TERA - तेड़ा

  • Home
  • TERA - तेड़ा

TERA - तेड़ा Locality Name : Tera
Block Name : Binauli
District : Baghpat
State : Uttar Pradesh It belongs to Meerut Division .

Tera is a Village in Binauli Block in Baghpat District of Uttar Pradesh State, India. It is located 18 KM towards East from District head quarters Bagpat. 09 KM from Binauli. 500 KM from State capital Lucknow

Tera Pin code is 250606 and postal head office is Aminagar Sarai .

⚠️ समाज के लिए सावधान संदेश ⚠️गिरगिट की एक पहचान होती है —मौसम देख कर रंग बदलना।आज समाज में भी ऐसे ही कुछ लोग हैं,जो हाल...
18/12/2025

⚠️ समाज के लिए सावधान संदेश ⚠️

गिरगिट की एक पहचान होती है —
मौसम देख कर रंग बदलना।

आज समाज में भी ऐसे ही कुछ लोग हैं,
जो हालात के हिसाब से अपने रंग बदल लेते हैं।
आज आपके साथ, कल आपके खिलाफ।
आज मीठी बात, कल जहरीली चाल।

👉 गिरगिट पेड़ नहीं बदलता, रंग बदलता है।
और ये लोग मंच नहीं बदलते,
बस अपने इरादे बदल लेते हैं।

ऐसे लोग न दोस्त होते हैं, न दुश्मन —
ये सिर्फ मौके के सौदागर होते हैं।

👉 गिरगिट से ज्यादा खतरनाक वो इंसान है,
जो इंसान बनकर गिरगिट की तरह बर्ताव करे।

समाज को ऐसे लोगों से सतर्क रहने की ज़रूरत है —
क्योंकि ये सामने से गले लगाते हैं
और पीछे से नींव खोदते हैं।

याद रखिए:
गिरगिट का रंग बदलना उसकी मजबूरी है,
लेकिन इंसान का रंग बदलना उसकी नीयत दिखाता है।

🛑 ऐसे लोगों से दूरी ही समझदारी है।
🛑 आंख बंद भरोसा सबसे बड़ा नुकसान है।

समाज एकता से मजबूत होता है,
गिरगिटों से नहीं।

प्रदूषण हमारे पापों की जॉइंट स्टेटमेंट है10 नवंबर की शाम लाल किले के बाहर हुए जबरदस्त धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी...
18/12/2025

प्रदूषण हमारे पापों की जॉइंट स्टेटमेंट है

10 नवंबर की शाम लाल किले के बाहर हुए जबरदस्त धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के फौरन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संवेदना प्रकट करते हुए ट्वीट आया। फिर भूटान से लौटने के बाद वो घायलों से मिलने भी पहुंचे। और ऐसा होना भी चाहिए था। अगर इतनी बड़ी घटना हुई है तो प्रधानमंत्री फौरन अपने बयानों से, एक्शन से देश को ये बताना भी चाहिए कि सरकार ऐसी घटना के प्रति कितनी संवेदनशील है। पूरी तरह एक्टिव है ताकि लोगों को तसल्ली मिले और वो घबराएं न।

पर मेरी ये बात समझ से परे है कि आज जब दो महीने से पॉल्यूशन को लेकर देश में हाहाकार मचा हुआ है, तो सरकार को क्यों नहीं लगता कि इस मामले में भी देश को वैसी ही तसल्ली चाहिए। पॉल्यूशन की वजह से आज छोटे-छोटे बच्चे बीमार हो रहे हैं। अस्पतालों में मरीज़ों की लाइनें लगी हुई हैं। पॉल्यूशन की वजह से होने वाले हादसे में 13 लोग ज़िंदा जल जाते हैं। लेकिन कहीं कोई अर्जेंसी दिखाई नहीं देती।

