23/09/2022
गजब है तेरी दुनिया ऐ पुरुष प्रधान समाज ,
सह भी तुम्हारी और तुम्हारी ही है मात ।
अपना हित देख कर तुमने बनाये हर रिवाज,
सालो बीत जाने पर भी तुम आए नही बाज।
तुम मनमानी करो तो स्वभाव तुम्हारा कहलाता है,
हम मन की कर ले तो लांछन हम पे लग जाता है।
त्याग- समर्पण ये सब तुम्हें कहाँ आता है , लेकिन
हम स्त्रियों का तो ये प्रथम धर्म कहलाता है।।
क्या खूब नीती के साथ तुमने हर रीती बनाई है,
खुद को व्यवसाय और हमे रसोई थमाई है।
सड़को पर आजाद तुमने रोज महफिल जमाई है,और
हमने चार दीवारी मे अपनी पुरी जिंदगी बिताई है।
खुद पर कोई रोक नहीं हम पर बस रोक लगाते हो,
हमे आत्म निर्भर बनाने से आज भी तुम कतराते हो।
नजरे झुका कर चलना हमारी सभ्यता बताते हो,
और खुद भेड़िये जैसी नजरे हर तरफ घुमाते हो।।
वाह रे पुरुषो तुमने कितना ज्यादा किया पक्षपात,
ना हमे सम्पत्ति दी और ना दिया हमे कोई अधिकार ।
ना विवाह कर तुम्हें बदलना पड़ा अपना निवास,
हमे बताया पराया धन और खुद बने घर का चिराग ।।
अपनी बुद्धि का क्या अदभुद प्रदर्शन दिखाया है,
अपनी रस्मो का रक्षण खुद स्त्रीयो को ही थमाया है।
औरत को ही औरत का दुस्मन बनाया है , और हम
मूर्खो ने भी इन जंजीरो को गहना बना सर मे सजाया है।।.....