भारतीय आदिवासी संगठन

  • Home
  • India
  • Bhopal
  • भारतीय आदिवासी संगठन

भारतीय आदिवासी संगठन आदिवासी क्वीन

मैं  #सांवले_रंग की  #गोंड घर की बेटी,मेरे  #चेहरे में  #सुंदरता कहां, मैं  #हार जाती हूं उस  #जगह पर,जहां  #चर्चा  #खूब...
10/11/2024

मैं #सांवले_रंग की #गोंड घर की बेटी,
मेरे #चेहरे में #सुंदरता कहां, मैं #हार जाती हूं
उस #जगह पर,जहां #चर्चा #खूबसूरती की होती है....!! 🌿

🙈
🏹⚔️🌿

ोहार 🙏🏹⚔️🌿

10/11/2024

Gondi Dance Live Event Today night

10/11/2024

Gondi Dance live Program

जय जोहार        जय आदिवासी 🏹 ‌.     #भीलप्रदेश
09/11/2024

जय जोहार
जय आदिवासी 🏹
‌.
#भीलप्रदेश

05/11/2024

माता पिता के साथ बिताए हर पल संभाल कर रखना क्योंकि हर पल याद तो आएंगे पर वापस नहीं आएंगे
जोहार सगा

🌾 *खरिप फसलों के जावा (निवोद/भोग) चढाने, खुशियों और मनोरंजन का पंडूम दिवारी/दियारी/देवारी पंडूम !* 🤼‍♀️^^^^^^^^^^^^^^^^^...
02/11/2024

🌾 *खरिप फसलों के जावा (निवोद/भोग) चढाने, खुशियों और मनोरंजन का पंडूम दिवारी/दियारी/देवारी पंडूम !* 🤼‍♀️
^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
👍 *गोंड समुदायों की दिवारी उत्सव गोंड नायकों की हत्याओं के जश्न से सबंध नही है । दिवारी उत्सव दसरे को गोंडी नृत्यो के अधिष्ठाता दस रावपेनों (राउड) की पुजा से शुरु होकर पुर्णिमा से अगली पुर्णिमा को संभू-गवरा के विवाहतक चलता है । दिवारी उत्सव महज एक या पाच दिनो का नही है पुरे एक माह चलता है ।*

*गोंड समुदाय के मौसमी फसलों के आधार पर वार्षिक चक्र के दो भाग होते है । उष्मकालीन खरिप फसलें और शीतकालीन रबी फसलों का बुआई पूर्व जमीन तैयार करने से लेकर फसल निकलने तक का समय पांच-पांच महिनों का माना जाता है । खरिप फसलों का काल अश्विन पूर्णिमा तक और रबी फसलों का काल फागुन पूर्णिमा तक होता है । इन अंतिम पूर्णिमाओं के आगे के अमावस तक का पखवाड़ा नारपेनों , दाईशक्तियो को जावा(निवोद/भोग) चढाने और आगे बुआई जानेवाली फसलों के बरकत की कामना करने का होता है । इन्ही को दिवारी(दियारी) , धुराडी(शिमगा), कोलटा पंडूमो के रुप मे मनाया जाता है । इन अवसरोंपर खेती कार्यों से फुरसत मिलने के कारण दंडारी, घुसाडी, हुलकी, करमा आदि नृत्यो उत्सवों के माध्यम से मनोरंजन कर खेती कार्यों से थकान दूर कर चेतना लायी जाती है । इन अवसरोंपर होनेवाले नृत्य उत्सवों और मंडियों के माध्यम से विवाह योग्य युवा युवतियों को अपना साथी चुनने का अवसर मिलता है ।*