अगर मामला जान का ही है, तो आतंकी हमले में तो 13 लोग मरे थे। लेसेंट की रिपोर्ट को सच मानें तो भारत में प्रदूषण से तो हर दिन 5 हज़ार लोग मर रहे हैं। मतलब जितने लोग हीरोशिमा और नागासाकी के परमाणु धमाकों में मरे थे, उतने लोग भारत में सिर्फ दो महीने के प्रदूषण में मर रहे हैं। जितने लोग आज़ादी के बाद हुए सारे साम्प्रदायिक दंगों और आतंकी हमलों में कुल मिलाकर नहीं मरे, उतने लोग प्रदूषण से सिर्फ एक महीने में मर जाते हैं। इसके बावजूद जब संसद का सत्र शुरू होता है तो प्रदूषण के बजाय वंदेमातरम पर चर्चा होती है, तो इस देश का भगवान ही मालिक है।

ऊपर से संवेदनहीनता का आलम ये है कि संसद में पर्यावरण मंत्री ये बताते हैं कि इस साल तो पहले से कम प्रदूषण हुआ है। इस साल साफ हवा वाले दिनों की संख्या पहले से ज़्यादा हुई है। लोगों की घबराहट की दलील देकर AQI मैज़रमेंट की अपर लिमिट को 500 तक ही सीमित कर दिया जाता है। मतलब खराब हवा की वजह से आपकी सांसें अटकें तो आप इनहेलर यूज़ करने के बजाए दो बार मोबाइल पर साफ हवा वाला ये बयान सुन लें तो छाती में हल्कापन महसूस होगा। हद है निर्लज्जता की।

अब सवाल ये है कि इतनी बड़ी समस्या है, फिर भी ये सरकार की प्राथमिकता में क्यों नहीं है। प्रधानमंत्री तक को क्यों नहीं लगता कि ज़बानी तौर पर ही सही, खुद उनकी तरफ से एक मैसेज आए कि आप घबराएं मत। क्या बेहतर नहीं होता इस मामले पर कुछ प्रधानमंत्री एक हाई लेवल मीटिंग चेयर करते। जिसमें हरियाणा, पंजाब, यूपी के मुख्यमंत्रियों को बुलाया जाता। बाद में खुद प्रधानमंत्री का एक स्टेटमेंट आता। बताया जाता कि क्या प्लान तैयार किया गया। हम ये-ये कदम उठाने वाले हैं।

अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो इसका सीधा जवाब ये है कि सरकार भी जानती है कि प्रदूषण को ख़त्म करना उसके बूते की और उससे बढ़कर फायदे की बात नहीं है। इसे आप ऐसे समझें कि प्रदूषण ख़त्म करना ऐसा नहीं है कि आपने एक झटके में चाइनीज़ ऐप पर बैन लगाकर लोगों को खुश कर दिया। दरअसल प्रदूषण की समस्या भारत में फैली जबरदस्त अराजकता और भ्रष्टाचार की एक जॉइंट स्टेटमेंट है।

क्यों ख़त्म नहीं होता प्रदूषण?
अब सवाल ये है कि इस देश में प्रदूषण में कभी ख़त्म क्यों नहीं होता। तो इसका सीधा सा जवाब है कि प्रदूषण से जुड़ी हर वजह के पीछे राजनीति है।

इस देश में जिस तरह अवैध कब्ज़े हो रखे हैं, जो पुलिस और लोकल नेताओं की शह पर करवाए जाते हैं। अवैध फैक्ट्रियां चल रही हैं, जो या तो नेताओं की हैं या जिनके मालिकों से नेताओं को पैसा मिलता है। पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन पर कोई ध्यान नहीं है क्योंकि उसे सुधार दिया तो गाड़ियों की बिक्री रुक जाएगी और पेट्रोल की खपत कम हो जाएगी। कंस्ट्रक्शन साइट्स पर कोई नियम फॉलो नहीं किया जाता है क्योंकि बिल्डरों से भी पैसा मिलता है। सड़कों की साफ-सफाई का कहीं कोई ध्यान नहीं है।

