Arvind agrawal bijawar

Arvind agrawal bijawar निवर्तमान अध्यक्ष लोक न्यास श्री जटाशंकर धाम एवं अधिमान्य पत्रकार, लेखक बिजावर जिला छतरपुर मध्य प्रदेश

01/02/2026
हमारे गौरव.... कार्तिकेय गुप्ता ने किया बिजावर का नाम रोशन। अंतरराष्ट्रीय स्तर की वेव्स समिट 2025 में बिजावर के एक युवा ...
12/05/2025

हमारे गौरव.... कार्तिकेय गुप्ता ने किया बिजावर का नाम रोशन।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की वेव्स समिट 2025 में बिजावर के एक युवा का चयन फाइनलिस्ट के रूप में किया गया।
मुंबई के जिओ वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में मई माह के पहले सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय स्तर की वेव्स समिट का आयोजन किया गया था। वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।
भारत सरकार द्वारा आयोजित इस समिट का उद्देश्य भारत को ग्लोबल मीडिया, एंटरटेनमेंट और क्रिएटर इकोनॉमी का केंद्र बनाना है। इस समिट में सौ से भी अधिक देशों से दस हजार से अधिक प्रतिनिधि,एक हजार से अधिक कंटेंट क्रिएटर्स और करीब तीन सौ से अधिक अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ शामिल हुईं।
यह आयोजन न सिर्फ मनोरंजन उद्योग के दिग्गजों के विचारों और कहानियों को जोड़ता है, बल्कि नए युग के क्रिएटर्स को दुनिया के सामने लाने का एक मंच भी है।

बिजावर गल्ला मंडी निवासी लक्ष्मी नारायण गुप्ता, साधना गुप्ता के सुपुत्र एवं पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता के कजिन प्रसिद्ध शेफ कार्तिकेय गुप्ता को कल्चरल रील मेकिंग कंपटीशन में फाइनलिस्ट चुना गया। इस समिट के लिए दुनिया भर के 1 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने अपने कंटेंट सबमिट किए थे। इसमें से 32 विभिन्न वैश्विक कैटेगरीज में सिर्फ 7 सौ क्रिएटर्स को शॉर्टलिस्ट किया गया। इसी में से कल्चरल कंटेंट क्रिएशन रील मेकिंग में कार्तिकेय गुप्ता को फाइनलिस्ट चुना गया। इस कैटेगरी में मात्र 6 लोगों का चयन हुआ।
यह कैटेगरी विश्व की विविध संस्कृतियों, भाषाओं और भावनाओं को 60 सेकंड के विडियो में पिरोने की कला थी। अपनी इस सफलता पर कार्तिकेय गुप्ता ने बताया कि दुनिया के कोने-कोने से क्रिएटर आए थे। मंच पर आकर हमने अपनी संस्कृति को दुनिया के सामने पेश किया। यह न सिर्फ मेरी कला का सम्मान था, बल्कि मेरी पहचान और मेरे देश की विविधता का भी जश्न है।
समिट में विभिन्न सत्रों के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर, दीपिका पादुकोण, एस.एस. राजामौली, रजनीकांत, आलिया भट्ट, विक्की कौशल,शाहरुख खान सहित कई प्रसिद्ध कलाकारों की उपस्थिति रही।
कार्तिकेय गुप्ता ने समिट के अपने अनुभव साझा करते हुए। बताया कि इस दौरान मैंने दुनियाभर के कंटेंट क्रिएटर्स, मीडिया एक्सपर्ट्स, और स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत की। जिसके अनुभव मुझे जीवन भर प्रेरित करेंगे। यह मेरे लिए एक प्रमाण है कि यदि आपकी कला में सच्चाई है और आप अपनी संस्कृति को गर्व से दिखाते हैं, तो वैश्विक मंच आपका स्वागत करता है। वही कार्तिकेय गुप्ता के फाइनलिस्ट चुने जाने पर भारत सरकार पर्यटन मंत्रालय के इंस्टीट्यूट, इंडियन क्यूलिनरी इंस्टीट्यूट द्वारा तिरुपति में विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया। गौरतलब है कि कार्तिकेय गुप्ता इसके पहले ताज ग्रुप के मुंबई, हैदराबाद और अहमदाबाद होटल सहित जे डब्ल्यू मैरिएट में बतौर चीफ शेफ काम कर चुके हैं। कार्तिकेय ने अब फूड कंसलटेंसी सर्विस एजेंसी सहित फ्रीलांसिंग सर्विस शुरू की है।
शाबास कार्तिकेय....

