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कासगंज, यूपी के चंदन गुप्ता को पहचानते होंगे! सीएम योगी के कट्टर समर्थक थे. कट्टर इतने की उनके सीएम बनने पर भंडारा किया ...
09/08/2026

कासगंज, यूपी के चंदन गुप्ता को पहचानते होंगे! सीएम योगी के कट्टर समर्थक थे. कट्टर इतने की उनके सीएम बनने पर भंडारा किया था. 26 जनवरी 2018 को विहिप ने तिरंगा यात्रा के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी. प्रशासन ने मना कर दिया, क्योंकि हालात बेहतर नहीं थे. इसके बाद भी करीब 100 की संख्या में बाइक से तिरंगा यात्रा निकाली गई. मुस्लिम गलियों में जमकर नारेबाजी हुई. इस दौरान झड़प हो गई. गोलियां चली. एक गोली चंदन को आकर लगी और मौके पर ही मौत हो गई.

इसके बाद जमकर हंगामा हुआ. मुस्लिमों की दुकानें जलाई गई. प्रशासन को तीन दिन तक इंटरनेट बंद करना पड़ा. कई दिग्गज नेता चंदन की अंतिम यात्रा में पहुंचे. परिवार को आर्थिक मदद, बहन को नौकरी, चौक पर मूर्ति लगवाने का वादा किया. बहन को नौकरी मिली लेकिन 6 महीने बाद ही निकाल दिया. चौक पर मूर्ति लगी लेकिन आज भी ढकी हुई है. किसी नेता को फुर्सत नहीं कि उसका उद्धाटन कर सके. परिवार कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में फंसा हुआ है. जो उस वक्त चंदन गुप्ता अमर रहे कर रहे थे अब वह भूल गए.

यह सब बातें इसलिए बता रहा हूं क्योंकि हर 6 महीने में दंगो की भेंट ऐसे ही मामूली परिवारों के लोग चढ़ते हैं. इनकी लाशों पर सियासत होती है. खूब वादे होते हैं लेकिन हकीकत में कुछ नहीं बदलता. सलाह सिर्फ इतनी है कि जब आप नहीं थे तब भी धर्म था, जब आप नहीं रहेंगे तब भी धर्म रहेगा. आपके बचाने से बचेगा नहीं, किसी के चाहने से खत्म नहीं होगा. आप बस अपना ख्याल रखिए. उग्रता और कट्टरता से दूर रहिए. सोशल मीडिया पर जो आपको भड़का रहे हैं इनके पास अच्छी नौकरी है. इनके बच्चे सेट हैं. आपको अपना देखना है।

शैलेंद्र राजेश गुप्ता
प्रदेश अध्यक्ष
अखिल भारतीय हमारा समाज पार्टी

कासगंज-यूपी के युवक पवन कोरी को इंसाफ दिलाने के लिए कोली समाज के सबसे पुराने संगठन "अखिल भारतीय कोली समाज (रजि) नई दिल्ल...
08/08/2026

कासगंज-यूपी के युवक पवन कोरी को इंसाफ दिलाने के लिए कोली समाज के सबसे पुराने संगठन "अखिल भारतीय कोली समाज (रजि) नई दिल्ली" के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कोई बयान आया हो तो बताएं. नहीं आया और आएगा भी नहीं. कोई धरना प्रदर्शन किया हो तो बताएं. नहीं किया, करेंगे भी नहीं. पिछली तमाम घटनाओं में भी नहीं किया था. क्योंकि इस संगठन के पदाधिकारी समाज के लिए नहीं, वरन एक पार्टी विशेष के लिए काम करते हैं. उन्हें डर लगा रहता है कि अपने समाज के लिए आवाज उठाएंगे तो पार्टी के लोग कहीं नाराज न हो जाएं. पवन की मौत के बाद उसकी मां कृष्णा सहित अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. लेकिन इस संगठन के लोग "भव्य अधिवेशन" कर लेने को ही समाज की सेवा बताते रहेंगे.

