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हकीकत देखा जाए तो कोलकाता नाइट राइडर्स की जो स्थिति है वो रहाणे और टीम मैनेजमेंट की बदौलत है वरना फिन एलन और टीम शाइफर्ट...
09/05/2026

हकीकत देखा जाए तो कोलकाता नाइट राइडर्स की जो स्थिति है वो रहाणे और टीम मैनेजमेंट की बदौलत है वरना फिन एलन और टीम शाइफर्ट जैसे ओपनर्स टीम मौजूद हैं तो रहाणे को खुद पीछे हटकर बल्लेबाजी के लिए आना चाहिए था👍

आपकों याद है वर्ल्डकप 2026 का वो मैच जिसमे 170+ रनों का स्कोर टिम शाइफर्ट और फिन एलन ने न्यूजीलैंड को 10 विकेटों से मैच जिताया था मगर कोलकाता नाइट राइडर्स ने इन दोनों से IPL मे ओपनिंग नही कराकर रहाणे को ओपनिंग के लिए शाइफर्ट या फिन एलन के साथ ओपनिंग भेजा

इतना ही नहीं लगातार शाइफर्ट और Allen को मौके भी नहीं दिए गए मौके भी दिए तो मैच छोड-छोड़कर दिए थे, इतने बड़े खिलाड़ी होने के बाद भी अगर लगातार दिए होते तो शायद इस स्थिति में KKR टीम नहीं होती🤔 आज

बतौर impact player आए फिन एलन ने दिल्ली के गेंदबाजों पर ऐसा असर डाला जो 10 ओवर के बाद से लेकर अंत तक उभर नहीं पाए, हर गेंदबाज के ओवर में चौके छक्के लगाकर कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए एक शतकीय पारी खेली।🥰

गांवों की चौपालों पर अक्सर एक कहावत बड़े मजे लेकर सुनाई जाती है अंधे के हाथ बटेर लग जाना। इस साल आईपीएल में लखनऊ सुपर जा...
08/05/2026

गांवों की चौपालों पर अक्सर एक कहावत बड़े मजे लेकर सुनाई जाती है अंधे के हाथ बटेर लग जाना। इस साल आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स और उनके कप्तान साहब की कहानी भी बिल्कुल इसी पुरानी कहावत के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। पूरे सीजन अपनी ही टीम के लिए एक भारी-भरकम बोझ बने रहने वाले कप्तान साहब आखिरकार एक ऐसी चमकीली और तेज-तर्रार पारी खेलने में कामयाब हो ही गए, जिसे देखकर टीम के मालिक भी शायद राहत की लंबी सांस लेते हुए कह सकें कि,चलो, करोड़ों का इन्वेस्टमेंट कहीं तो काम आया!

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ ऋषभ पंत के बल्ले से महज 10 गेंदों में 4 चौकों और 2 आसमानी छक्कों की मदद से जो 32 रनों की नाबाद आंधी निकली, उसने एक पल के लिए सबको हैरान जरूर कर दिया। अब मैं तो बस यही सोचकर मुस्कुरा रहा हूं कि क्या पंत के कुछ अति-उत्साही प्रशंसक इस छोटी सी आतिशी पारी की तुलना ग्लेन मैक्सवेल की उस ऐतिहासिक वर्ल्ड कप पारी (अफगानिस्तान के खिलाफ 2023) से तो नहीं करने लगेंगे?

ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी के लिए सच मानिए तो यह 10 गेंदों का तूफान किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। भले ही उनके इस छोटे से धमाके से लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेऑफ का टिकट न कटा पाए, लेकिन उनके समर्थकों और पीआर टीम को उनकी महान प्रतिभा का बखान करने के लिए एक सॉलिड मसाला जरूर मिल गया है।

अब आप खुद देखिएगा, अचानक से तमाम क्रिकेट ज्ञानी उनके पुराने टेस्ट रिकॉर्ड्स के पन्ने पलटने लगेंगे और दुनिया को याद दिलाएंगे कि कुछ साल पहले पंत क्या हुआ करते थे। लेकिन टी20 क्रिकेट की कड़वी और नंगी सच्चाई तो यही है कि इस फॉर्मेट में पंत हर दस-बीस मैचों के बाद एक-आध ऐसी पारी खेल ही जाते हैं, इसमें कोई बहुत ज्यादा चौंकने या चमत्कार मान लेने वाली बात नहीं है।

अंत में लखनऊ फ्रेंचाइजी के लिए बस एक छोटी सी चेतावनी है! अगर इस एक चमत्कारी पारी के झांसे में आकर आदरणीय संजीव गोयनका जी पंत की पिछली 8-10 फ्लॉप पारियों को भुला बैठते हैं और अगले सीजन के लिए उन्हें फिर से रिटेन कर लेते हैं... तो यकीन मानिए, अगले साल भी लखनऊ सुपर जायंट्स का हश्र ऐसा ही दर्दनाक होने वाला है और फैंस को फिर से मायूसी ही हाथ लगेगी।

