URVI HNA

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लू लगने पर इन घरेलू उपायों को अपनाए- १ – इमली की गूदे को हाथ पैरों के तलवों पर मलनेसे लू का असर खत्म हो जाता है।२ – छह –...
21/05/2026

लू लगने पर इन घरेलू उपायों को अपनाए-

१ – इमली की गूदे को हाथ पैरों के तलवों पर मलने
से लू का असर खत्म हो जाता है।

२ – छह – सात कच्चे आम (अमियां) उबाल लें या
राख में सेंक कर भून लें। फिर इन्हें कुछ देर ठंडे पानी
में रखें। ठंडा हो जाने पर छिलका उतार कर
जितने ग्लास पना बनाना हो उतना पानी लें।
फिर उबले आमों का गूदा पानी में हाथों से
निकालकर पानी में अच्छी तरह घोल लें।
तत्पश्चात थोड़ा सा गुड़, धनियां, नमक व
काली मिर्च डालकर पने को तैयार करें। यह
पना दिन में तीन से चार बार पीने से रोगी को
तुरंत आराम मिल जाता है।

३ – लू लगने पर प्याज के रस से कनपटियों और
छाती पर मालिश करें। जल्दी आराम मिलेगा।

४ – आलू बुखारे को गर्म पानी में डाल कर रखें और
उसी पानी में मसल लें। इसे भी आम के पने की तरह
बना कर पीने से लू लगने से होने वाली जलन और
घबराहट खत्म हो जाती है।

५ – धनियां के पानी में चीनी मिला कर पीने
से लू का असर कम होता है।

६ – लू लगने से रोगी को तेज बुखार चढ़ता है। इसके
लिए इमली को उबाल कर उसे छान लें और शर्बत
की तरह पियें। इमली को उबालकर उस पानी में
तौलिया भिगो कर उसके छींटे मारने से रोगी
को लू में बहुत आराम मिलता है।

७ – भुने हुए प्याज को पीस कर उसमें जीरे का
चूर्ण और मिश्री मिलाकर खाने से लू से राहत
मिलती है।

८ – इमली को भिगो कर उसका पानी पीने से
लू अपना असर नहीं दिखा पाती है।

९ – रोजाना खाने के साथ कच्चा प्याज
खाने से लू नहीं लगती है। इसलिए जमकर प्याज
खाइए और लू को दूर भगाइए।लू लगने से मृत्यु क्यों होती है ?*
———————————
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ?

👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है ।

👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है ।

👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है )

👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है ।

👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता
है ।

👉 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते
हैं ।

👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है ।

👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है ।

👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए ।

Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा ।

कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें ।

तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा ।

यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा ।

(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है) ।

कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें ।

किसी भी अवस्था में कम से कम 5 से 6 लीटर पानी जरूर पियें । किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें ।

जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें । किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है ।

ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम
करें ।

फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें ।

हीट वेव कोई मजाक नही है ।

एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है ।

शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है ।

अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें ।

With Poonam Gautam – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

"अशुद्ध में नही, तू है!"जो मेरे खून के दाग है, तेरे आने वाले वंश का सबूत है, अशुद्ध मैं नही, तू है!जो आज मंदिर नही जाती ...
19/05/2026

"अशुद्ध में नही, तू है!"

जो मेरे खून के दाग है, तेरे आने वाले वंश का सबूत है, अशुद्ध मैं नही, तू है!

जो आज मंदिर नही जाती मैं, वजह तू है, जो बचपन में 5 दिन मुझे कैद किया है, अशुद्ध मैं नही, तू है!

किचन में घुसने से तूने मुझे रोका, फिर खाना न मिलने पर मुझे ही कोसा, अशुद्ध मैं नही, तू है!

हाँ मैं लड़की हूँ, और मुझे माहवारी होती है, ये मेरे माँ बनने का कदम है, मुझे नीचा दिखाने वाले, अशुद्ध मैं नही, तू है!

एक सवाल?

उन दिनों क्यों अशुद्ध कहलाती है नारी जिसके रक्त से ही बनी है ये सृष्टि सारी !!

