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"ओडिशा की एक साधारण सी किशोरी, जिसने 260 से ज़्यादा देशी बीज इकट्ठा किए… किसानों को मुफ़्त में बांट दिए 🌱ना कैमरे आए, ना...
30/12/2025

"ओडिशा की एक साधारण सी किशोरी, जिसने 260 से ज़्यादा देशी बीज इकट्ठा किए… किसानों को मुफ़्त में बांट दिए 🌱
ना कैमरे आए, ना हेडलाइन बनी,
क्योंकि यहां फेमस तो वही होता है जो डांस करे, विवाद करे या दिखावा करे।
असली हीरो कभी ट्रेंड नहीं होते भाई जी ✍️"

ये हैं सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल जिन्होंने 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान अपने जलते टैंक से पाकिस्तान के 4 ट...
30/12/2025

ये हैं सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल जिन्होंने 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान अपने जलते टैंक से पाकिस्तान के 4 टैंक ध्वस्त किए और 16 दिसंबर, 1971 को मात्र 21 साल की उम्र में वीरगति को प्राप्त हुए।

1971 युद्ध में पाकिस्तान के 13 लांसर्स ने अटैक किया. 13 लांसर्स के पास अमेरिकी मेड 50 टन के पैटन टैंक थे. वहीं दूसरी तरफ 17 पूना हॉर्स के पास वर्ल्ड वॉर के जमाने के ब्रिटिश मेड सेंचुरियन टैंक थे.17 पूना हॉर्स की A और B दो स्वाड्रन थीं. लांसर्स ने B स्क्वाड्रन पर हमला किया तो उन्होंने A स्क्वाड्रन से मदद की गुहार की. A स्क्वाड्रन के टैंक मदद के लिए आगे बढ़े. इनमें से एक पर अरुण खेत्रपाल सवार थे. कई घंटे चली भीषण लड़ाई में B स्क्वाड्रन ने पाकिस्तान के 7 टैंक उड़ा दिए. अरुण खेत्रपाल के टैंक पर भी एक गोला लगा. जिससे उनके टैंक में आग लग गई . उनके सीनियर ने उन्हें टैंक छोड़ने का आदेश दिया. लेकिन अरुण तैयार नहीं हुए. उन्होंने रेडियो से सन्देश भेजा,
"No, Sir, I will not abandon my tank. My main gun is still working and I will get these bastards. यानी,

“सर मैं टैंक नहीं छोडूंगा. मेरी मेन बन्दूक अभी भी काम कर रही है”

अरुण खेत्रपाल का ये आख़िरी मेसेज था. इसके बाद उनका रेडियो बंद हो गया. जलते हुए टैंक से ही उन्होंने पाकिस्तान के चार टैंक उड़ाए और वहीं डटे रहे. उनके सामने अब सिर्फ एक पाकिस्तानी टैंक बचा था. जिस पर सवार थे लेफ्टिनेंट नासेर. दोनों टैंकों की बीच कुछ 200 मीटर की दूरी थी. दोनों टैंकों ने बिना देरी किए एक साथ, एक दूसरे की ओर फायर कर दिया।

कई साल बाद, साल 2001 में शहीद अरुण खेत्रपाल के पिता ब्रिगेडियर खेत्रपाल पाकिस्तान गए तो वहां उनकी मुलाक़ात ब्रिगेडियर नासेर से हुई. तब नासेर ने उन्हें अपने नजरिए से बताया कि उस रोज़ क्या हुआ था. ब्रिगेडियर नासेर ने बताया कि उस रोज़ अरुण चट्टान की तरह पाकिस्तानी टैंक के आगे खड़े हो गए थे. आख़िरी लड़ाई उनके और नासेर के बीच हुई थी. नासेर और अरुण दोनों ने एक दूसरे पर गोली चलाई. गोली दोनों टैंकों को लगी लेकिन नासेर ठीक समय पर टैंक से कूद गए. वहीं अरुण टैंक में फंसे रह गए. उनके पेट में गहरा घाव हुआ था. जिसके कारण उनकी वहीं मृत्यु हो गयी.
नासेर ने कहा,

“आपका बेटा बड़ा बहादुर था. हमारी हार के लिए वो अकेले जिम्मेदार थे.”