17 वर्षीय पवन कोरी की हत्या को 20 दिन से अधिक समय बीत चुका है, परंतु कासगंज पुलिस अभी तक हत्यारों का कोई पता नहीं लगा सकी है. कासगंज के सोरोंजी क्षेत्र के गांव चंडौस में 29 जुलाई को पवन कोरी पुत्र निरंजन का शव गांव के बाहर बाजरे के खेत में मिला था. पवन 23 जुलाई की शाम 6 बजे घर से चारा लेने के लिए खेत पर जाने की बात कहकर निकला था. इसके बाद देर रात तक घर नहीं लौटा. परिजन ने आस-पास काफी तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं लगा. अगले दिन 24 जुलाई को सोरोंजी कोतावली में उसके लापता होने की शिकायत दी गई. करीब हफ्ते भर बाद ग्रामीणों ने रक्षपाल बघेल के बाजरे के खेत में पवन कोरी का शव पड़ा देखा. शव मिलने की सूचना पर परिजन मौके पर पहुंच गए. उन्होंने कपड़ों व हाथ पर गुदे निशान के आधार पर उसकी पहचान की. पवन की मौत की सूचना मिलने पर पर परिवार में हाहाकार मच गया. मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए. पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर मामले में जानकारी ली.

अगले दिन परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय और पोस्टमार्टम गृह पहुंचकर आक्रोश व्यक्त किया. परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए मामले का शीघ्र खुलासा करने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. पवन के पिता निरंजन ने बताया कि 22 जून को उनके चचेरे भाई की बेटी नेहा की शादी थी. बरात चढ़ाने के दौरान उनके बेटे पवन का गांव के दूसरी जाति के लोगों से विवाद हुआ था. पिता का आरोप है कि उसी रंजिश में उनके बेटे की हत्या की गई है. उनका कहना है कि पहचान के छिपाने के लिए उसके चेहरे पर एसिड या अन्य पदार्थ फेंका गया.

SC वर्ग के प्रतिभाशाली युवा लगातार विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़ रहे हैं. हाल ही में हमने आपको बताया थ...
08/08/2026

SC वर्ग के प्रतिभाशाली युवा लगातार विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़ रहे हैं. हाल ही में हमने आपको बताया था कि AIIMS PG का टॉपर SC वर्ग से है. अब मिलिए एक और प्रतिभाशाली युवा अल्मोड़ा, उत्तराखंड के रवि टम्टा से, जिन्होंने उड़ने वाली कार 'हपिडा स्काईनेक्स' बनाकर सबको चौंका दिया है. उन्होंने अपनी कार में बैठकर उसे उड़ाने का ट्रॉयल भी सफलतापूर्वक किया, जिसका वीडियो आप कमेंट बॉक्स में देख सकते हैं.

इससे पहले वर्ष 2014 में रवि टम्टा ने धौलादेवी ब्लॉक के काफलीखान में एक हेलीकॉप्टर बनाया था. इसे बनाने में उन्हें दो वर्ष का समय लगा. लेकिन जब उन्होंने हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी, तो उड़ान की अनुमति नहीं मिली.

यही घटना आगे चलकर उड़ने वाली कार विकसित करने की उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनी. उन्होंने अपने सपनों को थमने नहीं दिया. उसी जुनून ने उन्हें स्वदेशी पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल ''हपिडा स्काईनेक्स'' विकसित करने की प्रेरणा दी.

रवि टम्टा ने जूनियर हाईस्कूल तक की शिक्षा सनरगोड़ से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने चेतराम साह ठुलघरिया इंटर कॉलेज, नैनीताल से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया और नैनीताल परिसर से बीए की डिग्री हासिल की. उनकी पत्नी सुनीता दुनाड़ गांव से वर्ष 2019 में बीडीसी सदस्य रह चुकी है. रवि की एक पांच वर्ष की बेटी है.

उड़ने वाली तकनीक के साथ-साथ रवि टम्टा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी आविष्कार कर रहे हैं. उन्होंने हपिडा पाइनपीट मशीन विकसित की है, जो चीड़ की सूखी पत्तियों को प्रोसेस कर पाइनपीट तैयार करती है. इसका उपयोग पौधशालाओं, बागवानी और मशरूम उत्पादन में किया जा रहा है. इसी मशीन से बायो पेलेट्स भी बनाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है. इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं.

इस नवाचार को जापान इंटरनेशनल कोपरेशन एजेंसी का सहयोग प्राप्त है और इसका मॉडल उत्तराखंड के 10 जिलों में संचालित किया जा रहा है.

आज संतोष कोली की पुण्यतिथि है. आज ही के दिन 7 अगस्त 2013 को गुरुग्राम के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया था. दिल्ली का य...
07/08/2026

आज संतोष कोली की पुण्यतिथि है. आज ही के दिन 7 अगस्त 2013 को गुरुग्राम के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया था. दिल्ली का यह युवा सितारा प्रदेश की राजनीति में चमकने से पहले ही बुझ गया. संतोष कोली आम आदमी पार्टी की एक एक्टिविस्ट और नेता थीं, जो राशन माफिया के खिलाफ लड़ाई और सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती थीं. आम आदमी पार्टी ने 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में संतोष कोली को 'सीमापुरी' से अपना प्रत्याशी बनाया था. परंतु चुनाव से पहले 30 जून को गाजियाबाद के कौशांबी मेट्रो स्टेशन के नीचे सुनसान सड़क पर तेज गति से आ रही कार उन्हें टक्कर मारकर फरार हो गई. एक महीने से अधिक समय तक मौत से संघर्ष करने के बाद उनका निधन हो गया.

