Prasanna Kumar Das

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प्रभु जगन्नाथ की अनंत शरणगरजते सागर की लहरों में, जब भय ने रूप दिखाया,चारों ओर अंधियारा छाया, संकट ने मन घबराया।तब नभ से...
03/06/2026

प्रभु जगन्नाथ की अनंत शरण

गरजते सागर की लहरों में, जब भय ने रूप दिखाया,
चारों ओर अंधियारा छाया, संकट ने मन घबराया।
तब नभ से एक दिव्य प्रकाश, जग को राह दिखाने आया,
नीलवर्ण प्रभु जगन्नाथ ने अपना करुण रूप सजाया।

विशाल स्वरूप धारण करके, सागर मध्य विराजे हैं,
भक्तों की रक्षा करने को, दोनों कर फैलाए हैं।
उनकी पावन हथेलियों में, एक परिवार समाया है,
जैसे जग का हर दुख उनका अपना ही बन आया है।

माता की आँखों में आँसू, बच्चों के मन में डर भारी,
किन्तु प्रभु की छाया पाकर, मिट गई सारी लाचारी।
वृद्ध पिता भी आश्वस्त हुए, जब प्रभु ने उन्हें थामा,
भक्ति के उस अमृत क्षण में, मिला सभी को सच्चा धाम।

पीछे खड़ा श्रीमंदिर पावन, गौरव की गाथा गाता है,
जगन्नाथ का दिव्य संदेश, हर हृदय तक पहुँचाता है।
जो भी उनकी शरण में आए, कभी न वह निराश रहे,
प्रेम, दया और विश्वासों से उसका जीवन खास रहे।

सागर की ऊँची लहरें भी, उनके आगे झुक जाती हैं,
प्रभु की इच्छा के सम्मुख, सारी शक्तियाँ रुक जाती हैं।
वे ही रक्षक, वे ही पालक, वे ही जीवन आधार हैं,
उनके चरणों में बसते सारे जग के शुभ संस्कार हैं।

जब-जब संकट घोर बढ़ेगा, जब मन आशा खो बैठेगा,
तब-तब जग का नाथ हमारा, हाथ पकड़कर साथ चलेगा।
करुणा जिनकी सीमा रहित, प्रेम जिनका अपार है,
ऐसे दीनबंधु जगन्नाथ को शत-शत बार नमस्कार है।

हे नाथ, हमें भी शक्ति देना, सेवा का सुंदर वरदान,
हर प्राणी में देख सकें हम, आपका ही दिव्य सम्मान।
जब तक साँसें चलती जाएँ, नाम तुम्हारा गाते रहें,
जगन्नाथ प्रभु की महिमा से जीवन अपना सजाते रहें।॥

प्रभु जगन्नाथ की महिमाहे प्रभु जगन्नाथ, नीलाचल के स्वामी,आपकी महिमा का वर्णन करना सरल नहीं।आप अनंत हैं, असीम हैं, और भक्...
03/06/2026

प्रभु जगन्नाथ की महिमा

हे प्रभु जगन्नाथ, नीलाचल के स्वामी,
आपकी महिमा का वर्णन करना सरल नहीं।
आप अनंत हैं, असीम हैं, और भक्तों के हृदय में सदा विराजमान हैं।
आपकी बड़ी-बड़ी करुणामयी आँखें संसार के प्रत्येक जीव पर समान कृपा बरसाती हैं।

पुरी धाम में स्थित आपका दिव्य मंदिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। जब भक्त आपके दर्शन करते हैं, तब उनके मन की व्याकुलता शांत हो जाती है और जीवन में नई आशा का संचार होता है। आपकी मुस्कान में प्रेम है, आपकी दृष्टि में दया है, और आपकी शरण में असीम सुख है।

रथयात्रा के पावन अवसर पर जब आप अपने विशाल रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं भगवान अपने भक्तों के द्वार तक आ रहे हों। उस दिव्य दृश्य को देखकर हर हृदय भक्ति से भर उठता है। आपके नाम का स्मरण मात्र ही दुखों को दूर करने वाला और जीवन को पवित्र बनाने वाला माना जाता है।

