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04/09/2025

Big boost to the Economy

New GST rates will be applicable from Sept 22.

Only 5% & 18% GST slabs to remain

12% & 28% slabs scrapped

To***co and ultra luxury will be at 40%

Great reform by Narendra Modi government

20/08/2025

बड़ा प्रचंड खेल – देश के सामने खड़ा सबसे बड़ा खतरा 🔥

1️⃣ पहला वार – राहुल ने 12/13 मामलों में बेल ली... वो भी सोच-समझकर! ताकि खुद को "क्रांतिकारी" और "सिस्टम के खिलाफ लड़ने वाला" बताकर माहौल बनाया जा सके।

2️⃣ सीधा निशाना – अब हमला चुनाव आयोग पर। सच जानता है, पर झूठ बोल रहा है। असल में निशाना आयोग नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के बहुमत पर है… ताकि लोगों के मन में यह बैठाया जा सके कि सरकार गैरकानूनी है।

3️⃣ घोषणा – "सरकार के किसी भी फैसले को नहीं मानेंगे!" – अगला कदम तय।

4️⃣ हिंसा की तैयारी – उनके हिंसक गिरोह एक्टिव होंगे: वामपंथी छात्र, नक्सली, जिहादी, खालिस्तानी, कुछ कट्टर कैथोलिक नेटवर्क। ऐसे लोगों से विदेशों में मुलाकात कर चुका है। पूरी ब्रीफिंग लेकर आया है। CIA पहले से मैदान में है।

5️⃣ बड़े नेटवर्क की एंट्री – दारुल इस्लाम, PFI, स्लीपर सेल… सब बाहर आएंगे। ISI एजेंट्स से कई बार मीटिंग हो चुकी है।

6️⃣ विद्रोह का आगाज़ – शुरुआत होगी पूर्वी बंगाल और केरल से। वहां हिंसा भड़केगी।

7️⃣ दिल्ली घेराबंदी – लाखों का हुजूम राजधानी में उतरेगा… अगला टारगेट संसद।

8️⃣ रक्षा तंत्र पर वार – सेना और पुलिस पर सीधा हमला।

💡 ये सब यूं ही नहीं हो रहा… चुनाव आयोग को टारगेट करना एक सोची-समझी चाल है।
सरकार को अवैध साबित करने के लिए पहले आयोग को कमजोर करना ज़रूरी है।
विदेशों में और भारत में बार-बार ये कहना कि "भारत में लोकतंत्र नहीं है" – ये तैयार की हुई स्क्रिप्ट है!

📢 ध्यान रहे – मोदी को हर तरफ से घेरने की कोशिश हो रही है।
क्यों? क्योंकि एक शक्तिशाली भारत किसी को मंज़ूर नहीं।
और इस खेल में मोहरा है – राहुल गांधी।

गांधी परिवार सत्ता के लिए कितनी भी नीच राजनीति कर सकता है, ये 1947 से बार-बार साबित हो चुका है।
आज वही कहानी का नया अध्याय शुरू हो चुका है।

अब फैसला हिंदुओं और "नेशन फर्स्ट" भारतीयों को करना है।
एक ही समय पर कई आंदोलन खड़े होने वाले हैं।

अगर इसे "सोनिया टैक्टिक्स" से नहीं रोका गया, तो यह आदमी देश को विनाश की तरफ ले जाएगा।
और एक बार सत्ता में आया… तो ऐसा करेगा कि सत्ता से कभी नहीं हटेगा।

🚨 जागते रहो! 🙏🇮🇳🚩

फोटो में बिहार का नक्शा है, जहां मुस्लिम आबादी 4.08% से 44.47% तक है, कुल 40%। राहुल गांधी की "मतदाता अधिकार यात्रा" 16 ...
17/08/2025

फोटो में बिहार का नक्शा है, जहां मुस्लिम आबादी 4.08% से 44.47% तक है, कुल 40%। राहुल गांधी की "मतदाता अधिकार यात्रा" 16 दिनों में 1300+ किमी का रूट कवर करती है, जो ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले इलाकों जैसे पश्चिमी चंपारण (19.42%), किशनगंज (67.98%) और कटिहार (44.47%) से गुजरती है। ये इसलिए हो सकता है कि उनका फोकस मुस्लिम वोट बैंक को टारगेट करना और पॉलिटिकल सपोर्ट बढ़ाना हो।