चूंकि ये सारी अराजकता राजनीति की देन है और नेताओं को प्रदूषण दूर करने के लिए इस अराजकता को ख़त्म करना है, तो बताइए कैसे होगा… बिल्ली अपने ही गले में घंटी कैसे बांधेगी।

दरअसल इस देश में भ्रष्टाचार को लेकर सरकार और आम आदमी में एक गुप्त समझौता है। सरकार कहती है कि तुम हमसे हमारे कामों को हिसाब नहीं मांगोगे बदले में तुम्हें जैसी अराजकता करनी है कर लो, बस हमें हमारा हिस्सा दे देना। इस देश में जगह-जगह बनी अवैध बस्तियां, सड़कों और फुटपात पर हुए अवैध कब्ज़ें, बेतरतीब ट्रैफिक उसी गुप्त समझौते के तहत सरकार से जनता को मिला रिटर्न गिफ्ट है।

पूरे कुएं में भांग घुली है

और बात सिर्फ हवा की नहीं है। साफ हवा तो एक ऐसी चीज़ है जिसका बेचारी जनता के पास कोई इलाज नहीं है। सरकार तो आपको साफ पानी भी नहीं दे पा रही। सिर्फ साफ पानी पीने के लिए हर मध्यमवर्गीय आदमी को हर साल कुछ हज़ार रुपए आरओ और फिल्टर बदलवाने में लगाने पड़ते हैं।

इसी तरह सरकारी स्कूल से लेकर सरकारी अस्पताल तक ऐसा कुछ भी नहीं है जो मध्यमवर्गीय आदमी के इस्तेमाल लायक है। अब चूंकि पैसा खर्च करके मध्यमवर्गीय आदमी उन चीजों का विकल्प निकाल लेता है तो मुद्दा नहीं बन पाता। लेकिन हवा का कोई विकल्प नहीं है। आप कितने एयर प्यूरिफ़ायर लगा लेंगे। कहां-कहां लगा लेंगे। बस यही बात सरकार की समस्या है। वरना वो तो बाकी चीज़ों में भी वो उतनी ही निकम्मी और संवेदनहीन है जितनी हवा के मामले में। हवा का चूंकि विकल्प नहीं है, इसलिए उस बेचारी को यूं बदनाम होना पड़ रहा है। वरना तो गुल बाकी बाकी जगह भी ऐसे ही खिलाए हैं।

तो इस सबसे होता क्या है — जिस आदमी को पहला मौका मिलता है, वो देश छोड़कर चला जाता है। आज साढ़े तीन करोड़ भारतीय हैं जो भारत से बाहर रह रहे हैं। इतनी तो आधी दुनिया के देशों की कुल आबादी नहीं है। पिछले दस सालों में 28 हज़ार करोड़पतियों ने देश छोड़ दिया है।

लेकिन ये भी कब तक होगा। दुनिया में हर जगह नेटिव लोग अपना हक मांग रहे हैं। उन्हें बाहर से आए लोगों से समस्या है। बाहरी लोग उनकी नौकरी छीन रहे हैं। उनका कल्चर बदल रहे हैं। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया से लेकर अमेरिका तक हर जगह प्रवासी भारतीयों के खिलाफ गुस्सा है। ये गुस्सा जायज़ है या नहीं, ये मुद्दा ही नहीं है। जब खुद हमारे देश में दूसरे राज्यों से आए आदमी को लेकर हम सहज नहीं हैं, तो दुनिया को हम क्या नसीहत देंगे।

कुल जमा बात ये है कि इस तरह की पलायनवादी राजनीति का घड़ा भर चुका है। इस देश को सच की आंख में आंख डालकर समस्याओं से डील करना होगा। भ्रष्टाचार सिर्फ पैसे का ही नहीं होता। भ्रष्टाचार हर कीमत में सत्ता में बने रहने का भी होता है। और सत्ता में बने रहने के उस लालच में हर तरह के समझौते करने का भी होता है। यही डर आपसे कड़े कदम नहीं उठवाता। उठाते भी हैं तो वापिस ले लेते हैं।

