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 ूर_दिवस_और_बाबा_साहेब_अम्बेडकर_का_योगदान1 मई को पूरे विश्व में मजदूर दिवस (Labour Day) मनाया जाता है। यह दिन उन मेहनतकश...
01/05/2026

ूर_दिवस_और_बाबा_साहेब_अम्बेडकर_का_योगदान

1 मई को पूरे विश्व में मजदूर दिवस (Labour Day) मनाया जाता है। यह दिन उन मेहनतकश लोगों को समर्पित है, जो अपने श्रम से समाज और देश की नींव को मजबूत बनाते हैं। भारत में मजदूरों के अधिकारों की बात जब भी होती है, तो डॉ. भीमराव अम्बेडकर का नाम सबसे सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने न केवल संविधान का निर्माण किया, बल्कि मजदूरों के हक और सम्मान के लिए भी ऐतिहासिक कार्य किए।

डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि किसी भी देश की असली ताकत उसके मजदूर होते हैं। यदि मजदूर सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त होंगे, तभी देश प्रगति करेगा। उन्होंने मजदूरों के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए, जो आज भी हमारे जीवन का हिस्सा हैं।

सबसे बड़ा योगदान उनका 8 घंटे काम का नियम (8 Hours Work Rule) है। पहले मजदूरों से 12-14 घंटे तक काम कराया जाता था, जिससे उनका शोषण होता था। डॉ. अम्बेडकर ने इस अमानवीय व्यवस्था का विरोध किया और मजदूरों के लिए 8 घंटे कार्य, 8 घंटे आराम और 8 घंटे व्यक्तिगत जीवन का सिद्धांत लागू करवाया। यह कदम मजदूरों के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव था।

इसके अलावा, उन्होंने मजदूरों के लिए छुट्टियों और वेतन के अधिकार को भी सुनिश्चित किया। आज जो हमें साप्ताहिक अवकाश (Weekly Off) और वेतन सहित छुट्टियाँ मिलती हैं, उसमें अम्बेडकर जी की सोच और प्रयासों का बड़ा योगदान है। उन्होंने यह समझा कि मजदूर केवल मशीन नहीं हैं, बल्कि इंसान हैं, जिन्हें आराम और सम्मान दोनों की जरूरत है।

डॉ. अम्बेडकर ने महिला मजदूरों के अधिकारों के लिए भी काम किया। उन्होंने महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) और सुरक्षित कार्यस्थल की व्यवस्था पर जोर दिया। यह उस समय की सोच से बहुत आगे की बात थी, जब महिलाओं को बराबरी का दर्जा भी नहीं दिया जाता था।

उन्होंने मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा (Social Security) की भी नींव रखी। कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), भविष्य निधि (PF) जैसी योजनाओं का विचार उनके ही प्रयासों से मजबूत हुआ। इससे मजदूरों को बीमारी, दुर्घटना और बुढ़ापे में आर्थिक सहारा मिलता है।

डॉ. अम्बेडकर ने मजदूरों के लिए ट्रेड यूनियन के अधिकार को भी बढ़ावा दिया। उन्होंने मजदूरों को संगठित होने और अपनी आवाज उठाने का अधिकार दिलाया, ताकि वे अपने हक के लिए लड़ सकें और शोषण के खिलाफ खड़े हो सकें।

मजदूर दिवस के अवसर पर हमें यह समझना चाहिए कि आज जो भी अधिकार हमें मिले हैं, वे आसानी से नहीं आए हैं। इसके पीछे कई महान नेताओं का संघर्ष और त्याग है, जिनमें डॉ. अम्बेडकर का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने मजदूरों को केवल अधिकार ही नहीं दिए, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और गरिमा के साथ जीने का रास्ता भी दिखाया।

आज भी समाज में कई जगह मजदूरों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्हें उचित वेतन, सुरक्षित कार्य वातावरण और सम्मान नहीं मिल पाता। ऐसे में डॉ. अम्बेडकर के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और एक समानता पर आधारित समाज का निर्माण करना चाहिए।