आप दीनों के सहारा हैं, निराश लोगों की आशा हैं और भक्तों के जीवन के आधार हैं। कोई आपको कृष्ण के रूप में देखता है, कोई विष्णु के रूप में, तो कोई आपको संपूर्ण ब्रह्मांड का पालनकर्ता मानता है। परंतु आपके लिए सभी भक्त समान हैं।

हे जगन्नाथ, आपकी कृपा सागर के समान गहरी और आकाश के समान विशाल है। हमारे हृदय में सदैव भक्ति का दीप जलाए रखें। हमें सत्य, प्रेम और सेवा के मार्ग पर चलने की शक्ति दें। आपके चरणों में ही शांति है, आपके नाम में ही मुक्ति है, और आपकी भक्ति में ही जीवन का सच्चा आनंद छिपा हुआ है।

जय जगन्नाथ! 🙏॥

In a world filled with pride, power, and endless desires, there is one divine lesson that remains eternal—compassion is ...
02/06/2026

In a world filled with pride, power, and endless desires, there is one divine lesson that remains eternal—compassion is greater than revenge, and forgiveness is greater than anger.

This heart-touching moment reminds us of the Lord’s boundless mercy. Even when wounded, He does not punish. Even when hurt, He does not hate. Instead, He teaches humanity the true meaning of love, kindness, and divine grace.

The Lord shows us that every soul deserves a chance for redemption. No mistake is too great when there is sincere repentance, and no darkness is too deep when touched by divine light. His compassion flows like an endless river, embracing everyone who seeks refuge in Him.

Life often tests us with pain, disappointment, and betrayal. Yet the Lord teaches us to rise above negativity, to choose forgiveness over hatred, and to keep faith even during our darkest moments. His divine presence reminds us that every ending carries the seed of a new beginning.

For devotees, this is not merely a scene—it is a powerful spiritual message. It reminds us that true strength lies not in conquering others, but in conquering our own anger, ego, and fear. The Lord’s love knows no boundaries, and His blessings reach every heart that calls upon Him with devotion.

May His divine grace guide us, protect us, and fill our lives with peace, wisdom, and unwavering faith.

Jai Jagannath! 🙏❤️🚩

प्रभु जगन्नाथ के दारु रूप पर कवितानीलाचल की पावन धरती पर, अद्भुत महिमा छाई है,दारु रूप में प्रभु जगन्नाथ ने, जग को राह द...
02/06/2026

प्रभु जगन्नाथ के दारु रूप पर कविता

नीलाचल की पावन धरती पर, अद्भुत महिमा छाई है,
दारु रूप में प्रभु जगन्नाथ ने, जग को राह दिखाई है।
न सोने का वैभव उनको भाए, न रत्नों का श्रृंगार,
भक्तों के प्रेम में बसते हैं, वही उनका सच्चा संसार।

पवित्र दारु से निर्मित तन, दिव्य रहस्य समाए हैं,
उनकी विशाल करुणा में, सारे लोक समाए हैं।
गोल-गोल वे सुंदर नेत्र, जग पर रखते ध्यान,
हर प्राणी के सुख-दुख को, लेते अपने जान।

कभी कृष्ण बनकर आए थे, गीता का संदेश दिया,
आज दारु ब्रह्म स्वरूप धरे, प्रेम और भक्ति का दीप जिया।
न हाथ पूरे, न चरण दिखें, फिर भी सबके साथ,
भटके जन को राह दिखाते, बनकर जीवन की बात।

रथयात्रा में जब निकलते हैं, उमड़ पड़ता संसार,
जय जगन्नाथ के जयघोष से, गूँज उठता हर द्वार।
राजा हो या साधारण जन, सब उनके दरबार,
प्रेम की डोरी में बंध जाते, भूल जगत का भार।

दिव्य दारु का यह स्वरूप, त्याग और समता सिखाता,
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर, मानवता का पाठ पढ़ाता।
उनकी मुस्कान में छिपी हुई, अनंत कृपा की धारा,
जिसने उनको हृदय में बसाया, उसका हुआ उद्धारा।