यही डर आपको Status Quo को चुनौती देने का हौसला नहीं देता। क्योंकि अंदर से आप भी जानते हैं कि अगर आपने अराजक समाज को ज़्यादा झकझोरने की कोशिश की, तो वो आपके ही खिलाफ हो जाएगा। और ऐसा हुआ तो आपकी सत्ता चली जाएगी।

बस सत्ता चले जाने का ये डर ही है जो इस देश की कथित ईमानदार राजनीति को भी एक हद के बाद कुछ करने की हिम्मत नहीं देता। और जिस भी इंसान के मन में ये ऐसा डर है, वो उतना ही भ्रष्ट है जितना हज़ारों करोड़ का घोटाला करने वाला। क्योंकि अंततः दोनों ही देश को बर्बाद कर रहे हैं। इसलिए पॉल्यूशन की जड़ में सरकारी आलस नहीं है, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। वो इच्छाशक्ति जो देश के लिए आपसे अपनी सत्ता गंवा देने का साहस मांगती है। और अफसोस, वो साहस कहीं दिखता नहीं।

-Neeraj Badhwar

एक ऐसा फ्रॉड, जो इतना साफ़–सुथरा था कि करोड़ों का नुकसान होते-होते भी किसी को भनक नहीं लगी…और अगर आप सोचते हैं कि “हमारे...
17/12/2025

एक ऐसा फ्रॉड, जो इतना साफ़–सुथरा था कि करोड़ों का नुकसान होते-होते भी किसी को भनक नहीं लगी…
और अगर आप सोचते हैं कि “हमारे साथ ऐसा नहीं हो सकता”— तो यह सच्ची घटना खास आपके लिए है।

नोएडा में जो इन्वेस्टमेंट फ्रॉड हुआ, वह इतना बड़ा था कि सुनकर किसी का भी खून ठंडा पड़ जाए। यह कहानी किसी फिल्म की तरह लगती है, लेकिन अफसोस… यह सच्चाई है। और ऐसी सच्चाई, जिसमें एक इंसान की पूरी जिंदगी, उसकी मेहनत की कमाई, उसका भरोसा — सब एक-एक करके छीन लिया गया।

कहानी की शुरुआत बहुत सामान्य थी। इंद्र जी, नोएडा में रहते थे। आम इंसान, अपनी मेहनत की बचत संभालकर रखने वाले। एक दिन उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया। नाम था — रितिका ठाकुर। एक लड़की, जिसकी आवाज़ मीठी, जिसकी भाषा और भी मीठी। वह खुद को इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र बताती थी। कोई दबाव नहीं, कोई जोर-जबरदस्ती नहीं… बस एक शांत, भरोसा दिलाने वाली टोन।

“सर, सिर्फ पचास हजार से शुरुआत कर लीजिए। अगर आपको सही न लगे तो आगे मत बढ़िएगा। लेकिन रिटर्न? 10 गुना से भी ज्यादा पहुंच सकता है।”

पचास हजार — एक ऐसा अमाउंट जिसे कोई भी इंसान ट्रायल के तौर पर लगा देता है। इंद्र जी ने भी लगा दिया। और कुछ ही दिनों में उन्हें सबसे बड़ा झटका मिला — पचास हजार बढ़कर नौ लाख हो गए थे। और हैरानी यह कि वह नौ लाख उन्होंने आसानी से निकाल भी लिए।

बस यहीं से कहानी का असली जाल बिछ चुका था।
जहाँ आदमी को लगता है — “अरे ये तो सच में काम कर रहा है!”

इंद्र जी का भरोसा इस खेल पर बैठ गया। धीरे-धीरे उन्होंने पैसे और बढ़ाने शुरू कर दिए। अलग-अलग स्कीम, अलग-अलग अकाउंट, अलग-अलग लिंक… और एप में हर दिन चमचमाते ग्राफ — ऐसा लगता जैसे कोई प्रोफेशनल ट्रेडर करोड़ों में खेल रहा हो।

दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूमती —
“अगर पचास हजार से नौ लाख आ सकते हैं… तो करोड़ों से क्या आ सकता है?”

