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ह्रदयचंद्र को घर बनवाना था. नक्शा पास नहीं था. ह्रदय ने सम्बंधित विभाग में संपर्क किया. लिपिक बोला- घर का नक्शा तभी बनेग...
04/06/2026

ह्रदयचंद्र को घर बनवाना था. नक्शा पास नहीं था. ह्रदय ने सम्बंधित विभाग में संपर्क किया. लिपिक बोला- घर का नक्शा तभी बनेगा जब जेब ढीली करोगे.

फिर घर का नक्शा पास तो नहीं हुआ लेकिन लिपिक के जीवन का नक्शा बिगड़ गया.

ह्रदयचंद्र ने नक्शा पास कराने के लिए कलेक्ट्रेट स्थित विनियमित क्षेत्र कार्यालय में संपर्क किया. यहाँ सीनियर लिपिक अक्षय राहुल ने 13 हजार की रिश्वत मांगी.

ह्रदयचंद्र ने दिमाग से काम लिया, और रिश्वत मांगने की शिकायत कर दी. भ्रष्टाचार निवारण मंडल ने फील्डिंग सेट की, रिश्वत दिलवाई और 13 हजार के साथ अक्षय राहुल धर लिए गए.

रिपोर्ट दर्ज हुई, जेल जायेंगे. मामला चित्रकूट का है.

इनका नाम अरुणा रॉय है।उनका जन्म 26 मई 1946 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था।उनके पिता एक वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे।उन...
03/06/2026

इनका नाम अरुणा रॉय है।

उनका जन्म 26 मई 1946 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था।

उनके पिता एक वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे।

उन्होंने दिल्ली में अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई की और 1968 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुईं।

लेकिन...

सिर्फ सात साल बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने भारत सरकार की सबसे शक्तिशाली नौकरियों में से एक छोड़ दी।

कारण?

वह राजस्थान के एक गांव में जाकर उन मजदूरों के साथ काम करना चाहती थीं जिन्हें कानून द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही थी।

1990 में उन्होंने राजस्थान के देवडूंगरी गांव में मज़दूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) की सह-स्थापना की।

यह आंदोलन किसी बड़े कार्यालय से नहीं,

बल्कि एक मिट्टी की झोपड़ी से शुरू हुआ था।

संगठन के कार्यकर्ता जन सुनवाई आयोजित करते थे।

इन सुनवाइयों में ग्रामीण सरकारी रिकॉर्ड पढ़कर सुनाते थे और बताते थे कि मजदूरी का पैसा कैसे गायब हो गया या कभी उनके पास पहुंचा ही नहीं।

स्थानीय प्रशासन अक्सर इन जन सुनवाइयों का विरोध करता था।

लेकिन अरुणा रॉय और उनके साथियों ने हार नहीं मानी।

धीरे-धीरे यह लड़ाई सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं रही।

उन्होंने एक बड़ा सवाल उठाया—

क्या आम नागरिकों को सरकारी दस्तावेज देखने का अधिकार नहीं होना चाहिए?

अगर मजदूर अपनी उपस्थिति रजिस्टर (मस्टर रोल) देख सकें, तो वे साबित कर सकते हैं कि उन्हें भुगतान नहीं मिला।

अगर नागरिक सरकारी फाइलें देख सकें, तो भ्रष्टाचार छिपाना मुश्किल हो जाएगा।

MKSS ने भारत में सोशल ऑडिट और जन जवाबदेही की अवधारणा को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

वर्षों तक सरकार ने इसका विरोध किया।

अरुणा रॉय ने अनशन किए।

पदयात्राएं निकालीं।

राजस्थान के गांव-गांव में लोगों को संगठित किया।

हजारों लोगों को सूचना मांगने और सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

फिर आया वह दिन जिसने भारत के लोकतंत्र को बदल दिया।

साल 2005 में संसद ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम पारित किया।

जिस आंदोलन को उन्होंने मिट्टी की एक झोपड़ी से शुरू किया था, वही आगे चलकर भारत के RTI आंदोलन की सबसे मजबूत नींव बना।