हे दारु ब्रह्म जगन्नाथ प्रभु, हम पर कृपा बरसाना,
भक्ति, प्रेम और सत्य मार्ग पर, जीवन भर चलाना।
जब तक यह सांसें चलती रहें, नाम तुम्हारा गाऊँ,
तेरे चरणों की धूल पाकर, जीवन सफल बनाऊँ।

नीलाचल के नाथ हमारे, जग के तुम आधार,
दारु रूप में विराजित होकर, करते सबका उद्धार।
तुम ही आशा, तुम ही शक्ति, तुम ही जीवन का सार,
जय जगन्नाथ, जय जगन्नाथ, गूँजे बारंबार।॥

प्रभु जगन्नाथ पर कविता (हिंदी)नीलाचल के पावन धाम में,जग के नाथ विराजते हैं।भक्तों के हर दुःख को हरकर,प्रेम की गंगा बहाते...
02/06/2026

प्रभु जगन्नाथ पर कविता (हिंदी)

नीलाचल के पावन धाम में,
जग के नाथ विराजते हैं।
भक्तों के हर दुःख को हरकर,
प्रेम की गंगा बहाते हैं।

बड़े-बड़े हैं उनके नयन,
करुणा से जो भर जाते हैं।
जो भी शरण में आता है,
उसको अपना बनाते हैं।

रथ पर बैठ नगर में आते,
सबको दर्शन देते हैं।
राजा, रंक और साधु-संत,
सबको समान समझते हैं।

उनकी महिमा अपरंपार,
वेद भी जिसे न गा पाएँ।
भक्ति की गहराई ऐसी,
शब्द जहाँ तक न पहुँच पाएँ।

माखन जैसी कोमल मुस्कान,
मन में शांति भर देती है।
उनकी मधुर कृपा की वर्षा,
जीवन को पावन करती है।

जब-जब मन घबराता है,
नाम तुम्हारा सहारा बनता।
अंधकार के गहरे पथ में,
दीपक बन उजियारा करता।

सागर की लहरें गाती हैं,
जय जगन्नाथ, जय जगदीश।
पवन सुनाता मधुर कहानी,
तुम हो सबके हृदय अधीश।

भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा,
संग तुम्हारे शोभा पाते।
तीनों मिलकर भक्त जनों पर,
अमृत जैसी कृपा बरसाते।

हे प्रभु! तुम दीनों के साथी,
तुमसे ही संसार सजे।
तेरे चरणों की धूलि पाकर,
जीवन के सब कष्ट मिटें।

नहीं चाहिए स्वर्ण महल,
न ही वैभव का अभिमान।
बस इतना वरदान मिले कि,
रहे सदा तेरा ही ध्यान।

हर धड़कन में नाम तुम्हारा,
हर श्वास तुम्हारा गुण गाए।
जब अंतिम क्षण जीवन का आए,
मन जगन्नाथ में खो जाए।

हे नाथ, करुणा के सागर,
भक्ति का दीप जलाए रखना।
अपने चरणों की छाया में,
सदा हमें बसाए रखना।

जय जगन्नाथ! 🙏॥

प्रभु जगन्नाथ का विष्णु अवतारनीलांचल के पावन धाम में, दिव्य ज्योति जब छा जाती,प्रभु जगन्नाथ के दर्शन से, हर आत्मा मुस्कु...
01/06/2026

प्रभु जगन्नाथ का विष्णु अवतार

नीलांचल के पावन धाम में, दिव्य ज्योति जब छा जाती,
प्रभु जगन्नाथ के दर्शन से, हर आत्मा मुस्कुराती।
वे ही विष्णु, वे ही नारायण, जग के पालनहार,
उनकी कृपा से चलता सारा यह सुंदर संसार।

विशाल नेत्रों में करुणा, मुख पर मधुर प्रकाश,
भक्तों के दुःख हरने आते, लेकर प्रेम का वास।
शंख, चक्र, गदा और पद्म से शोभित उनका रूप,
देख जिसे झुक जाते हैं, देव, दानव और भूप।