जब नासेर ने ये कहानी सुनाई तो ब्रिगेडियर खेत्रपाल ने उनसे पूछा, आपको कैसे पता, टैंक में अरुण था?

नासेर ने बताया कि युद्ध विराम के बाद वो अपने जवानों के मृत शरीर लेने वहां गए थे. तब उन्होंने देखा कि भारतीय सैनिक उस टैंक के पुर्जे इकठ्ठा कर रहे हैं, जिससे एकदिन पहले ही उनकी मुठभेड़ हुई थी. नासेर उत्सुक थे, ये जानने के लिए कि इतनी बहादुरी से लड़ने वाला वो आदमी था कौन. उन्होंने भारतीय सैनिकों से पूछा, तो पता चला कि वो सेकेण्ड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का टैंक था.
नासेर ने उनसे कहा,

“बड़ी बहादुरी से लड़े आपके साहब. चोट तो नहीं आई उन्हें?”

तब नासेर को एक सैनिक ने बताया, “साहब शहीद हो गए”. नासेर को बाद में खबरों से पता चला था कि अरुण खेत्रपाल की उम्र तब सिर्फ 21 साल थी. ये पूरी कहानी सुनाने के बाद ब्रिगेडियर नासेर का सर नीचे झुक गया. ब्रिगेडियर खेत्रपाल से नजरें छुपाकर वो लॉन की घास को देखने लगे. ब्रिगेडियर खेत्रपाल भी कुछ देर अपनी जगह पर बैठे रहे. दोनों ने एक दूसरे से कुछ न कहा. अंतहीन से लग रह रहा एक मिनट बड़ी मुश्किल से बीता. ब्रिगेडियर खेत्रपाल खड़े हुए. उन्होंने नासेर की तरफ देखा. और इससे पहले कि उनकी आंखों से आंसू टपकता, नासेर को खींचकर अपने गले से लगा लिया।

गीता फोगाट बनाम बबीता फोगाट: कुश्ती की दो बहनों की प्रेरणादायक कहानीभारतीय महिला कुश्ती में गीता फोगाट और बबीता फोगाट दो...
30/12/2025

गीता फोगाट बनाम बबीता फोगाट: कुश्ती की दो बहनों की प्रेरणादायक कहानी

भारतीय महिला कुश्ती में गीता फोगाट और बबीता फोगाट दो ऐसे नाम हैं, जिन्होंने देश और दुनिया को दिखा दिया कि बेटियाँ किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। हरियाणा के एक छोटे से गाँव बलाली से निकलकर इन दोनों बहनों ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत भी की। दोनों बहनें पहलवान महावीर सिंह फोगाट की बेटियाँ हैं, जिन्होंने पारंपरिक समाज की सीमाओं को तोड़ते हुए अपनी बेटियों को कुश्ती के मैदान में उतारा और उन्हें विश्व विजेता बनाया।

गीता फोगाट – पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट
गीता फोगाट का जन्म 15 दिसंबर 1988 को हुआ। वह भारत की पहली महिला पहलवान बनीं जिन्होंने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इसके अलावा, गीता 2012 के लंदन ओलंपिक्स के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान भी रहीं। उनकी उपलब्धियाँ न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात थीं, बल्कि उन्होंने हजारों लड़कियों को खेल में करियर बनाने की प्रेरणा दी।

गीता की कहानी फिल्म “दंगल” के माध्यम से पूरी दुनिया तक पहुँची, जिसमें आमिर खान ने उनके पिता की भूमिका निभाई। यह फिल्म गीता की संघर्ष, समर्पण और सफलता की गाथा को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनी।

बबीता फोगाट – छोटी बहन, बड़ा जज़्बा
बबीता फोगाट का जन्म 20 नवंबर 1989 को हुआ और वह गीता की छोटी बहन हैं। बबीता ने भी अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिताओं में कई बार भारत का नाम ऊँचा किया है। उन्होंने 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक और 2010 में रजत पदक जीता। इसके अलावा, 2012 के वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक भी हासिल किया, जो किसी भी भारतीय महिला पहलवान के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

