Ashish Tiwari

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अस्पताल के बिस्तर पर लेटना जितना कठिन लगता है, उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल होता है उस बिस्तर के पास खड़े रहना।नर्स से हर ब...
19/10/2025

अस्पताल के बिस्तर पर लेटना जितना कठिन लगता है, उससे कहीं ज़्यादा मुश्किल होता है उस बिस्तर के पास खड़े रहना।
नर्स से हर बार बोतल बदलने की मिन्नत करना, और उस बेहद व्यस्त डॉक्टर से हिम्मत जुटाकर कहना —
“सर, ज़रा एक बार देख लीजिए ना…”

हर रोज़ गिरते आँसुओं को पोंछते हुए दवाई लाना, और चेहरे पर मुस्कान ओढ़कर कहना —
“अरे कुछ नहीं हुआ है आपको, बस दो दिन की बात है… आप जल्दी घर चलेंगे।”

मरीज होना कभी-कभी आसान होता है,
पर अटेंडेंट होना…सबसे कठिन कार्य है।

कभी-कभी इंसाफ़ सिर्फ सज़ा देना नहीं,बल्कि इंसानियत सिखाना होता है 🙏इस जज ने साबित कर दिया कि दिल वाला कानून अब भी ज़िंदा...
18/10/2025

कभी-कभी इंसाफ़ सिर्फ सज़ा देना नहीं,
बल्कि इंसानियत सिखाना होता है 🙏
इस जज ने साबित कर दिया कि दिल वाला कानून अब भी ज़िंदा है ❤️

मीडिया वाले क्यों भागे???रूस की सरकार ने अपने यहां किसी भी मीडिया को न तो प्रतिबंधित किया ना बाहर निकलने का आदेश दिया......
18/10/2025

मीडिया वाले क्यों भागे???

रूस की सरकार ने अपने यहां किसी भी मीडिया को न तो प्रतिबंधित किया ना बाहर निकलने का आदेश दिया....सिर्फ ब्लादीमरी पुतिन ने कानून बना दिया कि जो भी मीडिया हाउस बिना किसी तथ्य के फेक न्यूज़ प्रसारित करेगा उसे 1 महीने का वक्त दिया जाएगा ताकि वह साबित कर सके यह न्यूज़ सच है अन्यथा 15 साल की जेल होगी...इस कानून बनने के बाद बीबीसी, डॉयचे वेले, अल जजीरा, सीएनएन, वाशिंगटन पोस्ट, द न्यूयॉर्क टाइम्स के सभी पत्रकार अपना बोरिया बिस्तर समेट कर रूस छोड़कर भाग गए...अब मुझे समझ में नहीं आ रहा कि जब व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें देश छोड़ने का आदेश दिया ही नहीं तब इन्होंने रूस क्यों छोड़ दिया??
इन सभी मीडिया हाउस का रूस छोड़ना इस बात का सुबूत है कि यह सिर्फ और सिर्फ झूठ दिखाते हैं...फेक न्यूज़ फैलाते हैं वरना यदि इन्हें अपने न्यूज़ पर भरोसा होता तब यह रूस में डटे रहते...भारत मे भी ऎसा कानून अति आवश्यक है।

12/10/2025

💔 “मुझे बाहर किया चलेगा… पर रोहित की गलती क्या थी?” — जडेजा का दिल छू लेने वाला बयान! 🔥
08/10/2025

💔 “मुझे बाहर किया चलेगा… पर रोहित की गलती क्या थी?” — जडेजा का दिल छू लेने वाला बयान! 🔥


लखनऊ को बाल भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के अभियान का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया है। इस चरण में शहर के 10 प्रमुख बाजारो...
08/10/2025

लखनऊ को बाल भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के अभियान का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो गया है। इस चरण में शहर के 10 प्रमुख बाजारों को बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त कराने का लक्ष्य तय किया गया है।

अभियान के लिए चिह्नित बाजारों में जनपद मार्केट, हजरतगंज, पत्रकारपुरम, भूतनाथ, अमीनाबाद, लेखराज, बंगला बाजार, कपूरथला, गोल मार्केट/निशात गंज और चारबाग मार्केट शामिल हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले छह माह से चल रहे अभियान के पहले चरण में काफी सफलता मिली है। अब दूसरे चरण में सभी के सहयोग से लखनऊ को पूरी तरह बाल भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने का लक्ष्य है।

जिलाधिकारी विशाख जी ने पत्रकारपुरम मार्केट पहुंचकर व्यापार संगठनों के पदाधिकारियों और अभियान टीम के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि इन बाजारों में अपर नगर मजिस्ट्रेट, स्वयंसेवी संस्थाएं, व्यापार मंडल और निगरानी टीमें मिलकर संयुक्त अभियान चलाएंगी। इसके लिए सभी बाजारों में नोडल अधिकारी भी तैनात किए गए हैं।

07/10/2025

लखनऊ में कारोबारी की स्कूटी पर लात मारने वाले स्नेचर की सीतापुर में लाश मिली है। उसके पैर के नाखून उखड़े थे। शरीर पर गंभ...
05/10/2025