विराट कोहली आज शून्य पर आउट हो गए। उनको प्रिंस यादव ने बोल्ड मार दिया है। एक बहस का मुद्दा मिल गया है। अब पूरी क्रिकेट क...
08/05/2026

विराट कोहली आज शून्य पर आउट हो गए। उनको प्रिंस यादव ने बोल्ड मार दिया है। एक बहस का मुद्दा मिल गया है। अब पूरी क्रिकेट की दुनिया दो फाड़ हो गयी है एक हिस्सा है जो विराट कोहली की महानता को नाप रहा है फलाना एवरेज फलाना पारी फलाना एवरेज बता रहा है वह यह मानने को ही नही तैयार कि विराट कोहली मनुष्य हैं। वह उनको महामानव बता रहा है जिसे आउट कर लेना ओलम्पिक मैडल पाने जैसा है।
दूसरा हिस्सा है जो उनको साधारण बल्लेबाज के रूप में मानने को तैयार है कि गलती हो जाती है कौन आउट नही होता। और यह कहा रहा है कि प्रिंस यादव अच्छे गेंदबाज है आज उन्होंने विराट कोहली को छका दिया। प्रिंस यादव गेंद को विराट समझ नही पाए चूक गए और बन्दा खुस भी क्यों न हो? जब विराट कोहली फॉर्म में हों तो उनको आउट करना मुश्किल होता है ऐस समय में उसने विराट को बोल्ड मार दिया है।
लेकिन कुछ क्रिकेट के अंडे जीने नही देते।
वह यह मानने को ही तैयार हैं कि कोहली आउट हो गया है।वह आज की पारी के अलावा कोहली की सभी पारी के बारे में बात करेंगे। 😊

लुंगी एंगिडी और टी नटराजन भी सोच रहे कि आखिर किसे कप्तान बना दिया गया है। इनको खुद ही नहीं पता कि पिच कैसा बर्ताव करेगी।...
06/05/2026

लुंगी एंगिडी और टी नटराजन भी सोच रहे कि आखिर किसे कप्तान बना दिया गया है। इनको खुद ही नहीं पता कि पिच कैसा बर्ताव करेगी। ये केवल अंदाजा ही लगाते रहते हैं।

अरुण जेटली स्टेडियम की पिच जो पूरी तरह फ्लैट होती तो उससे दिल्ली कैपिटल्स को चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ फायदा होता या फिर जिस तरह की पिच पर कल वाला मुकाबला खेला गया इससे फायदा हुआ?

दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने की बजाय बल्लेबाजी चुनी थी और शुरू में पिच धीमी निकली जो धीरे धीरे ठीक होती गई जबकि अक्षर पटेल ने कहा था कि पिच बाद में और भी धीमी हो जाएगी।

दिल्ली कैपिटल्स के इस हाल के जिम्मेदार अक्षर पटेल ही हैं। टीम की प्लेइंग इलेवन से लेकर टॉस जीतकर फैसला लेने तक सभी जगह वो पूरी तरह फ्लॉप रहे हैं। पृथ्वी शॉ जैसे खिलाड़ी एक भी मैच खेलने को नहीं पाए हैं। अब तो अक्षर पटेल को खुद ही कप्तानी से इस्तीफा दे देना चाहिए।

यह महज एक संयोग है या फिर पूरी तरह स्क्रिप्टेड मैच हैं? गुजरात टाइटंस को प्लेऑफ की दौड़ में बनाए रखने की यह कोई चाल है य...
04/05/2026

यह महज एक संयोग है या फिर पूरी तरह स्क्रिप्टेड मैच हैं? गुजरात टाइटंस को प्लेऑफ की दौड़ में बनाए रखने की यह कोई चाल है या फिर केवल इत्तेफाक ही है? आखिर इन दोनों मैचों के बीच इतनी समानताएं कैसे हो गईं? हालांकि कोई यह तो नहीं कह सकता कि यह मैच फिक्स थे और न ही मैं इस बात को कह रहा हूं लेकिन जो समानताएं इन दोनों मैचों के बीच हैं वह भी आश्चर्य पैदा करती हैं।

आईपीएल 2026 की दो सबसे मजबूत टीमें जो पॉइंट टेबल में टॉप दो में हैं और ऐसी बल्लेबाजी वाली टीमें जो ढाई सौ रनों के आंकड़े को भी छूने की ताकत रखती हैं वह अचानक ही गुजरात टाइटंस की गेंदबाजी के सामने बिखर गईं। दोनों मैचों में जो समानताएं हैं वो सामने रख रहा हूं। इन दोनों मैचों के शुरू होने से पहले गुजरात टाइटंस की जीत के अनुमान 25 परसेंट से भी कम लग रहे थे। एक मुकाबला 30 अप्रैल 2026 को तो दूसरा 3 मई 2026 को खेला गया। दोनों ही मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए।

