24/02/2026
होलिका दहन सिर्फ एक परंपरा नहीं,
यह सत्य की जीत और अहंकार के अंत की कहानी है।
प्रह्लाद के पास
न सेना थी,
न शस्त्र…
बस अटूट विश्वास था।
और वही विश्वास
अग्नि से भी बड़ा निकला।
🔥 होलिका जल गई, पर भक्ति अमर रही।
इसीलिए होली से पहले
होलिका दहन होता है—
ताकि हम याद रखें कि
अहंकार कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो,
अंत में जलता वही है।
🌸 अगले दिन रंग लगते हैं,
क्योंकि सत्य की जीत के बाद
जीवन को फिर से रंगीन बनाना ज़रूरी होता है।
🙏 इस होली,
सिर्फ रंग मत लगाना…
अपने भीतर के अहंकार को जला देना।
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ताकि होली का असली अर्थ ज़िंदा रहे।