29/01/2025

हायर सेकेंडरी स्कूल खैरा कला जिला छतरपुर में बच्चों के साथ

05/11/2024

इंसान उम्मीद से भरा एक ज़िद्दी परिंदा है...

जो घायल भी उम्मीद से है और ज़िंदा भी उम्मीद पर हैं.

इस दर्द को क्या नाम दूं ....अंतिम संस्कार के लिए हो रही परेशानी....सालों पुराना अंत्येष्टि स्थल वन भूमि में होने से नहीं...
29/04/2024

इस दर्द को क्या नाम दूं ....

अंतिम संस्कार के लिए हो रही परेशानी....

सालों पुराना अंत्येष्टि स्थल वन भूमि में होने से नहीं हो पा रही है व्यवस्थाएं....

बिजावर नगर के सबसे पुराने अंत्येष्टि स्थल के व्यवस्थित नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर के जेल मोहल्ला में बिजावर का सबसे पुराना अंत्येष्टि स्थल है। बिजावर में सबसे पहले आबादी इसी जेल मोहल्ला के समीप स्थित शुक्लाना मोहल्ला इलाके में बसी थी। इसे ही बाद में पांडेय मोहल्ला और बेहर वाला मोहल्ला के नाम से भी संबोधित किया जाने लगा। पंडित गिरिजा प्रसाद शुक्ल और राजा दुर्ग सिंह के पूर्वजों को बिजावर का पहला गैर राजकीय बासिंदा माना जाता है । इस इलाके के आस-पास के 500 से अधिक परिवारों में किसी का निधन होने पर जेल मोहल्ला में पहाड़ी पर स्थित इस अंत्येष्टि स्थल पर ही अंतिम संस्कार कई वर्षों से किया जा रहा है। यह अंत्येष्टि स्थल वन विभाग के इलाके में है और छोटी पहाड़ी के ऊपर स्थित है। यहां पर ना तो टीन शेड है ना ही पेयजल के इंतजाम है और तो और यहां तक पहुंचने के लिए रास्ता भी बेहद दुर्गम खाई नुमा है । बारिश के दौरान हालात और बदतर हो जाते हैं जब लोग शव लेकर पहाड़ी पर चढ़ते हैं तो फिसलन होती है। वन भूमि होने के चलते नगरीय प्रशासन यहां पर इंतजाम नहीं कर पा रहा है। तो वही इसी स्थान से सटकर वन विभाग के मुनारो के अंदर बड़ी तादाद में अतिक्रमण करके मकान बनाने का सिलसिला निरंतर जारी है । इतना ही नहीं यहां पर अतिक्रमण कर चुके लोग अब बाहर से रिश्तेदारों को बुलाकर यही बसा रहे हैं । जिनके लिए आए रोज नए मकान और झोपड़ों का निर्माण जारी रहता है।
इसी इलाके में सालों पुराना पीपल का पेड़ है । अंतिम यात्रा के दौरान हिंदू धर्म की परंपराओं के अनुसार यहां पर शव को रखा जाता है । इसी स्थान पर करीब 7 साल पहले नगर परिषद द्वारा एक टीन शेड बनवाया जा रहा था । अतिक्रमणकारियों ने महिलाओं को आगे कर दिया। जिन्होंने एक साथ वहां पहुंचकर यह सरकारी काम बंद करवा दिया। इस पर प्रशासन ने भी चुप्पी साध ली । यहां पर पिलर आदि में जो सरिया लगाया गया था। वह भी गायब कर दिया गया।

अपने परिजनों की अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो पाते वृद्ध और बीमार..... इस श्मशान घाट की भौगोलिक बसाहट इस तरह है कि लोगों को अपने परिजनों अथवा प्रिय जनों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सीधी खड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इन हालातो में वृद्ध और बीमार लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाते। अभी पिछले दिनों वार्ड नंबर 14 में निवासरत उदय सिंह की माता जी का निधन हो गया था। इस दौरान उनके कई रिश्तेदार अंतिम यात्रा में तो शामिल हुए। लेकिन अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो सके। यह स्थिति लगभग हर अंत्येष्टि के दौरान होती है। इतना ही नहीं यहां पर पहले काफी पेड़ थे। जिन्हें वन माफिया द्वारा काट दिया गया। अब अंत्येष्टि के दौरान जब चिता की तैयारी की जाती है। इस अवधि में लोगों को कड़ी धूप में इंतजार करना पड़ता है । पेड़ की छांव तक नसीब नहीं होती।
पंडित धरमदास शास्त्री बताते हैं कि सनातन धर्म में किसी के अंतिम संस्कार के बाद मृतक के परिजनों को लगातार 13 दिन तक अंत्येष्टि स्थल पर जाना होता है। हाल ही में अपनी माता जी को खो चुके उदय सिंह बताते हैं कि यहां पर सड़क नहीं होने से बेहद मुश्किल होती है।
कुछ यही हालत मोहनगंज के भी हैं। मोहनगंज में जटाशंकर रोड पर सड़क के पास सालों से अंतिम संस्कार किया जा रहा है । यहां पर भी शव दाह के लिए कोई इंतजाम नहीं है। नयाताल रोड पर नगर का एकमात्र व्यवस्थित श्मशान घाट है । इसके अंदर भी कुछ चबूतरो के टीन शेड सालों से नहीं लग पाए हैं।
पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि संजीव पांडे चीटू महाराज भावुक होते हुए कहते हैं कि इस दर्द को क्या नाम दूं। जहां लोगों को चैन से अंतिम संस्कार भी नसीब नहीं हो रहा है। इस दिशा में वन विभाग को मानवीय संवेदनाओं के साथ विचार करना चाहिए। यहां पर पहुंच मार्ग निर्माण के साथ ही अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का इंतजाम सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

