15/11/2025
हजरत आयशा r.a. ने फरमाया की अल्लाह के रसूल ﷺ पर वही का शुरुवाती दौर अच्छे सच्चे पाकीज़ा ख्वाबों से शुरू हुआ आप ख्वाब में जो कुछ देखते वो सुबह की रोशनी की तरह साहिन और सच्चा साबित होता . फिर मीन जानिब कुदरत आप तन्हाई पसंद हो गए और अपने गारे ऐ हेरा में तन्हाई इख्तियार फरमाते और कई कई दिन और रात वहां मूसल सल इबादत करते और यादें ऐ इलाही जिक्र वो फ़िक्र में मशगूल रहते जब तक घर आने को दिल ना करता आप वही रहते
यही सिल सिला जारी रहा यहां तलब आप पर हक नाजिल हो गया और आप गारे हीरा ही में थे कि अचानक हजरत जिबरील a.s. आपके पास हाज़िर हुए और कहने लगे की ऐ मोहम्मद पढ़ो आप फरमाते . है हमे पढ़ना नहीं आता उसके बाद आप फरमाते है की जिबरील ने हमे हमे दबाया फिर हमे छोड़ कर कहा पढ़ो !. ‘फिर कहा पढ़ो अपने रब के नाम से नाम से पढ़ो जिसने इंसान को पैदा किया जो इस जहान का मलिक वो मुख्तार हैं , इकरा पढ़ो इकरा पढ़ो उसके बाद आप ने पढ़ना शुरू किया अब आप जिबरील a,s गए
फिर आप घर तशरीफ़ लाए
आप बीबी हजरत खातिजा से फरमाते है मुझे
कम्बल उड़ा दो मैं कुछ खोफ सा महसूस कर रहा हु
फिर हज़रत खातिजा ने आपको कम्बल उड़ाया
फिर अपने सारा माजरा हजरत खातिजा को बताया
हज़रत खातिजा ने फरमाया आप घबराए नहीं आपको कुछ नहीं होगा
आप सुलह रहमी करते है आप गरीबों की मदद करते हैं
आप ग़म ज़दो का साथ देते है
फिर हज़रत खातिजा r,a, हुजूर पाक ﷺ को
वर्का बिन नोफल के पास ले गई
जो उस समय के बहुत बड़े अलीम थे
हज़रत खातिजा r,a, ने उनको सारा माजरा बताया
वर्का बीन नोफल ने बताया कि जो आपके पास आया था हज़रत जिबरील a,s, थे
और वो आगे भी आते रहेंगे जब जब अल्लाह का हुकम होगा
इंशाल्लाह इसके आगे भी अगले पोस्ट में
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Sahih al-Bukhari, Vol. 1, Book 1, Hadith- 3.
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