कभी राम बन धर्म बचाया, कभी कृष्ण अवतार,
हर युग में मानवता हेतु किया प्रेम विस्तार।
जगन्नाथ के रूप में फिर विष्णु धरा पर आए,
भक्तों के जीवन में सुख और शांति बरसाए।

रथयात्रा के पावन क्षण में जब रथ आगे बढ़ता,
हर मन में विश्वास और भक्ति का दीपक जलता।
बड़ा दांडा गूँज उठता है जय-जयकारों से,
धरती भर जाती है उनके मंगल उपकारों से।

उनके चरणों की रज पाकर जीवन धन्य हो जाता,
भटका हुआ पथिक भी अपना सच्चा मार्ग पाता।
वे दीनों के सहायक, दुखियों के आधार,
उनकी महिमा गाते हैं ऋषि, मुनि और संसार।

हे जगन्नाथ, हे विष्णुरूप, तुम करुणा के सागर,
तुमसे ही प्रकाशित होता यह जग सारा सुंदर।
हम सब पर अपनी कृपा की अमृत वर्षा करना,
भक्ति, प्रेम और सत्य का दीप हृदय में भरना।

जब तक सूरज चाँद रहेंगे, गूँजेगा यह नाम,
जगन्नाथ ही विष्णु हैं, जग के परम धाम।
उनकी महिमा अनंत है, उनका नहीं किनारा,
भक्तों के जीवन का वे ही उजियारा प्यारा।
जय जगन्नाथ, जय विष्णु देव, जय नीलाचल धारी,
तुम बिन सूना जगत सारा, तुमसे शोभा सारी।

प्रभु जगन्नाथ और राधा की रासलीलावृंदावन की पावन धरा पर, चाँदनी अपनी छटा बिखेर रही थी।यमुना की लहरें मधुर स्वर में गान कर...
01/06/2026

प्रभु जगन्नाथ और राधा की रासलीला

वृंदावन की पावन धरा पर, चाँदनी अपनी छटा बिखेर रही थी।
यमुना की लहरें मधुर स्वर में गान कर रही थीं, और मंद-मंद बहती पवन फूलों की सुगंध फैला रही थी।
ऐसे दिव्य समय में प्रभु जगन्नाथ अपने मनोहर रूप में प्रकट हुए। उनके मुख पर अद्भुत मुस्कान थी और उनकी आँखों में अनंत प्रेम झलक रहा था।

राधा रानी सखियों के साथ निकुंज में विराजमान थीं।
जैसे ही उन्होंने प्रभु का दर्शन किया, उनका हृदय प्रेम और भक्ति से भर उठा।
प्रभु ने मधुर बांसुरी की धुन छेड़ी, जिसकी स्वर लहरियाँ पूरे ब्रज में गूँज उठीं।
उस दिव्य संगीत को सुनकर गोपियाँ भी वहाँ आ पहुँचीं और वातावरण आनंदमय हो गया।

राधा और प्रभु जगन्नाथ एक-दूसरे की ओर प्रेमपूर्ण दृष्टि से निहारने लगे।
उनके चरणों की ताल पर रासलीला आरंभ हुई।
आकाश के देवता पुष्पवर्षा करने लगे, और चंद्रमा भी उस अद्भुत दृश्य को देखकर मानो ठहर गया।
हर ओर केवल प्रेम, भक्ति और आनंद का सागर उमड़ रहा था।

प्रभु जगन्नाथ कभी राधा का हाथ थामते, तो कभी उनके चारों ओर नृत्य करते।
राधा की मुस्कान से पूरा ब्रह्मांड प्रकाशित हो रहा था।
गोपियाँ प्रभु के प्रेम में मग्न होकर उनके साथ नृत्य कर रही थीं।
उस क्षण समय भी मानो रुक गया था।

यह रासलीला केवल नृत्य नहीं थी, बल्कि आत्मा और परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक थी।
राधा का प्रेम पूर्ण समर्पण था और प्रभु जगन्नाथ की कृपा अनंत करुणा का स्वरूप थी।
आज भी जो भक्त श्रद्धा से इस दिव्य रासलीला का स्मरण करता है, उसके हृदय में प्रेम, शांति और भक्ति का प्रकाश सदैव जगमगाता रहता है।
जय जगन्नाथ! जय राधे!