16/08/2025

भारत ने हाल ही में चीन को डीजल निर्यात करके वैश्विक व्यापार और कूटनीति के मंच पर एक नया मोड़ ला दिया है, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को तिलमिला दिया। यह घटना न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भू-राजनीतिक तनावों और ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ भारत और चीन की साझा रणनीति का भी प्रतीक बन गई है।
पृष्ठभूमि: ट्रम्प का भारत पर दबाव
डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल के महीनों में भारत पर अपनी व्यापारिक और कूटनीतिक नीतियों के जरिए दबाव बढ़ाया है। खास तौर पर, भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाया और भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो बाद में बढ़कर 50% तक पहुंच गया। ट्रम्प का तर्क था कि भारत और चीन जैसे देश रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने भारत को “मृत अर्थव्यवस्था” तक कह डाला और भारतीय नीतियों को “अमेरिका विरोधी” करार दिया। इसके अलावा, भारत की BRICS सदस्यता और रूस के साथ सैन्य और ऊर्जा संबंधों पर भी ट्रम्प ने तीखी आलोचना की।
भारत का जवाब: चीन को डीजल निर्यात
इन तमाम दबावों के बीच भारत ने एक चतुर कदम उठाया। भारत ने न केवल रूस से तेल खरीदना जारी रखा, बल्कि उस तेल को रिफाइन कर चीन को डीजल निर्यात करना शुरू कर दिया। यह कदम न सिर्फ आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ एक साहसिक कूटनीतिक जवाब भी है। भारत की रिफाइनिंग क्षमता, खास तौर पर रूसी कच्चे तेल में मौजूद उच्च सल्फर सामग्री को संभालने की तकनीक, इसे इस व्यापार का केंद्र बनाती है। रूस से सस्ता तेल खरीदकर और उसे रिफाइन कर चीन को बेचकर भारत ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि ट्रम्प के टैरिफ के दबाव को भी चुनौती दी।
ट्रम्प की प्रतिक्रिया: बौखलाहट
ट्रम्प, जो अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत भारत और अन्य देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे, इस कदम से स्पष्ट रूप से बौखला गए। भारत और चीन, जो परंपरागत रूप से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, ट्रम्प के खिलाफ एकजुट होकर जवाबी रुख अपनाने लगे। चीन ने भी इस मौके का फायदा उठाते हुए भारत के इस कदम की सराहना की। चीनी राजदूत जू फीहॉन्ग ने ट्रम्प को “बुली” (धमकाने वाला) करार दिया और भारत को सलाह दी कि वह अमेरिकी दबाव के आगे न झुके। चीनी मीडिया, जैसे ग्लोबल टाइम्स, ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रूसी तेल की खरीद को तारीफ के साथ पेश किया।
भारत-चीन की बढ़ती नजदीकी
ट्रम्प की नीतियों का एक अप्रत्याशित परिणाम यह हुआ कि भारत और चीन, जो 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से तनावपूर्ण संबंधों में थे, अब धीरे-धीरे नजदीक आ रहे हैं। दोनों देशों ने हाल ही में सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कदम उठाए हैं, जैसे कि भारतीय सेना को प्रमुख सीमा बिंदुओं पर गश्त की अनुमति और कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली। इसके अलावा, भारत ने चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से शुरू कर दिया है और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और नागरिक आदान-प्रदान बढ़ रहा है।
भू-राजनीतिक प्रभाव
इस घटनाक्रम ने वैश्विक मंच पर कई सवाल खड़े किए हैं। क्या ट्रम्प की नीतियां अनजाने में भारत और चीन को और करीब ला रही हैं? क्या यह एक नए भू-राजनीतिक गठजोड़ की शुरुआत है? विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की नीतियां भारत को रूस और चीन के साथ और गहरे आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की ओर धकेल सकती हैं, जो अमेरिका के लिए उल्टा पड़ सकता है। पूर्व अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने भी चेतावनी दी है कि ट्रम्प की नीतियां भारत जैसे मजबूत सहयोगी को खोने का जोखिम उठा रही हैं।
भारत की रणनीति: स्वतंत्रता और संतुलन
भारत ने इस पूरे प्रकरण में अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया है। रूस से तेल खरीदने का फैसला भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक बाजार की वास्तविकताओं पर आधारित है। भारत ने स्पष्ट किया कि उसने रूस से तेल खरीदना शुरू किया क्योंकि पारंपरिक आपूर्तियां यूरोप की ओर मोड़ दी गई थीं, और उस समय अमेरिका ने ही भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए ऐसा करने को प्रोत्साहित किया था। अब जब ट्रम्प भारत को निशाना बना रहे हैं, भारत ने न केवल इसका जवाब दिया, बल्कि चीन के साथ व्यापार बढ़ाकर एक नया संदेश भी दिया है।
निष्कर्ष
भारत का चीन को डीजल निर्यात करना और ट्रम्प की बौखलाहट इस बात का प्रतीक है कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव आ रहा है। भारत ने न केवल ट्रम्प के दबाव को खारिज किया, बल्कि अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी किया। यह घटना यह भी दर्शाती है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है। ट्रम्प की नीतियों ने अनजाने में भारत और चीन को एक साझा मंच पर ला खड़ा किया है, और यह भविष्य में वैश्विक कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
ट्रम्प की सुलगन और भारत-चीन की इस नई साझेदारी ने वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गाथा आगे कैसे सामने आती है। 😄💖

