26/04/2026
क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरा देश आईपीएल के बुखार में तप रहा था और हर कोई अपनी पसंदीदा क्रिकेट टीम के लिए चीयर कर रहा था, तब देश से दूर एक युवा भारतीय खिलाड़ी खामोशी से इतिहास कैसे रच रहा था? हम बात कर रहे हैं भारत के उभरते हुए बैडमिंटन स्टार आयुष शेट्टी की। जिस समय हमारे टीवी स्क्रीन्स पर क्रिकेटर्स छाए हुए थे, ठीक उसी समय आयुष ने एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी से कड़ी ट्रेनिंग लेने वाले इस युवा खिलाड़ी ने कोर्ट पर अपने अचूक स्मैश और गजब की फुर्ती से दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों को धूल चटाई। लेकिन विडंबना देखिए, क्रिकेट के इस देश में आयुष के इस ऐतिहासिक और पसीने से कमाए गए पदक को वह पहचान और सराहना नहीं मिली, जिसका वह असली हकदार था।
हमारे देश के युवा इस विशाल democracy का भविष्य हैं, और खेलों के विकास के लिए यह बहुत जरूरी है कि सिस्टम में नकारात्मक politics न हो। खेल संघों और प्रशासन में पूरी transparency होनी चाहिए ताकि हर खेल को समान महत्त्व मिले। जब हमारे खेल विभाग का governance मजबूत होता है और संबंधित अधिकारियों में accountability होती है, तभी आयुष शेट्टी जैसी दुर्लभ प्रतिभाएं दुनिया के सामने आ पाती हैं। बिना किसी खास कवरेज और सपोर्ट के भी अपने लक्ष्य पर अडिग रहकर आयुष ने जो leadership दिखाया है, वह काबिले तारीफ है। अपने खेल और समर्पण से देश का सम्मान बढ़ाना भी एक प्रकार की सच्ची public service ही है, जो लाखों युवाओं को एक नई दिशा दिखाती है।
आईपीएल की जीत सिर्फ कुछ फ्रेंचाइजी की होती है, लेकिन आयुष शेट्टी का यह पदक पूरे देश की जीत है। आइए, क्रिकेट के शोर से बाहर निकलकर देश के इस असली हीरो के जज्बे को सलाम करें।