13/04/2026
यह कहानी वाकई दिल दहला देने वाली और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली है।
यह हैं 25 वर्षीय अभिषेक पाटिल।
यह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।
अभिषेक मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में कैब चलाकर अपना गुजारा करते थे। कुछ दिन पहले ड्राइविंग के दौरान उनकी कैब इंदौर के ही रहने वाले एक अमीर व्यक्ति की कार से मामूली रूप से टकरा गई। उस अमीर व्यक्ति ने पहले तो अभिषेक को जमकर गालियां दीं और फिर नुकसान की भरपाई के लिए 25 हजार रुपये की मांग रख दी। अभिषेक ने कहा कि गाड़ी वर्कशॉप ले चलिए, जो भी जायज खर्चा होगा मैं दे दूंगा, लेकिन वह अहंकारी व्यक्ति 25 हजार रुपये पर ही अड़ा रहा।
बात थाने तक पहुँच गई। थाने वालों ने अभिषेक पर उस अमीर आदमी को पैसे देने का दबाव बनाया और उसकी कैब थाने में ही जब्त कर ली। अगले दिन जब अभिषेक अपनी कैब लेने थाने पहुंचे, तो वहाँ मौजूद सब-इंस्पेक्टर (SI) ने गाड़ी छोड़ने के बदले 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग ली। पैसे न देने पर कई झूठे केसों में फंसाकर जेल भेजने की धमकियाँ भी दीं।
अभिषेक ने घर आकर एक वीडियो बनाया, जिसमें पूरी घटना की जानकारी दी और सुसाइड (आत्महत्या) कर ली।
बेशक, इस तरह खुद को खत्म कर लेना कोई समाधान नहीं है, लेकिन इसका जिम्मेदार कौन है?
फिलहाल SI को सस्पेंड कर दिया गया है।
क्या यह काफी है?
क्या ऐसे भ्रष्ट लोगों को उम्रकैद (मौत तक जेल) की सजा नहीं मिलनी चाहिए?
एक विचार: एक मेहनतकश इंसान का सिस्टम के हाथों हार जाना समाज की सबसे बड़ी विफलता है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी कहाँ जाए? आपकी यह मांग कि ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, बिल्कुल जायज है ताकि भविष्य में किसी और 'अभिषेक' के साथ ऐसा न हो!