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 30 अप्रैल 2026 को इस सीजन के 42वें मैच में गुजरात टाइटंस और आरसीबी के बीच मुकाबला खेला गया। यह एक सामान्य मैच था फिर कहा जाता है इस मैच को देखने के लिए 90 हजार से अधिक दर्शक आए थे। इतने दर्शक आमतौर पर आईपीएल मैच देखने स्टेडियम नहीं आते। यह संख्या 2023 विश्वकप फाइनल देखने आए दर्शकों की संख्या के करीब थी।

सवाल यह है कि इतने दर्शक एक सामान्य मैच देखने क्यों चले आए? दर्शक आए चलो ठीक है आ सकते हैं लेकिन मैच का परिणाम बहुत चौंकाने वाला था। खैर टॉस गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू की टीम टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी कर रही थी और 8वें ओवर तक तो सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन फिर अचानक ही रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू की बल्लेबाजी बिखर जाती है और बल्लेबाजी के दौरान महज 47 रनों पर 6 विकेट खो देती है।

रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू जो एक समय 7.3 ओवर तक 79 रनों पर 2 विकेट था अचानक ही 14.1 ओवर में 126 रनों पर 8 विकेट खो चुका था। महज 47 रनों पर 6 विकेट खो देना चौंकाता है। रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू 20 ओवर भी नहीं खेल पाती और 4 गेंद शेष रहते 155 रनों पर सिमट जाती है। अंत में गुजरात टाइटंस यह मैच 4 विकेट से जीत जाती है। प्लेयर ऑफ दी मैच जेसन होल्डर को मिला जिन्होंने 2 विकेट लिए थे और बल्ले से
12 रन बनाए थे।

दूसरा मुकाबला जो इस सीजन का 46वां मैच गुजरात टाइटंस और पंजाब किंग्स के बीच 3 मई 2026 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ही खेला गया उसमें भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक बार फिर से टॉस गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने जीतकर एक बार फिर से पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। हुआ वही जो रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू के खिलाफ हुआ था। इस बार पैटर्न थोड़ा बदला था और इस बार मिडिल में नहीं बल्कि शुरू में ही 47 रनों पर ही पंजाब किंग्स ने अपने 5 विकेट खो दिए। पंजाब किंग्स किसी तरह 20 ओवर खेलकर 163 रन ही बना सकी। अंत में गुजरात टाइटंस मैच जीतने में 4 विकेट से सफल हुई। प्लेयर ऑफ द मैच एक बार फिर से जेसन होल्डर ही हुए जिन्होंने इस बार 4 विकेट लिए थे।

दोनों मैचों में टॉस गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल ने ही जीता और दोनों में पहले बल्लेबाजी करने का ही फैसला लिया। रॉयल चैलेंजर बैंगलुरू और पंजाब किंग्स दोनों टीमों ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ 47 रनों पर ही 5 विकेट गंवाए। दोनों मैचों में गुजरात टाइटंस 4-4 विकेटों से ही विजयी हुआ। दोनों मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच जेसन होल्डर ही हुए। दोनों मैच जो गुजरात टाइटंस ने जीता वो दोनों ही मैच टूर्नामेंट की टॉप दो टीमों के खिलाफ थे एक ही मैदान पर थे। खैर जो भी हो यह फिक्सिंग तो कत्तई नहीं हो सकता यह महज एक संयोग ही कहा जाएगा।

मेरा नाम विवेक शर्मा है। उम्र 32 साल। लोग जब पूछते हैं, तुम क्या करते हो, तो मैं कहता हूँ, किराना दुकान चलाता हूँ। वे हँ...
02/05/2026

मेरा नाम विवेक शर्मा है। उम्र 32 साल। लोग जब पूछते हैं, तुम क्या करते हो, तो मैं कहता हूँ, किराना दुकान चलाता हूँ। वे हँसते हैं, क्योंकि उन्हें पता है मैं आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में गोल्ड मेडलिस्ट था, और मेरे पास सैन फ्रांसिस्को की एक कंपनी का ऑफर लेटर आज भी अलमारी में रखा है, जिस पर सैलरी लिखी है 2,40,000 डॉलर सालाना।

मैंने वह लेटर कभी फाड़ा नहीं, पर कभी इस्तेमाल भी नहीं किया।

कहानी 1998 से शुरू होती है, कानपुर के किदवई नगर में। दो कमरे का घर, ऊपर टीन। पापा रेलवे में क्लर्क, माँ ट्यूशन पढ़ातीं। मैं इकलौता बेटा। पापा की सैलरी 8,000 रुपये। माँ की ट्यूशन से 2,000। हम मिडिल क्लास भी नहीं थे, लोअर मिडिल।

पर पापा का एक सपना था, बेटा बड़ा आदमी बने। उन्होंने कभी मुझसे नहीं कहा डॉक्टर बन, इंजीनियर बन। वह सिर्फ कहते, बेटा, जितना पढ़ना है पढ़, पैसे की चिंता मत कर।

मैं पढ़ता गया। दसवीं में 95 प्रतिशत, बारहवीं में 97। कोचिंग की फीस 1 लाख थी। पापा ने पीएफ निकाला। माँ ने अपनी चूड़ियाँ बेचीं। मैं कोटा गया। दो साल पंखे के नीचे पढ़ा, मच्छर खाए। 2012 में रिजल्ट आया, AIR 147। आईआईटी बॉम्बे, कंप्यूटर साइंस।

