03/05/2026
मामला क्या था?
यह आदेश 2018 में शिवगंगा जिले की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर डॉ. अंबेडकर के पोस्टर का अपमान करने का आरोप था। इस मामले में SC/ST Act के तहत FIR दर्ज की गई थी।
हालांकि बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया, लेकिन अदालत ने तुरंत केस खत्म करने के बजाय सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया।
अदालत ने आरोपी को.. डॉ. अंबेडकर पर किताबें पढ़ने छात्रों को किताबें वितरित करने मुआवजा लौटाने सामाजिक संस्थान को भुगतान करने
जैसे निर्देश दिए। बाद में आरोपी ने पश्चाताप जताया, जिसके बाद अदालत ने कार्यवाही रद्द कर दी।
अदालत की अहम टिप्पणी
अदालत ने कहा: डॉ. अंबेडकर इस राष्ट्र के संवैधानिक वादे का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी छवि का अपमान करना न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों के प्रति उदासीनता है। साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि संवैधानिक साक्षरता की कमी युवाओं में पूर्वाग्रह और सामाजिक विभाजन को जन्म दे सकती है।
यह फैसला केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज में संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
चेन्नई/मदुरैः Madras High Court की मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कक्षा 3 से 10 तक के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में B. R. Ambedkar पर पाठ शामिल करने का आदेश दिया है।
क्या कहा अदालत ने?
न्यायमूर्ति एल. विक्टोरिया गौरी ने 30 अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह निर्देश "संवैधानिक शिक्षा" को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है, न कि किसी प्रकार के राजनीतिक महिमामंडन के लिए।
अदालत ने कहा कि पाठ्यक्रम में डॉ. अंबेडकर के.. संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में योगदान
न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांत स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण में भूमिका कानून, अर्थशास्त्र और सामाजिक चिंतन में कार्य को शामिल किया जाना चाहिए।
कब से लागू होगा?
अदालत ने राज्य सरकार से 2027-28 शैक्षणिक सत्र से इन बदलावों को लागू करने का प्रयास करने को कहा है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।