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अभी सब तरफ स्टूडियो आर्ट फोटो लगे हुए है पर प्रश्न है कि इसे बनाते कैसे है?तो आप अपने फोटो को घिब्ली स्टूडियो आर्ट में म...
30/03/2025

अभी सब तरफ स्टूडियो आर्ट फोटो लगे हुए है पर प्रश्न है कि इसे बनाते कैसे है?

तो आप अपने फोटो को घिब्ली स्टूडियो आर्ट में मुख्यतया दो ऐप से बना सकते है एक है चेट जीपी टी और दूसरा है Grok

आप को इन ऐप्स पर अपने फोटो अपलोड करके बस प्रॉन्प्त में लिखना है

Convert this into studio Ghibli art

और आपका Ghibli studio style सा फोटो तैयार हो जाएगा
चैट जीपी टी दिन के दो फोटो फ्री में बनाकर देगा लेकिन गरोक वाला अनलिमिटेड है

लेकिन क्वालिटी जीपी टी वाला जोरदार है

ट्राई कीजिए और कमेंट में बताएं अपना फोटो

26/08/2024
तापमान बढ़ चुका है, औसत तापमान 60 डिग्री तक पहुंच चुका है, वर्ष 2024 वो पहला वर्ष था जब थर्मामीटर पर पारे ने 50 डिग्री प...
28/05/2024

तापमान बढ़ चुका है, औसत तापमान 60 डिग्री तक पहुंच चुका है, वर्ष 2024 वो पहला वर्ष था जब थर्मामीटर पर पारे ने 50 डिग्री पर दस्तक दी लेकिन आज बीस साल बाद औसत टेंप्रेचर 60 डिग्री तक पहुंच चुका है।

बीस साल पहले अरबों रुपए लगा बनाए गए रोड आज वीरान पड़े है, बाहर सतह पर कहीं एक दुक्के पेड़ छितरे हुए दिखाई देते है। मानव ने जीने के लिए नए तरीके ढूंढे है जैसे टनल वे एक नया तरह का ट्रांसपोर्ट है जो इंसान को अब धरती से कुछ फीट नीचे बिछे टनल में यात्रा करवा रहा है। फ्रिक्शन रहित ट्रांसपोर्ट से आवागमन की स्पीड में तेजी आई है और दिल्ली से अहमदाबाद की दूरी अब कुछ घंटों में सिमट गई है लेकिन अब शहर वैसे नहीं रह गए है और बिजली की अधिक मांग के कारण इन ट्रांसपोर्ट के साधनों को भी लिमिटेड संख्या में चलाया जा रहा है। अब थर्मल पावर प्लांट की संख्या काफी कम हो गई चूंकि प्लांट में थर्मल ऊर्जा के नियंत्रण के लिए पानी की आवश्यकता होती है और अधिक टेंपरेचर के कारण पानी का वाष्पीकरण होना ज्यादा हो गया है, पूरे साल चलने वाले जलाशय अब मई महीने तक ही सूख जाते है और पानी केवल ग्राउंड सोर्स से ही मिल रहा है।

भारत ने गर्मियों के महीने के लिए UG Delhi (underground Delhi) को अपनी नई राजधानी बनाया है, जहां लगभग 30 फीट नीचे कई सरकारी कार्यालय बनाए गए है, अब यहां से ही सब कुछ कंट्रोल किया जाता है, धरती के नीचे जहां ऑफिस चल रहे है वहीं धरती की सतह पर लगभग लॉकडाउन लगा हुआ था, वर्ष 2030 में केवल एक महीने के लिए लॉकडाउन लगना शुरू हुआ था जो अब आज 2044 में पूरे गर्मी के महीने रहता है, लगभग सब काम वर्क फ्रॉम होम ही है, आवश्यक चीजों को कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है और इनकी हाउसहोल्ड डेलिवरी की जाती है स्पेशियल कोल्ड क्यूब्स में जो ड्रोन के साथ अटैच होते है।

