14/05/2026
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में लौरिया अरेराज में सम्राट अशोक का एक प्रसिद्ध पत्थर का खंभा (स्तंभ) है।
2013-2014 में पुरातत्व विभाग ने सोचा कि इस खंभे के आसपास ज़मीन के नीचे कुछ दबा हो सकता है। इसलिए खंभे के दाएं-बाएं खुदाई शुरू की गई।
खुदाई में पता चला कि यहाँ कभी एक बौद्ध मठ हुआ करता था यानी वो जगह जहाँ बौद्ध भिक्षु (साधु) रहते और पूजा करते थे। यह मठ करीब 2000 साल पुराना है।
मठ की बनावट कुछ ऐसी थी —
बीच में एक खुला आंगन था, आंगन के चारों तरफ छोटे-छोटे कमरे थे जहाँ भिक्षु रहते थे।
एक कमरे में पूजा की जगह भी थी, जहाँ शायद कोई छोटा स्तूप या बुद्ध की मूर्ति रखी होती थी, फर्श पकी ईंटों से बना था और सबसे खास बात पानी निकालने के लिए ज़मीन के नीचे नालियाँ भी बनी थीं!
खंभे के दूसरी तरफ यानि पश्चिम दिशा में खुदाई में एक गोल ईंट की संरचना मिली जो शायद किसी स्तूप की नींव थी, और घुमावदार ईंटों से बना एक कुआं भी मिला।
मिट्टी के बर्तन, कटोरे, घड़े, ढक्कन आदि, जिन पर सुंदर फूल-पत्ती की नक्काशी थी, मिट्टी के सांप के फन (शायद पूजा में काम आते थे), मनके और पहिए (खिलौने या सजावट के सामान), गुलेल की गोलियाँ (मिट्टी की छोटी-छोटी गोलियाँ)
लौरिया(अरेराज) सिर्फ अशोक के खंभे के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े बौद्ध धार्मिक केंद्र के रूप में भी महत्वपूर्ण था। यहाँ कभी भिक्षु रहते थे, पूजा होती थी और एक व्यवस्थित जीवन चलता था — और यह सब आज से करीब 2000 साल पहले की बात है!
District Administration,East Champaran,Motihari