28/03/2026
नासिक से जुड़ी एक खबर ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। जब भी ऐसे मामले सामने आते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल सिर्फ किसी एक व्यक्ति पर नहीं उठता, बल्कि पूरे समाज की सोच पर खड़ा होता है। आखिर क्यों आज भी लोग किसी तथाकथित “बाबा” या “गुरु” पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं?
सबसे हैरानी की बात यह है कि इनमें सिर्फ अनपढ़ लोग ही नहीं, बल्कि पढ़ी-लिखी, समझदार महिलाएं भी शामिल होती हैं। यह सवाल और भी गहरा हो जाता है — जब शिक्षा होने के बावजूद, सोच इतनी कमजोर कैसे रह जाती है? क्या डिग्री होना ही समझदारी की गारंटी है? या फिर भावनाओं और डर के आगे तर्कशक्ति हार जाती है?
हमारे समाज में “आस्था” एक बहुत बड़ी ताकत है, लेकिन जब यही आस्था “अंधविश्वास” में बदल जाती है, तो यह खतरनाक बन जाती है। लोग अपनी परेशानियों, बीमारियों, रिश्तों या भविष्य को लेकर इतने असुरक्षित हो जाते हैं कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति पर विश्वास कर लेते हैं, जो उन्हें उम्मीद दिखाता है — चाहे वह सच हो या धोखा।
यहां सबसे बड़ी कमी है वैज्ञानिक सोच (scientific thinking) और प्रश्न पूछने की आदत। बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि “बड़ों की बात मानो”, “धर्म पर सवाल मत उठाओ” — लेकिन यही सोच आगे चलकर लोगों को कमजोर बना देती है। जब कोई खुद सोचने और सवाल करने की हिम्मत नहीं करता, तो वह आसानी से किसी के प्रभाव में आ जाता है।
दूसरी बात है भावनात्मक कमजोरी। जब इंसान अकेला महसूस करता है, परेशान होता है, या जीवन में समस्याओं से घिरा होता है — तब वह किसी सहारे की तलाश करता है। ऐसे में कुछ लोग इस कमजोरी का फायदा उठाते हैं और खुद को “भगवान का दूत” या “समस्या का हल” बताकर लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं।
लेकिन सवाल यह है — क्या सच में हमारे समाज में इतनी कमी है कि हमें अपनी जिंदगी के फैसले लेने के लिए किसी “बाबा” की जरूरत पड़े? क्या हम खुद पर भरोसा नहीं कर सकते? क्या हम अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं कर सकते?
आज जरूरत है जागरूकता की। जरूरत है यह समझने की कि विश्वास और अंधविश्वास में फर्क होता है। विश्वास वह है जिसमें तर्क हो, समझ हो, और सच्चाई हो। अंधविश्वास वह है जिसमें डर हो, अज्ञान हो, और आंख बंद करके किसी के पीछे चलना हो।
अगर समाज को आगे बढ़ाना है, तो सबसे पहले लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। सवाल पूछना सीखना होगा। हर चीज को जांचना होगा। क्योंकि जब तक लोग खुद नहीं जागेंगे, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
👉 आखिर कब तक हम आंख बंद करके विश्वास करते रहेंगे?
👉 कब हम सच में अपने दिमाग का इस्तेमाल करना शुरू करेंगे?