25/03/2024

बुंदेलखंड के केदारनाथ श्री जटाशंकर धाम में होली की धूम.....

04/12/2023

विधानसभा चुनाव 2023 में बिजावर से ऐतिहासिक जीत हासिल करने पर राजेश शुक्ला जी को हार्दिक बधाई ....

किसी भी चुनाव में एक की जीत और कइयों की हार होती है। यही इस चुनाव में भी हुआ। एक जीता कई हारे ....
इस चुनाव का परिणाम बिजावर की राजनीति की आगामी दिशा और दशा तय करने वाला है।
यह चुनाव कई मायने में अलग रहा। नगर के राजनैतिक इतिहास में इस चुनाव परिणाम को गहरी स्याही से लिखा जाएगा। इस चुनाव में एक ओर राजेश शुक्ला अकेले योद्धा के रूप में मैदान में रहे। तो वहीं दूसरी ओर चुनाव के अनुवभी लोगों का गठबंधन था। लेकिन राजेश शुक्ला सभी पर भारी पड़े। चुनावी विपक्ष जनता के मनोभाव को नहीं समझ सका,और हार गया। दरअसल राजेश शुक्ला ने यह चुनाव नेताओं की नहीं कार्यकर्ताओं की दम पर लड़ा। छठवां विधानसभा चुनाव लड़ रहे शुक्ला परिवार ने अपनी पुरानी और नई टीम के बीच बेहतर सामंजस्य कर चुनाव की हर परिस्थितियों का बेहतर सामना किया। अपने पुराने पारिवारिक संबंधों में नवऊर्जा का संचार कर टीम को सक्रिय करना, बेहतर मैनेजमेंट, तत्कालीन परिस्थिति अनुसार निर्णय लेने, विपरीत हालातो में भी स्वयं के साथ समर्थकों और कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बनाए रखने के विशिष्ट व्यवहारिक गुण और बेहतर चुनावी रणनीति जीत में सहायक रही। लाड़ली बहना योजना और मुख्य विपक्षी प्रत्याशी के बाहरी होने से जीत का अंतर बढ़ गया।
राजेश शुक्ला के पास पंचायत स्तर के अथवा क्षेत्र विशेष के स्वघोषित या वास्तविक क्षत्रप नहीं थे। विपक्ष के अनुमान के विपरीत इसका उन्हें नुकसान होने की बजाय फायदा ही हुआ है।
राजेश शुक्ला अब जन नेता बनने की राह पर हैं। जो लंबे समय तक राजनैतिक नेतृत्व करने की सोच सकते हैं।
लेकिन इसके लिए जरूरत है संभलकर राजनीति करने की। इस जनादेश का मान रखने, लोगों की जायज अपेक्षाओं पर खरा उतरने, क्षेत्रीय विकास की कार्य योजनाएं बनाकर उन्हें समय पर मूर्त रूप देने, अच्छे और सच्चे लोगों की पहचान करने, सरकारी तंत्र की मनमानी और समर्थकों के अति उत्साह पर लगाम लगाए रखने की आवश्यकता होगी।

हम सभी जानते हैं कि अनुभव से बड़ी कोई पाठशाला नहीं होती। सीखने की कोई उम्र नहीं होती । समय से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। आत्मविश्वास से बड़ा कोई साथी नहीं होता और धैर्य से बड़ा कोई साहस नहीं होता।.....जीत की पुनः बधाई....

Address

Bijawar

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Arvind agrawal bijawar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category