अंत में, 1 मई मजदूर दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक याद दिलाने वाला दिन है कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। डॉ. अम्बेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि न्याय, समानता और मानवाधिकार के लिए हमेशा संघर्ष करना चाहिए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।













आज भारत में गर्मी सिर्फ मौसम नहीं रही, यह एक संकट बन चुकी है। तापमान 45-50 डिग्री तक पहुंच रहा है, लोग सड़कों पर बेहोश ह...
28/04/2026

आज भारत में गर्मी सिर्फ मौसम नहीं रही, यह एक संकट बन चुकी है। तापमान 45-50 डिग्री तक पहुंच रहा है, लोग सड़कों पर बेहोश हो रहे हैं, मजदूर काम करने को मजबूर हैं—लेकिन सवाल यह है कि जिम्मेदार कौन है?
हाँ, यह सच है कि कर्क रेखा भारत के बीच से गुजरती है, इसलिए यहां गर्मी स्वाभाविक है।
लेकिन क्या पहले भी इतनी खतरनाक गर्मी पड़ती थी? जवाब है—नहीं।
👉 असली वजह है
जलवायु परिवर्तन + सरकारी लापरवाही
🌳 पेड़ कटे, गर्मी बढ़ी
आज विकास के नाम पर हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं।
हाईवे, बिल्डिंग, फैक्ट्री—सब बन रहे हैं, लेकिन
👉 क्या उतने पेड़ लगाए जा रहे हैं? नहीं।
👉 सरकार से सवाल:
जंगल बचाने की नीति कहां है?
पर्यावरण मंजूरी इतनी आसान क्यों?
🏙️ शहर बन रहे “भट्टी”
आज शहरों की हालत यह है कि:
हर जगह कंक्रीट
हर जगह धुआं
हर जगह ट्रैफिक
👉 “Urban Heat Island” की वजह से शहर आग बन चुके हैं
👉 सरकार की नाकामी:
ग्रीन पार्क नहीं
सही प्लानिंग नहीं
प्रदूषण पर कंट्रोल नहीं
💧 पानी खत्म, राहत खत्म
मानसून देर से आता है,
तालाब सूख रहे हैं,
नदियां खत्म हो रही हैं
👉 लेकिन:
Rainwater harvesting लागू नहीं
जल संरक्षण सिर्फ कागजों में
👉 हर साल वही समस्या, कोई स्थायी समाधान नहीं
🏥 आम आदमी मर रहा, सिस्टम सो रहा
गर्मी से लोग बीमार पड़ रहे हैं
लू से मौतें हो रही हैं
👉 लेकिन:
अस्पतालों में तैयारी नहीं
मजदूरों के लिए सुरक्षा नहीं
Heat Action Plan सिर्फ नाम का
सीधा सवाल सरकार से
क्या विकास का मतलब सिर्फ कंक्रीट है?
क्या पर्यावरण की कोई कीमत नहीं?
क्या गरीब आदमी की जान की कोई अहमियत नहीं?
अंतिम बात
गर्मी अब “प्राकृतिक” नहीं रही,
👉 यह नीतियों की विफलता भी है
अगर आज भी सरकार नहीं जागी तो
👉 आने वाला समय और खतरनाक होगा
✊ संदेश
पेड़ बचाओ 🌳
पानी बचाओ 💧
प्रदूषण रोको 🌍
और सरकार से जवाब मांगो ❗


धर्म की राजनीति भारत जैसे बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक देश के लिए हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रही है। जब राजनीति में धर्म...
28/04/2026

