22/12/2025
*जन्मभूमि मुक्ति संघर्ष के अडिग प्रहरी रहे डॉ. रामविलास दास वेदांती*
*कारसेवकपुरम में नम आंखों से दी गई श्रद्धांजलि*
अयोध्या
श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के साक्षात सिपाही और विश्व हिंदू परिषद के मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख संतों में शामिल डॉ. रामविलास दास वेदांती के निधन से अयोध्या की धरती एक समर्पित योद्धा से वंचित हो गई। उनके निधन पर कारसेवकपुरम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संतों, कार्यकर्ताओं और रामभक्तों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम प्रणाम किया।
*श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए चंपतराय भावुक हो उठे।* उन्होंने कहा—
“जब से श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति का आंदोलन प्रारंभ हुआ, तब से लेकर अपने अंतिम समय तक डॉ. रामविलास दास वेदांती किसी भी दायित्व से पीछे नहीं हटे। *आंदोलन उनका संकल्प था और रामलला उनकी साधना।”*
उन्होंने कहा कि रामजन्मभूमि न्यास की बैठकों में डॉ. वेदांती की उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती थी। उनकी स्पष्ट दृष्टि, निर्भीक विचार और अडिग आस्था ने आंदोलन को दिशा देने का कार्य किया। जन्मभूमि आंदोलन से उनका रिश्ता केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि आत्मिक और जीवनपर्यंत का था।
*संघर्ष से साधना तक—एक जीवन, एक संकल्प*
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. वेदांती केवल संत नहीं थे, बल्कि वह उस संघर्ष की जीवंत स्मृति थे, जिसने अंततः प्रभु श्रीरामलला को भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित होते देखा। कठिन समय में भी उन्होंने कभी विचलन नहीं दिखाया और हर परिस्थिति में आंदोलन के साथ खड़े रहे।
*संघ परिवार और रामभक्तों ने दी श्रद्धांजलि*
सभा में जिला संघचालक डॉ. विक्रमा प्रसाद पाण्डेय,
प्रांत संगठन मंत्री विजय प्रताप,
उमेश पोरवाल, अभय सिंह, अंकित, जेपी सिंह,
केदार सिंह, आभा सिंह, शरद सिंह, वीरेंद्र,
मुकेश जी, जीतेंद्र, ध्रुवेश मिश्र सहित अनेक कार्यकर्ताओं और रामभक्तों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि सभा का वातावरण मंत्रोच्चार, मौन और स्मृतियों से भरा रहा। उपस्थित जनों की आंखों में शोक था, लेकिन हृदय में उस संत के प्रति गर्व, जिसने जीवन भर प्रभु श्रीराम और जन्मभूमि के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन मयंक चौहान ने किया।
*अमर रहेंगे डॉ. वेदांती*
सभा के अंत में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि
डॉ. रामविलास दास वेदांती का शरीर भले ही नश्वर था,
लेकिन जन्मभूमि मुक्ति संघर्ष में उनका योगदान इतिहास के पन्नों में अमर रहेगा।
अयोध्या की मिट्टी, रामभक्तों का मन और रामलला का धाम
सदैव उनके त्याग और तपस्या का स्मरण करता रहेगा।