16/08/2025

कल, 15 अगस्त 2025 को भारत अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, लेकिन विश्व का ध्यान कहीं और था। सभी की निगाहें उस बहुप्रतीक्षित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी थीं, जो उसी रात डोनाल्ड ट्रम्प और व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली थी। दुनिया यह देखना चाहती थी कि क्या पुतिन ट्रम्प के बड़बोलेपन पर लगाम लगा पाएंगे। और यही हुआ भी।
बैठक के लिए ट्रम्प ने अलास्का को चुना, जो कभी, 1867 से पहले, रूस का हिस्सा था, लेकिन रूस ने इसे अमेरिका को बेच दिया था। तीन घंटे की इस लंबी वार्ता के बाद पुतिन ने पहले प्रेस को संबोधित किया। उनकी तैयारी इतनी पुख्ता थी कि उन्होंने ट्रम्प को उनकी औकात दिखा दी। हमेशा अपनी बात मनवाने वाले ट्रम्प इस बार सहमे और असहज नजर आए। न उनकी कोई ठोस तैयारी थी, न ही कोई गहरी समझ। पुतिन हर मायने में उन पर भारी पड़े।
अब अगली बैठक मॉस्को में होगी, जहां पुतिन का दबदबा और भी स्पष्ट होगा। यूक्रेन का 20 प्रतिशत हिस्सा रूस पहले ही हथिया चुका है। ऐसे में बेहतर होगा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की अब खुद पहल करें और माफी मांग लें। यूरोप भी लंबे समय तक ज़ेलेंस्की का साथ नहीं दे पाएगा। टी-शर्ट पहनकर दुनिया घूमने वाले ज़ेलेंस्की राजनेता कम, आवारा ज्यादा लगते हैं। और ट्रम्प? उनकी गुंडई को पुतिन ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।
यह मुलाकात न केवल एक राजनयिक घटना थी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का एक नया अध्याय भी साबित हुई।

12/08/2025

भारत 2 साल से रूस से तेल ले रहा है अमेरिका को तकलीफ नहीं थी , भारत 11 साल से वही टैक्स अमेरिका पर लगा रहा उस से भी कोई परेशानी नहीं थी
भारत अमेरिका के सख्त विरोध के बाद भी s400 लिया , उस से भी कोई समस्या नहीं हुई

पर अब समस्या है

क्योंकि अब भारत ने ओपेरेशन सिंदूर कर दिया है

इस ओपेरेशन के बाद अमेरिका को भारत एक खतरा लगने लगे है , चीन से भी बड़ा खतरा
चीन की आबादी इस हद तक बिगड़ चुकी है की वो अब अलगा जापान है और ये तय बात है

ओपेरेशन सिंदूर मे जो हो गया है , वो किसी ने नहीं सोचा था भारत ने भी नहीं की हम इतना अच्छा मार सकते है

अमेरिकी ऐसेट नूर बेस को भी तबाह कर दिया

इस सब से अमेरिका समझ गया है की भारत की मिलिटरी क्षमता वर्ल्ड क्लास है बेस्ट इन थे वर्ल्ड है , सीमित संसाधनों से जो भारत ने किया है , वो अमेरिका इजरायल रूस के लिए भी असंभव जैसा है

इस ओपेरेशन के बाद डीप स्टेट समझ गया है , की अगर अमेरिका को कोई भविष्य मे चेलेज करेगा तो वो भारत ही

एक फाइटर प्लेन छोड़ दिया जाए तो लगभग सब कुछ बनाने की स्तिथि मे भारत पहुचा जा रहा है

अब अमेरिका साम दाम दंड सब कुछ करेगा बीजेपी को हटाने के लिए

हो सकता है कोई युद्ध करवा दे पाकिस्तान को उकसा के , या भारत के प्रमुख की हत्या तक भी की जा सकती है

मोदी जो कह रहे है की व्यक्तिगत रूप से उन्हे इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी , एसे ही नहीं कह रहे