संतोष कोली 2005 में परिवर्तन संस्था के माध्यम से अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ी थीं. उन्होंने सुंदरनगरी इलाके में गरीबों को राशन दिलाने, अस्पताल में इलाज कराने और स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया. उनकी सक्रियता के कारण राशन माफिया ने पहले भी दो बार उन पर हमला किया. 2005 में राशन माफिया ने उनके ऊपर सर्जिकल ब्लेड व चाकूओं से हमला किया था, तब उनके गले में कई टांके आए थे. अन्ना का जंतर-मंतर आंदोलन हो या रामलीला मैदान का अनशन या संसद भवन, सांसदों के दरवाजे और पुलिस मुख्यालय के सामने का धरना प्रदर्शन हर जगह संतोष सबसे आगे रहीं. संतोष बेहद जुझारू, निडर व भरोसेमंद सामाजिक कार्यकर्ता मानी जाती थीं.

हिन्दी अकादमी, दिल्ली की ओर से उनकी याद में 'संतोष कोली स्मृति सम्मान' भी शुरू किया गया. यह पुरस्कार समाज सेवा में बेहतरीन काम करने वाली महिलाओं को दिया जाता है, जिसमें दो लाख रुपये भी दिए जाते हैं. यह पुरस्कार सिर्फ दिल्ली की महिलाओं के लिए है.

कांवड़ यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की सामाजिक संरचना को लेकर समाजशास्त्रियों, शोधकर्ताओं और मीडिया रिपोर्टों के...
06/08/2026

कांवड़ यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की सामाजिक संरचना को लेकर समाजशास्त्रियों, शोधकर्ताओं और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसमें सबसे अधिक संख्या OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) और दलित / अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लोगों की होती है.

यात्रा में शामिल होने वाले अधिकांश कांवड़िए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से आते हैं. इनमें अन्य पिछड़े व वंचित वर्गों की भागीदारी काफी अधिक देखी जाती है.

कांवड़ियों में बड़ी संख्या युवाओं, किसानों, मजदूरों, छोटे दुकानदारों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की होती है.

जो लोग काबिलियत और मेरिट की धौंस दिखाकर दिन रात आरक्षण को कोसते रहते हैं, उन्हें AIIMS PG का यह रिजल्ट देखना चाहिए. इतने...
06/08/2026

जो लोग काबिलियत और मेरिट की धौंस दिखाकर दिन रात आरक्षण को कोसते रहते हैं, उन्हें AIIMS PG का यह रिजल्ट देखना चाहिए. इतने कठिन और प्रतिष्ठित एग्जाम में सभी 'जन्मजात प्रतिभाशाली' कंडीडेट्स को पीछे छोड़कर टॉप करने वाला स्टूडेंट SC कैटेगरी से है. इस टॉपर लिस्ट में OBC के तमाम छात्र भी हैं. प्रतिभा सवर्ण जाति में पैदा होने से नहीं, वरन् अवसरों और सुख सुविधाओं से निखरती है. जैसे-जैसे आरक्षित वर्ग के बच्चों को समान अवसर मिलेंगे, वैसे-वैसे टॉपर लिस्ट में उनके नाम भी बढ़ते जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा है कि यदि कोई लिव-इन रिलेशनशिप 'शादी जैसे रिश्ते' की श्रेणी में आ...
03/08/2026