👉🏻 *गोंड समुदाय मे दिवारी महोत्सव की मान्यताएं :-*
*१)वर्षाकालीन फसलो का चक्र पुरा होता है और फसल निकालकर खाने के लिए इस्तेमाल मे लाने से पूर्व अपने इष्ट पेनों को नये फसलो का निवोद/भोग दिवारी मे चढाना । धन की बरकत देनेवाली येरुंग प्रकार की दाईयो (लग+सीमी) को नये फसल का निवोद चढाकर अगले शीतकालीन फसलो की अच्छी कामना करना ।अपने घर के गाय, भेस, बकरी आदी पशूओं की भी धन के रुप मे पुजा की जाती है ।*
*२)अपने इष्ट पेन संभू गवरा (तुलसा) के जीवन मे इस अवधी मे घटित मिलन और विवाह की घटना को इसर-गवरा उत्सव के रुप मे दिवारी के माह मे मनाना । बाद के पुनम को विवाह संपन्न का उत्सव मनाना । यह उत्सव वर्षाकालीन फसल चक्र पुरा होने के कारण पुनः उर्जावान बनने के लिए खुशी और मनोरंजन के रुप मे मनाया जाता है ।*
*३)गोंडी नृत्यो के अधिष्ठाता पेन/देव येत्मासूर पेनों की याद मे घुसाडी,दंडारी,हुलकी,करमा,ढेमसा आदी नृत्यों का आयोजन करना । रोजमर्रा की जिंदगी से निजात पाकर मनोरंजन और खुशी के माध्यम से पुनः उर्जावान बनना । सयुंग/पाच सगाओ के राउड पेन और मानकोदाई के जीवन मे घटित मिलन और विवाह की घटना को दंडारी नृत्य के माध्यम से याद करना । मानकोदाई का विवाह दिवारी के बाद के पुनम को हुआ था ।*

👉🏻 *खरिप फसलों का जावा पंडूम दिवारी (दियारी):-*
*दिवारी (दियारी) पंडूम का अर्थ ठंड दिनों का पंडूम (दिवा/दिया+आरी) होता है। जेठ माह से शुरू होनेवाला खरिप फसलों के पूर्व बुआई से काम अश्विन पूर्णिमा तक फसल निकलने तक चलता है । इस काल मे गोंड समुदाय फसलों के बुआई और देखभाल मे व्यस्त होता है । इस काल मे ली गयी धान, जवार आदि फसलें खाने के उपयोग के लिए तैयार होती है । अश्विन माह मे खरिप फसलें निकालनै का काम पुरा होता है । इन फसलों के अन्न के रूप मे इस्तेमाल करने से पूर्व अपने इष्ट नारदाई शक्तियों और नारपेनों को जावा(निवोद/भोग) चढाया जाता है । दिवारी और कोलटा पंडूम नारदाईया और नारपेनों को निवोद चढाने का पंडूम है । ये पंडूम पांच दिनोंतक चलता है । भोग चढाने का पंडूम होने के कारण कुछ क्षेत्रों मे इसे भोगी भी कहते है । नारपेनों के साथ साथ अन्नदाई, धनदाई, दिपदाई, जल्कादाई, भुईदाई, मालदाई, सामीदाई इन येरूंग दाईशक्तियो की निवोद चढाकर और दिये जलाकर पुजा की जाती है । बस्तर क्षेत्र मे कोलटा पंडूम नाम से दिवारी पंडूम मनाया जाता है । कोलटा पंडूम मे भी नारपेनों और नारदाईयो नये फसल का निवोद चढाकर आनेवाली शीतकालीन रबी फसलों की बरकत की कामना की जाती है । दियारी पंडूम के बाद नये अनाज का उपयोग करना शुरू हो जाता है ।*

👉🏻 *मनोरंजन और नवचेतना पाने का उत्सव देवारी :-*
*गोंड समुदाय मे खेती काम के व्यस्तता से आयी थकान से नवचेतना पाने के लिए और मनोरंजन के लिए देवारी उत्सवों का प्रयोजन किया जाता है । देवारी उत्सवों के माध्यम से व्यस्त मनुष्य को अपने घर परिवार कार्यों और मनोरंजन केलिए समय मिलता है । इन सब बातों के लिए देवारी उत्सव भी दिवारी पंडूम के साथ मनाया जाता है । उत्सव का नाम देवारी गोंड समुदाय के नृत्य देवता येत्मासूर के देवारपेदेर इस नाम से लिया गया है । देवारी उत्सव के अवसरपर गावों गावों मे गोंड समुदाय द्वारा दंडारी, घुसाडी, हुलकी, करमा आदि नृत्य उत्सवों का आयोजन किया जाता है । इन अवसरोंपर इन नृत्यों के अधिष्ठाता देवता येत्मासूर पेन की पुजा की जाती है । दंडारी, घुसाडी, हुलकी, करमा आदि नृत्यों के समुह एक गाव से दुसरे गाव अपनी नृत्यकला की प्रदर्शन के लिए जाते है । वहा उनका स्वागत कर खानेपीने का खयाल रखकर यथोचित सन्मान किया जाता है । रात मे प्रकाश के लिए दिये जलाकर इनके नृत्यों के कार्यक्रम का आनंद लिया जाता है । इसी दौरान युवा युवतियों को अपना पसंदीदा जीवनसाथी चुनने का अवसर भी मिलता है । मंडई उत्सवों का भी आयोजन इन्ही बातों का उद्देश्य रखकर किया जाता है । यहासे उनके शादी की बात आगे बढ सकती है । इसप्रकार देवारी खुशियों और मनोरंजन का पर्व है । अपने दैनंदिन कामों के व्यस्तता से छुटकारा पाने का नजरिया है ।*