अगले 4 साल चुनौती वाले होंगे , हनुमानजी की शक्ति जाग चुकी है

12/08/2025

साभार....
कांग्रेस 2005 में एक मसौदा तैयार किया था जिसके तहत अल्पसंख्यक को बहुसंख्यक से सुरक्षा का प्रावधान देने की बात कही गई थी।वह ड्राफ्ट बिल नही बन पाया, पुनः सोनिया गांधी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने सांप्रदायिक एवं लक्ष्य केन्द्रित हिंसा निवारण अधिनियम बनाया।इस अधिनियम #हिंदुओं में जड़मूल से मिटाने का पूरा कार्यक्रम था।

कांग्रेस पार्टी संपत्ति को हड़प कर मुसलमानों को देने की बात कर रही है वह कोई नई बात नही है।कांग्रेस पार्टी जिन लोगों के हाथ में है वे रक्त रंजित क्रांति चाहने वाले लोग हैं। उनका मकसद हिंदुओं की संस्कृति,उनका वैभव,उनका मान सम्मान नष्ट कर एक दूसरी संस्कृति के बीज बोना है।यह कम्युनिस्ट मार्क्सवादी लेनिन वादी कांग्रेस है जो हिंदुओं को तोड़ने पर आमदा है।

2011 के सांप्रदायिक एवं लक्ष्य केन्द्रित हिंसा निवारण अधिनियम में प्रावधान था कि कोई मुसलमान हिंदुओं की शिकायत कर दे तो हिंदू बिना अपील,वकील,दलील के प्रथम दृष्टया अपराधी मान लिया जाएगा।फर्ज कीजिए कि किसी दलित का किसी मुसलमान से झगड़ा हो गया तो कानून मुसलमान को कवर करेगा न कि दलित को।हिंदुओं का भाग्य था कि कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं था नही तो आज हिंदुस्तान और पाकिस्तान में ज्यादा भेद न होता।

कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व की भाषा निहायत ही डरावनी और षड्यंत्रकारी है।कांग्रेस अपने विरोधियों के प्रति अत्यंत क्रूर है,भूलती नही।रिश्ते में पुत्र हो या पति,दामाद का परिवार हो या बहू का,कांग्रेस से आप दयालुता की उम्मीद नहीं कर सकते।किसानों के प्रदर्शन के दौरान मोदी सरकार कभी उग्र नही हुई,अफसरों को नरमी से पेश आने के आदेश थे।पुलिस को केवल उन्हें रोकना था,याद करिए कांग्रेस ने किस तरह से रामलीला मैदान में क्रूर कार्यवाही की थी,याद करिए गौ सेवको पर किस तरह से गोलियां चली थीं,रामभक्तों के साथ क्या हुआ था।

कांग्रेस का पहला अध्यक्ष धर्म बदल कर ईसाई हो गया था और लंदन में बस गया था,कांग्रेस का वर्तमान नेतृत्व ईसाई है,एंटोनियो माइनो के पिता फासीवादी सैनिक थे,कांग्रेस फासीवाद का पर्याय बन गई है।जो राहुल गांधी अपने दादा के कब्र पर कभी नहीं गए वह देश के लोगों से क्या ही भावनात्मक संबंध रखेंगे।

झूठ बोलने की इंतहा किसी दल ने पार किया तो कांग्रेस ने,भारत को बांटने के साथ समाज को बांटने का काम किया तो कांग्रेस ने।राहुल गांधी को ब्राह्मण और दत्तात्रेय बताकर कांग्रेसी जनता को मूर्ख समझते हैं,जिसका दादा कब्र में लेटा हो वह ब्राह्मण कैसे हो सकता है।मुझे राहुल के ब्राह्मण, पारसी,ईसाई होने से मतलब नही,मुझे पाखंड और देश की जनता को मूर्ख बनाने की बात से चिढ़ है।

राहुल की भाषा एक गुंडे की भाषा है,यह व्यक्ति नफरत में पागल होकर सत्ता के लिए देश में गृहयुद्ध कराने पर आमदा है।

कांग्रेस समेत उसके सहयोगी दलों को वोट देने से हिंदू जनता अब बचने लगी है। #हिंदुत्व को गाली देने वाले राहुल गांधी की पार्टी में कोई हिंदू कैसे हो सकताहै यह शोध का विषय है।

12/08/2025

ये लोकतंत्र का विजय उत्सव है जो कांग्रेस सड़को की धूल चाट रही है। जिन्हे 2012 का समय याद होगा वे शायद उस मौके को याद कर रहे होंगे।