जिस दिन लेटर आया, पापा मिठाई का डिब्बा ले कर पूरे मोहल्ले में बाँट आए। माँ रो पड़ी। बोली, अब मेरा बेटा अमेरिका जाएगा।

आईआईटी में मैं उड़ा। कोडिंग, हैकाथॉन, इंटर्नशिप। तीसरे साल में गूगल समर इंटर्न, 1 लाख स्टाइपेंड। मैंने पहली सैलरी से पापा को फोन दिलाया, माँ को वॉशिंग मशीन। पापा ने फोन पर कहा, बेटा, अब तो रिटायरमेंट में आराम करूँगा।

फाइनल ईयर में प्लेसमेंट। मैं दिन रात तैयारी करता। दिसंबर 2015, मेरा इंटरव्यू हुआ एक कंपनी से, नाम था स्ट्राइप जैसी पेमेंट स्टार्टअप, बेस सैन फ्रांसिस्को। चार राउंड, आखिरी में सीटीओ ने कहा, वी वांट यू। ऑफर आया, 240k डॉलर, H1B, रीलोकेशन।

मैंने हॉस्टल में चिल्ला कर दोस्तों को बताया। रात को पापा को फोन किया। पापा चुप रहे, फिर बोले, बेटा, बहुत बड़ी बात है। माँ ने कहा, पासपोर्ट बनवा ले।

मैंने टिकट देखना शुरू किया, अगस्त 2016 जॉइनिंग।

मार्च 2016 में होली पर घर आया। पापा कमजोर लग रहे थे। खाँसी। मैंने कहा, डॉक्टर को दिखाओ। बोले, कुछ नहीं, ठंड लग गई। माँ भी थकी थकी। मैंने सोचा, उम्र है।

अप्रैल में फोन आया, माँ का। पापा गिर गए, अस्पताल में। मैं भागा। डॉक्टर ने कहा, लंग्स में इंफेक्शन, साथ में हार्ट की प्रॉब्लम। एंजियोप्लास्टी करनी पड़ेगी। खर्च, 3 लाख।

पापा के पास मेडिकल था, पर आधा ही कवर। मैंने अपनी इंटर्नशिप के पैसे, 2 लाख, निकाल कर दिए। ऑपरेशन हुआ। पापा बच गए।

मैं वापस बॉम्बे गया, फाइनल प्रोजेक्ट। मई में फिर फोन, माँ को चक्कर आए। जांच हुई, ब्रेस्ट कैंसर, स्टेज 2। डॉक्टर ने कहा, कीमो शुरू करो, 6 साइकल, हर साइकल 80 हजार। कुल 5 लाख, प्लस सर्जरी।

मैं सुन्न। पापा रिटायर हो चुके थे, पेंशन 12 हजार। घर में सेविंग खत्म। मैंने दोस्तों से उधार माँगा, 1 लाख मिला। बाकी।

जून में मैं घर बैठा था, ऑफर लेटर हाथ में। वीजा इंटरव्यू 15 जुलाई को था। फ्लाइट 10 अगस्त की। माँ की पहली कीमो 20 जून को।

मैंने पापा से कहा, मैं लोन लेता हूँ। पापा बोले, कौन देगा, घर गिरवी रखना पड़ेगा। मैंने कहा, रख देंगे। पापा ने मना किया, बोले, ये घर तेरी माँ की निशानी है।

उस रात मैं छत पर बैठा। आसमान में प्लेन जा रहा था। मैंने सोचा, यही प्लेन मुझे ले जाएगा। दूसरी तरफ माँ नीचे दर्द में।

मैंने अपने मेंटर को मेल किया, क्या जॉइनिंग डिफर हो सकती है, 6 महीने। रिप्लाई आया, सॉरी विवेक, वी नीड पीपल नाउ। यू कैन रीअप्लाई नेक्स्ट ईयर।

मैंने फिर मेल किया, रिमोट पॉसिबल। नो।

14 जुलाई की रात। वीजा इंटरव्यू कल। माँ की दूसरी कीमो परसों। पापा दवाई लेने गए थे, लौटे तो पर्ची गिर गई, झुक कर उठा नहीं पाए। मैंने उठाई। उस वक्त समझ आया, मैं अगर चला गया तो ये दोनों कैसे रहेंगे।

पापा रिटायर्ड, बीमार। माँ कीमो पर। कोई भाई बहन नहीं। रिश्तेदार मदद नहीं करते। कौन अस्पताल ले जाएगा, कौन दवाई लाएगा, कौन रात को पानी देगा।

मैंने सुबह वीजा इंटरव्यू कैंसिल किया। कंपनी को मेल लिखा, थैंक यू फॉर ऑफर, ड्यू टू फैमिली मेडिकल इमरजेंसी आई एम अनेबल टू जॉइन।