धर्म की राजनीति भारत जैसे बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक देश के लिए हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रही है। जब राजनीति में धर्म का अत्यधिक उपयोग किया जाता है, तो यह समाज में विभाजन और तनाव पैदा कर सकता है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ-साथ समाजवादी पार्टी (SP) पर भी समय-समय पर यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वे अलग-अलग तरीकों से धर्म और समुदाय आधारित राजनीति का सहारा लेते हैं। इस संदर्भ में आलोचनात्मक दृष्टिकोण से दोनों दलों की भूमिका को समझना जरूरी है।
सबसे पहले, लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि सरकार सभी नागरिकों के लिए समान हो, चाहे उनका धर्म, जाति या भाषा कुछ भी हो। आलोचकों का कहना है कि BJP ने कई बार हिंदू धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है। वहीं SP पर आरोप लगता है कि उसने एक विशेष समुदाय (खासकर मुस्लिम वोट बैंक) को ध्यान में रखकर अपनी राजनीति को आकार दिया। इस तरह दोनों दलों की रणनीतियाँ भले अलग हों, लेकिन दोनों पर “धर्म/समुदाय आधारित राजनीति” के आरोप लगते रहे हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक सौहार्द का है। जब राजनीतिक दल धार्मिक या सामुदायिक पहचान को उभारते हैं, तो समाज में ‘हम’ और ‘वे’ की भावना मजबूत होती है। BJP की आलोचना होती है कि उसकी राजनीति से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, जबकि SP पर आरोप है कि उसकी नीतियाँ कभी-कभी तुष्टिकरण (appeasement) की ओर झुकती हैं। दोनों ही स्थितियाँ समाज में संतुलन और विश्वास को कमजोर कर सकती हैं।
तीसरा बिंदु विकास और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का है। जब चुनावी राजनीति धर्म या समुदाय के इर्द-गिर्द घूमती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक विकास जैसे अहम मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। आलोचकों के अनुसार, BJP धार्मिक भावनाओं को उभारती है, जबकि SP सामाजिक समीकरणों और जातीय-धार्मिक गठजोड़ पर अधिक जोर देती है। नतीजतन, जनता के मूलभूत मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस के केंद्र में नहीं आ पाते।
चौथा पहलू संविधान और धर्मनिरपेक्षता से जुड़ा है। भारत का संविधान सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार की बात करता है। लेकिन जब किसी भी दल की नीतियाँ किसी एक समुदाय की ओर झुकी हुई दिखाई देती हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या संविधान की भावना का पूरी तरह पालन हो रहा है। BJP पर बहुसंख्यकवाद (majoritarianism) का आरोप लगता है, जबकि SP पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का। दोनों ही आरोप इस बात की ओर इशारा करते हैं कि राजनीति में संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।
हालांकि, दोनों दल अपने-अपने तरीके से इन आरोपों का खंडन करते हैं। BJP का कहना है कि वह सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है, जबकि SP खुद को सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की आवाज बताती है। यह भी लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा है और हर दल अपने दृष्टिकोण को सही ठहराने की कोशिश करता है।
फिर भी, एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है कि राजनीति का केंद्र बिंदु नागरिकों की भलाई हो, न कि उनकी धार्मिक या सामुदायिक पहचान। धर्म एक व्यक्तिगत आस्था का विषय है, और इसे राजनीतिक हथियार बनाना समाज के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए BJP और SP जैसे बड़े दलों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी राजनीति से बचें जो समाज में विभाजन पैदा करे।
अंततः, भारत की असली ताकत उसकी विविधता और एकता में है। यदि राजनीतिक दल इस विविधता को मजबूत करने की दिशा में काम करें, और धर्म या समुदाय के बजाय विकास, शिक्षा और समान अवसरों पर ध्यान दें, तो देश का भविष्य अधिक उज्ज्वल हो सकता है।


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डॉ. भीमराव अम्बेडकर: राष्ट्रनिर्माता, अर्थशास्त्री और दूरदर्शी चिंतकजब मैं भारत के महान व्यक्तित्वों के बारे में सोचता ह...
14/04/2026