ज़ब बड़े बड़े घोटाले होते थे जनता सड़को पर उतरती थी, उस पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाते थे। बदले मे बयान आते थे महंगाई तो अच्छी होती है, भ्रष्टाचार तो इकोसिस्टम के लिये अच्छा है, मुंबई मे तो 12 रुपये मे खाना मिल जाता है और ब्ला ब्ला।

ये वो दौर है ज़ब वही कांग्रेस आज सड़को पर रेंग रही है, जनता की चुनी हुई सरकार उसे भेड़ बकरियों की तरह इस वाहन से उस वाहन मे ठूस रही है।

सरकार को चिंता करने की जरूरत भी नहीं है, गृहयुद्ध से तख्तापलट होते है ये बात सही है लेकिन अब तक के इतिहास मे सिर्फ फ़्रांस और रूस की फरवरी क्रांति ही थी जिसमे जनता ने तख्तापलट किया था शेष सभी मे या तो सैन्य अधिकारी करते है या घर का कोई सदस्य।

रोज कमाकर खाने वाले व्यक्ति को उतनी फुरसत नहीं होती कि वो रोजी रोटी छोड़कर नौटंकी करने जाए। अमीर और मिडिल क्लास सड़को पर नहीं आता। 40 करोड़ लोग ग़रीबी से पार हुए है जो है वे या तो शराबी है या फिर छोटे मोटे काम कर रहे है।

काम वालो पर ऊपर वाली थ्योरी लागू है और शराबी को ले आये तो वो तुम्हारा ही सिरदर्द बनेगा।

बाकि राहुल गाँधी की कोई अप्रूवल रेटिंग है नहीं, ये भाई साहब नई दिल्ली के जिस इलाके मे प्रदर्शन कर रहे थे वो कभी कांग्रेस का गढ़ था लेकिन इनकी नौटंकी मे साधारण जन एक भी नहीं था सब कार्यकर्ता थे।

आप अपने अड़ोस पड़ोस के 10 गैर राजनीतिक लोगो से बात करो कोई ये नहीं कहेगा कि मोदी ने तो परेशान कर दिया है अब तो बस राहुल से उम्मीद है।

राहुल की हाइप कांग्रेसियो के अपने दिमाग़ मे है और खुद ही ने उसे जननेता मान रखा है। सेना प्रमुख ने कह दिया है कि पाकिस्तान से जल्द ही युद्ध हो सकता है, यूरोप को याद कीजिये वहाँ तख्तापलट युद्ध काल मे ही किये जाते है।

पाड़े को भूरी काकी के किसी रिश्तेदार ने पट्टी पढ़ा दी होंगी कि देखो फ़्रांस मे ऐसे आंदोलन कर दिया था तो जनता ने राजा को महल से निकाल दिया। पाड़ा भी खुद को नेपोलियन समझने लग गया।

लेकिन इन रट्टू तोतो को ये नहीं पता कि गृहयुद्ध मे यदि जनता ही जनता के खिलाफ खड़ी हो जाए तो गृहयुद्ध करने वाले नेता को ही पटक पटक कर मारती है।

जनता कमर कसकर तैयार रहे, बाहर सेना पाकिस्तान के साथ व्यस्त होंगी घर का मोर्चा आप ही को संभालना है। कौन किस कांग्रेसी को पीटने वाला है अभी से सोचकर रखो बाद मे धक्का मुक्की नहीं होनी चाहिए।

डॉलर और पाउंड को बेचकर गोल्ड में निवेश करना चाहिए, क्योंकि लगता है कि जल्द ही एक नई करेंसी का उदय हो सकता है, एक दिलचस्प...
06/08/2025

डॉलर और पाउंड को बेचकर गोल्ड में निवेश करना चाहिए, क्योंकि लगता है कि जल्द ही एक नई करेंसी का उदय हो सकता है, एक दिलचस्प और विचारणीय दृष्टिकोण है। आइए इस विचार को विस्तार से समझते हैं और इसके विभिन्न पहलुओं पर गौर करते हैं, जिसमें आर्थिक, भू-राजनीतिक और निवेश के दृष्टिकोण शामिल हैं। मैं इसे तार्किक और संतुलित तरीके से विश्लेषण करूंगा, ताकि आप अपने निर्णय को और बेहतर ढंग से समझ सकें।

