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Citizen Times Explainers, Interviews and Ground Reports

27/12/2025

बिहार में पहाड़ों से उतर रही सर्द हवाओं ने ठंड का कहर और बढ़ा दिया है। शीतलहर और घने कोहरे के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात ऐसे हैं कि कड़ाके की ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं।
पिछले 24 घंटों में पूरे राज्य में विजिबिलिटी महज 100 मीटर तक सिमट गई, जिससे सड़क और रेल यातायात पर भी असर पड़ा। औरंगाबाद से सबौर तक न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने ठंड की तीव्रता को और बढ़ा दिया है।
मौसम विभाग के मुताबिक आज यानी 27 दिसंबर को भी उत्तर-पश्चिम, उत्तर-मध्य और दक्षिणी बिहार में कोल्ड-डे की स्थिति बनी रह सकती है, वहीं बहुत घना कोहरा लोगों की परेशानी बढ़ाता रहेगा।

जमीन खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान!
25/12/2025

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25/12/2025

राज्यसभा सीटों को लेकर एनडीए में जेडीयू और बीजेपी की रणनीति, इस वीडियो में समझिए पांच सीटों पर किन्हें मिलेगा मौका

25/12/2025

क्या भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को इस बार राजनीतिक हार का सामना करने के लिए मजबूर कर पाएगी? 🤔👀💥

24/12/2025

राजद नेता शक्ति यादव ने एक यूट्यूब चैनल के साथ बातचीत में दावा किया है कि खरमास के बाद संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में मंगल पांडेय को बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुना जा सकता है।

24/12/2025

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के बीच मुलाकात से क्यों सियासी गलियारों में हलचल मच गई है? खरमास के बाद बिहार में भाजपा के मुख्यमंत्री बनने की अटकलें तेज हो गई हैं क्या?

22/12/2025

पटना में एक कट्ठा जमीन की कीमत 10cr से ज्यादा: बोरिंग रोड-राजा बाजार सबसे महंगा; बिहार में 400% तक सर्किल रेट बढ़ाएगी सरकार

22/12/2025

“क्रिसमस के भव्य उत्सव की तैयारी में जुटा भागलपुर का ईसाई समुदाय ✝️✨”

22/12/2025

सरकार मनरेगा से आगे बढ़कर एक ऐसा कानून लाई है, जो गांवों में ज्यादा दिन का काम, स्थायी आय और बेहतर विकास सुनिश्चित करने का दावा करता है।

21/12/2025

एलर्जिक इम्यून से जुड़ी त्वचा, पेट और मूत्र संबंधी बीमारियों के उपचार में यूनानी पद्धति कितनी प्रभावी है? भागलपुर के प्रसिद्ध यूनानी विशेषज्ञ हकीम डॉ मोहम्मद मशरूर हसन कासमी से जानें।

20/12/2025

गोराडीह पश्चिमी क्षेत्र के जिला परिषद को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है, उनका कहना है कि इतने सालों में कोई विकास नहीं हुआ है, इसलिए इस बार पीथना के जुल्फेकार उर्फ मिंटू को जिताने का मन बनाया है।

18/12/2025

नीतीश कुमार: व्यक्तित्व, राजनीति और साजिशों के बीच सच

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति को लेकर सवाल उठाना कोई नई बात नहीं है। वर्षों से विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाता रहा है। बिहार ही नहीं, देशभर में यह बहस समय-समय पर उछाली जाती रही है। लेकिन हाल के दिनों में बिहार में घटित एक घटना को जिस तरह से तोड़–मरोड़ कर पेश किया गया, उसमें चिंता से ज़्यादा राजनीति की गंध साफ़ दिखाई देती है।

जिस प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीधे निशाने पर लिया गया, उसमें संबंधित लड़की का बयान भी सामने आया है। उसने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मुख्यमंत्री की मंशा गलत नहीं थी। वहां मौजूद भीड़ और माहौल के कारण स्थिति असहज जरूर हुई, लेकिन इसे दुर्भावना से जोड़ना सरासर गलत है। बावजूद इसके, इस घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और मुख्यमंत्री की छवि को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। अब यह खबर भी आ रही है कि वह लड़की आगे की पढ़ाई या जॉइनिंग नहीं करना चाहती और अपने भाई के पास कोलकाता चली गई है—लेकिन इन तथ्यों को जानने से पहले ही फैसला सुना देना आज की राजनीति की पहचान बन गई है।

सवाल उठता है कि क्या किसी एक घटना के आधार पर पूरे राजनीतिक जीवन को कठघरे में खड़ा किया जा सकता है? जवाब साफ है—नहीं।

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर गवाह है कि उन्होंने बिहार में सिर्फ सत्ता नहीं चलाई, बल्कि एक नई राजनीतिक संस्कृति की नींव रखी। महिला सशक्तिकरण की बात हो या बालिका शिक्षा की—नीतीश कुमार ने नारे नहीं, ज़मीनी काम किए। साइकिल योजना, पोशाक योजना, आरक्षण में महिलाओं को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी—इन फैसलों ने बिहार की सामाजिक संरचना को बदला। आज जो लड़कियां आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं, उसके पीछे नीतीश कुमार की दूरदृष्टि है।

बिहार के मुसलमानों के लिए भी नीतीश कुमार ने बिना किसी दिखावे के काम किया। शिक्षा, सुरक्षा और विकास—तीनों मोर्चों पर उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि अल्पसंख्यक समुदाय खुद को हाशिये पर न महसूस करे। यही वजह है कि उनकी राजनीति पर अक्सर “सर्वसमावेशी” होने का ठप्पा लगता है।

अत्यंत पिछड़ा वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का श्रेय भी नीतीश कुमार को ही जाता है। पंचायत से लेकर प्रशासन तक, उन्होंने उन वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया, जिनकी आवाज़ दशकों तक दबाई गई थी।

सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि बिहार में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाया गया। कभी अपराध और अराजकता के लिए बदनाम रहा बिहार, आज काफी हद तक नियंत्रण और व्यवस्था का उदाहरण बना। अपराध पर सख्ती, भ्रष्टाचार पर अंकुश और प्रशासनिक पारदर्शिता—ये सब नीतीश कुमार की राजनीतिक पहचान का हिस्सा हैं।

नीतीश कुमार की सबसे बड़ी ताकत यह रही है कि उन्होंने बिहार को जाति, धर्म और वर्ग की दीवारों से ऊपर उठकर देखने की कोशिश की। सभी समुदायों, सभी वर्गों और सभी धर्मों के लोगों के लिए एक साथ रहने का अनुकूल वातावरण तैयार करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे संभव किया।

आज जब उनके स्वास्थ्य या किसी एक घटना के बहाने उनकी पूरी राजनीतिक विरासत पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तब ज़रूरी है कि हम भावनाओं और राजनीति से ऊपर उठकर तथ्यों को देखें। नीतीश कुमार केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि बिहार की सामाजिक और राजनीतिक पुनर्रचना के सूत्रधार हैं। इतिहास उन्हें किसी एक विवाद से नहीं, बल्कि उन बदलावों से याद रखेगा जो उन्होंने बिहार की ज़मीन पर उतारे।

इकरामुल हक

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