13/01/2026
भोपाल डिक्लेरेशन के 25 वर्ष पूरे होने से पहले देशभर के दलित और आदिवासी संगठनों ने एक बार फिर साझा मंथन की पहल की है। इसी कड़ी में सोमवार को राजधानी भोपाल में आयोजित “भोपाल डिक्लेरेशन-2” के ड्राफ्टिंग सत्र में सम्मिलित हुआ।
वर्ष 2002 में जो “भोपाल डिक्लेरेशन-1” हुआ था, उसे दलित एजेंडा नाम दिया गया था, लेकिन उसमें SC-ST दोनों वर्गों के मुद्दे शामिल थे। इसका मूल उद्देश्य यह था कि अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के जो युवा रोजगार के योग्य हो चुके हैं, उन्हें नौकरियां मिलें। शासकीय खरीद में आरक्षण दिया जाए और SC-ST वर्ग को पट्टे प्रदान किए जाएं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने SC-ST वर्ग के डिग्री और डिप्लोमा धारकों को बिना टेंडर के कॉन्ट्रैक्ट देना शुरू किया था, जिससे हजारों बेरोजगारों को ठेके मिले। तीन लाख से अधिक लोगों को पट्टे बांटे गए और शासकीय जमीनों पर दबंगों के कब्जे हटाकर SC-ST वर्ग को पट्टे दिए गए। भोपाल डिक्लेरेशन को पूरे देश में समझा गया और कई राज्यों में इसे लागू भी किया गया, हालांकि डेढ़ साल में किसी भी नीति को पूरी तरह लागू कर पाना आसान नहीं होता।
अब समय आ गया है कि “भोपाल डिक्लेरेशन-2” का ड्राफ्ट तैयार किया जाए। मध्य प्रदेश चैप्टर का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है। प्रथम सत्र में तय एजेंडे पर पांच सौ से अधिक लोगों के साथ अगले सत्र में चर्चा होगी और 13 जनवरी 2027 को फाइनल भोपाल डिक्लेरेशन-2 जारी किया जाएगा। इस दौरान अलग-अलग राज्यों में जिला स्तर पर सुझाव लिए जाएंगे और उन्हें ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। साथ ही Gen-Z से भी संवाद कर उनके विचारों को समझा जाएगा।
यह किसी पार्टी विशेष का कार्यक्रम नहीं है। आयोजकों ने भाजपा के दलित और आदिवासी वर्ग के नेताओं को भी आमंत्रित किया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए।
इस कार्यक्रम का संयोजन बहुजन इंटेलेक्ट, आदिवासी सेवा मंडल और डोमा परिषद द्वारा किया जा रहा है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति से जुड़े कई अन्य सामाजिक संगठन भी इसमें सहभागी हैं। ड्राफ्टिंग प्रक्रिया के तहत देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, बुद्धिजीवियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों से चरणबद्ध परामर्श किया जा रहा है।
इस सामूहिक मंथन का उद्देश्य भोपाल डिक्लेरेशन की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, भूमि अधिकार, शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा एक भविष्यपरक साझा एजेंडा तैयार करना है।