1. डॉलर और पाउंड की वर्तमान स्थिति
डॉलर (USD) और पाउंड (GBP) दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी में से हैं। डॉलर विशेष रूप से वैश्विक व्यापार, तेल (पेट्रोडॉलर), और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में प्रमुख है। पाउंड भी एक स्थिर और ऐतिहासिक रूप से मजबूत मुद्रा है, हालांकि इसका वैश्विक प्रभाव डॉलर की तुलना में कम है। लेकिन इन मुद्राओं की स्थिरता पर कुछ जोखिम हैं:
• डॉलर की कमजोरी के संभावित कारण:
◦ अमेरिकी ऋण का बोझ: 2025 तक अमेरिका का राष्ट्रीय ऋण $33 ट्रिलियन से अधिक हो चुका है, जो GDP का लगभग 120% है। यह दीर्घकालिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।
◦ मुद्रास्फीति और ब्याज दरें: फेडरल रिजर्व की उच्च ब्याज दर नीति (2023-2025 में 5% से अधिक) ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की कोशिश की है, लेकिन यह अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर भी ले जा सकता है।
◦ वैश्विक डी-डॉलराइजेशन: कुछ देश (जैसे रूस, चीन, और भारत) वैश्विक व्यापार में डॉलर के विकल्प तलाश रहे हैं, जैसे युआन, रुपये, या डिजिटल करेंसी। यह डॉलर की मांग को कम कर सकता है।
• पाउंड की स्थिति:
◦ यूके की अर्थव्यवस्था ब्रेक्सिट के बाद से चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें व्यापार घाटा, मुद्रास्फीति, और ऊर्जा संकट शामिल हैं।
◦ पाउंड की कीमत में उतार-चढ़ाव हाल के वर्षों में अधिक रहा है, खासकर वैश्विक अनिश्चितता (जैसे यूक्रेन-रूस युद्ध) के कारण।
इन कारकों को देखते हुए, आपका डॉलर और पाउंड को बेचने का विचार कुछ हद तक तर्कसंगत है, खासकर अगर आप लंबी अवधि में इन मुद्राओं की स्थिरता को लेकर चिंतित हैं।

2. गोल्ड में निवेश क्यों?
गोल्ड को ऐतिहासिक रूप से “सुरक्षित निवेश” (Safe Haven Asset) माना जाता है। यह मुद्रास्फीति, आर्थिक अस्थिरता, और भू-राजनीतिक संकटों के दौरान मूल्य बनाए रखता है। आपके सुझाव के संदर्भ में गोल्ड के पक्ष में कुछ तर्क हैं:
• मूल्य स्थिरता: गोल्ड की कीमत मुद्राओं की तुलना में कम अस्थिर होती है, क्योंकि यह सीमित संसाधन है और इसकी आपूर्ति केंद्रीय बैंकों द्वारा नियंत्रित नहीं होती।
• मुद्रास्फीति से सुरक्षा: जब कागजी मुद्राओं (Fiat Currency) का मूल्य घटता है, गोल्ड की मांग बढ़ती है, जिससे इसकी कीमत बढ़ती है। उदाहरण के लिए, 2020-2025 के बीच गोल्ड की कीमत में उछाल देखा गया, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था महामारी और युद्धों से प्रभावित थी।
• डी-डॉलराइजेशन और भू-राजनीतिक जोखिम: कई देश (जैसे चीन, रूस, और भारत) अपने गोल्ड भंडार को बढ़ा रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि गोल्ड वैश्विक वित्तीय प्रणाली में फिर से महत्वपूर्ण हो सकता है।
• नई करेंसी का उदय: आपकी आशंका कि एक नई करेंसी का उदय हो सकता है, सही हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो गोल्ड एक ऐसी संपत्ति है जो नई और पुरानी करेंसी के बीच एक स्थिर मूल्य भंडार के रूप में काम कर सकती है।
हालांकि, गोल्ड में निवेश के कुछ जोखिम भी हैं:
• लिक्विडिटी: गोल्ड को तुरंत नकदी में बदलना मुद्राओं की तुलना में कठिन हो सकता है।
• कीमत में उतार-चढ़ाव: अल्पकालिक तौर पर गोल्ड की कीमत में भी उतार-चढ़ाव हो सकता है, खासकर अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर हो जाए।
• भंडारण लागत: भौतिक गोल्ड (सिक्के, बार) को सुरक्षित रखने की लागत और जोखिम होता है।

