31/05/2026
रेलवे ओवर ब्रिज गिरा, सवालों के मलबे में दब गई जवाबदेही!
गुजरात के आणंद में निर्माणाधीन रेलवे ओवर ब्रिज का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई। राहत और बचाव टीमों को मौके पर भेजा गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे पुल की मजबूती आखिर कहां गायब हो गई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कोई पुल बनता है तो जनता यह उम्मीद करती है कि वह वर्षों तक सुरक्षित रहेगा। लेकिन यदि निर्माण के दौरान ही पुल का हिस्सा गिर जाए तो लोगों के मन में गुणवत्ता, निगरानी और निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
हर बार किसी हादसे के बाद जांच के आदेश दिए जाते हैं। अधिकारी मौके का निरीक्षण करते हैं। रिपोर्ट तैयार होती है। लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार बार क्यों हो रही हैं? क्या निर्माण सामग्री में कमी थी? क्या तकनीकी लापरवाही हुई? क्या निगरानी में चूक हुई? या फिर जिम्मेदार लोगों ने सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया?
देश के अलग अलग हिस्सों में पुल, सड़क और सरकारी परियोजनाओं से जुड़े हादसे समय समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे में जनता के मन में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि विकास के नाम पर खर्च होने वाला पैसा आखिर कितना सुरक्षित और टिकाऊ निर्माण दे रहा है।
फिलहाल प्रशासन द्वारा जांच की बात कही जा रही है। लेकिन लोगों की मांग है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि पुल का गिरना सिर्फ सीमेंट और सरिए का टूटना नहीं होता, यह जनता के भरोसे पर भी चोट करता है।
जनता का सवाल सीधा है। अगर निर्माणाधीन पुल सुरक्षित नहीं है, तो उसके पूरा होने के बाद उस पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
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