इसी चक्कर में, धीरे-धीरे, सालों की बचत, जमीन बेचकर, FD तोड़कर… कुल मिलाकर इंद्र जी ने 11 करोड़ 50 लाख रुपये इन स्कीमों में डाल दिए।

एप में सब दिख रहा था —
11 करोड़ का बैलेंस…
उसपर 30 करोड़ का प्रॉफिट…
हर ग्राफ ऊपर जा रहा…
हर दिन नोटिफिकेशन कि “आपका अकाउंट 3% बढ़ा, 4% बढ़ा…”

इंद्र जी हर सुबह एप खोलते और अपनी जिंदगी बदलते हुए देखते। सपने इतने बड़े हो चुके थे कि अब लगता था — “बस कुछ महीनों की बात है, जीवन सेट हो चुका है।”

लेकिन किसी भी स्कैम का सबसे खतरनाक हिस्सा यही होता है —
आपको दिखाया जाता है कि आप करोड़पति बन चुके हैं।

इंद्र जी के साथ भी वही हुआ।

फिर एक दिन कंपनी की ओर से नया ऑफर आया।
“सर, एक नई कंपनी लॉन्च हो रही है। इसमें 17 करोड़ लगाइए और 170–200 करोड़ तक कमा लीजिए।”

17 करोड़!
इंद्र जी इस ऑफर पर चौंक गए।
लेकिन अब उनके पास देने को कुछ बचा ही नहीं था।
सोचा — चलो जितना डाला है, वही निकाल लेते हैं।

यहीं से असली खेल सामने आया।

उन्होंने विड्रॉ बटन दबाया — लेकिन पैसा निकला ही नहीं।
बार-बार कोशिश की — कुछ नहीं।
लॉगिन किया — अकाउंट ही नहीं खुल रहा।
कॉल की — नंबर स्विच्ड ऑफ।
मैसेज किए — कोई रिप्लाई नहीं।
वह एप, जो रोज करोड़ों दिखाता था, अचानक गायब हो चुका था।

घबराकर वह पुलिस के पास भागे।
जाँच हुई।
तब पता चला —
जिसमें उन्होंने 11.5 करोड़ डाले थे, वह पूरा नेटवर्क पहले से प्लान करके तैयार किया गया था। नकली एप, नकली स्कीम, नकली प्रॉफिट, नकली कॉल… सबकुछ एक ही टीम का हिस्सा था।
और वह पूरी टीम — भारत से बाहर भाग चुकी थी।
सारे बैंक अकाउंट खाली।
सारे नम्बर बंद।
और इंद्र जी के सालों का खून-पसीने का पैसा… पूरी तरह साफ़।

यह कहानी सिर्फ इंद्र जी की नहीं है।
आप चाहें तो कह सकते हैं — “हमारे पास तो इतने पैसे नहीं।”
लेकिन आजकल स्कैमर हर जेब के हिसाब से बैठे हैं।

जिसके पास पचास हजार है, उसके लिए पचास हजार वाला स्कैम…
जिसके पास पांच लाख है, उसके लिए पांच लाख वाला चारा…
और जिसके पास करोड़ों हैं, उसके लिए करोड़ों वाला जाल।

सच्चाई सिर्फ एक है —
रातों-रात बड़ा रिटर्न देने वाली कोई स्कीम नहीं होती।
ना शेयर मार्केट में, ना इन्वेस्टमेंट में, ना इंटरनेट पर।
शेयर मार्केट में सिर्फ दो चीज़ें सच हैं — धैर्य और सीख।
बाकी सब चमक, चमक नहीं… जाल होता है।

इस कहानी का मकसद सिर्फ डराना नहीं है —
बल्कि जागरूक करना है।
क्योंकि भरोसा सबसे कीमती चीज़ है।