मेरे रक्त के निशान मेरी सम्पूर्णता की निशानी है❤

मेरे जज़्बे मेरी हिम्मत पर ऊपरवाले को भी हैरानी हैं
👏Respect Women👏
**es #महावारीछूआछूतनही

Good Afternoon Meta Family          Yogesh Bhardwaj
07/05/2026

Good Afternoon Meta Family

Yogesh Bhardwaj

05/05/2026

फ्री कनसलटेशन मेडिकल केम्प
के लिए चल पड़े

कंसलटेशन फीस 2500rs मे भारी छूट,क्योकि हम आ रहे है आपके बीच ग्राम करजू मे जहाँ आपको आर्य विद्वानों का उदवोधन सुनने को मि...
02/05/2026

कंसलटेशन फीस 2500rs मे भारी छूट,क्योकि हम आ रहे है आपके बीच ग्राम करजू मे जहाँ आपको आर्य विद्वानों का उदवोधन सुनने को मिलेगा,और URVI HNA की ओर से निःशुल्क चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन होगा,जिसमे केवल दवाओं के चार्ज रहेगे

With Sudish Mandal – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
02/05/2026

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क्या आप भी थका हुआ मेहसूस करते है?तो ये लेख आपकी मदद कर सकता है।दिन भर कंप्यूटर के सामने झुककर बैठने या घंटों फोन चलाते ...
26/04/2026

क्या आप भी थका हुआ मेहसूस करते है?

तो ये लेख आपकी मदद कर सकता है।

दिन भर कंप्यूटर के सामने झुककर बैठने या घंटों फोन चलाते रहने के बाद जब हमें दिमागी थकान महसूस होती है, तो हमें लगता है कि यह केवल काम का दबाव है।

असल में, इसका एक गहरा संबंध हमारी रीढ़ की हड्डी से है। हमारे शरीर का ढांचा इस तरह बना है कि मस्तिष्क को मिलने वाली नब्बे प्रतिशत ऊर्जा और पोषण रीढ़ की हड्डी की सक्रियता से पैदा होता है। जब हम चलते-फिरते हैं या अपनी रीढ़ को सीधा रखते हैं, तो नसों के जरिए दिमाग को लगातार संकेत मिलते रहते हैं, जो उसे सतर्क रखते हैं।

इसे एक साधारण जनरेटर की तरह समझें। रीढ़ की हड्डी वह हैंडल है जिसे घुमाने पर दिमाग की बैटरी चार्ज होती है। यदि रीढ़ स्थिर या झुकी हुई है, तो मस्तिष्क को मिलने वाले संकेतों में कमी आने लगती है, जिससे एकाग्रता कम हो जाती है और सुस्ती महसूस होती है।

विज्ञान के अनुसार, रीढ़ की गति मस्तिष्क के 'सेरेब्रल कॉर्टेक्स' को सक्रिय रखने के लिए अनिवार्य है। इसलिए, लंबे समय तक एक ही जगह बैठने के बजाय हर आधे घंटे में थोड़ा टहलें या स्ट्रेचिंग करें। अपनी रीढ़ को सीधा रखने की आदत डालें, क्योंकि एक सक्रिय पीठ ही एक तेज दिमाग की असली खुराक है।

स्रोत: डॉ. रोजर स्पेरी (नोबेल पुरस्कार विजेता)

Today on   let all resolve to save Malaria
25/04/2026

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फ्री कनसलटेशन मेडिकल केम्प-बाड़ी मे आयोजित आर्य समाज के वार्षिक उत्सव मे हमेशा की तरह मेरे द्वारा केम्प लगाया गया।मेरी ब...
23/04/2026

फ्री कनसलटेशन मेडिकल केम्प-
बाड़ी मे आयोजित आर्य समाज के वार्षिक उत्सव मे हमेशा की तरह मेरे द्वारा केम्प लगाया गया।मेरी बेटियो को केम्प मे मस्ती करने का मौका मिल जाता है।उर्वी तो बहुत अच्छी हेल्थ काउंसलर बनती जा रही है।
वो अक्सर मरीजो को दवा कैसे लेनी है,क्या परहेज करना है बताती रहती है।

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