डॉ. भीमराव अम्बेडकर: राष्ट्रनिर्माता, अर्थशास्त्री और दूरदर्शी चिंतक
जब मैं भारत के महान व्यक्तित्वों के बारे में सोचता हूँ, तो सबसे पहले मेरे मन में डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर का नाम आता है। आमतौर पर लोग उन्हें केवल संविधान निर्माता के रूप में जानते हैं, लेकिन मेरी नज़र में वे एक महान अर्थशास्त्री, योजनाकार और आधुनिक भारत की आर्थिक संरचना के प्रमुख शिल्पकार भी थे।
मुझे लगता है कि यदि हम भारत की आर्थिक संस्थाओं—जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक—और बड़े बाँधों (dams) की कल्पना को समझना चाहते हैं, तो हमें अम्बेडकर के विचारों को गहराई से जानना होगा।
मेरा मानना है: अम्बेडकर सिर्फ समाज सुधारक नहीं थे
जब मैं उनके जीवन को देखता हूँ, तो समझ आता है कि उन्होंने केवल सामाजिक भेदभाव के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी, बल्कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए भी ठोस नींव रखी।
उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू में हुआ। एक दलित परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने बचपन से ही अपमान और भेदभाव सहा। लेकिन यही संघर्ष उनके भीतर एक आग बन गया—कुछ बड़ा करने की, समाज और देश को बदलने की।
उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की। यहाँ से उन्होंने अर्थशास्त्र को केवल पढ़ा नहीं, बल्कि उसे भारत की समस्याओं से जोड़कर समझा।
RBI की स्थापना में अम्बेडकर का योगदान – मेरी समझ
बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना के पीछे अम्बेडकर के विचारों की बड़ी भूमिका थी।
उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक The Problem of the Rupee में भारतीय मुद्रा प्रणाली की समस्याओं का गहराई से विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए एक मजबूत केंद्रीय बैंक होना बेहद जरूरी है।
मेरा मानना है कि उनकी यह सोच उस समय के लिए बहुत आगे की थी। उन्होंने सुझाव दिया कि:
मुद्रा का नियंत्रण सरकार के बजाय एक स्वतंत्र संस्था के पास होना चाहिए
महंगाई और वित्तीय संकट को नियंत्रित करने के लिए एक केंद्रीय बैंक जरूरी है
देश की आर्थिक नीतियों को वैज्ञानिक तरीके से संचालित किया जाना चाहिए
इन विचारों के आधार पर 1935 में RBI की स्थापना हुई। यानी यह कहना गलत नहीं होगा कि अम्बेडकर ने भारत की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने का काम किया।
बड़े बाँधों (Dams) का विचार – अम्बेडकर की दूरदर्शिता
जब मैं भारत के विकास की बात करता हूँ, तो मुझे लगता है कि जल संसाधनों का सही उपयोग सबसे महत्वपूर्ण है। इस दिशा में भी अम्बेडकर का योगदान बहुत बड़ा है।
वे 1942 में वायसराय की कार्यकारी परिषद में श्रम सदस्य बने। इस दौरान उन्होंने जल और बिजली (hydropower) के महत्व को समझा और भारत में बड़े बाँधों के निर्माण का विचार आगे बढ़ाया।
उनकी सोच थी कि:
नदियों का पानी समुद्र में व्यर्थ न जाए
सिंचाई के लिए पानी का उपयोग हो
बिजली उत्पादन से उद्योगों को बढ़ावा मिले
इसी सोच के कारण केंद्रीय जल आयोग जैसी संस्थाओं की नींव पड़ी।
मेरे अनुसार, आज भारत में जो बड़े बाँध हैं—जैसे भाखड़ा नांगल बाँध—उनकी मूल सोच कहीं न कहीं अम्बेडकर की ही देन है।
सामाजिक न्याय और आर्थिक न्याय – दोनों जरूरी