लखनऊ में कारोबारी की स्कूटी पर लात मारने वाले स्नेचर की सीतापुर में लाश मिली है। उसके पैर के नाखून उखड़े थे। शरीर पर गंभीर चोट के निशान हैं। पुलिस का कहना है कि संजय यादव की हत्या करके शव सड़क किनारे फेंका गया।

लखनऊ पुलिस हिस्ट्रीशीटर संजय यादव की 9 दिन से तलाश कर रही थी। संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) बबलू कुमार ने रविवार को बताया कि संजय पर 1 लाख रुपए का इनाम घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर पुलिस आयुक्त को भेजा गया था। इसकी आधिकारिक घोषणा बाकी थी।

दरअसल, लखनऊ के गुडंबा इलाके में 20 सितंबर को कारोबारी अतुल जैन स्कूटी से जा रहे थे। तभी संजय ने अपने ममेरे भाई अरविंद वर्मा के साथ मिलकर अतुल की चेन लूट ली, जब अतुल लुटेरों का पीछा करने लगे तो संजय ने स्कूटी में लात मार दी। लात मारने से स्कूटी गिर गई। अतुल का सिर सड़क पर खड़ी पिकअप से टकरा गया। इससे उनकी मौत हो गई। #लखनऊ

05/10/2025
युवराज सिंह का तंज – ट्रॉफी जीत नहीं पाए तो पाकिस्तान वाले लेकर भाग गए
30/09/2025

युवराज सिंह का तंज – ट्रॉफी जीत नहीं पाए तो पाकिस्तान वाले लेकर भाग गए

 #शाजापुर - पासीसर गांव में मंगलवार को एक ऐसा संयोग घटा, जिसने हर किसी को अचरज में डाल दिया। 90 वर्षीय जुड़वां बहनें बरज...
26/09/2025

#शाजापुर - पासीसर गांव में मंगलवार को एक ऐसा संयोग घटा, जिसने हर किसी को अचरज में डाल दिया। 90 वर्षीय जुड़वां बहनें बरजूबाई और दुर्गाबाई ने जीवन के हर पड़ाव की तरह इस दुनिया से विदाई भी एक ही समय पर ली।

राजगढ़ जिले के खजूरी गांव में जन्मीं इन दोनों बहनों का बचपन कालापीपल में बीता। यहीं पली-बढ़ीं और जब विवाह का समय आया तो माता-पिता ने उनका रिश्ता पासीसर गांव के दो सगे भाइयों—रामसिंह और भादरसिंह—से तय कर दिया। इस तरह शादी भी एक साथ हुई और शादी के बाद का जीवन भी लगभग एक-दूसरे की परछाईं बनकर बीता।

मंगलवार को दोनों ने एक ही समय अंतिम सांस ली और परिजनों व ग्रामीणों ने सुबह 11 बजे उनका अंतिम संस्कार भी साथ किया। गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसा संयोग पहले कभी नहीं देखा।

जन्म, विवाह और मृत्यु—तीनों का एक साथ होना इस घटना को और भी अद्भुत बना देता है। यही वजह है कि यह प्रसंग अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे ईश्वर की अनोखी लीला मान रहे हैं।

पहली तस्वीर के बारे में आप सब जानते ही हैं , दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास में आग लगने के बाद मि...
24/09/2025

पहली तस्वीर के बारे में आप सब जानते ही हैं , दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास में आग लगने के बाद मिले भारी मात्रा में नकदी के जले हुए ढेर मिले थे । अब यह इलाहबाद हाईकोर्ट के जज हैं।

वहीं दूसरी तस्वीर है छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले 83 वर्षीय जागेश्वर प्रसाद अवधिया की, जिनकी ज़िंदगी एक झूठे आरोप ने तबाह कर दी। 1986 में सिर्फ़ ₹100 की रिश्वत लेने का इल्ज़ाम लगा, और उसी ने उनकी नौकरी, परिवार और सम्मान सब कुछ छीन लिया।

आज, पूरे 39 साल बाद हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, लेकिन इतने लंबे इंतज़ार ने उनके जीवन को गहरी चोट दी है। एक ईमानदार कर्मचारी को रिश्वतखोर कहकर अपमानित किया गया, उनकी पत्नी का दुखों से दम टूट गया, बच्चों की पढ़ाई छूट गई, परिवार समाज से अलग-थलग पड़ गया।

जागेश्वर अवधिया कहते हैं – “न्याय तो मिला, लेकिन किस कीमत पर? मेरा पूरा परिवार बर्बाद हो गया।” अब वे सिर्फ़ सरकार से अपनी बकाया पेंशन और मदद की उम्मीद कर रहे हैं ताकि बाकी दिन सुकून से जी सकें।

उनके बेटे नीरज आज भी याद करते हैं – “पापा का नाम साफ़ हो गया, लेकिन हमारा बचपन और जवानी लौटकर नहीं आएगी।”

यह घटना सिर्फ़ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि भारतीय न्याय प्रणाली की उस कड़वी हकीकत को दिखाती है, जहाँ न्याय की देरी कभी-कभी न्याय से भी बड़ी सज़ा बन जाती है।

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