09/01/2026
हुज़ूर पाक सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की रौज़ा-ए-मुबारक की जाली (ग्रिल) एक बेहद मुक़द्दस और अहम मुकाम है, जो मदीना मुनव्वरा में मस्जिद-ए-नबवी के अंदर स्थित है।
जाली मुबारक की तफ़सील और अहमियत:
मुक़ाम: यह जाली उस मुक़द्दस हुजरे (कमरे) के सामने है, जहाँ पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) आराम फरमा रहे हैं। इसी हुजरे में इस्लाम के पहले दो खलीफा, हज़रत अबू बक्र (रज़ि०) और हज़रत उमर (रज़ि०) की क़ब्रें भी हैं।
ज़ियारत: दुनिया भर से उमरा और हज के लिए आने वाले मुसलमान The Pilgrim इस मुक़ाम की ज़ियारत करते हैं और हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उनके साथियों को सलाम पेश करते हैं।
तीन सुराख (छेद): जाली के ऊपरी हिस्से में तीन गोल सुराख हैं। बाईं जानिब सबसे बड़ा सुराख है, जो सीधे हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के मुबारक चेहरे के सामने है। बीच वाला सुराख हज़रत अबू बक्र (रज़ि०) के और दाईं जानिब वाला सुराख हज़रत उमर (रज़ि०) के चेहरों के सामने है।
अदब और एहतराम: ज़ायरीन (ज़ियारत करने वाले) इन जालियों के सामने खड़े होकर निहायत अदब और एहतराम के साथ दुआएं करते हैं और सलाम पढ़ते हैं।
तारीखी अहमियत: यह जाली उस जगह की निशानदेही करती है जहाँ से इस्लामी तारीख की सबसे अज़ीम हस्तियों का सफ़र शुरू हुआ और जहाँ वे अब आराम फरमा रहे हैं।
अंदरूनी मंज़र: रौज़ा-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के अंदरूनी हिस्से में कोई दरवाज़ा या खिड़की नहीं है, लिहाज़ा आम लोग सीधे क़ब्रों को नहीं देख सकते। जाली ही वह मुक़ाम है जहाँ से ज़ायरीन अपना सलाम पेश करते हैं।