प्रभु जगन्नाथ का कल्कि वेशकलियुग की घोर निशा में, जब धर्म होगा लुप्त यहाँ,अधर्म का होगा अंधकार, काँपेगा सारा यह जहाँ।तब ...
01/06/2026

प्रभु जगन्नाथ का कल्कि वेश

कलियुग की घोर निशा में, जब धर्म होगा लुप्त यहाँ,
अधर्म का होगा अंधकार, काँपेगा सारा यह जहाँ।
तब दारु-ब्रह्म प्रभु जगन्नाथ, धारण करेंगे दिव्य स्वरूप,
कल्कि वेश में आएँगे वे, मिटाने पापों का प्रतिरूप।

श्वेत अश्व पर होंगे आरूढ़, हाथ में होगी तेज तलवार,
अन्याय और अत्याचारों पर, करेंगे धर्म का प्रहार।
उनके नेत्रों की दिव्य ज्योति, सूर्य समान चमकेगी,
भक्तों के मन में आशा बन, नई किरण दमकेगी।

जग के नाथ जगन्नाथ प्रभु, विष्णु के दिव्य अवतार हैं,
कल्कि रूप में प्रकट होकर, धर्म के सच्चे आधार हैं।
जब लोभ, क्रोध और मोह बढ़े, मानवता रोने लगे,
तब प्रभु अपने भक्तों हेतु, कृपा के द्वार खोलें लगे।

नीलाचल के श्रीनाथ वही, कल्कि बनकर आएँगे,
दुष्टों का संहार करेंगे, सतयुग फिर से लाएँगे।
उनकी महिमा अपरम्पार, वे भक्तों के रखवाले हैं,
दीन-दुखियों के जीवन में, सुख के दीप जलाने वाले हैं।

जगन्नाथ का कल्कि वेश, केवल क्रोध का रूप नहीं,
यह करुणा, न्याय और सत्य का, अनुपम दिव्य स्वरूप सही।
जो श्रद्धा से उनका स्मरण करे, उसका जीवन धन्य हो जाए,
प्रभु की कृपा से हर संकट, पल भर में दूर हो जाए।

हे जगन्नाथ, हे विश्वनाथ, हम सब पर कृपा बरसाना,
कल्कि रूप में आकर प्रभु, धर्म का दीप फिर जलाना।
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ, यही हमारी अभिलाषा है,
तेरे नाम का जप करते रहें, यही जीवन की परिभाषा है।

जय जगन्नाथ! जय कल्कि प्रभु!
तुमसे ही जग का उद्धार है,
कलियुग के इस अंधकार में,
तुम ही सत्य का आधार हो।

कल्कि को विष्णु का अंतिम अवतार माना गया है, जो कलियुग के अंत में धर्म की पुनः स्थापना करेंगे।

प्रभु जगन्नाथ की अद्भुत लीलानीलाचल के पावन धाम में,जगन्नाथ की महिमा न्यारी है।भक्तों के मन में बसने वाले,उनकी लीला सबसे ...
30/05/2026

प्रभु जगन्नाथ की अद्भुत लीला

नीलाचल के पावन धाम में,
जगन्नाथ की महिमा न्यारी है।
भक्तों के मन में बसने वाले,
उनकी लीला सबसे प्यारी है।

कभी दीनों के मित्र बन जाते,
कभी दुखियों का दुःख हर लेते।
जो सच्चे मन से उन्हें पुकारे,
उसके जीवन में सुख भर देते।

दिव्य रूप है दारु ब्रह्म का,
जिसमें अनंत रहस्य समाया।
छोटे-बड़े सबको अपनाकर,
प्रेम का सुंदर दीप जलाया।

