28/05/2024
तापमान बढ़ चुका है, औसत तापमान 60 डिग्री तक पहुंच चुका है, वर्ष 2024 वो पहला वर्ष था जब थर्मामीटर पर पारे ने 50 डिग्री पर दस्तक दी लेकिन आज बीस साल बाद औसत टेंप्रेचर 60 डिग्री तक पहुंच चुका है।
बीस साल पहले अरबों रुपए लगा बनाए गए रोड आज वीरान पड़े है, बाहर सतह पर कहीं एक दुक्के पेड़ छितरे हुए दिखाई देते है। मानव ने जीने के लिए नए तरीके ढूंढे है जैसे टनल वे एक नया तरह का ट्रांसपोर्ट है जो इंसान को अब धरती से कुछ फीट नीचे बिछे टनल में यात्रा करवा रहा है। फ्रिक्शन रहित ट्रांसपोर्ट से आवागमन की स्पीड में तेजी आई है और दिल्ली से अहमदाबाद की दूरी अब कुछ घंटों में सिमट गई है लेकिन अब शहर वैसे नहीं रह गए है और बिजली की अधिक मांग के कारण इन ट्रांसपोर्ट के साधनों को भी लिमिटेड संख्या में चलाया जा रहा है। अब थर्मल पावर प्लांट की संख्या काफी कम हो गई चूंकि प्लांट में थर्मल ऊर्जा के नियंत्रण के लिए पानी की आवश्यकता होती है और अधिक टेंपरेचर के कारण पानी का वाष्पीकरण होना ज्यादा हो गया है, पूरे साल चलने वाले जलाशय अब मई महीने तक ही सूख जाते है और पानी केवल ग्राउंड सोर्स से ही मिल रहा है।
भारत ने गर्मियों के महीने के लिए UG Delhi (underground Delhi) को अपनी नई राजधानी बनाया है, जहां लगभग 30 फीट नीचे कई सरकारी कार्यालय बनाए गए है, अब यहां से ही सब कुछ कंट्रोल किया जाता है, धरती के नीचे जहां ऑफिस चल रहे है वहीं धरती की सतह पर लगभग लॉकडाउन लगा हुआ था, वर्ष 2030 में केवल एक महीने के लिए लॉकडाउन लगना शुरू हुआ था जो अब आज 2044 में पूरे गर्मी के महीने रहता है, लगभग सब काम वर्क फ्रॉम होम ही है, आवश्यक चीजों को कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है और इनकी हाउसहोल्ड डेलिवरी की जाती है स्पेशियल कोल्ड क्यूब्स में जो ड्रोन के साथ अटैच होते है।
लोगो को अब बेसब्री से अगस्त से मार्च महीने का इंतजार रहता है जब लोग अपने घरों से बाहर आ जा सकते है।
गर्मी के कारण धरती की सतह पर काफी नुकसान हुआ है ओजोन परत पर भी काफी नुकसान हुआ है जिससे सोलर रेडिएशन काफी बढ़ गया है गर्मी के मौसम में, पूरी दुनिया के वैज्ञानिक एक आर्टिफिशियल सतह (लेयर) तैयार करने में लगे हुए है ताकि सोलर रेडिएशन कम हो तो इंसान पेड़ लगाने जैसे दूसरे विकल्पों पर काम कर सकते है जो की गर्मी को कम करने में मददगार है, दूसरा विकल्प इसलिए क्योंकि अब सोलर रेडिएशन और तापमान इतना अधिक है कि बरसात और सर्दी में लगाए पौधे अब मई से अगस्त की गर्मी नहीं झेल पाते है और दम तोड़ देते है, वैज्ञानिकों ने इसमें हीटसिंक लगाकर इन पौधों को बचाने की कोशिश भी की लेकिन सफलता का प्रतिशत इतना नहीं है कि प्रकृति को फिर से संभाल सके,
2044 में अब लोग लॉकडाउन और अंडरग्राउंड रहना सीख गए है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है की हर वर्ष पृथ्वी की सतह का तापमान एक फीट नीचे तक बढ़ रहा है, जल्द ही पृथ्वी की सतह से 10 फीट नीचे भी सतह जितना ही तापमान होगा।
भारत और विश्व भर के कई वैज्ञानिक भारत समेत दुनिया के पुराने ग्रंथ, दस्तावेज देख रहे है और उम्मीद लगाए बैठे है की जल्द ही वे ऐसे क्रिस्टल का निर्माण कर लेंगे जो सूरज की सोलर रेडिएशन को कोल्ड रेज (ठंडी किरणों) में तब्दील कर पाएंगे, अब वैज्ञानिक इस में कितना सफल हो पाएंगे यह तो पता नही पर आज की पीढ़ी अगली को यह कहानियां सुनाते दुख जाते है की वो छोटे थे तब पौधे लगा सकते थे और कईयों ने एक दो पौधे लगाए भी थे,
आज की पीढ़ी आश्चर्य कर रही है की धरती पर वास्तव में ही पौधे लगाए जाते थे और वो पेड़ बनते थे क्योंकि आज 2044 में तो पौधे भले लगा ले लेकिन वो पेड़ बन नहीं पाते है।
2044 में यह अफसोस न करे कि काश 2024 में पेड़ लगा पाते, आज जब पेड़ लगा सकते है तो जरूर लगाए क्योंकि कल को ऐसा न हो की यह जमीन पौधों को पेड़ न बनने दे। आपने कोई पेड़ लगाया हो इस साल तो The PPT को बताए।