30/08/2026
नवदीप
कैसे नादाँ हो दोस्त, जुगनू साथ ले आए हो,
जाजम पे चमकाने वाले, बस तमाशाई लाए हो।
इन टिमटिमाती लौ से, क्या रात रौशन करोगे,
मौका-परस्त फौज से, दरिया क्या पार करोगे।
सब मियां मिठ्ठू हैं, मंज़िल के राही बने तेरे हैं,
हवा का रुख बदला तो, राह बदल लेंगे,
फिर बैठ के तन्हा, बहुत अफसोस करोगे।
नवदीप नादाँ है, ये लोग तालियों पर झूमेंगे,
क्या सोचा हम जैसे लोग फिर भी, आफरीं-आफरीं कहेंगे??
भाई-भाई रे भिल्ला...डा
नवीन (नवदीप)