13/02/2026
बरेली का क्रिटिकल केयर अस्पताल लखनऊ शिफ्ट, 5 साल में जमीन नहीं मिली
बरेली के लिए प्रस्तावित क्रिटिकल केयर अस्पताल अब लखनऊ शिफ्ट कर दिया गया है। वजह बताई गई – जमीन नहीं मिल पाई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2021 से 2026 तक पूरे 5 साल में प्रशासन 5 एकड़ जमीन भी तय नहीं कर पाया?
जनप्रतिनिधियों पर सवाल
बरेली में 7 भाजपा विधायक, एक सांसद, 3 एमएलसी और कई बड़े पदों पर बैठे लोग हैं।
अगर इतने जनप्रतिनिधि होने के बावजूद शहर को एक बड़ा सरकारी अस्पताल नहीं मिल पाया, तो जिम्मेदारी किसकी है?
लोकसभा में सपा सांसद श्री नीरज मौर्य जी ने जब इस विषय पर सवाल उठाया, तब यह बात सामने आई कि जमीन उपलब्ध न होने के कारण अस्पताल लखनऊ शिफ्ट कर दिया गया।
बरेली महानगर, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं
बरेली एक बड़ा शहर है, लेकिन यहां आज भी सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं है।
सरकार हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना चला रही है, फिर भी बरेली इस सुविधा से वंचित है।
केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार, नगर निगम और जिला पंचायत — चारों स्तर पर एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद, अगर शहर को अपनी स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाई, तो यह चिंता का विषय है।
जनता के साथ अन्याय
यह अस्पताल बरेली के लोगों के इलाज के लिए बनना था।
अब गंभीर मरीजों को फिर से लखनऊ या दिल्ली भागना पड़ेगा।
कागजों में योजनाएं बनती रहीं, लेकिन जमीन तय नहीं हुई।
5 साल तक फाइलें चलती रहीं और आखिर में अस्पताल चला गया।
सवाल अभी भी बाकी हैं
क्या जमीन सच में नहीं मिली, या प्रयास नहीं किया गया?
क्या मॉनिटरिंग ठीक से हुई?
क्या चुनाव के समय फिर बड़े वादे किए जाएंगे?
बरेली की जनता जवाब चाहती है।
स्वास्थ्य जैसी जरूरी सुविधा पर राजनीति नहीं, जिम्मेदारी चाहिए।BareillyHealthCrisis