बबीता न केवल एक कुशल पहलवान हैं, बल्कि एक मुखर वक्ता और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखने वाली महिला भी हैं। वे 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं और राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

मां को पानी के लिए कोसों दूर न जाना पड़े, इसलिए बेटे ने 4 दिन में खोद डाला 15 फ़ीट गहरा कुंआ कोई अहंकारी होगा जो इस बहाद...
30/12/2025

मां को पानी के लिए कोसों दूर न जाना पड़े, इसलिए बेटे ने 4 दिन में खोद डाला 15 फ़ीट गहरा कुंआ कोई अहंकारी होगा जो इस बहादुर बेटे को आशीर्वाद नहीं देगा

Jammu & Kashmir Flash Flood: पीठ पर बैठाकर शख्स ने बचाई बछड़े की जान | Heavy Rainfall | Viral Videoजम्मू : सोशल मीडिया पर...
30/12/2025

Jammu & Kashmir Flash Flood: पीठ पर बैठाकर शख्स ने बचाई बछड़े की जान | Heavy Rainfall | Viral Video

जम्मू : सोशल मीडिया पर एक भावुक कर देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक शख्स भारी बारिश के बीच अपनी पीठ पर गाय के बछड़े को उठाए हुए कहीं सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा है. रास्ते में जब एक राहगीर उससे पूछता है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है, तो उसका जवाब दिल जीतने वाला था.

आज पूरा देश हरियाणा के चरखी दादरी के वीर सपूत, पैरा कमांडो बलजीत चौहान की शहादत को नमन करता है।​शौर्य और बलिदान की कहानी...
30/12/2025

आज पूरा देश हरियाणा के चरखी दादरी के वीर सपूत, पैरा कमांडो बलजीत चौहान की शहादत को नमन करता है।
​शौर्य और बलिदान की कहानी:
​रेजिमेंट: कुमाऊं रेजिमेंट से 13 पैरा (SF) कमांडो बटालियन के जांबाज जवान।
​शहादत: 4 नवंबर को पंजाब के पठानकोट में NSG कमांडो ट्रेनिंग (अंडरवॉटर डाइविंग ट्रायल) के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए।
​गौरव: बलजीत हमेशा अपनी ट्रेनिंग में अव्वल रहे थे और देश सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।
​बलजीत चौहान ने देश की सबसे कठिन फोर्स में रहकर माँ भारती की सेवा की और अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनके पिता का यह कहना कि "बेटे ने देश के लिए जान दी है, हमें गर्व है," पूरे देश को प्रेरणा देता है।
​हम इस मुश्किल घड़ी में शहीद के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। राष्ट्र उनकी सेवा और सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।
​जय हिन्द! 🇮🇳
शहीद बलजीत चौहान अमर रहें!

CRPF के वीर कमांडेंट चेतन चीता वह नाम हैं, जिनकी कहानी, हिम्मत और निष्ठा देशभक्ति की मिसाल बन चुकी है। आतंकियों से लड़ते...
30/12/2025

CRPF के वीर कमांडेंट चेतन चीता वह नाम हैं, जिनकी कहानी, हिम्मत और निष्ठा देशभक्ति की मिसाल बन चुकी है। आतंकियों से लड़ते वक्त 9 गोलियां लगने के बावजूद भी वो उनसे लड़ते रहे। चेतन चीता ने ना सिर्फ मोर्चा संभाले रखा, बल्कि अपनी टीम की जान बचाते हुए ऑपरेशन को सफल भी बनाया।

आतंकियों के साथ इस मुठभेड़ में उनको 9 गोलियाँ लगी और उन्होंने अपनी एक आँख भी गवाई। और पूरे दो महीने तक कोमा में रहे उनकी इस बहादुरी के लिए उनको कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

रील्स पर नाचने वाली को सब फेमस करते है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप मेंकांस्य पदक लाने वा...
30/12/2025

रील्स पर नाचने वाली को सब फेमस करते है लेकिन
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में
कांस्य पदक लाने वाली प्यारी बेटी को कोई फेमस नहीं करता

