08/05/2026
गांवों की चौपालों पर अक्सर एक कहावत बड़े मजे लेकर सुनाई जाती है अंधे के हाथ बटेर लग जाना। इस साल आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स और उनके कप्तान साहब की कहानी भी बिल्कुल इसी पुरानी कहावत के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। पूरे सीजन अपनी ही टीम के लिए एक भारी-भरकम बोझ बने रहने वाले कप्तान साहब आखिरकार एक ऐसी चमकीली और तेज-तर्रार पारी खेलने में कामयाब हो ही गए, जिसे देखकर टीम के मालिक भी शायद राहत की लंबी सांस लेते हुए कह सकें कि,चलो, करोड़ों का इन्वेस्टमेंट कहीं तो काम आया!
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ ऋषभ पंत के बल्ले से महज 10 गेंदों में 4 चौकों और 2 आसमानी छक्कों की मदद से जो 32 रनों की नाबाद आंधी निकली, उसने एक पल के लिए सबको हैरान जरूर कर दिया। अब मैं तो बस यही सोचकर मुस्कुरा रहा हूं कि क्या पंत के कुछ अति-उत्साही प्रशंसक इस छोटी सी आतिशी पारी की तुलना ग्लेन मैक्सवेल की उस ऐतिहासिक वर्ल्ड कप पारी (अफगानिस्तान के खिलाफ 2023) से तो नहीं करने लगेंगे?
ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी के लिए सच मानिए तो यह 10 गेंदों का तूफान किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। भले ही उनके इस छोटे से धमाके से लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेऑफ का टिकट न कटा पाए, लेकिन उनके समर्थकों और पीआर टीम को उनकी महान प्रतिभा का बखान करने के लिए एक सॉलिड मसाला जरूर मिल गया है।
अब आप खुद देखिएगा, अचानक से तमाम क्रिकेट ज्ञानी उनके पुराने टेस्ट रिकॉर्ड्स के पन्ने पलटने लगेंगे और दुनिया को याद दिलाएंगे कि कुछ साल पहले पंत क्या हुआ करते थे। लेकिन टी20 क्रिकेट की कड़वी और नंगी सच्चाई तो यही है कि इस फॉर्मेट में पंत हर दस-बीस मैचों के बाद एक-आध ऐसी पारी खेल ही जाते हैं, इसमें कोई बहुत ज्यादा चौंकने या चमत्कार मान लेने वाली बात नहीं है।
अंत में लखनऊ फ्रेंचाइजी के लिए बस एक छोटी सी चेतावनी है! अगर इस एक चमत्कारी पारी के झांसे में आकर आदरणीय संजीव गोयनका जी पंत की पिछली 8-10 फ्लॉप पारियों को भुला बैठते हैं और अगले सीजन के लिए उन्हें फिर से रिटेन कर लेते हैं... तो यकीन मानिए, अगले साल भी लखनऊ सुपर जायंट्स का हश्र ऐसा ही दर्दनाक होने वाला है और फैंस को फिर से मायूसी ही हाथ लगेगी।