साल 2000 में उन्हें रैमोन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

लेकिन 2011 में उन्होंने पद्म भूषण स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा कि वह राज्य द्वारा दिए जाने वाले सम्मान की इस व्यवस्था में विश्वास नहीं करतीं।

हाल ही में उन्होंने 80 वर्ष की आयु पूरी की है।

लेकिन आज भी वह देवडूंगरी में शुरू किए गए उस आंदोलन और जन अधिकारों की लड़ाई से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

कुछ लोग सत्ता में जाकर बदलाव लाने की कोशिश करते हैं।

अरुणा रॉय उन लोगों में हैं जिन्होंने सत्ता छोड़कर बदलाव लाने का रास्ता चुना।

बैंगलुरू में 9 साल तक IT कंपनी में Manager की कुर्सी पर बैठने वाली Priya ने Auto चलानी शुरू कर दी•••अब उसके जिंदगी में ह...
01/06/2026

बैंगलुरू में 9 साल तक IT कंपनी में Manager की कुर्सी पर बैठने वाली Priya ने Auto चलानी शुरू कर दी•••

अब उसके जिंदगी में हाई प्रेशर, लगातार तनाव, वर्क-लाइफ बैलेंस का नामोनिशान नहीं है। आज वो हर महीने ₹60,000 कमा रही है।

लेकिन सबसे बड़ी बात - वो कहती है, "अब मैं पहले से कहीं ज्यादा खुश और सुकून में हूँ।" ❤️

कुछ लोग इसे "साहसिक फैसला" बता रहे है तो कुछ लोग "पागलपन" बोल रहे हैं। मगर सच्चाई ये है कि••• कभी-कभी वो नौकरी जिसे लोग सपना समझते हैं, कोई उसे छोड़कर अपनी असली खुशी ढूंढ लेता है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ में मात्र 17 साल की कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का की निर्मम हत्या कर दी गई। अति पिछड़ी जाति के गरीब परिवार...
01/06/2026

उत्तर प्रदेश के मेरठ में मात्र 17 साल की कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का की निर्मम हत्या कर दी गई। अति पिछड़ी जाति के गरीब परिवार की इस मासूम लड़की ने फास्ट फूड विक्रेता श्याम धानक (42) से 3600 रुपये उधार लिए थे। जब पैसे वापस मांगने पर विवाद हुआ, तो आरोपी ने उसकी जान ले ली। लाश को बोरे में भरकर नाले में फेंक दिया । पूरे 2 हफ्ते बाद उसकी लाश बरामद हुई।

एक छोटी-सी रकम… सिर्फ 3600 रुपये के लिए!

वो लड़की जो मिट्टी के मैदान पर सपने बुन रही थी, जो गरीबी से लड़कर कुछ बनने की कोशिश कर रही थी, उसी की जिंदगी मात्र उधार के थोड़े से पैसों के विवाद में खत्म कर दी गई।

17 साल की उम्र ,खेल का जुनून, परिवार की उम्मीदें, भविष्य के सपने — सब कुछ एक पल में चूर-चूर। एक गरीब खिलाड़ी बेटी की इतनी सस्ती मौत।

ये हत्या सिर्फ एक बच्ची की नहीं, बल्कि हमारी पूरी व्यवस्था, हमारी संवेदनहीनता और महिलाओं की असुरक्षा की है। C/P

31/05/2026

1857 की अमर वीरांगना झलकारी बाई

29/05/2026

गुजरात में बैठे अखिल भारतीय कोली समाज नई दिल्ली के फर्जी अध्यक्ष जी फर्जी नियुक्तियां कर रहे हैं और पद के लालची समाज के कुछ लोग इस फर्जीवाड़े में उनका साथ भी दे रहे हैं. ऐसे फ्रॉडिए समाज का क्या ही भला करेंगे?