दोस्तों ने फोन किया, पागल है क्या, 1.6 करोड़ की जॉब छोड़ रहा है। मैंने कहा, हाँ।

माँ को नहीं बताया। पापा को बताया। वह चुप रहे, फिर बोले, बेटा तेरा करियर। मैंने कहा, करियर फिर बन जाएगा, आप फिर नहीं मिलोगे।

मैंने कानपुर में ही नौकरी ढूंढी। एक लोकल सॉफ्टवेयर कंपनी, सैलरी 35 हजार। मैंने जॉइन कर ली। सुबह 9 से शाम 6 ऑफिस, शाम को अस्पताल। कीमो में माँ के बाल गए, वह रोती। मैं विग ले आया। पापा की दवाई टाइम पर देता।

2016 से 2018, दो साल ऐसे निकले। माँ की सर्जरी हुई, रिकवरी हुई। कैंसर रिमिशन में आया। पापा की तबीयत स्थिर। पर पैसे खत्म। मैंने लोन लिया, 7 लाख।

2018 में कंपनी बंद हो गई। मैं बेरोजगार। इंटरव्यू दिए, बेंगलुरु से ऑफर आया, 18 लाख। मैंने मना किया। पापा बोले, जा बेटा। मैंने कहा, अब नहीं छोड़ सकता। माँ को हर तीन महीने चेकअप, पापा को डायबिटीज। कौन देखेगा।

दोस्त बोले, तू अपना करियर मार रहा है। मैंने कहा, करियर मेरा है, माँ बाप भी मेरे।

मैंने घर के नीचे छोटी सी दुकान खोली, पापा के नाम पर, शर्मा जनरल स्टोर। कंप्यूटर छोड़ कर दाल चावल बेचने लगा। पहले दिन शर्म आई। आईआईटी का लड़का दुकान पर। फिर एक आंटी आईं, बोलीं, बेटा तुम्हारी माँ ने मुझे पढ़ाया था, तुम दुकान खोलो, हम यहीं से लेंगे।

धीरे धीरे दुकान चली। मैं सुबह 6 बजे होलसेल मंडी जाता, सामान लाता, दिन में दुकान, रात को फ्रीलांस कोडिंग। 500 डॉलर की वेबसाइट बनाता।

2019 में माँ पूरी तरह ठीक। डॉक्टर ने कहा, क्लियर। उस दिन मैं दुकान बंद कर के मंदिर गया। प्रसाद चढ़ाया। घर आया तो पापा बोले, बेटा, तूने हमारे लिए सब छोड़ दिया। मैंने कहा, छोड़ा नहीं, बदला है।

2020 लॉकडाउन। दुकान एसेंशियल में खुली। लोगों को राशन चाहिए था। मैंने होम डिलीवरी शुरू की। साइकिल पर जाता। पापा हिसाब लिखते। माँ पैकिंग करती। उस लॉकडाउन में हमने 2 लाख कमाए। मैंने लोन का आधा चुका दिया।

2021 में मैंने दुकान के साथ एक छोटा कंप्यूटर क्लास शुरू किया, बच्चों को कोडिंग सिखाने। फीस 500 महीना। 20 बच्चे आए। मुझे फिर से कोडिंग का मजा आया।

2022 में एक बच्चा, अंश, जो मेरे पास पढ़ता था, उसने नेशनल ओलंपियाड जीता। न्यूज में आया, 'कानपुर के किराना वाले आईआईटीयन से सीख कर जीता'। वह आर्टिकल वायरल हुआ।

उसी हफ्ते मुझे मेल आया, स्ट्राइप के उसी सीटीओ से। लिखा था, विवेक, आई सॉ योर स्टोरी। वी आर ओपनिंग इंडिया ऑफिस। वुड यू लाइक टू लीड एजुकेशन इनिशिएटिव, रिमोट, पार्ट टाइम।

मैंने हाँ कहा। अब मैं सुबह दुकान, दोपहर क्लास, शाम को यूएस टीम के साथ काम। सैलरी डॉलर में नहीं, पर इज्जत में बहुत।

पिछले महीने पापा 68 के हुए। मैंने छोटा सा फंक्शन रखा। दोस्त आए, वही जो कहते थे तूने करियर बर्बाद किया। पापा ने माइक ले कर कहा, मेरा बेटा अमेरिका नहीं गया, पर मेरे पास रहा। जब मैं अस्पताल में था, उसने मेरा हाथ पकड़ा। जब इसकी माँ के बाल गए, इसने चोटी बनाई। करियर तो बहुत लोग बनाते हैं, बेटा कोई कोई बनता है।

माँ ने धीरे से कहा, मुझे आज भी वह ऑफर लेटर याद है। तूने अलमारी में क्यों रखा। मैंने कहा, ताकि याद रहे मैंने क्या छोड़ा। बोली, तूने छोड़ा नहीं, तूने चुना।

आज दुकान पर बैठा हूँ। सामने स्कूल के बच्चे टॉफी ले रहे हैं। लैपटॉप पर कोड चल रहा है। पापा बगल में अखबार पढ़ रहे हैं, माँ काउंटर पर बैठी हैं।