सोशल मीडिया पर एक बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। अस्पताल में जब ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हो गई और मशीनें बंद हो गईं। तब एक डॉ...
29/12/2025

सोशल मीडिया पर एक बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। अस्पताल में जब ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हो गई और मशीनें बंद हो गईं। तब एक डॉक्टर की मानवता ने चमत्कार कर दिखाया। आगरा के सरकारी अस्पताल में एक नवजात की सांसें थमने लगी थीं, लेकिन डॉ. सुलेखा चौधरी ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद आगे बढ़कर बच्चे को मुंह से सांस देना शुरू कर दिया और पूरे सात मिनट तक यह प्रयास जारी रखा। आखिरकार नन्ही जान ब*च गई
7 मिनट तक डॉक्टर ने दी सांसें
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉ. सुलेखा नवजात को गोद में लेकर कभी सीधा पकड़ती हैं, तो कभी उल्टा करके पीठ थपथपाती हैं और मुंह से लगातार सांस देती रहती हैं। कुछ ही पलों में बच्चे की आंखें खुलती हैं और चेहरा सामान्य हो जाता है। यह दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति ने राहत की सांस ली।
सोशल मीडिया पर लोगों ने बांधे तारीफों के पुल
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने यह वीडियो साझा किया, जिसके बाद यह लाखों लोगों तक पहुंच गया। यूजर्स ने डॉक्टर की तारीफों के पुल बांधे। एक यूजर ने लिखा, 'ईश्वर के बाद अगर कोई जिंदगी बचा सकता है, तो वह डॉक्टर होता है।' दूसरे ने कहा, 'यह कोई साधारण इलाज नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे ऊंची मिसाल है।' कई लोगों ने डॉ. सुलेखा चौधरी को सलाम किया और कहा कि ऐसे डॉक्टर समाज के सच्चे हीरो हैं।
हालांकि यह मामला हालांकि पुराना है, लेकिन इन दिनों फिर से वायरल होकर लोगों के दिलों को छू रहा है। घटना 2022 की बताई जा रही है।

थाना प्रभारी 'हनुमंत लाल तिवारी' ने एक बेसहारा लड़की को अपनी बहन मानकर धूमधाम से उसकी शादी करवायी पर किसी ने हनुमंत जी क...
29/12/2025

थाना प्रभारी 'हनुमंत लाल तिवारी' ने एक बेसहारा लड़की को अपनी बहन मानकर धूमधाम से उसकी शादी करवायी पर किसी ने हनुमंत जी को बधाई नहीं दी

किसी बड़े कलाकार का बेटा होता तो सब बधाई देते देखते हैंसीरियल दीया और बाती हम के कलाकार अनस राशिद के बेटेका आज जन्मदिन ह...
29/12/2025

किसी बड़े कलाकार का बेटा होता तो सब बधाई देते देखते हैं
सीरियल दीया और बाती हम के कलाकार अनस राशिद के बेटे
का आज जन्मदिन है छोटे कलाकार को बधाइया मिलती है कि नहीं

🌟 कभी किसी कमी को अपनी कमजोरी मत बनाओ…बिहार की रूपम कुमारी जन्म से दोनों हाथों के बिना पैदा हुईं —लेकिन उन्होंने ठान लिय...
29/12/2025

🌟 कभी किसी कमी को अपनी कमजोरी मत बनाओ…

बिहार की रूपम कुमारी जन्म से दोनों हाथों के बिना पैदा हुईं —
लेकिन उन्होंने ठान लिया कि “ज़िंदगी मुझे नहीं, मैं ज़िंदगी को बदलूंगी।” 🙌

आज वो अपने पैरों से लिखकर PhD कर रही हैं,
और अपनी मेहनत से लाखों लोगों के लिए एक मिसाल बन गई हैं। ❤️

उनकी कहानी हमें सिखाती है —
“अगर इरादे सच्चे हों, तो किस्मत भी झुक जाती है।” 🙏

👇 Comment में “Salute to Rupam 💪” लिखकर इस जज़्बे को सलाम करें।

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