28/05/2026

कोटा रेंज के नए आईजी बने हरेंद्र महावर

यह पूजा सिंघल है....तथाकथित मेरिट वाली प्रतिभाइसका जन्म 1978 में देहरादून में हुआ था। 21 साल की उम्र में इसने अपने पहले ...
27/05/2026

यह पूजा सिंघल है....तथाकथित मेरिट वाली प्रतिभा

इसका जन्म 1978 में देहरादून में हुआ था। 21 साल की उम्र में इसने अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल की।
वह अपने बैच की सबसे युवा IAS अधिकारियों में से एक थी। इसका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।

अपने इंटरव्यू में पूजा ने कथित तौर पर कहा था कि वह अपना करियर “सबसे गरीब से भी सबसे गरीब” लोगों के लिए काम करते हुए बिताना चाहती है।

साल 2000 में इसे नवगठित राज्य झारखंड कैडर में नियुक्त किया गया, जहाँ वह शुरुआती IAS अधिकारियों में से एक थी।

पूजा ने धीरे-धीरे नौकरशाही में ऊँचा स्थान हासिल किया। 2022 तक वह झारखंड की खनन सचिव बन चुकी थी, जो खनिज संपन्न राज्य में सबसे शक्तिशाली पदों में से एक है।

6 मई 2022 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और पंजाब में उससे जुड़े 18 ठिकानों पर छापेमारी की।

रांची स्थित इसके चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार के परिसर से जांचकर्ताओं ने 17.49 करोड़ रुपये नकद बरामद किए।

नकदी गिनने के लिए नोट गिनने वाली मशीनें मंगाई गईं। अलग-अलग जगहों से कुल नकद बरामदगी 19.31 करोड़ रुपये बताई गई।

11 मई 2022 को पूजा सिंघल को गिरफ्तार कर लिया गया।

बाद में ED जांचकर्ताओं ने कथित धनशोधन की कड़ी का एक हिस्सा खूंटी जिले तक जोड़ा, जहाँ वह 2008 से 2011 के बीच डिप्टी कमिश्नर रह चुकी थी।

ED ने आरोप लगाया कि इसके कार्यकाल के दौरान मनरेगा (MGNREGA) फंड से जुड़े 18.06 करोड़ रुपये का गबन हुआ।

मनरेगा सरकार की वह योजना है जो ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिनों के भुगतान वाले काम की गारंटी देती है।

सबसे गरीब लोगों के लिए बनी योजना।

ED ने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े कुछ धन को उसके पति से संबंधित एक अस्पताल में निवेश किया गया।
बाद में एजेंसी ने रांची में उससे जुड़ी 82.77 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया।
अगस्त 2022 में PMLA कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

नवंबर 2022 में झारखंड हाई कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इसे “असाधारण मामला” बताया और कहा कि इसमें “कुछ गंभीर रूप से गलत” है।

पूजा ने 28 महीने जेल में बिताए।

7 दिसंबर 2024 को एक विशेष PMLA कोर्ट ने उसे जमानत दे दी।

झारखंड सरकार ने उसी तारीख से उसका निलंबन वापस लेकर उसे बहाल कर दिया।

ED ने उसकी बहाली का विरोध किया। PMLA कोर्ट ने ED की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसे सरकारी पद पर नियुक्त होने से रोकने की मांग की गई थी, यह कहते हुए कि यह अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

जांच और मुकदमा अभी भी जारी है।

21 साल की उम्र में इसने कथित तौर पर UPSC बोर्ड से कहा था कि वह “सबसे गरीब से भी सबसे गरीब” लोगों के लिए काम करना चाहती है।

ED के अनुसार जिन फंड्स के गबन का आरोप है, वे ठीक उन्हीं लोगों के लिए थे। सबसे गरीब से भी सबसे गरीब।

23/05/2026

अखिल भारतीय कोली समाज, नयी दिल्ली के निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कश्यप हैं। अगर कोई अन्य इस संगठन का अध्यक्ष होने का दावा करता है, तो वह पूर्णतः फर्जी है, उसे समाज की आड़ लेकर मात्र अपनी राजनीति चमकाने से मतलब है।

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