लोगो को अब बेसब्री से अगस्त से मार्च महीने का इंतजार रहता है जब लोग अपने घरों से बाहर आ जा सकते है।

गर्मी के कारण धरती की सतह पर काफी नुकसान हुआ है ओजोन परत पर भी काफी नुकसान हुआ है जिससे सोलर रेडिएशन काफी बढ़ गया है गर्मी के मौसम में, पूरी दुनिया के वैज्ञानिक एक आर्टिफिशियल सतह (लेयर) तैयार करने में लगे हुए है ताकि सोलर रेडिएशन कम हो तो इंसान पेड़ लगाने जैसे दूसरे विकल्पों पर काम कर सकते है जो की गर्मी को कम करने में मददगार है, दूसरा विकल्प इसलिए क्योंकि अब सोलर रेडिएशन और तापमान इतना अधिक है कि बरसात और सर्दी में लगाए पौधे अब मई से अगस्त की गर्मी नहीं झेल पाते है और दम तोड़ देते है, वैज्ञानिकों ने इसमें हीटसिंक लगाकर इन पौधों को बचाने की कोशिश भी की लेकिन सफलता का प्रतिशत इतना नहीं है कि प्रकृति को फिर से संभाल सके,
2044 में अब लोग लॉकडाउन और अंडरग्राउंड रहना सीख गए है लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है की हर वर्ष पृथ्वी की सतह का तापमान एक फीट नीचे तक बढ़ रहा है, जल्द ही पृथ्वी की सतह से 10 फीट नीचे भी सतह जितना ही तापमान होगा।

भारत और विश्व भर के कई वैज्ञानिक भारत समेत दुनिया के पुराने ग्रंथ, दस्तावेज देख रहे है और उम्मीद लगाए बैठे है की जल्द ही वे ऐसे क्रिस्टल का निर्माण कर लेंगे जो सूरज की सोलर रेडिएशन को कोल्ड रेज (ठंडी किरणों) में तब्दील कर पाएंगे, अब वैज्ञानिक इस में कितना सफल हो पाएंगे यह तो पता नही पर आज की पीढ़ी अगली को यह कहानियां सुनाते दुख जाते है की वो छोटे थे तब पौधे लगा सकते थे और कईयों ने एक दो पौधे लगाए भी थे,
आज की पीढ़ी आश्चर्य कर रही है की धरती पर वास्तव में ही पौधे लगाए जाते थे और वो पेड़ बनते थे क्योंकि आज 2044 में तो पौधे भले लगा ले लेकिन वो पेड़ बन नहीं पाते है।

2044 में यह अफसोस न करे कि काश 2024 में पेड़ लगा पाते, आज जब पेड़ लगा सकते है तो जरूर लगाए क्योंकि कल को ऐसा न हो की यह जमीन पौधों को पेड़ न बनने दे। आपने कोई पेड़ लगाया हो इस साल तो The PPT को बताए।

गरीबों के लिए निशुल्क चाय की दुकान     (गुलाब जी चाय वाले जयपुर )जयपुर आने वाले लोग जब स्थानीय लोगो से पूछते है की भाई च...
26/05/2024

गरीबों के लिए निशुल्क चाय की दुकान
(गुलाब जी चाय वाले जयपुर )

जयपुर आने वाले लोग जब स्थानीय लोगो से पूछते है की भाई चाय के लिए कोई अच्छी या प्रसिद्ध जगह बताओ तो वो बिना एक सेकंड गवाएं आपसे कहेंगे

गुलाब जी चाय वाले

की दुकान पर चले जाओ MI रोड पर, और आप उनका कहना मान वहां चले जाते है, वहां जाकर देखते है की रोड पर पचासों स्टूल लगे हुए है और काफी युवा, बुजुर्ग सभी अपनी चाय की चुस्की ली रहे है।