3. नई करेंसी का उदय: संभावनाएं और प्रभाव
आपके विचार कि “बहुत जल्द किसी नई करेंसी का उदय होने वाला है” कई संभावनाओं की ओर इशारा करता है। आइए इसे विस्तार से देखें:
संभावित नई करेंसी के प्रकार:
1 डिजिटल करेंसी (CBDCs):
◦ कई देश, जैसे चीन (डिजिटल युआन), भारत (डिजिटल रुपया), और यूरोपीय संघ, अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) विकसित कर रहे हैं। ये डिजिटल करेंसी कागजी मुद्राओं को पूरक या प्रतिस्थापित कर सकती हैं।
◦ अगर CBDC वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य हो जाती हैं, तो डॉलर की रिजर्व करेंसी स्थिति कमजोर हो सकती है।
2 क्रिप्टोकरेंसी:
◦ बिटकॉइन, एथेरियम, और अन्य क्रिप्टोकरेंसी वैकल्पिक मुद्राओं के रूप में उभर रही हैं। हालांकि, इनकी अस्थिरता और नियामक अनिश्चितता अभी भी एक बड़ा जोखिम है।
◦ कुछ देश क्रिप्टो को वैध मुद्रा के रूप में मान्यता दे रहे हैं (जैसे अल सल्वाडोर ने बिटकॉइन को), जो भविष्य में क्रिप्टो की स्वीकार्यता बढ़ा सकता है।
3 नई वैश्विक रिजर्व करेंसी:
◦ BRICS देश (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) एक नई वैश्विक करेंसी या व्यापारिक इकाई पर विचार कर रहे हैं, जो डॉलर पर निर्भरता को कम कर सकती है।
◦ यह करेंसी गोल्ड-समर्थित (Gold-Backed) हो सकती है, जिससे गोल्ड की मांग और कीमत बढ़ सकती है।
नई करेंसी का प्रभाव:
• डॉलर और पाउंड पर प्रभाव: अगर एक नई वैश्विक करेंसी उभरती है, तो डॉलर और पाउंड की मांग कम हो सकती है, जिससे उनकी कीमत गिर सकती है।
• गोल्ड की भूमिका: गोल्ड ऐतिहासिक रूप से करेंसी परिवर्तन के दौरान स्थिरता प्रदान करता है। अगर नई करेंसी गोल्ड-समर्थित होती है, तो गोल्ड की कीमत में उछाल आ सकता है।
• आर्थिक अस्थिरता: नई करेंसी का परिचय वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता पैदा कर सकता है, जिससे निवेशक गोल्ड जैसे सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

4. क्या करना चाहिए?
आपके सुझाव के आधार पर, यहाँ कुछ कदम हैं जो आप विचार कर सकते हैं:
1 डॉलर और पाउंड को बेचना:
◦ अगर आपके पास डॉलर और पाउंड में नकदी या निवेश है, तो आप इन्हें धीरे-धीरे बेच सकते हैं। लेकिन इसे एकमुश्त न करें, क्योंकि मुद्रा बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।
◦ मुद्रा विनिमय जोखिम (Exchange Rate Risk) को कम करने के लिए, स्थानीय मुद्रा (जैसे रुपये) में निवेश करें या गोल्ड में परिवर्तित करें।
2 गोल्ड में निवेश:
◦ भौतिक गोल्ड: सोने के सिक्के, बार, या ज्वेलरी खरीद सकते हैं। सुनिश्चित करें कि आप इन्हें सुरक्षित स्थान (जैसे बैंक लॉकर) में रखें।
◦ डिजिटल गोल्ड: कई प्लेटफॉर्म (जैसे Paytm, Google Pay, या Sovereign Gold Bonds) डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF में निवेश की सुविधा देते हैं, जो भंडारण की समस्या को हल करता है।
◦ गोल्ड ETF/म्यूचुअल फंड: ये स्टॉक मार्केट में गोल्ड की कीमत से जुड़े होते हैं और लिक्विडिटी प्रदान करते हैं।
3 विविधीकरण (Diversification):
◦ सभी निवेश को गोल्ड में न डालें। अपने पोर्टफोलियो को विविध बनाएं, जिसमें स्टॉक, बॉन्ड, रियल एस्टेट, और अन्य परिसंपत्तियाँ शामिल हों।
◦ अगर आप क्रिप्टोकरेंसी में विश्वास रखते हैं, तो बिटकॉइन या स्थिर कॉइन (Stablecoins) में छोटा निवेश विचार कर सकते हैं।
4 बाजार की निगरानी:
◦ वैश्विक आर्थिक समाचार, खासकर BRICS देशों की नीतियों, CBDC के विकास, और गोल्ड की कीमतों पर नजर रखें।
◦ अगर नई करेंसी की खबरें विश्वसनीय स्रोतों से मिलती हैं, तो अपने निवेश को तदनुसार समायोजित करें।

