवार को नाच गाना सिखाने के लिए महंगे कोरियोग्राफर 10-15 दिन ट्रेनिंग देते हैं!

मेहंदी लगाने के लिए आर्टिस्ट बुलाए जाने लगे हैं
मेहंदी में सभी को हरी ड्रेस पहनना अनिवार्य है जो नहीं पहनता है उसे हीन भावना से देखा जाता है लोअर केटेगरी का मानते हैं

फिर हल्दी की रस्म आती है
इसमें भी सभी को पीला कुर्ता पाजामा पहनना अति आवश्यक है इसमें भी वही समस्या है जो नहीं पहनता है उसकी इज्जत कम होती है ।
इसके बाद वर निकासी होती है
इसमें अक्सर देखा जाता है जो पंडित को दक्षिणा देने में 1 घंटे डिस्कशन करते हैं
वह बारात प्रोसेशन में 5 से 10 हजार नाच गाने पर उड़ा देते हैं ।
इसके बाद रिसेप्शन स्टार्ट होता है
स्टेज पर वरमाला होती है पहले लड़की और लड़के वाले मिलकर हंसी मजाक करके वरमाला करवाते थे,,,,,, आजकल स्टेज पर धुंए की धूनी छोड़ देते हैं
दूल्हा दुल्हन को अकेले छोड़ दिया जाता है
बाकी सब को दूर भगा दिया जाता है
और फिल्मी स्टाइल में स्लो मोशन में वह एक दूसरे को वरमाला पहनाते हैं
साथ ही नकली आतिशबाजी भी होती है ।

स्टेज के पास एक स्क्रीन लगा रहता है
उसमें प्रीवेडिंग सूट की वीडियो चलती रहती है
जिसमें यह बताया जाता है की शादी से पहले ही लड़की लड़के से मिल चुकी है और कितने अंग प्रदर्शन वाले कपड़े पहन कर
कहीं चट्टान पर
कहीं बगीचे में
कहीं कुएं पर
कहीं बावड़ी में
कहीं श्मशान में कहीं नकली फूलों के बीच अपने परिवार की इज्जत को नीलाम कर के आ गई है ।

प्रत्येक परिवार अलग-अलग कमरे में ठहरते हैं
जिसके कारण दूरदराज से आए बरसों बाद रिश्तेदारों से मिलने की उत्सुकता कहीं खत्म सी हो गई है!!
क्योंकि सब अमीर हो गए हैं पैसे वाले हो गए हैं!
मेल मिलाप और आपसी स्नेह खत्म हो चुका है!
रस्म अदायगी पर मोबाइलों से बुलाये जाने पर कमरों से बाहर निकलते हैं !
सब अपने को एक दूसरे से रईस समझते हैं!
और यही अमीरीयत का दंभ उनके व्यवहार से भी झलकता है !
कहने को तो रिश्तेदार की शादी में आए हुए होते हैं
परंतु अहंकार उनको यहां भी नहीं छोड़ता !
वे अपना अधिकांश समय करीबियों से मिलने के बजाय अपने अपने कमरो में ही गुजार देते हैं!!

हमारी संस्कृति को दूषित करने का बीड़ा ऐसे ही अति संपन्न वर्ग ने अपने कंधों पर उठाए रखा है

मेरा अपने मध्यमवर्गीय समाज बंधुओं से अनुरोध है
आपका पैसा है ,आपने कमाया है,
आपके घर खुशी का अवसर है खुशियां मनाएं,
पर किसी दूसरे की देखा देखी नहीं!

कर्ज लेकर अपने और परिवार के मान सम्मान को खत्म मत करिएगा!

जितनी आप में क्षमता है उसी के अनुसार खर्चा करिएगा
4 - 5 घंटे के रिसेप्शन में लोगों की जीवन भर की पूंजी लग जाती है !

दिखावे की इस सामाजिक बीमारी को अभिजात्य वर्ग तक ही सीमित रहने दीजिए!

अपना दांपत्य जीवन सर उठा के, स्वाभिमान के साथ शुरू करिए और खुद को अपने परिवार और अपने समाज के लिए सार्थक बनाइए !

धन्यवाद 🙏.

Address

Ayodhya
Ayodhya
224161

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gaav WaaLee posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Gaav WaaLee:

Share