मैं यह मानता हूँ कि अम्बेडकर ने हमें यह सिखाया कि केवल सामाजिक समानता ही काफी नहीं है, आर्थिक समानता भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने संविधान में:
समान अधिकार
आरक्षण व्यवस्था
श्रमिकों के अधिकार
जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया। वे जानते थे कि अगर आर्थिक स्थिति नहीं सुधरेगी, तो समाज में असमानता बनी रहेगी।
संविधान निर्माण – एक ऐतिहासिक कार्य
जब मैं भारतीय संविधान सभा के कार्यों को देखता हूँ, तो समझ आता है कि अम्बेडकर ने कितनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से संविधान तैयार किया।
उन्होंने संविधान को केवल कानूनों का संग्रह नहीं बनाया, बल्कि एक ऐसा दस्तावेज बनाया जो हर व्यक्ति को सम्मान और अधिकार देता है।
धर्म परिवर्तन – एक सामाजिक क्रांति
अम्बेडकर ने अंत में बौद्ध धर्म अपनाया। मेरे अनुसार, यह केवल धार्मिक परिवर्तन नहीं था, बल्कि एक सामाजिक क्रांति थी।
उन्होंने यह दिखाया कि इंसान को अपने आत्मसम्मान के लिए कोई भी बड़ा निर्णय लेने से नहीं डरना चाहिए।
मेरी दृष्टि में अम्बेडकर की प्रासंगिकता
आज जब मैं भारत की स्थिति को देखता हूँ, तो महसूस करता हूँ कि अम्बेडकर के विचार आज भी उतने ही जरूरी हैं।
आर्थिक असमानता आज भी मौजूद है
जातिगत भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
संसाधनों का सही उपयोग अभी भी चुनौती है
ऐसे में उनके विचार हमें दिशा दिखाते हैं।
निष्कर्ष – मेरा निष्कर्ष
मेरे लिए डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर केवल एक महान नेता नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक हैं।
उन्होंने हमें सिखाया:
शिक्षा का महत्व
आत्मसम्मान का मूल्य
और देश के लिए सोचने का तरीका
RBI की स्थापना हो या बाँधों का विचार—उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी।
अंत में मैं यही कहना चाहता हूँ कि अगर हम सच में भारत को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो हमें अम्बेडकर के विचारों को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में अपनाना होगा।
“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” – यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।आज हम सभी महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता और मानवता के डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर जी की 126वीं जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं।
बाबा साहेब का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियाँ भी किसी व्यक्ति को महान बनने से नहीं रोक सकतीं। उन्होंने अपने संघर्ष, शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर न केवल खुद को ऊँचाइयों तक पहुँचाया, बल्कि करोड़ों लोगों को सम्मान और अधिकार दिलाने का काम किया।
उन्होंने समाज में समानता, न्याय और भाईचारे का संदेश दिया। भारतीय संविधान सभा में उनके द्वारा रचित संविधान आज भी हर नागरिक को अधिकार और सुरक्षा प्रदान करता है।
उनका दिया हुआ संदेश —
“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” — आज भी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
आइए, इस पावन अवसर पर हम यह संकल्प लें कि:
हम शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएँगे
समाज में भेदभाव को खत्म करने का प्रयास करेंगे
और बाबा साहेब के आदर्शों पर चलकर एक समान और न्यायपूर्ण भारत का निर्माण करेंगे
बाबा साहेब अमर रहें!
जय भीम! 🙏