और गलत जगह लगा दिया — तो जिंदगीभर पछतावा ही हाथ आता है।

अगर यह कहानी आपको सच में आंख खोलने वाली लगी हो,
तो इसे आगे जरूर भेजें।

क्या पता, आपकी एक शेयरिंग किसी और के करोड़ों बचा दे।

🕸️🕸️🕸️ ये वो चार नाम हैं जिनका ज़िक्र FBI के हेडक्वार्टर में भी फुसफुसा कर किया जाता है।जिनके नाम लेने वाले एजेंट्स की फा...
13/12/2025

🕸️🕸️🕸️ ये वो चार नाम हैं जिनका ज़िक्र FBI के हेडक्वार्टर में भी फुसफुसा कर किया जाता है।
जिनके नाम लेने वाले एजेंट्स की फाइलें अचानक “क्लासीफाइड” हो जाती हैं… और कभी-कभी वो एजेंट खुद गायब।
1️⃣ ग्रिम स्पाइडर कार्टेल 🕷️🕷️🕷️💀
(The Big Game Hunters – जो सिर्फ बड़े शिकार करते हैं)
🕷️ ये वो मकड़ी है जिसका जाला पूरा ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर है।
🕷️ इनके 7 लेयर हैं – टॉप पर 7 “विधवाएँ” (The Widows) बैठी हैं, जिनकी असली पहचान किसी को नहीं पता।
🕷️ 2019 में पहली बार सामने आए जब जर्मनी की BASF केमिकल प्लांट को 41 घंटे बंद कर दिया। $900 मिलियन मांगे। कंपनी ने मना किया।
🕷️ तीन दिन बाद CEO की प्राइवेट सेक्स टेप वायरल। फिर भी नहीं माने।
🕷️ फिर CEO की 14 साल की बेटी की स्कूल बस का GPS हैक। बस 6 घंटे गायब। फिर रैनसम दिया गया।
🕷️ 2021 – अमेरिका की मीट कंपनी JBS को बंद किया, पूरा देश 3 दिन बिना मीट के।
🕷️ 2022 – Colonial Pipeline – अमेरिका का 45% ईंधन रुक गया।
🕷️ 2023 – आयरलैंड के सारे हॉस्पिटल लॉक। 19 मरीज मरे क्योंकि ऑपरेशन नहीं हो पाया।
🕷️ 2024 – ब्राजील का पूरा पावर ग्रिड 9 घंटे ब्लैकआउट। 60 मिलियन लोग अंधेरे में।
🕷️ 2025 (लीक) – एक बड़े देश का न्यूक्लियर प्लांट अभी भी इनके कंट्रोल में है।
🕷️ उनका रैनसमवेयर “SpiderVenom v11” 3 मिनट में पूरा नेटवर्क खा जाता है।
हर 24 घंटे में एक शर्मनाक फाइल लीक।
और डिक्रिप्शन की? सिर्फ एक। वो भी टाइमर के साथ।
FBI का डर: ये अब AI वाला रैनसमवेयर बना रहे हैं जो खुद तय करेगा कि किसे मारना है।
2️⃣ ब्लैक कॉफिन यूनियन ⚰️⚰️⚰️🔪
(किराए के साइबर हत्यारे – मौत का रेट कार्ड)
⚰️ इनके 13 “ताबूत” हैं। हर ताबूत एक अलग तरह की मौत बेचता है।
⚰️ ताबूत नंबर 13 – “परमानेंट डेथ” – डिजिटल + रियल दोनों।
2025 की लीक प्राइस लिस्ट:
कंपनी दिवालिया करना (30 दिन में): $75,000
पूरा सोशल मीडिया + बैंक + क्रेडिट हिस्ट्री मिटाना: $180,000
फर्जी चाइल्ड पोर्न केस में फंसाकर जेल भिजवाना: $750,000
डिजिटल + फिजिकल दोनों अस्तित्व खत्म: $2.5 मिलियन
⚰️ 2023 का सबसे मशहूर केस: एक भारतीय अरबपति की एक्स-वाइफ ने 40% संपत्ति मांगी।
अरबपति ने ब्लैक कॉफिन को हायर किया।