रथयात्रा का पावन उत्सव,
उनकी लीला का अनुपम रूप।
स्वयं निकलकर भक्तों के बीच,
दूर करते हर मन का संताप और धूप।

कहते हैं एक दिन प्रभु ने,
भक्त की लाज बचाने को।
राजा, रंक का भेद मिटाकर,
दौड़े उसके पास आने को।

कभी सुदामा सा प्रेम दिखाया,
कभी कृष्ण बनकर मुस्काए।
कभी करुणा के सागर बनकर,
भक्तों के आँसू स्वयं पोंछ जाएँ।

महाप्रभु का प्रेम निराला,
नहीं किसी सीमा में बंधता।
जो उनके चरणों में झुकता,
उसका जीवन सफल हो जाता।

जगन्नाथ की हर एक लीला,
भक्ति का अमृत बरसाती है।
मन के अंधकार को हरकर,
सत्य की ज्योति जलाती है।

हे नाथ जगन्नाथ हमारे,
सदा कृपा की दृष्टि रखना।
भक्ति, प्रेम और सत्य के पथ पर,
हम सबको आगे बढ़ना सिखाना।

तुम हो जग के नाथ प्रभु,
तुमसे ही जीवन का आधार।
तेरी लीला का अंत न पाया,
न पाएँगे ऋषि और विद्वान अपार।

तेरे चरणों की धूलि पाकर,
हर जन धन्य हो जाता है।
जगन्नाथ का नाम जो जपे,
वह भवसागर तर जाता है।

प्रभु जगन्नाथ और राधा की रासलीलावृंदावन की पावन धरा पर, चाँदनी रात सुहानी थी,यमुना की लहरें गुनगुनातीं, प्रकृति भी मस्ता...
30/05/2026

प्रभु जगन्नाथ और राधा की रासलीला

वृंदावन की पावन धरा पर, चाँदनी रात सुहानी थी,
यमुना की लहरें गुनगुनातीं, प्रकृति भी मस्तानी थी।
कदंब वृक्ष की छाया में, प्रेम का दीप जला था,
राधा के संग प्रभु जगन्नाथ का अद्भुत रास रचा था।

मुरली की मधुर तान सुनकर, सारा जग मोहित होता,
हर स्वर में प्रेम की गंगा, हर धड़कन में सुख संजोता।
राधा की आँखों में भक्ति, प्रभु के मुख पर मुस्कान,
दोनों के दिव्य मिलन से, धन्य हुआ सारा ब्रजधाम।

गोपियाँ भी संग आईं, प्रेम का उत्सव मनाने,
हर हृदय में प्रभु बसते, जीवन को सफल बनाने।
नृत्य की अनुपम लय में, समय स्वयं रुक जाता,
प्रेम और भक्ति का सागर, हर दिशा में लहराता।

राधा थीं प्रेम की प्रतिमा, प्रभु करुणा के आधार,
दोनों का पावन संगम, जग के लिए अमृत उपहार।
जहाँ न कोई भेद रहा, न कोई दूरी की रेखा,
केवल प्रेम ही प्रेम था, जैसे स्वर्ग उतरा देखा।

चाँद भी नभ से झुककर, उस लीला को निहार रहा था,
तारों का हर दीपक जैसे, प्रभु का गुण गा रहा था।
यमुना की लहरें चरणों को, बार-बार स्पर्श करतीं,
राधा-जगन्नाथ की महिमा, संसार भर में भरतीं।

जो भी इस रास को सुनता, उसका मन निर्मल हो जाता,
भक्ति का दीप हृदय में जलकर, जीवन पावन बन जाता।
राधा का निष्कलंक समर्पण, प्रभु का असीम दुलार,
युग-युग तक गाता रहेगा, यह प्रेममय दिव्य संसार।

राधा और प्रभु जगन्नाथ की यह अमर रासलीला महान,
भक्ति, प्रेम और समर्पण का देती है दिव्य ज्ञान।
जिसके हृदय में यह लीला बस जाए एक बार,
उस पर सदा बरसता रहता है प्रभु का अपार प्यार।

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