5. जोखिम और सावधानियां
• जल्दबाजी न करें: निवेश निर्णय लेने से पहले पूरी तरह से शोध करें। गोल्ड की कीमतें भी बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती हैं, और यह हमेशा बढ़ती नहीं हैं।
• वित्तीय सलाहकार से परामर्श: अगर आपके पास बड़ी राशि है, तो किसी विश्वसनीय वित्तीय सलाहकार से बात करें।
• कर (Tax) और लागत: गोल्ड खरीदने और बेचने में कर (जैसे GST, Capital Gains Tax) और अन्य लागतें शामिल हो सकती हैं। इनका हिसाब रखें।
• नकली गोल्ड से सावधान: भौतिक गोल्ड खरीदते समय केवल विश्वसनीय विक्रेताओं (जैसे टाटा, MMTC-PAMP) से खरीदें।

6. निष्कर्ष
आपका विचार कि नई करेंसी के उदय के कारण डॉलर और पाउंड को बेचकर गोल्ड में निवेश करना चाहिए, आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए समझदारी भरा हो सकता है। गोल्ड एक सुरक्षित और लंबी अवधि की संपत्ति है, जो मुद्रास्फीति और करेंसी अस्थिरता से बचाव प्रदान करता है। हालांकि, निवेश को विविध रखना, बाजार की निगरानी करना, और जल्दबाजी से बचना महत्वपूर्ण है।

04/08/2025
31/07/2025

#प्रेमानंद_महाराज, #अनिरुद्धाचार्य जी और #पंडित_धीरेन्द्र_कृष्ण_शास्त्री पर हमला अचानक नहीं है,इसके पीछे सोची-समझी साज़िश है!

जहाँ एक तरफ प्रेमानंद महाराज की अजातशत्रु की छवि बन गई थी और संभ्रांत लोग भी उनकी वाणी में विश्राम पाने लगे थे,
वहीं दूसरी तरफ कैंसर अस्पताल और कन्या विवाह जैसे आयोजनों के जरिए #बागेश्वर_धाम वाले बाबा निर्धन तबके में ज़बरदस्त लोकप्रियता बटोर रहे थे कुछ ऐसे ही कार्य अनिरुद्धाचार्य जी के भी हैं वह भी कन्या विवाह असहाय अनाथ बच्चों के लिए आश्रम चलाते हैं जो उनको आम जनमानस में लोकप्रियता देते हैं।

अतः,एक के 4 महीने पुराने वीडियो की अधूरी क्लिप कटवाकर वायरल करवाई गई,वहीं दूसरे पर देश में होने वाली हर आपदा का ठीकरा फोड़ा जाने लगा।

इसके पीछे कारण ये है कि बाबा रामदेव अब ऐसे आक्रमणों से Immune हो चुके हैं, #सद्गुरु के विरुद्ध भी इन्होंने बहुत प्रयास किया लेकिन वो सफल नहीं हुआ।
#बाबा_रामदेव से ख़तरा था क्योंकि उन्होंने योग और आयुर्वेद को पुनः आम जनसमूह में स्थापित किया,
सद्गुरु अंग्रेजी में बोलते हैं और दुनियाभर के हिन्दू हेटर्स को चुप करा देते हैं इसलिए वो निशान थे।

मोरारी बाबू और श्री श्री रविशंकर से इन्हें बहुत ख़तरा नहीं दिखा क्योंकि ये दोनों पूर्व में सेक्युलर प्रकृति के रहे हैं। अलीमौला गाना ओर हिंदुत्व की परम्परा को तोड़ना नई परम्परा चलाना जिससे हिंदू जीवन शैली नष्ट हो इसलिए कभी इनका विरोध नहीं किया

जिन प्रेमानन्द महाराज को कल तक इतने सम्मान के भाव से देखा जाता था और हिन्दुओं से घृणा करने वाले भी उनकी बातों को ध्यान से सुनते थे,
आज उनके लिए इस एक वीडियो क्लिप की आड़ में तरह-तरह के अपशब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
वहीं बागेश्वर धाम वाले बाबा को तो लगातार मीडिया और सोशल मीडिया की स्क्रूटनी झेलनी पड़ी।लेकिन,अब वो भी इन चीजों से ऊपर उठ रहे हैं।

महाराज के साथ अच्छी बात ये है कि वो कोई इंटरव्यू वगैरह नहीं देते,न बृन्दावन से बाहर कहीं जाते हैं।
इसीलिए,उनके विरुद्ध प्रपंच भी बहुत अधिक नहीं टिकेगा।फिर भी हमको आपको अनिरुद्धाचार्य जी प्रेमानंद महाराज या बाबा बागेश्वर की तरह किसी भी सनातन के हित में कार्य कर रहे व्यक्ति का पूर्ण समर्थन करना होगा अगर हम सनातन का गौरव और प्रतिष्ठा बनाए रखना चाहते हैं तो।बाकी निर्णय आपका होगा.

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