Sagar Gautam Nidar
Baba Saheb Ambedkar

कांशीराम जयंती – 15 मार्च : विचारों को समझने की आवश्यकता15 मार्च का दिन भारतीय राजनीति और सामाजिक न्याय के इतिहास में मह...
15/03/2026

कांशीराम जयंती – 15 मार्च : विचारों को समझने की आवश्यकता

15 मार्च का दिन भारतीय राजनीति और सामाजिक न्याय के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दिन कांशीराम जी का जन्म हुआ था। कांशीराम जी ऐसे नेता थे जिन्होंने समाज के वंचित, दलित और पिछड़े वर्गों को जागरूक करने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सचेत करने का कार्य किया। उनका जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब में हुआ था। साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपने विचारों और संघर्ष के बल पर भारतीय समाज और राजनीति में एक अलग पहचान बनाई।

कांशीराम जी का मानना था कि किसी भी लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि समाज के सभी वर्गों को बराबरी का अवसर मिले। अगर समाज का कोई बड़ा हिस्सा लंबे समय तक शिक्षा, सम्मान और अवसरों से वंचित रहता है, तो वह केवल उस वर्ग की समस्या नहीं रह जाती बल्कि पूरे समाज की प्रगति को प्रभावित करती है। इसी सोच के साथ उन्होंने बहुजन समाज को संगठित करने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए जागरूक करने का कार्य किया।

कांशीराम जी ने यह तर्क दिया कि सामाजिक परिवर्तन केवल भावनात्मक नारों से नहीं आता, बल्कि इसके लिए शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी आवश्यक होती है। जब लोग अपने अधिकारों को समझते हैं और एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। उनका पूरा जीवन इसी विचार को स्थापित करने के प्रयास में बीता।

आज के समय में एक दिलचस्प और सोचने योग्य स्थिति दिखाई देती है। जिन राजनीतिक दलों ने लंबे समय तक कांशीराम जी के विचारों को गंभीरता से नहीं लिया या जिनकी नीतियों पर कई बार सामाजिक न्याय को लेकर सवाल उठते रहे, वही दल आज उनकी जयंती पर बड़े-बड़े कार्यक्रम करते हुए दिखाई देते हैं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी जैसे दल भी आज कांशीराम जयंती मनाते हैं। यह बात अपने आप में एक सवाल खड़ा करती है कि क्या केवल जयंती मनाना ही पर्याप्त है, या उनके विचारों को समझकर उन्हें नीतियों और व्यवहार में लागू करना भी उतना ही जरूरी है।

किसी भी महान व्यक्ति की जयंती केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अगर कांशीराम जी के विचारों को सही अर्थों में सम्मान देना है, तो समाज में समान अवसर, शिक्षा, सामाजिक सम्मान और न्याय की दिशा में वास्तविक प्रयास होने चाहिए। केवल राजनीतिक मंचों से उनके नाम का उल्लेख करना या उनके चित्र पर माल्यार्पण करना ही पर्याप्त नहीं है।

इसलिए कांशीराम जयंती हमें केवल उनके जीवन को याद करने का अवसर नहीं देती, बल्कि यह भी सोचने के लिए प्रेरित करती है कि क्या हम वास्तव में उनके बताए रास्ते पर चल रहे हैं या नहीं। अगर उनके विचारों को व्यवहार में उतारा जाए, तभी समाज में वह परिवर्तन संभव होगा जिसकी कल्पना कांशीराम जी ने की थी।

अंततः यह कहा जा सकता है कि कांशीराम जी का जीवन सामाजिक जागरूकता, संगठन और समानता के संघर्ष का प्रतीक है। उनकी जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर उनके विचारों को समझें और उन्हें समाज में लागू करने की दिशा में प्रयास करें।

18/12/2025

पंजाब में पंचायत चुनाव के नतीजे और बसपा का प्रदर्शन ये बता रहा है कि बसपा का कार्यकर्ता मेहनत कर रहा है ।

मैं किसी समाज की उन्नति क़ो,महिलाओ की उन्नति से मापता हूँ....             -ड़ा भीमराव अम्बेडकरडॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने ...
14/04/2025

मैं किसी समाज की उन्नति क़ो,
महिलाओ की उन्नति से मापता हूँ....

-ड़ा भीमराव अम्बेडकर

डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने समानता, न्याय और शिक्षा के क्षेत्र मे सराहनीय कार्य किया, और महिलाओ की शिक्षा पर जोर दिया, ऐसे महान व्यक्तित्व क़ो मेरा शत -शत नमन

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31/03/2025

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24/03/2025

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01/03/2025

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17/02/2025

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