दुकान एक छोटी से स्टॉल में है जहां पर टोकन लेकर आप चाय ले सकते है जो कांच की गिलास या कुल्हड़ में मिलती है। अब इनकी एक रेस्टोरेंट भी है जहां लगभग 30 लोगो के लिए सिटिंग अरेंजमेंट मिल जाएगा लेकिन लोग तो बाहर खुले में स्टूल पर बैठकर ही चाय का आनंद लेते दिखते है।

चाय के साथ आप समोसे या बन मस्का आनंद ले सकते।है, और भी कई चीजें है नाश्ते में लेकिन समोसा और बन मस्का ज्यादा प्रसिद्ध है।

30 रुपए में मिलने वाली यह चाय इतनी प्रसिद्ध क्यों है, क्यों लोग इतनी लाइन लगाकर पैदल चलकर या कई कई किलोमीटर दूर अपनी गाड़ी से यहां चाय पीने आते है?

तो जी जवाब है?

मानवता,

मानवता?? भला चाय में इसका क्या काम आप यही सोच रहे होंगे लेकिन हमारे देश में कहते है की आप अच्छा करते है तो वो अच्छाई आप तक लोट कर जरूर आती है, तो गुलाब जी लगातार अच्छा और भलाई का काम करते रहते थे और बदले में यह अच्छाई प्रसिद्धि के रूप उनके पास वापस आई।

गुलाब जी की कहानी

एक राजपूत परिवार में जन्मे गुलाब जी ने आजादी से एक साल पहले MI रोड पर एक चाय की दुकान लगाई, जो वास्तव में उस समय एक राजपूत परिवार के लड़के के लिए कोई आसान बात नहीं थी, तब इस समय चाय के काम को अच्छे से नही देखा जाता था।

लेकिन गुलाब जी का उद्देश्य सिर्फ चाय नही था, उनकी दुकान पर उस समय जो भी आता अगर उसके पास पैसे नहीं तो उसे चाय और नाश्ता निशुल्क मिलता था, कुछ संख्या से शुरू हुआ यह निशुल्क चाय पानी आंकड़ा अब सैकड़ों के पहुंचा जाता है, और तब से अब तक के आंकड़े देखे तो गुलाब जी चाय वाले के यह लाखो लोग निशुल्क चाय नाश्ता कर चुके है।

कहते है सुबह 6 बजे यहां जिन के पास पैसे नहीं है वो लाइन लगाकर चाय ले सकते है।

अभी वर्तमान में चाय 30 रुपए में मिलती है (कुल्हड़ में)
वैसे कांच के गिलास में 25 रुपए में मिलती है।

गुलाब जी 94 वर्ष की आयु तक इस दुकान पर आते रहे है, और उस समय तक भी चाय बनाने में एक्टिव रहते थे।
इस चाय की दुकान पर चाय की चुस्की लेने में पूर्व उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह जी शेखावत, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत सहित कई राजनेतिक और बड़ी हस्तियां रह चुकी है।
गुलाब जी आज से लगभग 3 वर्ष पूर्व अपनी 95 वर्ष की आयू में अपनी देह त्याग कर स्वर्गलोक को चले गए पर अब भी उनके नाम से लोग चाय की चुस्की लेने यहां आते है। गुलाब जी चाय के एक और आउटलेट है जहां मैं गया हूं, वो अगली पोस्ट में।

मैं अक्सर भविष्य की बातें करता हूं और लिखता हूं की कैसा होगा भविष्य ज्यादातर काल्पनिक बातें होती है लेकिन उनका आधार आज क...
24/05/2024

मैं अक्सर भविष्य की बातें करता हूं और लिखता हूं की कैसा होगा भविष्य ज्यादातर काल्पनिक बातें होती है लेकिन उनका आधार आज की जा रहे रिसर्च और डेवलपमेंट पर आधारित होते है। आज बात कर रहा हूं भविष्य में बनने वाले रोड की, रोड के प्रकार की नही बल्कि रोड बनाने के तरीके पर।