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा है कि यदि कोई लिव-इन रिलेशनशिप 'शादी जैसे रिश्ते' की श्रेणी में आती है, तो उसमें रहने वाली महिला के साथ क्रूरता करने पर पुरुष के खिलाफ IPC की धारा 498A के तहत मुकदमा चलाया जा सकेगा. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्याख्या केवल धारा 498A तक सीमित रहेगी और गिरफ्तारी से पहले प्रारंभिक जांच अनिवार्य होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को IPC की धारा 498A का दायरा बढ़ाते कहा कि पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता से संबंधित यह प्रावधान उन 'लिव-इन रिलेशनशिप' पर भी लागू होगा, जो 'शादी जैसे रिश्ते' की श्रेणी में आते हैं।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि धारा 498A केवल उन्हीं लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू होगी, जो वास्तव में 'शादी जैसे रिश्ते' हों. अदालत ने कहा कि ऐसे रिश्तों में विवाह करने का इरादा संबंध का एक महत्वपूर्ण तत्व होना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सुरक्षा केवल दो सहमति से साथ रहने वाले बालिग व्यक्तियों के बीच बने रिश्तों पर ही लागू होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी और अन्य कानूनी कार्रवाई से जुड़े सभी सुरक्षा प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाएगा. यदि किसी 'शादी जैसे' लिव-इन रिलेशनशिप में महिला के साथ क्रूरता का आरोप लगाया जाता है, तो आरोपी व्यक्ति या उसके रिश्तेदार को बिना प्रारंभिक जांच के गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.

अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति यह सोचकर किसी रिश्ते में नहीं जाता कि उसके साथ भविष्य में क्रूरता होगी. सामान्यतः जब दो लोग साथ जीवन शुरू करते हैं तो उनका उद्देश्य सुखद और सम्मानजनक जीवन जीना होता है, लेकिन समय के साथ कुछ रिश्ते ऐसे मोड़ पर पहुंच जाते हैं, जहां कानूनी संरक्षण की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए कानून में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान होना चाहिए.

इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यदि लिव-इन संबंध "शादी जैसे रिश्ते" की कसौटी पर खरा उतरता है, तो उसमें रहने वाली महिला को भी धारा 498A के तहत वही कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो एक विवाहित महिला को प्राप्त है.

लखनऊ के आशियाना में महिला से दुष्कर्म के आरोपी SSI धर्मवीर शाही को निलंबित कर जेल भेज दिया गया है.SSI धर्मवीर शाही ने पी...
03/08/2026

लखनऊ के आशियाना में महिला से दुष्कर्म के आरोपी SSI धर्मवीर शाही को निलंबित कर जेल भेज दिया गया है.

SSI धर्मवीर शाही ने पीड़िता को शादी का झांसा दिया और दुष्कर्म किया. उसने पीड़िता से कहा, "तुम्हारा रेप के पुराना हो चुका है, जिससे मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि नहीं होगी. अगर तुम मुझसे संबंध बना लो तो रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी." पीड़िता ने SSI के झांसे में आकर वैसा ही किया, जैसा उसने कहा.

मामले की शुरुआत PGI थाने में दर्ज एक मुकदमे की विवेचना से हुई थी. बस्ती निवासी अभिषेक सिंह के खिलाफ पीड़िता ने दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसकी जांच SSI धर्मवीर शाही को सौंपी गई थी.

विवेचना के दौरान SSI ने पीड़िता से संपर्क बढ़ाया और शादी का भरोसा दिया. इसके बाद वह उसे अपने साथ ले गया और उसके साथ धोखा देकर दुष्कर्म किया. पीड़िता का आरोप है कि शादी का भरोसा मिलने के बाद वह SSI के संपर्क में रही.

बाद में जब उसने शादी की बात कही तो टालमटोल करने लगा. विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई. पीड़िता ने बेल्ट से पीटने का भी आरोप लगाया है.

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मुकदमे की विवेचना SSI को सौंपी गई थी, उसी दौरान उन पर पीड़िता को प्रभाव में लेकर शादी का झांसा देने का आरोप लगा.

शिकायत अधिकारियों तक पहुंचने के बाद DCP मध्य ने तथ्यों और शिकायत के आधार पर SSI धर्मवीर शाही को निलंबित कर दिया.

कुछ नहीं बदला. तुम पहले भी गुलाम थे और आज भी गुलाम हो. अंतर मात्र इतना है कि पहले तुम्हे विवशता में गुलामी करनी पड़ती थी...
03/08/2026

कुछ नहीं बदला. तुम पहले भी गुलाम थे और आज भी गुलाम हो. अंतर मात्र इतना है कि पहले तुम्हे विवशता में गुलामी करनी पड़ती थी और आज तुम खुशी-खुशी अपनी मानसिक गुलामी को ढो रहे हो.

"जो अतीत को नियंत्रित करता है, वही भविष्य को नियंत्रित करता है; और जो वर्तमान को नियंत्रित करता है, वही अतीत को नियंत्रित करता है।"- जॉर्ज ऑरवेल

"अपने आपको मानसिक गुलामी से मुक्त करो; हमारे मन को हमारे अलावा कोई और आज़ाद नहीं कर सकता।"- बॉब मार्ले

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