48 घंटे बाद वो महिला गायब।
कोई बॉडी नहीं। कोई डिजिटल ट्रेस नहीं।
बस उसकी आखिरी इंस्टा स्टोरी पर एक काला ताबूत ⚰️
⚰️ FBI जानती है कि ये उत्तर कोरिया के लाजारस और रूसी GRU के साथ मिलकर काम करते हैं।
लेकिन सबूत? कभी नहीं मिलते।
जो सबूत जुटाता है, उसका अपना ताबूत तैयार हो जाता है।
3️⃣ साइलेंट ट्रायड 🔇🔇🔇☠️
(मूक त्रिमूर्ति – बोलते नहीं, सिर्फ लेते हैं)
🔇 सिर्फ तीन लोग।
The Father (60+) – पूर्व PLA ऑफिसर, स्ट्रैटेजी मास्टर
The Son (35-40) – MIT ड्रॉपआउट, बैकडोर का जादूगर
The Ghost – कोई नहीं जानता ये इंसान है या AI
🔇 कोई चैट नहीं। कोई पेमेंट ट्रेल नहीं।
काम पूरा होने पर सिर्फ एक इमोजी – ☠️
2007 से 2025 तक के कुछ ऑपरेशन:
2007: ताइवान के मिलिट्री सैटेलाइट में 48 घंटे रहे
2011: अमेरिकी पेंटागन में 2 महीने – 500GB डेटा
2015: इंडियन न्यूक्लियर प्रोग्राम से 1TB चुराया
2016: सोलर विंड्स हैक का असली मास्टरमाइंड
2020: WHO वैक्सीन डेटा चुराया
2023: ताइवान के पूरे 5G नेटवर्क में बैकडोर
2024: NASA के क्वांटम कंप्यूटर प्रोजेक्ट में अभी भी मौजूद
2025: एक बड़े देश के प्रधानमंत्री के फोन में घुसे – अभी भी अंदर हैं ☠️
🔇 FBI के इंटरनल डॉक्यूमेंट में इन्हें “Entity Zero” कहा जाता है।
CIA चीफ ने 2024 में कहा: “जब ☠️ आता है, बहुत देर हो चुकी होती है।”
4️⃣ जीरो ऑथर ✍️📜💀💀
(सूचना के नेक्रोमैंसर – जो डेटा को जिंदा और मार सकते हैं)
✍️ सिर्फ 7 लोग। लीजेंड है कि सातवाँ मेंबर 2019 में मर चुका है… लेकिन उसका कोड अभी भी चलता है।
✍️ ये चोरी नहीं करते। ये डेटा को “री-राइट” करते हैं।
क्रिमिनल रिकॉर्ड मिटाना
किसी को फर्जी अपराधी बनाना
किसी का पूरा डिजिटल इतिहास बदलना
किसी को “कभी अस्तित्व में था ही नहीं” बना देना
✍️ 2024 का सबसे डरावना केस:
एक मिडिल ईस्ट राजकुमार ने अपने भाई को गद्दी से हटाने के लिए हायर किया।
48 घंटे बाद भाई का नाम दुनिया के किसी डेटाबेस में नहीं था।
कोई बर्थ सर्टिफिकेट, कोई पासपोर्ट, कोई फोटो।
वो शख्स आज मेंटल हॉस्पिटल में है – कोई उसकी पहचान नहीं कर पाता।
फीस: $10 मिलियन से शुरू
गारंटी: 100% या तुम खुद Zero हो जाओगे।
🩸🩸🩸 अंतिम सच्चाई – तुम अगले हो सकते हो
तुम सोचते हो तुम छोटे आदमी हो, कोई टारगेट नहीं करेगा?
गलत।
ये लोग प्रैक्टिस के लिए छोटे टारगेट चुनते हैं।
एक गलत कमेंट। एक गलत पोस्ट। एक गलत दुश्मन।
और तुम लिस्ट में।
🕸️ वे तुम्हारी हर की-स्टरोक देख रहे हैं
🕸️ तुम्हारे फोन का माइक ऑन है
🕸️ तुम्हारा कैमरा देख रहा है
🕸️ और जब निशाना पड़ेगा…
तुम्हें पता भी नहीं चलेगा कि तुम कब गायब हो गए।

