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Durg Singh Rajpurohit News Provider Durg Singh Rajpurohit Not here to impress, here to express. Fearless by nature, honest by choice.
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I believe in truth, stand for justice, and speak what others hesitate to say. � Attitude with simplicity � Voice with responsibility � Rajasthan I don’t follow the crowd… I create my own path.

13/05/2026

इतनी भीषण गर्मी में भी बाड़मेर जिला अस्पताल के ये हाल...!मरीज परेशान, व्यवस्थाएं बेहाल। आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे? #ब...

मुझे व्यक्तिगत रूप से किसी की अनावश्यक तारीफ़ करना पसंद नहीं है।अक्सर लोग पूछते हैं कि आप फलां नेता, अधिकारी या व्यक्ति ...
10/05/2026

मुझे व्यक्तिगत रूप से किसी की अनावश्यक तारीफ़ करना पसंद नहीं है।
अक्सर लोग पूछते हैं कि आप फलां नेता, अधिकारी या व्यक्ति की खुलकर प्रशंसा क्यों नहीं करते?
मेरा हमेशा एक ही जवाब रहता है कि यदि कोई अधिकारी या नेता अच्छा काम करता है तो वह उसका कर्तव्य है। उसके कार्यों के प्रचार-प्रसार के लिए जिला स्तर से लेकर राज्य और केंद्र तक बाकायदा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग मौजूद है।

लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी कार्यशैली, निरंतरता और सामाजिक सक्रियता आपको लिखने के लिए मजबूर कर देती है।

ऐसे ही एक नाम हैं , डॉ. दुर्गसिंह राजपुरोहित, बालोतरा।

छात्र जीवन से ही सक्रिय रहे डॉ. दुर्गसिंह ने बहुत कम समय में जिस प्रकार सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, वह निश्चित रूप से उल्लेखनीय है। सामान्यतः छोटे शहरों और कस्बों से निकलने वाले युवाओं के सामने संसाधनों और अवसरों की कमी बड़ी चुनौती होती है, लेकिन उन्होंने यह साबित किया कि यदि व्यक्ति में धैर्य, निरंतर मेहनत और लोगों से संवाद स्थापित करने की क्षमता हो तो वह अपनी अलग पहचान बना सकता है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक उनका संपर्क और प्रभाव क्षेत्र लगातार बढ़ा है। भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से जुड़े रहते हुए उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई है। भाजपा में आज युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की जो परंपरा दिखाई देती है, उसमें ऐसे युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है जो जमीन से जुड़े रहते हुए अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता बनाए रखते हैं।

डॉ. दुर्गसिंह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने केवल सोशल मीडिया की राजनीति तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज के बीच लगातार उपस्थित रहकर संवाद और संपर्क बनाए रखा। वर्तमान समय में अधिकांश युवा जल्द परिणाम चाहते हैं, लेकिन उनका सफर यह सिखाता है कि राजनीति और समाजसेवा दोनों में धैर्य सबसे बड़ी पूंजी होती है।

राजपुरोहित समाज के युवाओं के लिए भी उनका सफर प्रेरणा का विषय है। समाज में अक्सर यह चर्चा होती है कि युवाओं को अवसर नहीं मिलते, लेकिन वास्तविकता यह है कि अवसर निरंतर सक्रिय रहने वालों को ही दिखाई देते हैं। डॉ. दुर्गसिंह ने यह साबित किया कि यदि व्यक्ति लगातार लोगों के बीच रहे, अपनी वैचारिक स्पष्टता बनाए रखे और संबंधों को सम्मानपूर्वक निभाए तो वह सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ सकता है।

आज के दौर में जहां राजनीति में तात्कालिक लोकप्रियता और दिखावे का प्रभाव बढ़ रहा है, वहां ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो संगठन, समाज और विचार के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता रखते हों।

डॉ. दुर्गसिंह राजपुरोहित की सक्रियता और कार्यशैली निश्चित रूप से यह संदेश देती है कि निरंतरता, धैर्य और व्यवहार कुशलता के साथ बहुत बेहतर कार्य किया जा सकता है।
समाज के युवाओं को उनसे सीख लेने की आवश्यकता है कि पहचान रातोंरात नहीं बनती, बल्कि वर्षों की मेहनत, संपर्क और सामाजिक विश्वसनीयता से तैयार होती है।

डॉ. दुर्ग सिंह राजपुरोहित

मरुस्थल, गर्मियां और पानी.... #बाड़मेर  #थार
24/04/2026

मरुस्थल, गर्मियां और पानी....
#बाड़मेर #थार

न कोई सुरक्षा.न कोई मंच.न कोई ताली.फिर भी संतुलन ऐसाकि बड़े-बड़े कलाकार भी पीछे रह जाएं.ये हुनर नहींये ज़िंदगी की लड़ाई ...
22/04/2026

न कोई सुरक्षा.
न कोई मंच.
न कोई ताली.

फिर भी संतुलन ऐसा
कि बड़े-बड़े कलाकार भी पीछे रह जाएं.

ये हुनर नहीं
ये ज़िंदगी की लड़ाई है।

19/04/2026

बाड़मेर के कल्याण का साथी मिल गया है।
बकरा म्हारा भाई है , इन्यूनो मरण नी दो..🤠😎

इन दिनों देशभर में “जनसभाओं” का नया ट्रेंड चल रहा है।हर हाथ में मोबाइल, हर आंख सोशल मीडिया पर।कुर्सियां खाली दिख जाएं तो...
19/04/2026

इन दिनों देशभर में “जनसभाओं” का नया ट्रेंड चल रहा है।
हर हाथ में मोबाइल, हर आंख सोशल मीडिया पर।
कुर्सियां खाली दिख जाएं तो बवाल,
नारे कम हों तो बवाल,
भीड़ कम हो तो बवाल,
और ज़्यादा हो जाए तो अव्यवस्था का बवाल।

लेकिन असली कहानी कुछ और है।

अब “जनता” नहीं जुटती।
उसे जुटाया जाता है।

ऊपर से साफ आदेश आता है।
“लोग अपने आप नहीं आएंगे…
पैकेट का इंतज़ाम करो, भीड़ दिख जाएगी।”

बस में बैठते ही नाश्ते का पैकेट,
टोल नाके पर चाय,
आगे फिर खाने का पैकेट,
और कार्यक्रम खत्म होते ही एक और पैकेट।

नेताओं की अंदरूनी लाइन साफ है।
“जितने पैकेट, उतनी भीड़।”
और हां,
बच्चों को भी साथ लाओ , नंबर बढ़ते हैं।

नमकभूमि की सच्चाई यही है।
यहां समर्थन नहीं जुट रहा,
लोगों को पैकेट के सहारे खड़ा किया जा रहा है। किसी को विकास के पोस्टर के साथ चिपकाया जा रहा है।

ये भीड़ नहीं,
मैनेजमेंट है।

और लोकतंत्र?
वो कहीं इन पैकेट्स के नीचे दब गया है।

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Near Old Income Tax Office

344001

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