*इसप्रकार गोंडो का दिवारी(दियारी) पंडूम और देवारी उत्सव खरिप फसलों जावा (निवोद/भोग) चढाने और मनोरंजन का पंडूम है । प्राकृतिक पंडूम और उत्सवों का आयोजन है । इसमे खेती और नार के खुशहाली के अधिष्ठाता पेन , गोंड समुदाय के नायकों के कुटिलता से कोयतूर (किसान) राजा बली और नार रक्षकपेन नारकासूर के हत्याओं से जोडा गया है । लेकिन इन काली करतुतों का सबंध इस पंडूम से जोडकर इसके असली रुप को मिटाया जा रहा है । इस अवसरोंपर गोंड समुदाय येरूंग दाईशक्तियो, नारपेनों की पुजा करता और मनोरंजन के लिए दंडारी, घुसाडी, हुलकी, करमा आदि उत्सवों का आयोजन करता है ।*

तिरुमाल कुशाबराव विश्वनाथ पेंदोर

हमारी संस्कृति सभ्यता की एक झलक हमारी पहचान धर्म संस्कृति हमारे सतरंगी झंडे से है जोहार आदिवासी सगाजन आदिवासी संस्कृति  ...
21/10/2024

हमारी संस्कृति सभ्यता की एक झलक हमारी पहचान धर्म संस्कृति हमारे सतरंगी झंडे से है
जोहार आदिवासी सगाजन
आदिवासी संस्कृति

#भीलप्रदेश #मुलवासी

20/10/2024

भूखे रहकर चांद को देखने से लंबी उम्र नहीं होती बल्कि तब होती है जब आप साफ नीयत से अपने हमसफर के लिए सुख दुख में हमेशा एक दूसरे का साथ देते हो सहारा बनते हो एक दूसरे को समझते हो एक दूसरे से कदम मिलाकर चलते हैं और जिंदगी भर एक दूजे का साथ निभाते हो और उन्हें अच्छा
अच्छा हेल्दी खाना खिलाते हो..
जय भीम जय प्रकृति शक्ति जय जौहर

आदिवासी संस्कृति गढ़ मंडला की रानी दुर्गावती जी एक झलक आदिवासी क्वीन
19/10/2024

आदिवासी संस्कृति
गढ़ मंडला की रानी दुर्गावती जी एक झलक आदिवासी क्वीन

आदिवासी ग्रामीण जीवन की एक झलक सबसे अलग देखने को मिलता हैं जय जोहार        जय आदिवासी 🏹 ‌.     #भीलप्रदेश               ...
18/10/2024

आदिवासी ग्रामीण जीवन की एक झलक सबसे अलग देखने को मिलता हैं
जय जोहार
जय आदिवासी 🏹
‌.
#भीलप्रदेश

बिरसा मुंडा एक ऐसे योद्धा जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में अपने देश के लिए अंग्रेजो से लोहा लिया। आदिवासी समाज को ही नही, ब...
18/10/2024

बिरसा मुंडा एक ऐसे योद्धा जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में अपने देश के लिए अंग्रेजो से लोहा लिया। आदिवासी समाज को ही नही, बल्कि देश के हर युवा को बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेना चाहिए।

जोहार जय आदिवासी ✊🏿🏹

13/10/2024

पंखिड़ा हो पंखिड़ा ____
पंखिड़ा हो पंखिड़ा पंखिड़ा तू उड़ के जाना बाबा गड़ रे महाकाली से मिल के कहना गरबा खेलेंगे
बाली ठाकरे और रीजा खान का का सुपरहिट गायिका के द्वारा शानदार प्रस्तुति









#बैतूल
#उड़ीसा


Address

Bhopal

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when भारतीय आदिवासी संगठन posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share