कभी कभी रात को वह ऑफर लेटर निकालता हूँ। 240,000 डॉलर। फिर माँ की हँसी सुनता हूँ, पापा की खाँसी कम हुई है, देखता हूँ। और लेटर वापस रख देता हूँ।

लोग पूछते हैं, पछतावा होता है। मैं सच कहता हूँ, पहले होता था। जब दोस्त बेंगलुरु से फोटो डालते, यूएस ट्रिप की। अब नहीं। क्योंकि मैंने करियर का त्याग नहीं किया, मैंने करियर को रीडिफाइन किया।

मेरा करियर अब सिर्फ कोड नहीं, केयर है।

मैंने माता पिता के लिए अमेरिका छोड़ा, पर उनके साथ जिंदगी जी ली। पापा को हर सुबह चाय दे पाता हूँ, माँ के पैर दबा पाता हूँ। ये 2.4 करोड़ में नहीं मिलता।

अगर फिर से मौका मिले, तो मैं फिर वही करूँगा। वीजा कैंसिल, जॉब छोड़, दुकान खोल। क्योंकि कुछ त्याग घाटा नहीं होते, वे निवेश होते हैं, प्यार में।

और आज जब कोई बच्चा पूछता है, भैया आप आईआईटी करके दुकान क्यों, मैं हँस कर कहता हूँ, क्योंकि मेरे माता पिता मेरी सबसे बड़ी कंपनी हैं, और मैं उनका फुल टाइम सीईओ हूँ।

मिलिए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के महान विकेटकीपर-बल्लेबाज जितेश शर्मा से! भाई साहब के टैलेंट की तो बाद में बात करेंगे, पह...
02/05/2026

मिलिए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के महान विकेटकीपर-बल्लेबाज जितेश शर्मा से! भाई साहब के टैलेंट की तो बाद में बात करेंगे, पहले इनकी अजीबोगरीब मन्नतों का किस्सा सुन लीजिए। जनाब खुलेआम कहते हैं कि वो ऊपर वाले से हाथ जोड़कर यही दुआ मांगते हैं कि आरसीबी का टॉप-ऑर्डर जल्दी से ताश के पत्तों की तरह ढह जाए। क्यों? ताकि ये संकटमोचन बनकर क्रीज पर एंट्री मारें, एक मैच जिताऊ पारी खेलें और रातों-रात पूरे देश की नजरों में हीरो बन जाएं।

अब ऊपर वाला भी ठहरा दयालु, उसने इनकी मुराद सुन भी ली और एक-दो नहीं, बल्कि कई बार हीरो बनने का एकदम परफेक्ट सेटअप सजाकर दे दिया। लेकिन हमारे ये सुपरहीरो मैच बचाना तो दूर, पूरी की पूरी नाव डुबाने का ही फुल-प्रूफ जुगाड़ सेट कर देते हैं। गुजरात टाइटंस के खिलाफ भी बिल्कुल यही ब्लॉकबस्टर स्क्रिप्ट लिखी गई थी। 79 रन पर 3 विकेट गिर चुके थे, टीम गहरे दबाव में थी और मंच पूरी तरह से तैयार था। जितेश बाबू बड़े स्वैग से क्रीज पर आए और पलक झपकते ही स्कोर 80 रन पर 4 विकेट हो गया! आए और तू चल मैं आया वाली तर्ज पर लौट गए!

जरा इनके इस सीजन के खौफनाक आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो सच में चक्कर खा जाएंगे। पूरे टूर्नामेंट में जनाब के बल्ले से कुल जमा 63 रन टपके हैं, वो भी 9 के विराट औसत और 100 के तूफानी स्ट्राइक रेट के साथ! ये तो आरसीबी की किस्मत अच्छी है कि उनके पास विराट कोहली, भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड जैसे असली मैच-विनर्स मौजूद हैं, जो हर बार अपने दम पर टीम को जीत की लाइन पार करवा दे रहे हैं। वरना इन दिग्गजों की आड़ में जितेश शर्मा की जो ये निकोलस पूरन टाइप वाली उल्टी तबाही छुप रही है, वो आरसीबी को कब का टूर्नामेंट से बाहर करवा चुकी होती।

बात सिर्फ खराब फॉर्म की होती तो फैंस फिर भी बर्दाश्त कर लेते, लेकिन इनके शॉट सेलेक्शन का लेवल ही बिल्कुल अलग दुनिया का है। मैंने अपनी जिंदगी में उस शांत और होनहार युवा वैभव सूर्यवंशी को आज तक सिर्फ एक ही बार मैदान पर आगबबूला होकर अपशब्द बोलते सुना है, और आपको जानकर हैरानी होगी कि वो परम सम्मान भी इन्हीं जितेश शर्मा को नसीब हुआ था। उस दिन भाई ने शॉट ही इतना बेहूदा और गैर-जिम्मेदाराना खेला था कि अगर किसी इंसान ने जिंदगी भर गाली न देने या हाथ न उठाने की कसम खाई हो, तो उस पल उसकी भी सारी कसमें टूट जाएं!