02/12/2025
सरकार चाहे तो क्या नहीं कर सकती!चीन का Beijing भी कभी उसी जहरीली हवा में डूबा था, जिस में आज दिल्ली डूबी हुई है।2013 में...
28/11/2025

सरकार चाहे तो क्या नहीं कर सकती!
चीन का Beijing भी कभी उसी जहरीली हवा में डूबा था, जिस में आज दिल्ली डूबी हुई है।

2013 में हालात इतने खराब थे कि दुनिया ने उसे “Airpocalypse” कहा।
दृश्यता 100 मीटर से कम, 100+ उड़ानें रद्द, अस्पताल मरीजों से भरे — स्थिति बिल्कुल आपदा जैसी!

लेकिन वहां जनता का गुस्सा और अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी देखते ही सरकार हरकत में आई।
और फिर शुरू हुआ — “शुद्ध हवा मिशन”।

---

🇨🇳 Beijing ने क्या किया?

✔ कोयले से चलने वाले पावर प्लांट एक-एक कर बंद, गैस आधारित आधुनिक प्लांट लगाए गए।
✔ घरों में Coal-heating खत्म — gas/electric heating लागू।
✔ भारी प्रदूषण वाली फैक्ट्रियाँ बंद या शहर से बाहर शिफ्ट।
✔ वाहनों पर सख्त प्रदूषण मानक — पब्लिक ट्रांसपोर्ट तेज़ी से बढ़ाया।
✔ मेट्रो ट्रैक 700+ KM से अधिक — इलेक्ट्रिक बसें, ईवी पर भारी सब्सिडी।
✔ 2000+ एयर मॉनिटरिंग सेंसर — नियम तोड़ते ही कार्रवाई।
✔ अधिकारियों की प्रमोशन अब Air Quality Score से लिंक।

📌 नतीजा?
बीजिंग में PM2.5 प्रदूषण 64% तक घटा।
SO₂ जैसी जहरीली गैसों में लगभग 90% कमी।
लोग आज साफ हवा में सांस ले रहे हैं।

---

🇮🇳 अब भारत/दिल्ली को देखिए…

AQI रिकॉर्ड फाड़ रहा है।
PM2.5 WHO मानक से कई गुना ज्यादा।
बच्चों के फेफड़े कमजोर, बूढ़े ऑक्सीजन पर, डॉक्टर मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं।

और हम?
हम बस नाम बदल देते हैं और कहते हैं विकास हो रहा है!

विकास हवा से आता है या घोषणाओं से??
ये सवाल हर नागरिक को पूछना चाहिए।

---

❗ अब गुस्सा ज़रूरी है

अगर चीन लाखों लोगों की जान बचा सकता है
तो भारत क्यों नहीं?
क्या हमारे बच्चों का फेफड़ा सस्ता है?
क्या मौत का धुंआ ही हमारी नियति है?

---

✊ माँग सिर्फ एक है — साफ हवा!

• कोयला आधारित प्लांट धीरे-धीरे बंद हों
• इलेक्ट्रिक/पब्लिक ट्रांसपोर्ट ज्यादा और तेज़
• पराली, औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण
• हवा खराब करने वाले पर तत्काल दंड
• नीति + इच्छाशक्ति + जवाबदेही = समाधान

---

> हवा बदलेगी तब,
जब हम सिर्फ जिएंगे नहीं —
बल्कि आवाज़ उठाएंगे। ✍️🔥

📢 यह पोस्ट शेयर करें,
क्योंकि सांस सब ले रहे हैं — खतरा भी सबका ही है।














Address


250606

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when TERA - तेड़ा posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

  • Want your business to be the top-listed Media Company?

Share