आज किसी जगह रोड बनना शुरू होता है तो जो पहले से मौजूद रोड होती है उसे खोद दिया जाता है, टू लेन के रोड के पास एक कच्चा पक्का रोड बना दिया जाता है फिर शुरू होता है रोड बनाने का काम जिसमें निर्धारित टाइम लाइन पर कभी रोड नही बन पाते है, कभी अप्रूवल तो कभी क्या कभी क्या विषय को लेकर रोड बनाने की गति धीमी होती रहती है, विशेषकर अगर यह रोड शहर के अंदर बन रही होती है तो जो ट्रैफिक जाम होता है वो न सिर्फ देश के फ्यूल को फालतू में जलाता है, बल्कि प्रदूषण में भी वृद्धि करता है लेकिन सरकार और कांट्रेक्टर के सिवाय यह लिखने की

आप के भविष्य को सुविधा के लिए वर्तमान की दुविधा के लिए खेद है।

लेकिन इस लाइन से उस आदमी को क्या राहत मिलेगी जिसे किसी भी हालत में सही समय पर ऑफिस पहुंचना है या अस्पताल पहुंचना है या किसी भी जगह निश्चित समय पर पहुंचना है।

इस समस्या के सॉल्यूशन एक यूरोपियन कंपनी ने सोचा है, astra नाम की यह कंपनी फ्लाईओवर ब्रिज का कॉन्सेप्ट लेकर आई है जिसमें रोड बनाते समय एक मोबाइल ब्रिज होता है जो टेंपरेरी आधार पर ट्रैफिक को अपने ऊपर से पास करता है और इसके नीचे इसी समय रोड बनने का काम होता है, अब इस स्थिति में रोड चाहे कितने भी दिनों में बने ट्रैफिक जाम की कोई समस्या नहीं आती है। आपको क्या लगता है की इस तरह के सॉल्यूशन भारत में भी आवश्यक है और क्या यह भविष्य में भारत में दिखेंगे। The PPT

किसी शहर को अच्छे से एक्सप्लोर करने का एक तरीका का है की वहां के जायके को एक्सप्लोर किया जाए।राजस्थान अपने दाल बाटी के ल...
22/05/2024

किसी शहर को अच्छे से एक्सप्लोर करने का एक तरीका का है की वहां के जायके को एक्सप्लोर किया जाए।

राजस्थान अपने दाल बाटी के लिए प्रसिद्ध है लेकिन अगर एक राजस्थानी इसी टेस्ट को एक्सप्लोर करने के लिए निकले तो निश्चित ही बता देगा की यह प्लेस या रेस्टोरेंट जो ऑथेंटिक राजस्थानी टेस्ट का दावा करता है वो वाकई उस टेस्ट के आस पास भी है या नही।

इस पोस्ट में लगे फोटो जयपुर के एक रेस्टोरेंट राजस्थानी थाली, बनी पार्क जयपुर की है जिसके थाल में सजा है राजस्थानी दाल बाटी और साथ में है चूरमा, खीर, बेसन गट्टे की सब्जी, मसाला बाटी, दाल, चावल, कढ़ी और एडिशन में है मिर्च के टिपोरे, लहसून चटनी और एक्स्ट्रा घी। मसाला बाटी, चूरमा, खीर, कढ़ी वाकई बेहतरीन टेस्ट में है तो सबसे ज्यादा निराश किया बाटी ने जो दाल बाटी का मेन पार्ट है लेकिन इतनी सख्त बाटियों को खाना वास्तव में मुश्किल है हालांकि स्टाफ का व्यवहार अच्छा था तो आपके मांगने पर थोड़ी नरम बाटियां मिल जाएगी लेकिन जिन्होंने राजस्थानी जीमन की दाल बाटी खाई हो उसे संतुष्ट नही किया जा सकता है, इस जगह का खाना अच्छा है लेकिन थोड़ा डिमांडिंग होना है अच्छी दाल बाटी खाने के लिए।

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Bhilwara
311001

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