वाका की यह पिच देखिये ?? तारीख थी 22 फर्वरी 1997 , सीरीज़ का पाचवा और अंतिम टेस्ट । वेस्टैन्डीज़ अपने सुनेहरे अतीत की अं...
30/04/2026

वाका की यह पिच देखिये ?? तारीख थी 22 फर्वरी 1997 , सीरीज़ का पाचवा और अंतिम टेस्ट । वेस्टैन्डीज़ अपने सुनेहरे अतीत की अंतिम सासे गिन रही थी ।
क़िस्मत थी कि उस समय सर एम्ब्रोज़ वाल्श चन्द्रपाल और ग्रेट लारा टीम के साथ थे।

#ब्रायनलारा: पर्थ की उस 'खतरनाक' पिच पर क्रिकेट का सबसे बड़ा जादूगर!

वेस्टइंडीज क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी जीत दर्ज हैं जिन्होंने दुनिया को हैरान किया, लेकिन 1996-97 के ऑस्ट्रेलिया दौरे का पर्थ टेस्ट कुछ अलग ही था।
वाका (WACA) की उस पिच को याद कीजिए, जिस पर बड़ी-बड़ी दरारें किसी गहरे घाव की तरह नजर आ रही थीं।
गेंद कब कहां टप्पा खाकर बल्लेबाज के सिर पर आएगी या घुटने के नीचे रहेगी, यह कहना नामुमकिन था। उस दौर की सबसे खतरनाक पिचों में से एक पर जहां दुनिया के दिग्गज बल्लेबाज क्रीज पर टिकने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वहां 'प्रिंस ऑफ पोर्ट ऑफ स्पेन' ब्रायन लारा ने जो किया, वह केवल महानता की श्रेणी में नहीं, बल्कि चमत्कार की श्रेणी में आता है।

ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी को वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों ने मात्र 243 रनों पर समेट दिया था, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी।
जब लारा बल्लेबाजी करने उतरे, तो पिच का मिजाज पूरी तरह बिगड़ चुका था। दरारें इतनी चौड़ी थीं कि उनमें गेंद फंस सकती थी, लेकिन लारा के इरादे उन दरारों से कहीं ज्यादा मजबूत थे। उन्होंने खेल के शुरुआती दो घंटों में जिस संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाया, उसने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया।
लारा ने दो घंटों में अपना अर्धशतक पूरा किया और फिर जो हुआ, उसने पर्थ के मैदान पर मौजूद हर दर्शक की सांसें रोक दीं। अगले एक घंटे के भीतर, अपनी बल्लेबाजी की गति को अगले स्तर पर ले जाते हुए, लारा ने अपना शतक पूरा कर लिया।

लारा की वह 132 रनों की पारी केवल रनों का आंकड़ा नहीं थी, बल्कि यह दुनिया को एक संदेश था कि जब टैलेंट और टेंपरामेंट का मिलन होता है, तो पिच की स्थिति मायने नहीं रखती।
उनके कट, पुल और वो कवर ड्राइव्स उन दरारों के बीच से निकल रहे थे जैसे वह किसी सपाट पिच पर खेल रहे हों। ग्लेन मैक्ग्रा और शेन वॉर्न जैसे दिग्गज भी उस दिन लारा के सामने बेबस नजर आए। लारा की इस पारी की बदौलत वेस्टइंडीज ने न केवल मजबूत बढ़त बनाई, बल्कि अंततः ऑस्ट्रेलिया को 10 विकेटों से करारी शिकस्त दी।

यह जीत वेस्टइंडीज के लिए ऐतिहासिक थी क्योंकि उन्होंने पर्थ जैसी तेज और खतरनाक पिच पर ऑस्ट्रेलिया को उन्हीं के घर में धूल चटाई थी। ब्रायन लारा की वह पारी आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है।
वह मैच गवाह है कि क्रिकेट में आंकड़े तो बनते-बिगड़ते रहते हैं, लेकिन विषम परिस्थितियों में जो साहस लारा ने दिखाया, वह उन्हें इस खेल का सबसे निडर योद्धा बनाता है।
पर्थ की उन दरारों वाली पिच पर लारा का वह 132 रन का संघर्ष आज भी किसी महागाथा से कम नहीं लगता। क्रिकेट की दुनिया हमेशा इस पारी को एक बेंचमार्क के रूप में याद रखेगी।

ऐसे ही लार को महान नहीं कहा जाता ।
कहने वाले कहते हैं कि सचिन से भी बड़े बल्लेबाज़ थे लारा , और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों मैं किया गया उनका प्रदर्शन इस बात की गवाही भी देता है ।

90 के दशक के भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए 'लारा' भी पसंदीदा बल्लेबाज़ हुआ करते थे ।

क्या आपमें से किसी को याद है यह पारी ?
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मुंबई इंडियंस का मामला एक बार फिर आईपीएल में फंस गया है। सनराइजर्स हैदराबाद से मिली हार ने टीम का खेल खराब कर दिया है। अ...
30/04/2026

मुंबई इंडियंस का मामला एक बार फिर आईपीएल में फंस गया है। सनराइजर्स हैदराबाद से मिली हार ने टीम का खेल खराब कर दिया है। अब उसके प्लेऑफ में जाने के समीकरण क्या हैं और सिनेरियो क्या बन रहा है, ये समझ लीजिए।

मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल का ये सीजन काफी खराब जा रहा है। टीम जीत की पटरी पर लौटने की कोशिश करती है, लेकिन उसे नाकामी हाथ लगती है। बुधवार को ही मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 240 से अधिक रन बना दिए थे, लेकिन इसके बाद भी उसे हार मिली। अब सवाल है कि क्या मुंबई इंडियंस की टीम आईपीएल 2026 से बाहर मानी जाए या फिर कोई संभावना है, जो उसे टॉप 4 में लेकर जाए। इसका सीधा और सरल समीकरण और सिनेरियो हम आपको समझा देते हैं।

टीम ने खेल लिए अपने 8 मैच, केवल दो में ही मिली है जीत
हार्दिक पांड्या की कप्तानी वाली मुंबई इंडियंस के लिए एक और आईपीएल सीजन खराब जाता हुआ नजर आ रहा है। टीम के लिए अब आगे की राह काफी ज्यादा मुश्किल होती हुई दिख रही है। हालांकि समीकरणों के हिसाब से देखें तो टीम अभी तक टॉप 4 की रेस से बाहर नहीं हुई है। अभी तक की स्थिति को देखें तो पता चलता है कि टीम ने आठ मैच खेलकर केवल दो में जीत दर्ज की है। 6 में उसे हार का सामना करना पड़ा है। यानी टीम के पास केवल चार अंक हैं और अंक तालिका में टीम 9वें नंबर पर संघर्ष कर रही है।

मुंबई इंडियंस के अभी 6 और मैच बचे हैं बाकी
अब जरा समझते हैं कि मुंबई इंडियंस की टीम आईपीएल के प्लेऑफ में कैसे जा सकती है। मुंबई के अब कुल मिलाकर 6 और लीग मैच बाकी हैं। यानी टीम ने बचे हुए 6 मुकाबले जीत लिए उसके 12 अंक हो जाएंगे, चार अंक पहले से ही हैं, यानी टीम 16 तक पहुंच सकती है। जो प्लेऑफ में जाने के लिए काफी होंगे। लेकिन सवाल ये है कि जो टीम पहले 8 मैच में से दो जीत पाई हो, उससे ये उम्मीद लगाना कहां तक ठीक है कि बचे छह के छह मुकाबले टीम जीत जाएगी।

एक भी मैच हारी तो नेट रन रेट का चक्कर आ सकता है सामने
अगर मुंबई की टीम यहां से एक भी मैच हारी तो फिर उसके लिए 16 अंकों तक पहुंच पाना संभव नहीं होगा। फिर भी वो 14 अंकों तक तो पहुंच ही सकती है। वैसे तो 14 अंक लेकर भी टीमें प्लेऑफ में गई हैं, लेकिन यहां पर नेट रन रेट का मामला फंस सकता है। हालांकि इस बात की संभावना कम है कि कोई टीम इस बार 14 अंकों के साथ प्लेऑफ में जाएगी। मुंबई इंडियंस का नेट रन रेट इस वक्त -0.784 का है, जो काफी खराब है। यानी टीम को न केवल जीत चाहिए, बल्कि बड़ी जीत चाहिए, ताकि अगर आगे चलकर दो टीमों के बराबर अंक हों और मामला नेट रन रेट पर जाए तो वहां मुंबई की टीम बाजी मार सके।

टॉप की टीमें जीतती चली जाए तो भी मुंबई के लिए मौका
मुंबई इंडियंस को न केवल अपने मैच बड़े अंतर से जीतने होंगे, बल्कि ये भी दुआ करनी होगी कि पंजाब किंग्स, आरसीबी और राजस्थान रॉयल्स की टीमें अपने मैच जीतती चली जाए, ताकि चौथे नंबर की जो भी टीम हो, वो बहुत ज्यादा अंक हासिल ना कर पाए और वहां पर मुंबई के लिए एक चांस बन सकता है। जो टीमें नीचे चल रही हैं, वे अपने मैच हारती रहें तो ही एमआई के लिए उम्मीद दिखाई दे सकती है।

क्या पुरानी कहानी दोहरा पाएगी मुंबई की टीम
ये एक ऐसी टीम है, जो आईपीएल के दूसरे फेज में वापसी करती है। इससे पहले साल 2014 और 2015 में ऐसा हो चुका है। हालांकि इस बार भी टीम ऐसा कर पाएगी, अभी तो इसकी संभावना कम दिखती है। कुल मिलाकर कम शब्दों में बात इतनी है कि अगर मुंबई की टीम यहां से एक भी मैच हारी तो समझ लीजिए कि उसकी कहानी फिर खत्म है। अब अगला नहीं, हर मैच टीम के लिए काफी ज्यादा अहम होने जा रहा है।

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